# जंतर-मंतर हिंसा की जांच तेज, सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने शुरू किया विशेष पोर्टल और सुरक्षा का भरोसा

> जुलाई 2026 की जंतर-मंतर हिंसा की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की हाई पावर इन्क्वायरी कमेटी ने एक सीक्रेट वेब पोर्टल लॉन्च किया है। इसके जरिए आम नागरिक और घायल पुलिसकर्मी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं, साथ ही गवाहों की सुरक्षा व गोपनीयता का पूरा इंतजाम किया गया है।

**Type:** article · **Category:** अपराध · **Published:** 2026-10-17 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/crime/jantar-mantar-violence-probe-supreme-court-panel-launches-special-portal-with-witness-protection-48706 · **Language:** Hindi
**Tags:** जंतर-मंतर हिंसा, सुप्रीम कोर्ट, HPEC कमेटी, वेब पोर्टल, गवाह सुरक्षा, पुलिस जांच

जुलाई 2026 के दौरान जंतर-मंतर समेत देश के विभिन्न इलाकों में भड़की हिंसक घटनाओं की तह तक जाने के लिए न्यायिक प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच के वास्ते उच्चतम न्यायालय द्वारा बनाई गई हाई पावर इन्क्वायरी कमेटी ने अब एक समर्पित वेब पोर्टल की शुरुआत की है। इस विशेष डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अब कोई भी पीड़ित व्यक्ति आसानी से अपनी बात सीधे समिति तक पहुंचा सकता है। जांच को पारदर्शी और सुलभ बनाने के उद्देश्य से यह पोर्टल शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से शिकायतें और महत्वपूर्ण विवरण ऑनलाइन साझा किए जा सकते हैं।

यह नया डिजिटल माध्यम केवल आम जनता और प्रभावित नागरिकों के लिए ही नहीं है, बल्कि उन पुलिसकर्मियों के लिए भी खुला है जो इन हिंसक प्रदर्शनों के दौरान घायल हुए थे या जिन्हें ड्यूटी के दौरान नुकसान उठाना पड़ा था। सभी पक्षों को अपनी बात रखने का समान अवसर देने के लिए इस पोर्टल को तैयार किया गया है। वे सभी लोग जो इस हिंसा से किसी भी रूप में प्रभावित हुए हैं, वे आधिकारिक वेबसाइट http://hpec.nic.in पर जाकर अपने दस्तावेज या शिकायतें दर्ज करा सकते हैं, ताकि जांच में किसी भी तरह की कोई रुकावट न आए।

## किन मामलों को मिलेगी जांच में प्राथमिकता
शीर्ष अदालत द्वारा 18 अगस्त 2026 और 10 सितंबर 2026 को दिए गए स्पष्ट आदेशों के आधार पर कुछ खास बिंदुओं को जांच के केंद्र में रखा गया है। हाई पावर इन्क्वायरी कमेटी इन सभी संवेदनशील मुद्दों की बेहद बारीकी से छानबीन कर रही है। इस पूरी जांच प्रक्रिया के दौरान सबसे ज्यादा जोर पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़े मामलों पर दिया जाएगा, जिन्हें सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा गया है। इसके अलावा प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों को खासतौर पर निशाना बनाकर की गई हिंसा और उनके उत्पीड़न के मामलों की भी गहराई से जांच की जा रही है।

इस जांच के दायरे में केवल एक पक्ष नहीं बल्कि दोनों तरफ के हालात को परखा जा रहा है। चाहे वह पुलिसकर्मी हों या फिर आम प्रदर्शनकारी, दोनों पक्षों की ओर से किए गए अत्यधिक बल प्रयोग और सरकारी या निजी संपत्ति को पहुंचे नुकसान के मामलों को बेहद गंभीरता के साथ परखा जा रहा है। कमेटी यह सुनिश्चित करने में लगी है कि हिंसा की जड़ तक पहुंचकर हर एक पहलू की सच्चाई सामने लाई जा सके, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

## शिकायतकर्ताओं और गवाहों के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
इस तरह के संवेदनशील मामलों में अक्सर यह देखा गया है कि लोग बाहरी दबाव, डर या अन्य कारणों की वजह से खुलकर सामने आने से बचते हैं और गवाही देने से कतराते हैं। इसी बड़ी समस्या को ध्यान में रखते हुए इस नए पोर्टल को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इस्तेमाल करने वालों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो। जांच समिति ने यह बात बिल्कुल साफ कर दी है कि जो भी गवाह कमजोर स्थिति में हैं या जिन्हें किसी भी प्रकार के खतरे का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें पूरी सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी ताकि वे बिना किसी डर के सच सामने रख सकें।

इसके साथ ही गोपनीयता का भी पूरा ख्याल रखा गया है। यदि कोई पीड़ित या गवाह यह चाहता है कि उसकी पहचान सार्वजनिक न हो और उसका नाम गुप्त रखा जाए, तो पोर्टल पर उसकी जानकारी को पूरी तरह से सुरक्षित और गोपनीय रखा जाएगा। कमेटी ने सभी संबंधित पक्षों और प्रभावित लोगों से यह अपील की है कि वे इस डिजिटल प्लेटफॉर्म का खुलकर उपयोग करें। पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने या अपना पक्ष रखने के लिए बहुत ही सरल फॉर्मेट दिए गए हैं, जिनकी मदद से कोई भी व्यक्ति आसानी से अपनी बात जांच समिति तक पहुंचा सकता है।

## इसका आप पर असर
इस जांच पोर्टल के शुरू होने से जंतर-मंतर हिंसा से जुड़े पीड़ितों और गवाहों को कानूनी प्रक्रिया में बिना किसी डर के शामिल होने का सीधा अवसर मिल रहा है।

- **राष्ट्रीय स्तर पर:** देश भर के नागरिकों और पुलिसकर्मियों को यह संदेश मिलता है कि उच्च स्तरीय न्यायिक जांच में पारदर्शिता और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। ऐसे मामलों में भविष्य के कानूनी कदमों के लिए एक मजबूत मिसाल कायम होती है।
- **दिल्ली में:** स्थानीय स्तर पर जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों के प्रभावित लोगों या घायल कर्मियों को बिना अपनी पहचान उजागर किए अपनी शिकायत दर्ज कराने की सुविधा मिल गई है। इससे स्थानीय स्तर पर गवाही देने का डर कम होगा और सही तथ्य सामने आ सकेंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
जुलाई 2026 की हिंसा की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यह कदम उठाया गया है।

- **न्यायिक निर्देश:** सुप्रीम कोर्ट द्वारा 18 अगस्त 2026 और 10 सितंबर 2026 को दिए गए स्पष्ट आदेशों के तहत हाई पावर इन्क्वायरी कमेटी का गठन किया गया था।
- **पारदर्शिता की जरूरत:** पारंपरिक तरीकों में गवाहों के डरने और सबूत जुटाने में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए एक डिजिटल और सुरक्षित माध्यम की आवश्यकता महसूस की गई थी।
- **गंभीर मामलों की प्राथमिकता:** पैलेट गन के इस्तेमाल, महिला प्रदर्शनकारियों पर हिंसा और अत्यधिक बल प्रयोग जैसे गंभीर आरोपों की गहन जांच करना इस कमेटी का मुख्य उद्देश्य है।

## सवाल-जवाब

### 1. जंतर-मंतर हिंसा की जांच के लिए कौन सी कमेटी बनाई गई है?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर इन्क्वायरी कमेटी (HPEC) इस हिंसा की जांच कर रही है।

### 2. शिकायत दर्ज करने के लिए कौन सा वेब पोर्टल लॉन्च किया गया है?
प्रभावित लोग http://hpec.nic.in पर जाकर अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं।

### 3. यह पोर्टल किन लोगों के लिए है?
यह पोर्टल आम नागरिकों के साथ-साथ हिंसा के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों के लिए भी है।

### 4. किन मामलों को जांच में सबसे ऊपर रखा गया है?
पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़े मामलों और महिला प्रदर्शनकारियों पर हुई हिंसा को सबसे ऊपर रखा गया है।

### 5. क्या गवाहों की पहचान गुप्त रखी जाएगी?
हाँ, कमजोर या खतरे का सामना कर रहे गवाहों की पहचान को पूरी तरह से गुप्त और सुरक्षित रखा जाएगा।

### 6. यह कमेटी किस अदालत के आदेश पर काम कर रही है?
यह कमेटी सुप्रीम कोर्ट के 18 अगस्त 2026 और 10 सितंबर 2026 के आदेशों के तहत काम कर रही है।

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