# दिल्ली में आईएसआई के जासूसी मॉड्यूल का भंडाफोड़, फर्जी +91 नंबरों और हनीट्रैप से रची गई थी सेना की जासूसी की साजिश

> दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और मिलिट्री इंटेलिजेंस ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई द्वारा संचालित जासूसी मॉड्यूल का पर्दाफाश करते हुए साहिल और समीरा नाम के पति-पत्नी को गिरफ्तार किया है। यह सिंडिकेट फर्जी भारतीय सिम कार्ड, हनीट्रैप और पूर्व सैनिकों को निशाना बनाकर संवेदनशील सैन्य जानकारियां सीमा पार भेज रहा था।

**Type:** article · **Category:** अपराध · **Published:** 2026-09-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/crime/delhi-men-isi-ke-jasusi-modyula-ka-bhndaphora-pharji-91-nnbaron-aura-hanitraipa-se-rachi-gai-thi-sena-ki-jasusi-ki-sajisha-26555 · **Language:** Hindi
**Tags:** दिल्ली पुलिस, मिलिट्री इंटेलिजेंस, आईएसआई जासूसी, हनीट्रैप साजिश, साहिल और समीरा, आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल, सैन्य सुरक्षा

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और मिलिट्री इंटेलिजेंस की संयुक्त टीम ने पाकिस्तान की गुप्तचर संस्था आईएसआई द्वारा संचालित एक बड़े जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई के दौरान देश की राजधानी दिल्ली से साहिल और समीरा नाम के एक शादीशुदा जोड़े को गिरफ्तार किया गया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह दंपति बेहद शातिराना अंदाज में भारतीय सेना के सुरक्षा घेरे में सेंध लगाने, सैन्य अधिकारियों की जानकारी जुटाने तथा देश भर के विभिन्न सैन्य ठिकानों की निगरानी करने की साजिश में मुख्य भूमिका निभा रहा था।

## फर्जी भारतीय सिम कार्ड और +91 नंबरों का खेल
इस पूरे जासूसी नेटवर्क की बुनियाद अवैध सिम कार्ड की तस्करी और आभासी नंबरों के इस्तेमाल पर टिकी हुई थी। साहिल और समीरा को भारत के भीतर से फर्जी और गैर-कानूनी तरीके से सिम कार्ड हासिल करने का जिम्मा दिया गया था। इन सिम कार्डों को जुटाने के बाद इन्हें गुप्त रास्तों से सीमा पार पाकिस्तान भेजा जाता था। पाकिस्तान स्थित आईएसआई के खुफिया अड्डों पर बैठे हैंडलर्स इन सक्रिय भारतीय सिम कार्डों की मदद से व्हाट्सऐप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खाते चालू करते थे। जब इन खातों से भारतीय सैन्यकर्मियों के मोबाइल पर कॉल या संदेश भेजे जाते थे, तो स्क्रीन पर +91 से शुरू होने वाला भारतीय कोड दिखाई देता था। इससे भारतीय जवानों को किसी प्रकार का संदेह नहीं होता था और वे यह समझते थे कि कॉल देश के भीतर से ही आ रही है।

## सोशल मीडिया समूह और हनीट्रैप की साजिश
भारतीय नंबरों से खाते सक्रिय करने के बाद जासूसी नेटवर्क ने हनीट्रैप और भावनात्मक दबाव बनाने का काम शुरू किया। इसके लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भारतीय सेना के शुभचिंतकों के नाम पर फर्जी समूह बनाए गए। इन समूहों में सेवारत सैन्यकर्मियों को किसी न किसी बहाने से जोड़ा जाता था। एक बार संपर्क स्थापित होने के बाद, समीरा और पाकिस्तान में मौजूद अन्य महिला हैंडलर्स जवानों से बातचीत शुरू करती थीं। मासूमियत और हमदर्दी के साथ शुरू होने वाली यह बातचीत धीरे-धीरे निजी संदेशों, वीडियो कॉल और गहरे प्रेम जाल में बदल जाती थी। इस साजिश का अंतिम मकसद जवानों को जाल में फंसाकर उनसे सेना के गोपनीय दस्तावेज, सैन्य टुकड़ियों की आवाजाही और संवेदनशील अभियानों की जानकारी हासिल करना था।

## आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल के पास पूर्व सैनिकों की निगरानी
सेवानिवृत्त सैन्यकर्मियों की संभावित संवेदनशील स्थिति को देखते हुए आईएसआई ने अपना ध्यान विशेष रूप से पूर्व सैनिकों पर केंद्रित किया था। इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए साहिल और समीरा को दिल्ली स्थित आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल (AFT) के आसपास के इलाके में तैनात किया गया था। यह जोड़ा ट्रिब्यूनल परिसर के आसपास उन पूर्व सैनिकों और सैन्यकर्मियों पर नजर रखता था जो अपनी पेंशन, पदोन्नति, कोर्ट-मार्शल या किसी अन्य कानूनी विवाद के सिलसिले में वहां आते थे। कानूनी अड़चनों से परेशान लोगों की लाचारी का फायदा उठाते हुए समीरा बेहद हमदर्दी के साथ उनसे मिलती थी और मदद का भरोसा देकर उनके मोबाइल नंबर हासिल कर लेती थी। ये नंबर तुरंत पाकिस्तान में बैठे आकाओं को भेज दिए जाते थे, जहां से कानूनी सहायता के नाम पर फोन करके सेना के अंदरूनी मामलों, अधिकारियों की तैनाती और संवेदनशील इकाइयों का ब्योरा जुटाया जाता था।

## वॉयस नोट से खुला कैंटोनमेंट क्षेत्रों की रेकी का राज
एजेंसियों द्वारा साहिल और समीरा के मोबाइल फोन की तलाशी लेने पर कई महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत हाथ लगे हैं। दोनों के फोन से मिले वॉयस नोट्स की विस्तृत जांच में पाकिस्तान में बैठे दो हैंडलर्स के सीधे निर्देश रिकॉर्ड पाए गए हैं। इन वॉयस रिकॉर्डिंग्स में देश के करीब 7 से 8 प्रमुख सैन्य कैंटोनमेंट इलाकों की सूची शामिल थी और इनकी बारीकी से रेकी करने के स्पष्ट आदेश दिए गए थे। इसके अलावा, हैंडलर्स ने साहिल और समीरा को स्थानीय बेरोजगार युवाओं को पैसों का लालच देकर नेटवर्क में शामिल करने का काम सौंपा था। योजना के मुताबिक, इन युवाओं के जरिए कैंटोनमेंट के रास्तों, बैरकों, सैन्य वाहनों की आवाजाही और सुरक्षा चौकियों की निगरानी कराकर सारा ब्योरा पाकिस्तान भेजा जाना था।

## गुप्त सूचना, तकनीकी निगरानी और गिरफ्तारी
मिलिट्री इंटेलिजेंस को इस जासूसी सिंडिकेट की गतिविधियों की भनक समय रहते लग गई थी। इसके बाद तकनीकी निगरानी और जमीन पर सक्रिय मुखबिरों के नेटवर्क की मदद से दोनों संदिग्धों की हर गतिविधि पर नजर रखी जाने लगी। जांच एजेंसियों ने साहिल और समीरा के फोन कॉल, लोकेशन और लेन-देन के रिकॉर्ड का गहन अध्ययन किया। पुख्ता सबूत मिलने के बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के साथ मिलकर चलाए गए एक साझा अभियान में दोनों को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया। इस कार्रवाई से सीमा पार से चलाए जा रहे एक खतरनाक जासूसी मॉड्यूल को समय रहते नाकाम कर दिया गया।

## इसका आप पर असर
इस खबर से देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और आम नागरिकों, विशेषकर सैन्य कर्मियों तथा पूर्व सैनिकों के डिजिटल व्यवहार से जुड़ी अहम बातें सामने आती हैं।

- **भारत में:** सीमा पार से होने वाली जासूसी की इस साजिश के पर्दाफाश से यह स्पष्ट होता है कि साइबर सुरक्षा और अनजान कॉल्स को लेकर अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। सैन्यकर्मियों और नागरिकों को अनजान नंबरों से आने वाली कॉल या फ्रेंड रिक्वेस्ट पर तुरंत भरोसा न करने की सख्त सलाह दी जाती है।
- **दिल्ली में:** दिल्ली स्थित आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल और संवेदनशील कैंटोनमेंट इलाकों के आसपास सुरक्षा जांच और निगरानी तंत्र को अधिक कड़ा कर दिया गया है। वहां आने-जाने वाले पूर्व सैनिकों तथा आगंतुकों के सत्यापन की प्रक्रिया को और सतर्क बनाया गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. इस जासूसी मामले में किन लोगों को गिरफ्तार किया गया है?
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और मिलिट्री इंटेलिजेंस ने जासूसी के आरोप में साहिल और समीरा नाम के पति-पत्नी को दिल्ली से गिरफ्तार किया है।

### 2. जासूसी के लिए फर्जी नंबरों का इस्तेमाल कैसे किया जाता था?
साहिल और समीरा भारत से अवैध सिम कार्ड हासिल कर पाकिस्तान भेजते थे, जहां आईएसआई हैंडलर्स +91 कोड वाले व्हाट्सऐप और सोशल मीडिया अकाउंट्स चालू करके भारतीय जवानों से संपर्क करते थे।

### 3. पूर्व सैनिकों को किस प्रकार निशाना बनाया जाता था?
यह जोड़ा दिल्ली स्थित आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल के पास कानूनी समस्याओं या पेंशन विवादों से जूझ रहे पूर्व सैनिकों से हमदर्दी जताकर उनके नंबर हासिल करता था और फिर पाकिस्तान से कॉल करके जानकारियां जुटाने की कोशिश की जाती थी।

### 4. जांच में वॉयस नोट्स से क्या बड़ा खुलासा हुआ है?
जब्त फोन के वॉयस नोट्स से खुलासा हुआ कि पाकिस्तान के हैंडलर्स ने देश के 7 से 8 बड़े कैंटोनमेंट क्षेत्रों की रेकी करने और स्थानीय बेरोजगार युवकों को पैसों का लालच देकर भर्ती करने के निर्देश दिए थे।

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