# जौनपुर के आशीष मौर्य हत्याकांड में सांसद के प्रतिनिधि मनोज मौर्य समेत 4 भाइयों को मिली उम्रकैद

> उत्तर प्रदेश के जौनपुर में 2004 में हुई आशीष मौर्य की दिनदहाड़े हत्या के मामले में अदालत ने 22 साल बाद निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने सांसद बाबू सिंह कुशवाहा के प्रतिनिधि मनोज मौर्य और उनके तीन भाइयों को उम्रकैद तथा 80-80 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी है।

**Type:** article · **Category:** अपराध · **Published:** 2026-08-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/crime/jaunpur-ke-ashish-maurya-hatyakanda-men-sansada-ke-pratinidhi-manoj-maurya-sameta-4-bhaiyon-ko-mili-umrakaida-22937 · **Language:** Hindi
**Tags:** जौनपुर हत्याकांड, अदालत का फैसला, उम्रकैद की सजा, बाबू सिंह कुशवाहा, मनोज मौर्य, उत्तर प्रदेश पुलिस

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले की एक अदालत ने 22 साल पुराने बहुचर्चित आशीष मौर्य हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए चार सगे भाइयों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सजा पाने वालों में सांसद बाबू सिंह कुशवाहा के वर्तमान प्रतिनिधि मनोज मौर्य भी शामिल हैं। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल यादव की अदालत ने चारों आरोपियों को दोषी करार देते हुए उन पर 80-80 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। फैसला आते ही अदालत ने चारों दोषियों को हिरासत में लेकर जेल भेजने का आदेश जारी कर दिया।

 

## कचहरी तिराहे पर दिनदहाड़े हुई थी गोलीबारी

यह सनसनीखेज वारदात 16 अगस्त 2004 को घटी थी, जब जौनपुर के लाइन बाजार थाना क्षेत्र के अंतर्गत मियांपुर मोहल्ले में कचहरी तिराहे के समीप आशीष मौर्य की सरेराह गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस दुस्साहसिक घटना के पीछे मुख्य वजह जमीन से जुड़ा एक पुराना विवाद था। वारदात के तुरंत बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पीड़ित पक्ष की तहरीर पर लाइन बाजार थाने में हत्या समेत विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत कुल 7 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की थी।

 

## अदालत का निर्णय और 80 हजार रुपये का अर्थदंड

मामले की लंबी सुनवाई के बाद अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने राम सेवक मौर्य, अश्वनी मौर्य, पवन मौर्य और मनोज मौर्य को आशीष मौर्य की हत्या का मुख्य दोषी पाया। न्यायाधीश अनिल यादव ने चारों सगे भाइयों को भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 80-80 हजार रुपये का जुर्माना भी चुकाने का निर्देश दिया गया है। जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ सकती है।

 

## सात नामजद आरोपियों का पूरा कानूनी लेखा-जोखा

एफआईआर में दर्ज सात आरोपियों में से चार सगे भाइयों को अदालत ने सख्त सजा सुनाई है, जबकि बाकी तीन आरोपियों का मामला अलग रहा। ट्रायल के दौरान अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में दो अन्य आरोपियों को पूरी तरह बरी कर दिया। वहीं, मुकदमे की लंबी प्रक्रिया के दौरान ही एक अन्य आरोपी की मृत्यु हो गई थी, जिसके कारण उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही समाप्त कर दी गई थी। इस प्रकार 22 वर्षों तक चले इस मुकदमे में कानूनी प्रक्रिया अपने अंतिम निष्कर्ष तक पहुंची।

 

## मनोज मौर्य की राजनीतिक स्थिति पर स्थिति स्पष्ट

मामले में सजा पाने वाले दोषियों में शामिल मनोज मौर्य वर्तमान समय में सांसद बाबू सिंह कुशवाहा के प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत हैं। हालांकि, न्यायिक रिकॉर्ड और मामले से जुड़े तथ्यों के अनुसार, वर्ष 2004 में जब यह हत्या की घटना हुई थी, उस समय मनोज मौर्य का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं था। उस दौर में न तो वे सक्रिय राजनीति में थे और न ही उनका सांसद बाबू सिंह कुशवाहा के साथ कोई संबंध या जुड़ाव था।

 

## 22 साल लंबे कानूनी संघर्ष का अंत

वर्ष 2004 से लगातार 2026 तक चले इस मुकदमे ने पीड़ित परिवार के लंबे इंतजार को समाप्त किया है। कचहरी तिराहे जैसे व्यस्त इलाके में हुई इस हत्या ने उस समय पूरे शहर में सनसनी फैला दी थी। अभियोजन पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शियों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को अदालत के समक्ष मजबूती से पेश किया, जिसके आधार पर कोर्ट ने चार सगे भाइयों को दोषी मानकर जेल भेज दिया। इस फैसले के साथ ही दो दशक से अधिक पुराने इस आपराधिक मामले का पटाक्षेप हो गया है।

## इसका आप पर असर
यह फैसला आपराधिक मामलों में लंबी अदालती प्रक्रियाओं और भूमि विवादों से जुड़े गंभीर अपराधों पर कड़ा संदेश देता है।

- **भारत में:** 22 साल बाद आया यह निर्णय दिखाता है कि पुराने मामलों में भी न्याय प्रणाली दोषियों को बख्शती नहीं है। इससे जमीन संबंधी विवादों में हिंसा का सहारा लेने वालों के मन में कानून का डर पैदा होगा।

- **जौनपुर और यूपी में:** जौनपुर के लाइन बाजार क्षेत्र में वर्षों पहले हुए इस दुस्साहसिक हत्याकांड के अंजाम तक पहुंचने से स्थानीय लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा मजबूत हुआ है। क्षेत्र में संपत्ति से जुड़े विवादों का निपटारा कानूनी रास्ते से करने की सीख मिलती है।

- **स्थानीय नागरिकों के लिए:** किसी भी तरह के प्रॉपर्टी या जमीन के विवाद को आपसी हिंसा की जगह राजस्व और सिविल कोर्ट के जरिए सुलझाना ही सुरक्षित रास्ता है। इस मामले में दोषियों के परिवारों को भी सामाजिक और कानूनी तौर पर बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है।

- **कानूनी प्रक्रियाओं पर:** पीड़ित परिवारों के लिए संदेश स्पष्ट है कि साक्ष्यों को सही तरीके से प्रस्तुत करने पर देर से ही सही, इंसाफ जरूर मिलता है। गवाहों और पुलिस जांच का सही समन्वय फैसले तक पहुंचने में मददगार होता है।

## सवाल-जवाब

### 1. जौनपुर कोर्ट ने किस मामले में 4 भाइयों को उम्रकैद की सजा सुनाई है?
कोर्ट ने 16 अगस्त 2004 को मियांपुर में कचहरी तिराहे के पास हुई आशीष मौर्य की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या करने के मामले में 4 सगे भाइयों को उम्रकैद की सजा दी है।

### 2. सजा पाने वाले दोषियों में कौन-कौन शामिल हैं?
सजा पाने वालों में सांसद बाबू सिंह कुशवाहा के प्रतिनिधि मनोज मौर्य और उनके तीन सगे भाई राम सेवक मौर्य, अश्वनी मौर्य तथा पवन मौर्य शामिल हैं।

### 3. अदालत ने दोषियों पर कितना जुर्माना लगाया है?
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल यादव की अदालत ने चारों दोषियों पर 80-80 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

### 4. क्या 2004 में हत्या के समय मनोज मौर्य राजनीति में थे?
नहीं, 2004 में जब यह हत्या हुई थी, तब मनोज मौर्य राजनीति में नहीं थे और न ही उनका सांसद बाबू सिंह कुशवाहा से कोई जुड़ाव था।

### 5. एफआईआर में नामजद बाकी तीन आरोपियों का क्या हुआ?
मामले के दो अन्य नामजद आरोपियों को सबूतों के अभाव में कोर्ट ने बरी कर दिया, जबकि एक आरोपी की सुनवाई के दौरान ही मौत हो चुकी थी।

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