जयपुर में अमेरिकी नागरिकों से ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश, 14 गिरफ्तार जयपुर पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट ने बिंदायका इलाके के एक किराए के फ्लैट में चल रहे अवैध अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर का भंडाफोड़ कर 14 जालसाजों को दबोचा है। आरोपी दिग्गज टेक कंपनी एप्पल का प्रतिनिधि बनकर अमेरिकी नागरिकों से डॉलर में अवैध वसूली कर रहे थे। जयपुर के बिंदायका थाना क्षेत्र में एक बहुमंजिला आवासीय सोसाइटी के भीतर चल रहे अवैध अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर का भंडाफोड़ हुआ है। जयपुर पश्चिम के पुलिस उपायुक्त प्रशांत किरण और साइबर क्राइम यूनिट के पुलिस उप अधीक्षक आदित्य पूनियां के नेतृत्व में की गई इस बड़ी कार्रवाई में 14 आरोपियों को हिरासत में लिया गया। यह गिरोह भारत में बैठकर हजारों मील दूर संयुक्त राज्य अमेरिका के नागरिकों को अपना शिकार बना रहा था। आरोपियों के कब्जे से तकनीकी साजोसामान का बड़ा जखीरा बरामद किया गया है, जिसका इस्तेमाल अमेरिकी नागरिकों से संपर्क साधने और धोखाधड़ी को अंजाम देने में किया जा रहा था। सोसाइटी के फ्लैट में चल रहा था पूरा नेटवर्क साइबर जालसाजों ने इस गैरकानूनी धंधे के लिए बिंदायका इलाके में स्थित मंगलम- द ग्रैंड रेजिडेंसी में एक फ्लैट किराए पर ले रखा था। शांत और सुरक्षित मानी जाने वाली इस आवासीय सोसाइटी के अन्य निवासियों को लंबे समय तक यह भनक भी नहीं लगी कि पड़ोस के फ्लैट में बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय ठगी का खेल खेला जा रहा है। फ्लैट के भीतर कंप्यूटर, इंटरनेट और आधुनिक संचार साधनों का जाल बिछाया गया था। यहीं से गिरोह के सदस्य अमेरिका में रहने वाले लोगों को कॉल और संदेश भेजकर अपने जाल में फंसाते थे। पुलिस की छापेमारी के बाद जब इस गिरोह की असलियत सामने आई, तब जाकर स्थानीय निवासियों को मामले की गंभीरता का पता चला। एप्पल का नाम लेकर प्री-अप्रूव्ड चार्ज के नाम पर वसूली जांच अधिकारियों द्वारा जुटाई गई शुरुआती जानकारी के मुताबिक, यह गिरोह टेक दिग्गज कंपनी एप्पल के नाम और विश्वसनीयता का दुरुपयोग करता था। आरोपी अमेरिका में मौजूद संभावित ग्राहकों को ऐसे संदेश भेजते थे, जिनमें एप्पल के उत्पादों और सेवाओं का उल्लेख होता था। इसके बाद वे पीड़ितों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश करते थे कि उनके खाते या नाम पर कोई प्री-अप्रूव्ड चार्ज अथवा विशेष सेवा शुल्क बकाया है। बातचीत के दौरान जालसाज अमेरिकी नागरिकों पर इस कथित शुल्क को तुरंत चुकाने का दबाव बनाते थे। शिकार बनाए गए लोगों से 399 अमेरिकी डॉलर, 499 अमेरिकी डॉलर और 699 अमेरिकी डॉलर तक की अलग-अलग रकमें वसूली जाती थीं। तकनीकी दांव-पेचों और बातचीत के सधे हुए अंदाज से आरोपी सामने वाले को इस बात का यकीन दिला देते थे कि कॉल सचमुच कंपनी के अधिकृत सहायता केंद्र से ही आया है। अधिकारियों का मानना है कि इस तरीके से कई अमेरिकी नागरिकों को झांसे में लेकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की जा चुकी है, जिसकी अंतिम गणना अभी की जा रही है। गुजरात का मास्टरमाइंड और अंतरराज्यीय गिरोह की कड़ियां गिरफ्तार किए गए 14 आरोपियों की पृष्ठभूमि की पड़ताल करने पर पता चला है कि इस गिरोह के तार देश के कई राज्यों से जुड़े हुए हैं। पकड़े गए लोगों में से 12 आरोपी राजस्थान के बाहर के रहने वाले हैं, जबकि केवल 2 आरोपी ही राजस्थान के स्थानीय निवासी हैं। जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि इस पूरे सिंडिकेट का मास्टरमाइंड हीरेन नाम का एक व्यक्ति है, जो गुजरात का निवासी बताया जा रहा है। पुलिस अब हीरेन की तलाश और भूमिका की बारीकी से जांच कर रही है। इसके साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि अन्य राज्यों से आए इन युवकों को जयपुर में किस माध्यम से संगठित किया गया था। इस गिरोह तक अमेरिकी नागरिकों के निजी फोन नंबर और डेटाबेस पहुंचाने वाले मध्यस्थों की पहचान भी की जा रही है, ताकि डेटा चोरी के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सके। लैपटॉप, मोबाइल जब्त और फ्लैट मालिक से पूछताछ छापेमारी के दौरान पुलिस टीम ने फ्लैट से 24 मोबाइल फोन, 13 लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अपने कब्जे में लिए हैं। इन सभी जब्त उपकरणों को डिजिटल फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है। जांचकर्ताओं को उम्मीद है कि लैपटॉप और मोबाइल से पीड़ितों की विस्तृत सूची, कॉल लॉग्स, चैट रिकॉर्ड्स और पैसों के लेन-देन के अहम डिजिटल साक्ष्य हासिल होंगे। इसके साथ ही पुलिस ने मंगलम- द ग्रैंड रेजिडेंसी के उस फ्लैट के मालिक से भी पूछताछ शुरू कर दी है, जहां यह गैरकानूनी सेटअप संचालित हो रहा था। पुलिस इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि फ्लैट किराए पर देते समय किरायेदारों का पुलिस सत्यापन कराया गया था या नहीं, और किराएदारों ने अपनी पहचान और पेशे के बारे में मकान मालिक को क्या दस्तावेज दिए थे। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन और आगे की कार्रवाई जयपुर पश्चिम के डीसीपी प्रशांत किरण और साइबर क्राइम यूनिट के डीएसपी आदित्य पूनियां के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों से सघन पूछताछ जारी है। जांच एजेंसी मुख्य रूप से इस बात की कड़ियां जोड़ रही है कि यह फर्जी कॉल सेंटर कितने समय से इस इमारत में सक्रिय था और अब तक कुल कितने विदेशी नागरिकों से ठगी की जा चुकी है। इसके अलावा, सबसे अहम जांच अमेरिकी डॉलर में वसूली गई रकम को भारत में स्थानांतरित करने के वित्तीय रास्तों को लेकर की जा रही है। अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि ठगी का पैसा किन बैंक खातों, डिजिटल पेमेंट गेटवे या अन्य माध्यमों से भारत लाया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर आने वाले दिनों में इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े अन्य मददगारों और मुख्य सरगनाओं की गिरफ्तारियां संभव हैं। इसका आप पर असर यह घटना दिखाती है कि किस तरह आवासीय कॉलोनियों में अवैध कॉल सेंटर बनाकर अंतरराष्ट्रीय ठगी की जा रही है और इसका असर आम नागरिकों पर भी पड़ता है। • जयपुर और राजस्थान में: आवासीय समितियों और मकान मालिकों के लिए किरायेदारों का पुलिस सत्यापन कराना अब पहले से कहीं अधिक अनिवार्य हो गया है। बिना उचित पहचान पत्र और जांच-पड़ताल के फ्लैट किराए पर देने वाले मकान मालिकों को अब कानूनी कार्रवाई और पुलिस पूछताछ का सामना करना पड़ सकता है। • भारत में: विदेशी तकनीकी कंपनियों के नाम पर अनधिकृत शुल्क वसूली के फर्जी संदेशों से आम नागरिकों को भी सतर्क रहने की सख्त जरूरत है। किसी भी अज्ञात संदेश में बताए गए प्री-अप्रूव्ड चार्ज या सेवा शुल्क का भुगतान करने से पहले हमेशा कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर जाकर सत्यापन करें। • आवासीय सोसायटियों के लिए: फ्लैटों में असामान्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, दर्जनों लैपटॉप और अस्वाभाविक गतिविधियों पर सुरक्षा समितियों को निगरानी बढ़ानी होगी। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत स्थानीय पुलिस को देकर नागरिक कानून व्यवस्था बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। • साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता: फोन या इंटरनेट पर किसी अनजान कॉलर के दबाव में आकर व्यक्तिगत डेटा या वित्तीय विवरण साझा न करें। डिजिटल धोखाधड़ी की आशंका होने पर तुरंत 1930 राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं। ऐसा क्यों हुआ यह अंतरराष्ट्रीय ठगी गिरोह संगठित योजना, तकनीकी संसाधनों और प्रतिष्ठित ब्रांड की साख का गलत फायदा उठाकर संचालित किया जा रहा था। • प्रतिष्ठित ब्रांड का दुरुपयोग: आरोपियों ने दुनिया भर में मशहूर टेक कंपनी एप्पल के नाम का सहारा लेकर अमेरिकी नागरिकों में विश्वास और घबराहट पैदा की। नामचीन कंपनी के नाम पर प्री-अप्रूव्ड चार्ज का झांसा देकर लोगों को आसानी से बहकाया गया। • किराए के फ्लैट का पर्दा: गिरोह ने पुलिस और जांच एजेंसियों से बचने के लिए किसी व्यावसायिक दफ्तर के बजाय एक बहुमंजिला आवासीय सोसाइटी में फ्लैट किराए पर लिया। शांत रिहायशी माहौल की आड़ में वे बिना किसी बाहरी संदेह के तकनीकी सेटअप संचालित करते रहे। • अंतरराज्यीय नेटवर्क और तकनीकी डेटा: गुजरात के कथित मास्टरमाइंड हीरेन और विभिन्न राज्यों से बुलाए गए प्रशिक्षित युवकों के जरिए यह गिरोह चलाया जा रहा था। अमेरिका के नागरिकों का संपर्क डेटा अवैध रूप से हासिल करके विदेश में कॉल और मैसेज किए जा रहे थे। • कॉल सेंटर का विस्तृत दायरा: गिरोह ने 399, 499 और 699 डॉलर जैसी निश्चित रकमों की मांग कर एक व्यवस्थित प्रणाली बनाई हुई थी। इस अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क के सटीक लेन-देन और डेटा स्रोतों की पुष्टि के लिए पुलिस की तकनीकी जांच अभी जारी है। सवाल-जवाब 1. जयपुर में फर्जी कॉल सेंटर के मामले में कुल कितने आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं? जयपुर पश्चिम पुलिस और साइबर क्राइम यूनिट ने इस मामले में कुल 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। 2. यह फर्जी कॉल सेंटर जयपुर में किस जगह से संचालित हो रहा था? यह फर्जी कॉल सेंटर बिंदायका थाना इलाके की मंगलम- द ग्रैंड रेजिडेंसी में एक किराए के फ्लैट से चलाया जा रहा था। 3. आरोपी किस कंपनी का नाम लेकर लोगों से ठगी कर रहे थे? आरोपी दिग्गज टेक कंपनी एप्पल का प्रतिनिधि बनकर और उसके उत्पादों व सेवाओं का हवाला देकर ठगी कर रहे थे। 4. अमेरिकी नागरिकों से कितनी रकम वसूली जाती थी? आरोपी प्री-अप्रूव्ड चार्ज के नाम पर अमेरिकी नागरिकों से 399, 499 और 699 अमेरिकी डॉलर तक की रकम वसूलते थे। 5. पुलिस ने मौके से कौन-कौन से उपकरण बरामद किए हैं? पुलिस ने छापेमारी में आरोपियों के कब्जे से 24 मोबाइल फोन, 13 लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। 6. इस साइबर गिरोह का कथित मास्टरमाइंड कौन है और वह कहां का रहने वाला है? पुलिस के अनुसार इस गिरोह का मास्टरमाइंड हीरेन नाम का व्यक्ति है, जो गुजरात का रहने वाला बताया जा रहा है। 7. गिरफ्तार किए गए 14 आरोपियों में से कितने राजस्थान के बाहर के हैं? गिरफ्तार 14 आरोपियों में से 12 आरोपी राजस्थान से बाहर के राज्यों के हैं, जबकि केवल 2 आरोपी राजस्थान के निवासी हैं। 8. इस मामले की जांच किन पुलिस अधिकारियों के नेतृत्व में की जा रही है? यह कार्रवाई जयपुर पश्चिम के डीसीपी प्रशांत किरण और साइबर क्राइम यूनिट के डीएसपी आदित्य पूनियां के नेतृत्व में की गई है। https://trendkia.com/crime/jaipur-men-ameriki-nagarikon-se-thagi-karane-vale-pharji-kola-sentara-ka-pardaphasha-14-giraphtara-40905 TrendKia — Har trend, sabse pehle.