# गुजरात में चीनी साइबर सिंडिकेट का पर्दाफाश, सूरत पुलिस ने 33 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय गिरोह से जुड़े व्यक्ति को पकड़ा

> सूरत पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने लवली उर्फ समीर उर्फ रिव अरोड़ा को गिरफ्तार करके 14 राज्यों में फैले एक विशाल ऑनलाइन फ्रॉड नेटवर्क को बेनकाब किया है। दुबई और चीन से जुड़े इस सिंडिकेट ने फर्जी निवेश योजनाओं और वर्क-फ्रॉम-होम जॉब के नाम पर 33.14 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की है।

**Type:** article · **Category:** अपराध · **Published:** 2026-08-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/crime/gujarat-mein-chinese-cyber-syndicate-ka-pardafash-surat-police-ne-33-crore-ke-international-gang-se-jude-vyakti-ko-pakda-21672 · **Language:** Hindi
**Tags:** सूरत पुलिस, साइबर क्राइम, चीन साइबर ठगी, ऑनलाइन फ्रॉड, क्रिप्टो करेंसी स्कैम, गुजरात समाचार

गुजरात की सूरत साइबर क्राइम सेल ने चीन और दुबई से तार जोड़ने वाले एक बेहद शातिर अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस सिलसिले में चेन्नई के रहने वाले 39 वर्षीय लवली उर्फ समीर उर्फ रिव अरोड़ा को गिरफ्तार किया है, जो पेशे से मैनपावर सप्लायर है और पहले गुरुग्राम में भी रह चुका है। तकनीकी सबूतों के आधार पर की गई इस कार्रवाई के बाद पता चला है कि आरोपी से जुड़े 34 बैंक खातों के जरिए देश भर में 33.14 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गई है।

## शेयर बाजार में निवेश के नाम पर 1.52 करोड़ की धोखाधड़ी
इस पूरे नेटवर्क की जांच की शुरुआत 14 नवंबर 2025 से 10 फरवरी 2026 के बीच हुई एक बड़ी धोखाधड़ी की शिकायत से हुई। पीड़ित को शेयर बाजार में अमेरिकी डॉलर में निवेश करने पर भारी रिटर्न देने का लालच दिया गया था। इसके लिए जालसाजों ने एक फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट का लिंक भेजा। पीड़ित ने फर्जी वेबसाइट और कस्टमर केयर नंबरों के माध्यम से बताए गए अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1.52 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जमा कर दी। जब पीड़ित ने अपने पैसे और मुनाफे को निकालने की कोशिश की, तो वेबसाइट पर उसका खाता ब्लॉक कर दिया गया।

सूरत पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की, जिससे इस पूरे गिरोह की कड़ियां जुड़ती चली गईं।

## कमिशन का खेल और क्रिप्टो करेंसी में पैसों का ट्रांसफर
जांच में खुलासा हुआ कि लवली उर्फ समीर बैंक खातों का इंतजाम करने वाले एक मुख्य बिचौलिए के रूप में काम कर रहा था। वह पहले गिरफ्तार हो चुके साइबर अपराधियों से किराए के बैंक खाते हासिल करता था और प्रत्येक लेनदेन पर उन्हें 3 प्रतिशत कमीशन देता था। इसके बाद वह इन बैंक खातों को दुबई में बैठे एक फरार सहयोगी को 3.5 प्रतिशत कमीशन पर उपलब्ध कराता था। इस तरह हर ट्रांजैक्शन पर वह खुद 0.5 प्रतिशत का मुनाफा कमाता था।

दुबई में बैठा यह आरोपी सीधे चीनी साइबर गैंग के संपर्क में था। ठगी के जरिए जुटाए गए भारतीय रुपये को पुलिस जांच और बैंक फ्रीज से बचाने के लिए यूएसडीटी जैसी डिजिटल क्रिप्टो करेंसी में बदला जाता था और विदेशों में ट्रांसफर कर दिया जाता था।

## 14 राज्यों में 113 शिकायतें और 33.14 करोड़ की ठगी
जब सूरत पुलिस ने आरोपी से जुड़े 34 बैंक खातों का डेटा नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर चेक किया, तो चौकाने वाले आंकड़े सामने आए। इन खातों के खिलाफ देश के 14 राज्यों से कुल 113 शिकायतें दर्ज थीं, जिनमें 33.14 करोड़ रुपये से ज्यादा की हेराफेरी पाई गई।

इन शिकायतों में सबसे ज्यादा 34 मामले अकेले कर्नाटक से दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र से 11, जबकि गुजरात और तमिलनाडु से 10-10 शिकायतें मिली हैं। वहीं आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, बिहार, असम और दिल्ली से 6-6 शिकायतें दर्ज की गई हैं।

## वर्क-फ्रॉम-होम के नाम पर 33 लाख युवाओं का डेटा और फर्जीवाड़ा
तफ्तीश के दौरान पुलिस के हाथ एक और समानांतर घोटाला लगा, जो नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को निशाना बनाता था। आरोपी ने मुंबई, इंदौर, पटना, अहमदाबाद, बेंगलुरु और चेन्नई में बाकायदा कॉल सेंटर खोल रखे थे।

इन कॉल सेंटरों को चलाने के लिए आरोपी ने विभिन्न ऑनलाइन जॉब पोर्टल से नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं का डेटा खरीदा था। उसने प्रति रिकॉर्ड 2 से 8 रुपये खर्च करके 33 लाख से ज्यादा लोगों का निजी डेटा हासिल किया। इन कॉल सेंटरों के टेली-कॉलर लोगों को घर बैठे डेटा एंट्री का काम देने का झांसा देते थे और शुरुआत में 5,000 रुपये सिक्योरिटी मनी जमा कराते थे। बाद में काम में कमियां बताकर सुरक्षा राशि और मेहनत की कमाई लौटाने से इनकार कर दिया जाता था। इस तरीके से 750 से अधिक लोगों से 35 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी की गई।

## डिजिटल उपकरण, फर्जी सॉफ्टवेयर और आपराधिक पृष्ठभूमि
पुलिस ने आरोपी के पास से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और डेटा बरामद किया है। जब्त किए गए मुख्य लैपटॉप से 33,88,646 ग्राहकों की जानकारी और डेटा एंट्री जॉब से जुड़े 266 फर्जी एग्रीमेंट मिले हैं। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने लोगों को ठगने के लिए 'केयर कंपास' नाम का एक फर्जी सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन भी तैयार कराया था। इसके अतिरिक्त 14 मोबाइल फोन, 3 लैपटॉप, 4 सिम कार्ड और 57 सिम कार्ड कवर बरामद किए गए हैं।

पुलिस की जांच में पता चला है कि आरोपी लवली अब तक लगभग 12 बार दुबई की यात्रा कर चुका है और उसके पास पहले दुबई की रेजिडेंसी भी थी। आरोपी सूरत साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज 15.44 लाख रुपये की एक अन्य निवेश ठगी के मामले में भी नामजद है। उस मामले में मिनेश कुमार सोलंकी, अनिल गुप्ता, विकास सिंह भदौरिया और रियाज उर्फ शोएब नामक चार अन्य आरोपियों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। सूरत पुलिस इस विशाल साइबर नेटवर्क के बाकी सदस्यों की धरपकड़ के लिए आगे की कार्रवाई कर रही है।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** शेयर बाजार और घर बैठे डेटा एंट्री नौकरी के नाम पर किसी भी अनधिकृत लिंक या थर्ड-पार्टी बैंक खातों में पैसे जमा करने से बचें, क्योंकि साइबर अपराधी क्रिप्टो करेंसी के जरिए पैसों को देश से बाहर भेज रहे हैं।
- **गुजरात में:** सूरत साइबर क्राइम पुलिस की इस कार्रवाई से फर्जी जॉब और निवेश गिरोहों के खिलाफ सतर्कता बढ़ी है, और स्थानीय स्तर पर साइबर ठगी की शिकायतों पर तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. सूरत साइबर क्राइम सेल ने किसे गिरफ्तार किया है?
पुलिस ने चेन्नई निवासी 39 वर्षीय लवली उर्फ समीर उर्फ रिव अरोड़ा को गिरफ्तार किया है, जो अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह के लिए बैंक खातों का प्रबंधन करता था।

### 2. इस सिंडिकेट के 34 बैंक खातों के जरिए कुल कितने रुपये की ठगी का खुलासा हुआ?
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के अनुसार 14 राज्यों से आई 113 शिकायतों में कुल 33.14 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का पता चला है।

### 3. इस मामले में सबसे ज्यादा शिकायतें किस राज्य से दर्ज की गईं?
इस बैंक नेटवर्क से जुड़ी सबसे ज्यादा 34 शिकायतें अकेले कर्नाटक राज्य से दर्ज की गई हैं।

### 4. साइबर ठग भारत से ठगी का पैसा बाहर कैसे भेजते थे?
दुबई में बैठा आरोपी चीनी साइबर गैंग के साथ मिलकर ठगी की रकम को यूएसडीटी (USDT) क्रिप्टो करेंसी में बदलकर विदेश ट्रांसफर करता था।

### 5. जांच के दौरान उजागर हुआ डेटा एंट्री जॉब घोटाला क्या था?
आरोपी ने 33 लाख से ज्यादा लोगों का डेटा खरीदकर वर्क-फ्रॉम-होम का झांसा दिया और 750 से ज्यादा लोगों से 5,000 रुपये जमा कराकर 35 लाख रुपये से अधिक ठग लिए।

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