# गुरुग्राम में युवराज सिंह मनचंदा की हत्या के बाद पुलिस ने बिना पहचान किए कर दिया अंतिम संस्कार, परिजनों ने खड़े किए गंभीर सवाल

> दिल्ली के लाजपत नगर निवासी युवराज सिंह मनचंदा की हत्या के मामले में परिजनों ने गुरुग्राम पुलिस पर प्रोटोकॉल तोड़ने और जल्दबाजी में अंतिम संस्कार करने का आरोप लगाया है।

**Type:** article · **Category:** अपराध · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/crime/gurugram-men-yuvraj-singh-manchanda-ki-hatya-ke-bada-pulisa-ne-bina-pahachana-kie-kara-diya-antima-snskara-parijanon-ne-khare-kie--33433 · **Language:** Hindi
**Tags:** युवराज सिंह मनचंदा, गुरुग्राम पुलिस, लाजपत नगर, बादशाहपुर थाना, अन्या वत्स, संयम सचदेवा, हत्याकांड

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एक युवक की शादी की तैयारियां उस समय अचानक मातम में बदल गईं, जब लापता होने के कुछ दिनों बाद उसकी गोली मारकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई। नई दिल्ली के लाजपत नगर के रहने वाले लगभग 31 वर्षीय युवराज सिंह मनचंदा का विवाह महज एक महीने बाद संपन्न होना तय था। इस पूरे मामले में हत्या के खुलासे के साथ ही गुरुग्राम पुलिस की कार्यप्रणाली पर बेहद गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि युवक का शव मिलने के बाद परिजनों को सूचित किए बिना अथवा वैधानिक शिनाख्त प्रक्रिया पूरी किए बिना ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

## शादी की खरीदारी और रहस्यमयी ढंग से लापता होने की कड़ियां
परिजनों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार रविवार 6 सितंबर को युवराज अपनी शादी के लिए शेरवानी खरीदकर घर लौटा था। घर में उत्सव का माहौल था और सभी सदस्य आगामी विवाह समारोह की तैयारियों में जुटे थे। उसी दिन दोपहर के समय युवराज ने परिजनों को बताया कि उसकी अनन्या उसे अपनी कार से लेने आ रही है और वह एक आवश्यक बैठक में शामिल होने के लिए जा रहा है। अपने दफ्तर के सहयोगियों और मंगेतर के साथ आखिरी बातचीत में भी युवराज ने यही बात दोहराई थी।

परिवार के सदस्यों से उसकी अंतिम बार बातचीत रविवार शाम लगभग 7:30 बजे हुई थी। इसके बाद युवराज का मोबाइल फोन अचानक बंद आने लगा। हालांकि इसके उपरांत कुछ अंतराल पर फोन थोड़े समय के लिए चालू होता था और परिजनों तथा मित्रों के पास वॉट्सऐप संदेश आते थे कि वह जल्द ही लौटेगा और संपर्क करेगा। परिवार को लगा कि वह कामकाज में व्यस्त हो सकता है, परंतु मंगलवार 8 सितंबर के बाद उसका फोन पूरी तरह बंद हो गया और कोई संदेश आना भी बंद हो गया।

## गुमशुदगी की रिपोर्ट और गुरुग्राम में शव मिलने का घटनाक्रम
कई दिनों तक संपर्क पूरी तरह टूटे रहने पर परिजनों ने 11 सितंबर को नई दिल्ली के लाजपत नगर पुलिस थाने में गुमशुदगी की आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई। दिल्ली पुलिस ने इस मामले की जांच 13 सितंबर को प्रारंभ की। इसके बाद 16 सितंबर को परिवार के सामने यह बात आई कि 6 सितंबर को ही युवराज की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले की तहकीकात के दौरान अन्या वत्स और संयम सचदेवा नामक दो व्यक्तियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया, जिनमें एक महिला और उसका पति शामिल हैं।

परिवार के लिए सबसे बड़ा आघात यह तथ्य था कि गुरुग्राम पुलिस को युवराज का शव 10 सितंबर को ही बरामद हो चुका था। यह तारीख उस दिन से भी पहले की थी जब परिजनों ने लाजपत नगर में गुमशुदगी की औपचारिक रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बावजूद अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय या परिजनों तक समय पर सूचना पहुंचाने का कोई प्रभावी प्रयास नहीं देखा गया।

## जिपनेट पोर्टल के नियमों का उल्लंघन और जल्दबाजी में अंतिम संस्कार
अज्ञात शवों की पहचान और लापता व्यक्तियों के आंकड़ों के त्वरित मिलान के लिए अंतरराज्यीय स्तर पर जिपनेट पोर्टल संचालित किया जाता है। पुलिस नियमों के तहत लावारिस या अज्ञात शव मिलने की स्थिति में उसकी तस्वीरें और विस्तृत विवरण तत्काल इस केंद्रीय डेटाबेस पर अपलोड करना अनिवार्य होता है। परिजनों का स्पष्ट आरोप है कि 10 सितंबर को शव मिलने के बावजूद गुरुग्राम पुलिस ने न तो उसकी तस्वीरें जिपनेट पर दर्ज कीं और न ही मृतक की पहचान सुनिश्चित करने का प्रयास किया।

इसके विपरीत 14 सितंबर को पुलिस प्रशासन द्वारा शव का अंतिम संस्कार करवा दिया गया। परिजनों को इस बात की कोई भनक नहीं लगने दी गई। जब 16 सितंबर को परिवार के सदस्यों को इसका पता चला और उन्होंने कड़ा विरोध दर्ज कराया, तब जाकर शव बरामद होने के छह दिन बाद और अंतिम संस्कार के दो दिन बीत जाने पर जिपनेट पर प्रविष्टि की गई। नतीजतन अपने बेटे के विवाह की प्रतीक्षा कर रहे माता-पिता उसका अंतिम बार चेहरा तक नहीं देख सके और न ही अंतिम विदाई में शामिल हो पाए।

## बादशाहपुर थाने में परिजनों के साथ कथित दुर्व्यवहार
युवराज अपने पूरे परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। उसके ऊपर अपने लकवाग्रस्त पिता, गंभीर हृदय रोग से पीड़ित मां और दो बहनों की देखरेख तथा आर्थिक भरण-पोषण की पूरी जिम्मेदारी थी। परिजनों का कहना है कि जब वे पूरे मामले की जानकारी लेने गुरुग्राम के बादशाहपुर थाने पहुंचे, तो वहां तैनात थाना प्रभारी और जांच अधिकारी का रुख बेहद असंवेदनशील रहा।

परिजनों का आरोप है कि उन्हें बिना किसी स्पष्ट कारण के सात घंटे तक थाने में बैठाकर रखा गया और अधिकारियों ने प्रक्रियात्मक खामियों तथा लापरवाही पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। पीड़ित परिवार ने यह भी उल्लेख किया है कि थाने में हुए इस व्यवहार की ऑडियो रिकॉर्डिंग उनके पास मौजूद है जिसे वे सार्वजनिक करने के लिए तैयार हैं।

## पीड़ित परिवार द्वारा पुलिस प्रशासन के सामने रखे गए छह मुख्य प्रश्न
लापरवाही और नियमों की अनदेखी को लेकर परिवार ने जांच एजेंसी और प्रशासन के समक्ष छह सीधे सवाल रखे हैं

- **पोर्टल पर देरी:** जब 10 सितंबर को शव बरामद हो गया था, तो स्थापित नियमों के तहत जिपनेट पर उसकी तस्वीरें और विवरण तुरंत क्यों नहीं डाला गया?
- **अंतिम संस्कार में जल्दबाजी:** निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं की अनदेखी करते हुए और परिजनों की तलाश किए बिना 14 सितंबर को शव का अंतिम संस्कार करने की इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई?
- **हत्या के बाद के संदेश:** यदि 6 सितंबर को ही युवराज की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, तो अगले दो दिनों तक उसके फोन से परिवार और दोस्तों को वॉट्सऐप संदेश कौन भेज रहा था?
- **निष्पक्ष जांच और गिरफ्तारियां:** क्या इस हत्याकांड में शामिल सभी आरोपियों की पहचान करते हुए निर्धारित समय सीमा के भीतर निष्पक्ष जांच पूरी की जाएगी?
- **दस्तावेजों और साक्ष्यों की सुपुर्दगी:** पोस्टमार्टम रिपोर्ट, इंक्वेस्ट पेपर, डीएनए सैंपल, शव की तस्वीरें और युवराज का व्यक्तिगत सामान कब सुरक्षित करके परिजनों को सौंपा जाएगा?
- **जिम्मेदार कर्मियों पर कार्रवाई:** वैधानिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन करने और साक्ष्यों की उपेक्षा करने वाले गुरुग्राम पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और आपराधिक जांच कब शुरू होगी?

परिवार का कहना है कि वे किसी प्रकार की रियायत नहीं मांग रहे हैं, बल्कि उन्हें अपने बेटे की हत्या के मामले में पूरी जवाबदेही, स्पष्ट उत्तर और निष्पक्ष न्याय चाहिए।

## इसका आप पर असर
यह मामला पुलिस प्रशासन द्वारा लावारिस शवों की शिनाख्त और अंतरराज्यीय समन्वय के नियमों के गंभीर उल्लंघन को उजागर करता है।

- **भारत में:** यदि देश में किसी नागरिक का कोई परिजन लापता होता है, तो परिजनों को तत्काल स्थानीय थाने के साथ-साथ केंद्रीय स्तर के जिपनेट डेटाबेस पर रिकॉर्ड दर्ज कराने का आग्रह करना चाहिए। त्वरित डिजिटल ट्रैकिंग से अन्य राज्यों में मिले लावारिस व्यक्तियों या शवों के आंकड़ों का समय पर मिलान सुनिश्चित किया जा सकता है।
- **दिल्ली और गुरुग्राम में:** राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए यह घटना अंतरराज्यीय पुलिस तालमेल की भारी कमी को दर्शाती है। लापता मामलों में केवल स्थानीय पुलिस पर निर्भर रहने के बजाय पड़ोसी राज्यों के नजदीकी सीमावर्ती थानों और मोर्चरी में भी सीधे व्यक्तिगत पूछताछ करना बेहद जरूरी साबित होता है।
- **नागरिक अधिकारों के स्तर पर:** पुलिस प्रक्रिया के अनुसार किसी भी अज्ञात शव के अंतिम संस्कार से पहले निर्धारित समय तक पहचान की प्रतीक्षा और डीएनए नमूने सुरक्षित रखना कानूनी अधिकार है। नागरिक किसी भी लापरवाही या बदसलूकी की स्थिति में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और मानवाधिकार आयोग के समक्ष आधिकारिक शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
- **परिवारों की सुरक्षा पर:** शादी या व्यक्तिगत मुलाकातों के लिए निकलते समय परिजनों के साथ लाइव लोकेशन साझा करने की आदत आपातकालीन स्थितियों में महत्वपूर्ण सुराग दे सकती है। किसी भी संदिग्ध संदेश या अचानक फोन बंद होने पर बिना देरी किए तत्काल पुलिस शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
यह दुखद घटना एक आपराधिक साजिश, युवक के लापता होने और उसके बाद दो अलग-अलग राज्यों की पुलिस इकाइयों के बीच समन्वय की भारी विफलता के कारण घटी।

- **आपराधिक साजिश और कत्ल:** परिजनों के अनुसार 6 सितंबर को शेरवानी खरीदकर लौटने के बाद युवराज को एक मीटिंग के बहाने बुलाया गया और उसी दिन गोली मारकर उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस जांच में इस कृत्य के लिए अन्या वत्स और उसके पति संयम सचदेवा की गिरफ्तारी हुई है।
- **गुमराह करने का प्रयास:** हत्या के बाद अगले दो दिनों तक मृतक के मोबाइल फोन को बीच-बीच में चालू रखकर दोस्तों और परिजनों को फर्जी संदेश भेजे गए। इस कदम का उद्देश्य परिजनों को यह विश्वास दिलाना था कि युवराज जीवित है और किसी काम में व्यस्त है, ताकि शिकायत दर्ज कराने में देरी हो।
- **अंतरराज्यीय समन्वय और पोर्टल की विफलता:** गुरुग्राम पुलिस को 10 सितंबर को शव मिलने के बावजूद उसे समय पर जिपनेट पोर्टल पर दर्ज नहीं किया गया। दिल्ली के लाजपत नगर थाने में 11 सितंबर को दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्ट और गुरुग्राम में मिले शव के बीच समय रहते कोई डिजिटल मिलान नहीं हो सका।
- **नियम विरुद्ध अंतिम संस्कार:** अज्ञात शवों को निर्धारित अवधि तक सुरक्षित रखने और शिनाख्त के सभी रास्ते तलाशने के कानूनी नियमों का पालन किए बिना 14 सितंबर को जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कर दिया गया। परिजनों द्वारा कड़ा विरोध जताने के बाद ही 16 सितंबर को पोर्टल पर जानकारी जोड़ी गई।

## सवाल-जवाब

### 1. युवराज सिंह मनचंदा कौन थे और उनके साथ क्या हुआ?
युवराज सिंह मनचंदा दिल्ली के लाजपत नगर निवासी 31 वर्षीय युवक थे, जिनकी शादी से ठीक एक महीने पहले 6 सितंबर को गोली मारकर हत्या कर दी गई।

### 2. इस हत्याकांड में पुलिस ने किन आरोपियों को गिरफ्तार किया है?
पुलिस ने इस मामले में अन्या वत्स और उसके पति संयम सचदेवा को गिरफ्तार किया है।

### 3. गुरुग्राम पुलिस पर परिजनों के मुख्य आरोप क्या हैं?
परिजनों का आरोप है कि 10 सितंबर को शव मिलने के बाद पुलिस ने जिपनेट पर जानकारी अपलोड नहीं की और 14 सितंबर को बिना शिनाख्त के जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कर दिया।

### 4. युवराज के लापता होने के बाद उनके फोन से क्या हो रहा था?
हत्या के बाद 8 सितंबर तक युवराज के फोन से परिजनों और दोस्तों को वॉट्सऐप मैसेज भेजे जा रहे थे कि वह व्यस्त हैं और जल्द लौटेंगे।

### 5. जिपनेट पोर्टल क्या है और इस मामले में इसका क्या महत्व है?
जिपनेट राज्यों के बीच लापता लोगों और लावारिस शवों के मिलान का आधिकारिक पोर्टल है, जिस पर गुरुग्राम पुलिस ने शव मिलने के 6 दिन बाद एंट्री की।

### 6. बादशाहपुर थाने में परिजनों के साथ क्या व्यवहार हुआ?
परिजनों का आरोप है कि उन्हें थाने में सात घंटे तक बैठाए रखा गया और पुलिस अधिकारियों ने उनके साथ अभद्र और संवेदनहीन व्यवहार किया।

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