हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में बड़ी कार्रवाई, 592 एकड़ जमीन पर उगाई गई अवैध भांग की फसल नष्ट हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में प्रशासन ने नशे के खिलाफ बड़ा अभियान चलाते हुए 592 एकड़ क्षेत्र में फैली अवैध भांग की खेती को नष्ट कर दिया है। इस संयुक्त कार्रवाई में कई सरकारी एजेंसियों ने हिस्सा लिया। हिमाचल प्रदेश में अवैध मादक पदार्थों के कारोबार पर शिकंजा कसने के लिए प्रशासन ने एक व्यापक अभियान चलाया है। राज्य के कुल्लू जिले के दुर्गम इलाकों में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से उगाई जा रही भांग की फसल को पूरी तरह से नेस्तनाबुड कर दिया गया है। इस पूरी कार्रवाई के दौरान कुल 592 एकड़ भूमि पर फैली फसल को नष्ट किया गया है, ताकि नशे के कारोबार की जड़ों को शुरुआती स्तर पर ही कमजोर किया जा सके। संयुक्त टीमों ने की पार्वती घाटी में कार्रवाई इस बड़े अभियान को अंजाम देने के लिए देश और राज्य की कई प्रमुख एजेंसियों ने एक साथ मिलकर काम किया। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), हिमाचल प्रदेश पुलिस और राज्य के वन विभाग के जवानों ने संयुक्त रूप से पार्वती घाटी क्षेत्र में यह कार्रवाई पूरी की। अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य नशीले पदार्थों की सप्लाई चेन को बाधित करना और इनकी खेती करने वालों पर नकेल कसना है, जिसके तहत इस बड़े क्षेत्रफल को साफ किया गया है। दुर्गम इलाकों और पहाड़ियों पर करना पड़ा कड़ा संघर्ष यह अवैध खेती सामान्य स्थानों पर नहीं बल्कि बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों में की गई थी। कुल्लू जिले के भीतर 2,100 से 3,050 मीटर की ऊंचाई पर स्थित घने जंगलों से घिरे इलाकों में यह फसल लहलहा रही थी, जहां आम तौर पर वाहनों से पहुंचना असंभव है। कार्रवाई में जुटी टीमों को खराब मौसम, लगातार बारिश और घने कोहरे के बीच खड़ी पहाड़ियों पर पैदल चढ़ाई करके इन स्थानों तक पहुंचना पड़ा। तमाम मुश्किलों को पार करते हुए सुरक्षा बलों ने मौके पर ही भांग के पौधों को काटा और उन्हें नष्ट कर दिया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जीपीएस लोकेशन के साथ तस्वीरें भी सुरक्षित की गईं। कसोल और चंबा तक बढ़ाया जाएगा दायरा मादक पदार्थों के खिलाफ चल रहा यह अभियान यहीं रुकने वाला नहीं है और इसका दायरा अन्य संवेदनशील क्षेत्रों तक भी फैलाया जा रहा है। इस मुहिम के अगले चरण के तहत प्रशासन की टीमें अब कसोल की तरफ बढ़ रही हैं, जहां अवैध खेती के खिलाफ अगला कदम उठाया जाएगा। इसके साथ ही नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की एक अन्य टुकड़ी ने चंबा जिले में भी डेरा डाल दिया है और वहां भी जल्द ही इसी तरह की सख्त कार्रवाई शुरू की जाएगी। नार्कोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट के तहत हो रहा काम यह पूरा अभियान केंद्र सरकार की ओर से तैयार किए गए नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-29 के प्रावधानों के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है। इस विजन का मुख्य लक्ष्य केंद्र सरकार और विभिन्न राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर आपसी तालमेल स्थापित करना है। इसके जरिए देश भर से नशीले पदार्थों की अवैध खेती को पूरी तरह से समाप्त करने और भारत को एक नशामुक्त राष्ट्र बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इसका आप पर असर कुल्लू और आसपास के पहाड़ी इलाकों में चल रहे इस बड़े नशा विरोधी अभियान का सीधा असर स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर पड़ेगा। • कुल्लू में: स्थानीय निवासियों और पर्वतीय क्षेत्रों के ग्रामीणों को अवैध मादक पदार्थों की खेती से जुड़े आपराधिक तत्वों के प्रभाव से राहत मिलेगी। साथ ही सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता बढ़ने से इन दुर्गम इलाकों में अवैध गतिविधियों पर लगाम कसेगी। • भारत में: देश भर में नशीले पदार्थों के अवैध नेटवर्क और सप्लाई चेन को कमजोर करने के राष्ट्रीय प्रयासों को मजबूती मिलेगी। इससे केंद्र सरकार के नशामुक्त भारत के लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलेगी। ऐसा क्यों हुआ दुर्गम पहाड़ी इलाकों में अवैध रूप से उगाई जा रही भांग की फसलों को नष्ट करने के पीछे सरकार की एक सोची-समझी रणनीति और सुरक्षा नीतियां जुड़ी हैं। • भौगोलिक स्थिति: कुल्लू जिले की पार्वती घाटी के घने जंगल और 2,100 से 3,050 मीटर की ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्र तस्करों को अवैध खेती के लिए सुरक्षित ठिकाना मुहैया कराते थे। • सरकारी विजन: केंद्र सरकार के नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-29 के तहत केंद्रीय और राज्य एजेंसियों को आपसी समन्वय से नशे की जड़ें खत्म करने का निर्देश दिया गया है। • सप्लाई पर रोक: प्रशासन का मुख्य उद्देश्य फसल पकने से पहले ही उसे नष्ट कर मादक पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला को शुरुआती स्तर पर ही तोड़ना है। सवाल-जवाब 1. कुल्लू में कुल कितनी जमीन पर अवैध भांग की फसल नष्ट की गई है? प्रशासन ने कुल्लू जिले में लगभग 592 एकड़ जमीन पर उगाई गई अवैध भांग की फसल को नष्ट किया है। 2. इस संयुक्त अभियान में कौन-कौन सी एजेंसियां शामिल थीं? इस अभियान में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), आईटीबीपी, हिमाचल प्रदेश पुलिस और राज्य के वन विभाग ने मिलकर हिस्सा लिया। 3. यह अवैध खेती कितनी ऊंचाई वाले इलाकों में की जा रही थी? अवैध भांग की खेती समुद्र तल से 2,100 से 3,050 मीटर की ऊंचाई वाले दुर्गम और घने जंगलों में की गई थी। 4. यह अभियान किस सरकारी योजना के तहत चलाया जा रहा है? यह कार्रवाई केंद्र सरकार के नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-29 के अंतर्गत संचालित की जा रही है। 5. इस अभियान के अगले चरण में किन जिलों में कार्रवाई की जाएगी? अगले चरण में प्रशासन की टीमें कसोल और चंबा जिले में अवैध भांग की खेती को नष्ट करने के लिए पहुंच रही हैं। https://trendkia.com/crime/himachal-pradesh-ke-kullu-mein-badi-karwahi-592-acre-zamin-par-ugai-gayi-avaidh-bhang-ki-fasal-nasht-47073 TrendKia — Har trend, sabse pehle.