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  "type": "article",
  "title": "गैंगस्टर गुरविंदर आफरीदी इथियोपिया से भारत डिपोर्ट, 30 से अधिक मुकदमों में था वांटेड",
  "summary": "पंजाब पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स ने केंद्रीय एजेंसियों और ओएफटेक के साथ मिलकर इथियोपिया से गैंगस्टर गुरविंदर सिंह उर्फ आफरीदी को भारत डिपोर्ट करा लिया है। उस पर 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था और वह 30 से ज्यादा मामलों में वांछित था।",
  "content": "पंजाब में संगठित अपराध और गैंगस्टरों के खिलाफ चलाए जा रहे शिकंजे के बीच सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पंजाब पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स यानी एजीटीएफ ने केंद्रीय एजेंसियों और पंजाब पुलिस की ओवरसीज फ्यूजिटिव ट्रैकिंग एंड एक्सट्राडिशन सेल यानी ओएफटेक के साथ मिलकर एक साझा अभियान चलाया। इस अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन के तहत विदेश में छिपे कुख्यात गैंगस्टर गुरविंदर सिंह उर्फ आफरीदी को अफ्रीकी देश इथियोपिया से दबोचकर भारत लाया गया है। लगभग 10 महीने तक चले इस लंबे अभियान के बाद उसे 6 नवंबर को इथियोपिया में हिरासत में लिया गया और वहां से डिपोर्ट कर दिया गया। जैसे ही वह विमान से दिल्ली एयरपोर्ट उतरा, पंजाब पुलिस ने उसे औपचारिक रूप से अपनी हिरासत में ले लिया और आगे की गहन पूछताछ के लिए पंजाब ले जाया जा रहा है। गुरविंदर आफरीदी पर कानून का शिकंजा कसते हुए 5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था।\n\nऑपरेशन शहीद के तहत अफ्रीकी देश से पहली बार प्रत्यर्पण\nइस पूरी कार्रवाई के बारे में जानकारी देते हुए पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निर्देशों के तहत ‘गैंगस्टरां ते वार’ अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत यह बड़ी सफलता मिली है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गुरविंदर सिंह को देश वापस लाने के लिए विशेष तौर पर ‘ऑपरेशन शहीद’ का संचालन किया गया था। पंजाब पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक यह अपने आप में एक अनूठा मामला है, क्योंकि इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि राज्य की पुलिस किसी अफ्रीकी देश से अपने किसी वांछित अपराधी को सफलतापूर्वक डिपोर्ट करवाकर भारत लाने में कामयाब रही है। इस ऑपरेशन को उन तमाम गैंगस्टरों और अपराधियों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है जो देश से बाहर विदेशों में शरण लेकर भारत की धरती पर अवैध और आपराधिक गतिविधियों का संचालन कर रहे थे।\n\nदस महीनों तक विभिन्न देशों में चलती रही तलाश\nपुलिस सूत्रों और आधिकारिक विवरणों से सामने आया है कि गुरविंदर सिंह कानून के हाथ से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने और देश बदल रहा था। जब सुरक्षा एजेंसियों को उसके विदेश में होने की पुख्ता खबर मिली, तो पंजाब पुलिस और तमाम केंद्रीय एजेंसियों ने उसकी हरकतों पर पैनी नजर रखनी शुरू कर दी। लगभग 10 महीने तक चले इस बेहद जटिल ऑपरेशन के दौरान उसकी सटीक लोकेशन का पता लगाने, खुफिया इनपुट जुटाने और अलग-अलग देशों की स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने का काम किया गया। इस संपूर्ण अभियान की उच्चस्तरीय निगरानी एजीटीएफ के स्पेशल डीजीपी प्रमोद बान कर रहे थे। वहीं दूसरी तरफ, काउंटर इंटेलिजेंस विंग के अंतर्गत काम करने वाली ओएफटेक इकाई के आईजी आशीष चौधरी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ पत्राचार और प्रत्यर्पण से जुड़े सभी प्रशासनिक कार्यों का समन्वय संभाल रहे थे। पुलिस ने उसके छिपने के तौर-तरीकों और फर्जी कागजातों से जुड़ी अहम जानकारियां समय-समय पर केंद्रीय एजेंसियों के साथ साझा कीं, जिसके परिणामस्वरूप उसके शिकंजे में आने का रास्ता साफ हुआ।\n\nविदेश यात्रा और ठिकानों बदलने का पूरा क्रम\nपंजाब पुलिस की ओर से साझा किए गए आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, देश से फरार होने के बाद उसकी विदेश यात्रा का क्रम कुछ इस प्रकार रहा था\n\n• 31 मार्च 2025: उसने मुंबई एयरपोर्ट से कथित तौर पर एक फर्जी पासपोर्ट के सहारे संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई की यात्रा की।\n• अप्रैल 2026: वह यूएई से निकलकर अफ्रीकी देश केन्या जा पहुंचा।\n• जून 2026: केन्या से अपनी लोकेशन बदलते हुए वह अंगोला पहुंच गया।\n• नवंबर 2026: अंगोला से सफर करते हुए वह अंततः इथियोपिया जा पहुंचा।\n• 6 नवंबर 2026: इसी तारीख को इथियोपिया के सुरक्षा बलों ने उसे हिरासत में लिया और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी कर भारत भेज दिया गया।\n\nफर्जी पासपोर्ट के सहारे मुंबई एयरपोर्ट से हुआ था फरार\nपंजाब पुलिस के खुलासे के मुताबिक, गुरविंदर सिंह उर्फ आफरीदी 31 मार्च 2025 को मुंबई एयरपोर्ट से देश छोड़कर संयुक्त अरब अमीरात भाग निकला था। इस विदेश यात्रा को अंजाम देने के लिए उसने धोखाधड़ी का सहारा लिया और एक फर्जी पहचान के आधार पर पासपोर्ट तैयार करवाया था। हैरानी की बात यह है कि यह फर्जी पासपोर्ट उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के रहने वाले एक व्यक्ति की पहचान पर आधारित था, जिसे 12 फरवरी 2025 को लखनऊ से ही जारी किया गया था। इस खुलासे के बाद अब पुलिस इस एंगल पर भी गहराई से जांच कर सकती है कि आखिर एक खूंखार और वांछित अपराधी को इतनी आसानी से फर्जी पहचान के आधार पर पासपोर्ट कैसे मिल गया और इस पूरे फर्जीवाड़े की साजिश में कौन-कौन लोग अंदरूनी तौर पर शामिल थे। इन जाली दस्तावेजों के बल पर देश की सीमाओं से बाहर निकलने के बाद आफरीदी ने लगातार अपने ठिकाने बदले ताकि भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियां उसकी असल मौजूदगी का सुराग न लगा सकें।\n\nयूएई से मैक्सिको भागने की कोशिश भी हुई थी विफल\nपुलिस के दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि विदेश की धरती पर कदम रखने के बाद आफरीदी शुरुआत के दिनों में संयुक्त अरब अमीरात में ही कहीं छिपा हुआ था। वहां से उसने इस्तांबुल के रास्ते मैक्सिको देश में प्रवेश करने की एक बड़ी योजना बनाई थी, लेकिन उसकी यह चाल कामयाब नहीं हो सकी। मैक्सिको सीमा के रास्ते में ही उसे पकड़ लिया गया और वापस यूएई डिपोर्ट कर दिया गया। इस असफलता के बाद उसने एक बार फिर से अपनी रणनीति बदली और लगातार ठिकाने बदलने का सिलसिला शुरू कर दिया। इस प्रकार आफरीदी ने लगभग डेढ़ साल के लंबे अंतराल में दुनिया के कई देशों में लगातार अपने ठिकाने बदले। पुलिस और देश-विदेश की सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बच निकलने के लिए वह लगातार अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार करता रहा। हालांकि, उसके खिलाफ जारी वैश्विक चेतावनियों और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतरीन तालमेल के कारण आखिरकार उसका असली चेहरा और ठिकाना बेनकाब हो ही गया।\n\nरेड कॉर्नर नोटिस और इंटरपोल के सात रेफरेंस\nगुरविंदर सिंह के खिलाफ कानून का शिकंजा कसने के लिए पंजाब पुलिस ने केवल घरेलू स्तर पर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी कड़े कदम उठाए थे। उसके खिलाफ विधिवत रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाया गया था। इसके अतिरिक्त फर्जी पासपोर्ट के इस्तेमाल, विदेश की धरती पर उसकी अवैध मौजूदगी और बार-बार बदलते ठिकानों से जुड़ी तमाम संवेदनशील जानकारियां केंद्रीय एजेंसियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र के साथ भी साझा की गईं। पुलिस विभाग के अनुसार इस संपूर्ण मामले के संदर्भ में इंटरपोल के सात अलग-अलग रेफरेंस भी जारी किए गए थे। इन सभी रेफरेंस के माध्यम से दुनिया के विभिन्न देशों में उसकी गतिविधियों और पहचान से जुड़े मामलों पर काम किया गया। लगभग 10 महीने तक चले खुफिया मिशन और विदेशी एजेंसियों के साथ आपसी सहयोग के बाद 6 नवंबर को उसे इथियोपिया में धर दबोचा गया। इसके बाद औपचारिकताएं पूरी कर उसे भारत के हवाले कर दिया गया। अब दिल्ली एयरपोर्ट पर कब्जे में लेने के बाद पंजाब पुलिस उससे विस्तृत पूछताछ कर रही है, जिससे पंजाब राज्य में दर्ज तमाम आपराधिक मुकदमों, विदेश में उसके गहरे संपर्कों और उसके पूरे आपराधिक नेटवर्क से जुड़े कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।\n\nइसका आप पर असर\nगैंगस्टर गुरविंदर आफरीदी के प्रत्यर्पण से देश की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर सीधा सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।\n\n• भारत में: विदेशी धरती पर छिपकर आपराधिक नेटवर्क चलाने वाले अपराधियों में अब कानून का डर पैदा होगा। यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छिपे अन्य वांछित गैंगस्टरों के प्रत्यर्पण के रास्ते भी आसान करेगी।\n• पंजाब में: राज्य में संगठित अपराध और जबरन वसूली के मामलों पर लगाम कसने में मदद मिलेगी। इससे स्थानीय नागरिकों और कारोबारियों को बड़ी राहत महसूस होगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nगुरविंदर आफरीदी के खिलाफ पंजाब में 30 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज थे और वह गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार देश छोड़कर विदेश भाग गया था।\n\n• फरारी और ठिकाने बदलना: आरोपी ने 31 मार्च 2025 को फर्जी पासपोर्ट के सहारे मुंबई से यूएई की उड़ान भरी थी और कानून से बचने के लिए लगातार केन्या, अंगोला तथा इथियोपिया जैसे देशों में अपनी लोकेशन बदलता रहा।\n• अंतरराष्ट्रीय समन्वय: पंजाब पुलिस की एजीटीएफ, केंद्रीय एजेंसियों और ओएफटेक इकाई ने इंटरपोल के सात रेफरेंस और रेड कॉर्नर नोटिस के जरिए लगभग 10 महीने तक खुफिया अभियान चलाकर उसकी लोकेशन का पता लगाया।\n• इथियोपिया में हिरासत: लंबी तलाश और कूटनीतिक समन्वय के बाद 6 नवंबर को इथियोपियाई सुरक्षा बलों ने उसे हिरासत में लिया और भारत सरकार के प्रत्यर्पण अनुरोध के तहत डिपोर्ट कर दिया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. गुरविंदर आफरीदी को किस देश से भारत लाया गया है?\nउसे अफ्रीकी देश इथियोपिया से हिरासत में लेने के बाद भारत डिपोर्ट किया गया है।\n\n2. गुरविंदर आफरीदी पर कुल कितने मामले दर्ज हैं?\nवह 30 से अधिक आपराधिक मामलों में वांटेड था।\n\n3. गुरविंदर आफरीदी पर कितने का इनाम था?\nउसकी गिरफ्तारी पर 5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था।\n\n4. उसे भारत लाने के लिए कौन सा अभियान चलाया गया था?\nउसे वापस लाने के लिए 'ऑपरेशन शहीद' चलाया गया था।\n\n5. वह देश छोड़कर कब और कैसे भागा था?\nवह 31 मार्च 2025 को मुंबई एयरपोर्ट से एक फर्जी पासपोर्ट के सहारे यूएई भागा था।",
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  "publishedAt": "2026-11-08",
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