# ऑनलाइन बेटिंग और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की कार्रवाई के बाद नई शिकायत, कई नाम आए सामने

> प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी के बाद एक नई शिकायत में ऑनलाइन बेटिंग और साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े कई बड़े नामों और वित्तीय लेनदेन की व्यापक जांच की मांग की गई है।

**Type:** article · **Category:** अपराध · **Published:** 2026-10-29 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/crime/ed-raids-expose-online-betting-network-fresh-complaint-highlights-major-names-and-multi-crore-transactions-53076 · **Language:** Hindi
**Tags:** ईडी, ऑनलाइन बेटिंग, मनी लॉन्ड्रिंग, साइबर फ्रॉड, एडसम फिनटेक, गोवा कैसीनो, महादेव बुक

ऑनलाइन बेटिंग और साइबर फ्रॉड से जुड़े कथित वित्तीय नेटवर्क पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की गई सख्त कार्रवाई के बाद यह पूरा मामला अब एक बिल्कुल नए और बड़े मोड़ पर पहुंच गया है। पिछले महीने 13 अक्टूबर 2026 को देश के कई प्रमुख शहरों में ताबड़तोड़ छापेमारी किए जाने के बाद, अब एक नई और विस्तृत शिकायत सामने आई है जिसमें कई प्रभावशाली और बड़े नामों का जिक्र करते हुए तमाम जांच एजेंसियों से इस पूरे सिंडिकेट की गहराई से और व्यापक स्तर पर जांच करने की मांग की गई है। इस ताज़ा शिकायत में विशेष तौर पर समुंदर सिंह राठौड़, मुकेश जैन और पहले से ही न्यायिक हिरासत में बंद एडसम फिनटेक के संस्थापक राम यू. रामधानी के बीच कथित तौर पर मौजूद वित्तीय संबंधों की गहन जांच कराए जाने की पुरजोर मांग की गई है, जिससे इस काले कारोबार के असली मास्टरमाइंड बेनकाब हो सकें।

## छापेमारी और शेल कंपनियों का जाल
प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम यानी पीएमएलए के प्रावधानों के तहत कार्रवाई करते हुए मुंबई, पुणे, मेहसाणा, सूरत और हैदराबाद जैसे अहम शहरों में एक साथ 20 अलग-अलग ठिकानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया था। जांच एजेंसियों के मुताबिक यह पूरी कार्रवाई मुख्य रूप से ऑल पैनल एक्सचेंज और एमजीएम91 जैसे लोकप्रिय ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफार्मों से जुड़े कथित धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की गुत्थी सुलझाने के लिए की जा रही थी। केंद्रीय एजेंसी की शुरुआती जांच में यह बात सामने निकलकर आई है कि इन अवैध प्लेटफार्मों के माध्यम से देश भर के भोले-भाले पीड़ितों से वसूला गया बेहिसाब काला धन पुणे स्थित एडसम फिनटेक के जटिल नेटवर्क के जरिए देश के तमाम अलग-अलग बैंक खातों में तेजी से स्थानांतरित किया जाता था। जांच के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि इस कंपनी ने विशेष रूप से ‘आईपैसा’ नाम से एक भुगतान इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म तैयार किया था, जिसकी आड़ में 200 से अधिक शेल यानी फर्जी और फ्रंट कंपनियों को आपस में जोड़ा गया था ताकि काले धन को आसानी से सफेद किया जा सके।

## दुबई से संचालन और विदेशी भेजने के तरीके
जांच एजेंसी का यह दावा है कि इन तमाम फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर ऑनलाइन बेटिंग, अवैध गेमिंग और साइबर फ्रॉड से जुड़े संदिग्ध वित्तीय लेनदेन को अंजाम देने के लिए किया जा रहा था। एजेंसी के अनुसार, यह पूरा व्यापक नेटवर्क म्यूल बैंक खातों, आधुनिक डिजिटल भुगतान माध्यमों और कथित तौर पर दुबई से मिलने वाले निर्देशों के आधार पर बेहद सुनियोजित तरीके से संचालित हो रहा था। इस पूरी जांच के दौरान कथित तौर पर यह तथ्य भी सामने आया कि गैरकानूनी तरीके से कमाए गए इस अवैध धन को भारत से बाहर विदेश भेजने के लिए मुख्य रूप से तीन प्रमुख तरीकों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता था। इनमें पहला तरीका माल का ओवर-इनवॉयसिंग दिखाकर व्यापारिक लेनदेन के रूप में भारी-भरकम रकम विदेश भेजना था, दूसरा तरीका कृषि उपज विपणन समिति यानी एपीएमसी यूनिट्स के नाम पर फर्जी तरीके से खोले गए म्यूल खातों के जरिए भारी मात्रा में नकद निकासी करना था, और तीसरा तरीका इस अवैध धन को तुरंत क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर भारत की सीमाओं से बाहर ट्रांसफर करना शामिल था।

इस पूरे मामले में एडसम फिनटेक के संस्थापक राम यू. रामधानी को जांच के दौरान पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और वे फिलहाल कानून के शिकंजे में न्यायिक हिरासत के तहत बंद हैं। छापेमारी की इस पूरी कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और अत्याधुनिक डिजिटल डिवाइस अपने कब्जे में लिए थे, साथ ही संदिग्ध पाए गए कई बैंक खातों को भी तुरंत प्रभाव से फ्रीज कर दिया गया था।

## नई शिकायत और चौकाने वाले खुलासे
प्रवर्तन निदेशालय की इस सख्त कार्रवाई के ठीक बाद संतोष घोलप नामक एक व्यक्ति ने बीते 24 अक्टूबर को देश की आठ प्रमुख केंद्रीय जांच एजेंसियों को एक बहुत ही विस्तृत और सनसनीखेज शिकायत सौंपी है। इस नई शिकायत में यह कड़ा दावा किया गया है कि ऑल पैनल एक्सचेंज तो इस पूरे सिंडिकेट का केवल एक छोटा सा हिस्सा भर है और इसके पर्दे के पीछे एक बहुत बड़ा आपराधिक नेटवर्क सक्रिय रूप से काम कर रहा है। शिकायत में लगाए गए गंभीर आरोपों के अनुसार, समुंदर सिंह राठौड़ कथित तौर पर इस पूरे अवैध नेटवर्क के मुख्य संचालकों में से एक हैं। इस शिकायत के माध्यम से ऑनलाइन बेटिंग एक्सचेंज, मटका प्लेटफॉर्म, साइबर फ्रॉड के विभिन्न नेटवर्क, लोगों को डिजिटल अरेस्ट करके ठगने वाली धोखाधड़ी और गोवा स्थित आलीशान कैसीनो कारोबार से जुड़े तमाम संदेहास्पद वित्तीय लेन-देन की भी नए सिरे से जांच कराए जाने की पुरजोर मांग की गई है।

## म्यूल खातों का जाल और कैसीनो कारोबार
शिकायत में यह भी तीखा आरोप लगाया गया है कि मुंबई, पुणे, गोवा, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे बड़े महानगरों में छोटे-छोटे दफ्तरों की आड़ में बड़ी संख्या में म्यूल बैंक अकाउंट और यूपीआई आईडी का अवैध संचालन किया जाता था। कथित तौर पर हर रोज हजारों करोड़ रुपए के भारी-भरकम अवैध लेनदेन को इन तमाम अलग-अलग माध्यमों से घुमाया जाता था और इस पूरे नेटवर्क का रिमोट कंट्रोल दुबई से संचालित होने का दावा किया गया है। इसके अलावा, चर्चित महादेव ऑनलाइन बुक से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन को भी अवैध तरीके से वित्तीय सुविधा उपलब्ध कराने के गंभीर आरोप इस शिकायत में लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने अपनी बात के समर्थन में यह दावा किया है कि उसके पास देश भर के करीब 20,442 कैसीनो खिलाड़ियों के असली नाम, उनके पर्सनल मोबाइल नंबर और उनके वित्तीय लेनदेन से जुड़े तमाम पुख्ता विवरण मौजूद हैं। इसके साथ ही, उसने अपनी शिकायत में 17 अलग-अलग बैंक खातों और कुल 46 व्यक्तियों की एक लंबी सूची भी आगे की कार्रवाई के लिए जांच एजेंसियों को सौंप दी है।

## कैसीनो डील और ऑफ-द-रिकॉर्ड भुगतान
सामने आई शिकायत के मुताबिक, कैसीनो चिप्स और बेटिंग से मिलने वाले बैलेंस का भुगतान हमेशा नियमों के मुताबिक अधिकृत और वैध खातों में लेने के बजाय तीसरे पक्ष यानी थर्ड पार्टी के बैंक खातों और यूपीआई माध्यमों के जरिए स्वीकार किया जाता था, ताकि बड़े पैमाने पर सरकारी कर की चोरी की जा सके और वित्तीय अनियमितताओं को आसानी से अंजाम दिया जा सके। शिकायत में यह भी बेहद सनसनीखेज आरोप लगाया गया है कि गोवा के एक जाने-माने कैसीनो के प्रस्तावित अधिग्रहण को लेकर कुल 900 करोड़ रुपए की एक भारी-भरकम डील की सुनियोजित योजना बनाई गई थी। इस पूरी डील के तहत कथित तौर पर 200 करोड़ रुपए की आधिकारिक और कागजी रकम को रिकॉर्ड में दिखाया जाना था, जबकि बाकी के बचे हुए पूरे 700 करोड़ रुपए का भारी-भरकम भुगतान पूरी तरह से ऑफ-द-रिकॉर्ड करने का गुप्त प्रस्ताव रखा गया था।

## जांच का दायरा और आगे की दिशा
विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अब देश की तमाम प्रमुख जांच एजेंसियां प्रवर्तन निदेशालय द्वारा पहले की गई कार्रवाई और इस नई शिकायत में सामने आए गंभीर आरोपों के बीच के आपसी संभावित वित्तीय संबंधों की कड़ियां जोड़ने में जुट गई हैं। एजेंसियां इस बात की गहराई से छानबीन कर रही हैं कि इन तमाम मामलों में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, पेमेंट ट्रेल यानी भुगतान की श्रृंखला और इस पूरे अवैध खेल के अंतिम लाभार्थियों की वास्तविक भूमिका क्या रही है। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान शिकायत में लगाए गए तमाम आरोपों की अभी तक किसी भी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और जांच एजेंसियों की तरफ से इन सभी दावों पर अभी तक कोई भी अंतिम आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इस बहुचर्चित मामले में आगे की कानूनी जांच अभी भी पूरी तेजी के साथ जारी है।

## इसका आप पर असर
ऑनलाइन बेटिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के इस बड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई और नई शिकायतों से वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों का शिकंजा और अधिक कसता नजर आ रहा है।

- **भारत में:** देश भर में ऑनलाइन गेमिंग, बेटिंग ऐप्स और फर्जी शेल कंपनियों के जरिए होने वाले काले धन के कारोबार पर सख्त निगरानी बढ़ाई जाएगी। वित्तीय लेनदेन की कड़ाई से जांच होने से आम नागरिकों को साइबर धोखाधड़ी और फर्जी निवेश योजनाओं से सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।
- **महाराष्ट्र और गोवा में:** मुंबई, पुणे, गोवा और आसपास के क्षेत्रों में अवैध कैसीनो लेनदेन और फ्रंट कंपनियों के संचालन पर प्रशासनिक शिकंजा और अधिक कड़ा होगा। स्थानीय स्तर पर अवैध वित्तीय गतिविधियों से जुड़े नेटवर्क की पहचान कर वित्तीय संस्थानों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह पूरा मामला तब गहराई से सामने आया जब केंद्रीय जांच एजेंसियों ने देश के कई बड़े शहरों में ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफार्मों और फर्जी भुगतान प्रणालियों के जरिए हो रहे अवैध वित्तीय लेनदेन का पता लगाया। इसके पीछे मुख्य कारण शेल कंपनियों, म्यूल खातों और विदेशी पतों के जरिए काले धन को छिपाने और उसे क्रिप्टोकरेंसी या अन्य माध्यमों से देश से बाहर भेजने का सुनियोजित प्रयास था।

- **जांच का दायरा:** ऑल पैनल एक्सचेंज और एमजीएम91 जैसे प्लेटफार्मों के जरिए पीड़ितों से वसूली गई भारी-भरकम राशि को शेल कंपनियों के जाल के माध्यम से घुमाने की वजह से यह बड़ी कार्रवाई शुरू हुई।
- **तकनीकी नेटवर्क:** पुणे स्थित एडसम फिनटेक द्वारा विकसित ‘आईपैसा’ जैसे भुगतान इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म और 200 से अधिक फर्जी फ्रंट कंपनियों के इस्तेमाल ने अवैध धन के आवागमन को संभव बनाया।
- **विदेशों से संचालन:** देश के बाहर दुबई से मिलने वाले निर्देशों और म्यूल बैंक खातों तथा यूपीआई आईडी के जरिए प्रतिदिन हजारों करोड़ रुपए के लेनदेन को घुमाने के कारण एजेंसियों को व्यापक कार्रवाई करनी पड़ी।

## सवाल-जवाब

### 1. प्रवर्तन निदेशालय ने किन शहरों में छापेमारी की थी?
ईडी ने मुंबई, पुणे, मेहसाणा, सूरत और हैदराबाद में 20 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था।

### 2. यह कार्रवाई मुख्य रूप से किन प्लेटफार्मों से जुड़ी है?
यह कार्रवाई ऑल पैनल एक्सचेंज और एमजीएम91 जैसे ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्मों से जुड़ी है।

### 3. एडसम फिनटेक के संस्थापक कौन हैं?
एडसम फिनटेक के संस्थापक राम यू. रामधानी हैं, जिन्हें इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है।

### 4. नई शिकायत किस व्यक्ति द्वारा और कब दर्ज कराई गई?
संतोष घोलप नामक व्यक्ति ने 24 अक्टूबर को आठ केंद्रीय एजेंसियों को यह विस्तृत शिकायत सौंपी।

### 5. शिकायत में किस कैसीनो डील का जिक्र किया गया है?
शिकायत में गोवा के एक कैसीनो के प्रस्तावित अधिग्रहण में 900 करोड़ रुपए की डील की योजना का जिक्र है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._