आईआईटी बॉम्बे छात्र खुदकुशी मामला: न्याय की गुहार लेकर आजाद मैदान पर बैठे पिता, प्रोफेसर पर गंभीर आरोप आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले में उनके पिता रवींद्र वाकोडे ने मुंबई के आजाद मैदान में धरना शुरू कर दिया है। परिवार ने संस्थान के एक प्रोफेसर पर जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया है, जबकि पुलिस और संस्थान स्तर पर जांच जारी है। मुंबई में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के एक छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के दस दिन बीत जाने के बाद पीड़ित छात्र के पिता ने दक्षिण मुंबई के प्रमुख धरना स्थल पर अनिश्चितकालीन प्रदर्शन का बिगुल फूंक दिया है। परिवार का सीधा आरोप है कि उनके बेटे को शैक्षणिक परिसर के भीतर लक्षित उत्पीड़न और भेदभाव का सामना करना पड़ा था। जब तक इस पूरे प्रकरण में दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक यह विरोध प्रदर्शन अनवरत जारी रहने का ऐलान किया गया है। आजाद मैदान में शुरू हुआ अनशन और धरना पीड़ित छात्र साहिल वाकोडे के पिता रवींद्र वाकोडे ने प्रशासनिक व्यवस्था से सीधी और दोटूक मांग करते हुए कहा कि उन्हें किसी भी प्रकार की कार्रवाई का खौफ नहीं है और वह अपने बेटे के हक के लिए अंतिम दम तक लड़ेंगे। इससे पहले इसी सप्ताह के शुरुआती दिनों में परिवार के सदस्यों ने एक दिन की भूख हड़ताल भी की थी, जिसके बाद सोमवार से इस बड़े धरने की रूपरेखा तैयार की गई। परिवार का कहना है कि वे चाहते हैं कि इस मामले में पूरी पारदर्शिता बरती जाए और दोषियों को सजा मिले ताकि भविष्य में किसी अन्य छात्र को ऐसी त्रासदी न झेलनी पड़े। क्या था पूरा घटनाक्रम और पुलिस जांच बीते 18 सितंबर की शाम को संस्थान के हॉस्टल परिसर के एक कमरे में द्वितीय वर्ष के बाईस वर्षीय छात्र साहिल वाकोडे का शव फंदे से झूलता हुआ बरामद किया गया था। यह दुखद घटनाक्रम उस वक्त सामने आया जब मिड-सेमेस्टर की परीक्षाओं के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल और कथित तौर पर चैटजीपीटी के प्रयोग को लेकर उन्हें पकड़ा गया था। इस मामले की गंभीरता को भांपते हुए मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने आत्महत्या के लिए उकसाने समेत अन्य गंभीर धाराओं के तहत जांच का दायरा बढ़ा दिया है। पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी में जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप भी शामिल किए गए हैं, जिसकी गहन पड़ताल की जा रही है। संस्थान और छात्रों की प्रतिक्रिया इस पूरे मामले के तूल पकड़ने के बाद आईआईटी बॉम्बे प्रशासन ने एक दस सदस्यीय आंतरिक जांच समिति का गठन किया है जो इस पूरी घटना के हर पहलू की समीक्षा कर रही है। प्राथमिकी में नामजद शिक्षक प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला को इस पूरी जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के उद्देश्य से फिलहाल अवकाश पर भेज दिया गया है। इसके अलावा परिसर के भीतर छात्रों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार की रात को सैकड़ों की संख्या में विद्यार्थियों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर एक मार्च निकाला और वर्तमान जांच समिति के कुछ सदस्यों पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए इसके पुनर्गठन की मांग उठाई। कैंपस से लेकर बाहर तक बढ़ रहा समर्थन छात्रों का एक वर्ग अभी भी परिसर के भीतर शांतिपूर्ण तरीके से धरने पर बैठा हुआ है और उन्होंने इस स्थान का नाम 'जस्टिस कॉर्नर' रखा है, जहां इस पूरे प्रकरण पर लगातार चर्चाएं और बैठकें आयोजित की जा रही हैं। केवल इसी संस्थान के नहीं बल्कि देश के अन्य प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों से जुड़े छात्र संगठन भी वाकोडे परिवार के समर्थन में आगे आए हैं। सभी का यही कहना है कि इस घटना की निष्पक्ष न्यायिक जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके और परिवार को सांत्वना मिल सके। इसका आप पर असर इस घटना का असर उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़े पैमाने पर पड़ रहा है। • भारत में: देश भर के प्रतिष्ठित संस्थानों में विद्यार्थियों की सुरक्षा और मानसिक तनाव को कम करने के लिए कड़े प्रशासनिक दिशा-निर्देशों की मांग तेज हो गई है। • मुंबई में: स्थानीय स्तर पर छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों द्वारा विरोध प्रदर्शनों के कारण सुरक्षा व्यवस्था और यातायात पर विशेष नजर रखी जा रही है। • शैक्षणिक संस्थानों पर: परिसरों के भीतर भेदभाव रोकने और आंतरिक शिकायत निवारण तंत्र को अधिक पारदर्शी बनाने का दबाव बढ़ गया है। • कानूनी कार्रवाई: पुलिस जांच के दायरे में आने वाले मामलों में त्वरित कार्रवाई और निष्पक्षता की उम्मीद बढ़ गई है। ऐसा क्यों हुआ यह घटनाक्रम एक छात्र की अचानक हुई मौत और उसके बाद संस्थान व परिवार के बीच उपजे गंभीर विवादों की श्रृंखला के कारण सामने आया। • सीधा कारण: छात्र द्वारा परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के कथित इस्तेमाल पर पकड़े जाने और उसके कुछ ही घंटों बाद हॉस्टल में उसका शव मिलने से यह विवाद गहराया। • संस्थागत तनाव: मृतक के परिवार द्वारा संस्थान के भीतर जातिगत भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए जाने से मामला तूल पकड़ गया। • जांच में देरी का अंदेशा: शुरुआती प्रशासनिक और आंतरिक जांच समितियों के गठन पर छात्रों द्वारा सवाल उठाए जाने से असंतोष और बढ़ गया। • सार्वजनिक प्रतिक्रिया: नामजद प्रोफेसर को छुट्टी पर भेजे जाने और पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बावजूद न्याय की मांग को लेकर परिजनों का सड़क पर उतरना इस आंदोलन का मुख्य कारण बना। सवाल-जवाब 1. साहिल वाकोडे कौन थे? साहिल वाकोडे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मुंबई के द्वितीय वर्ष के 22 वर्षीय छात्र थे। 2. रवींद्र वाकोडे ने धरना कहां शुरू किया है? रवींद्र वाकोडे ने दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में धरना शुरू किया है। 3. यह घटना कब और कहां हुई? यह घटना 18 सितंबर की शाम को आईआईटी बॉम्बे के हॉस्टल कमरे में हुई थी। 4. परिवार ने क्या मुख्य आरोप लगाया है? परिवार ने संस्थान में अपने बेटे को जातिगत भेदभाव और प्रताड़ना का सामना करने का आरोप लगाया है। 5. पुलिस इस मामले में क्या कर रही है? मुंबई पुलिस की अपराध शाखा आत्महत्या के लिए उकसाने और भेदभाव के आरोपों से जुड़े मामले की जांच कर रही है। 6. जांच के लिए कौन सा कदम उठाया गया है? आईआईटी बॉम्बे के बोर्ड ने 10 सदस्यीय समिति का गठन किया है और प्राथमिकी में नामजद प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला को छुट्टी पर भेज दिया गया है। 7. छात्रों ने परिसर में क्या विरोध जताया है? छात्रों ने मोमबत्ती मार्च निकाला और जांच समिति के पुनर्गठन की मांग करते हुए परिसर में शांतिपूर्ण धरना दिया है। https://trendkia.com/crime/iit-bombay-student-suicide-case-father-protests-at-azad-maidan-demanding-justice-and-action-against-professor-39881 TrendKia — Har trend, sabse pehle.