{
  "type": "article",
  "title": "कानपुर नगर निगम में करोड़ों के फर्जीवाड़े पर एसआईटी की बड़ी कार्रवाई, 100 करोड़ के ठेके निरस्त और 7 फर्मों पर लगा बैन",
  "summary": "कानपुर नगर निगम में 100 करोड़ रुपये के टेंडर घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद 7 फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया गया है। एसआईटी की जांच के बीच नगर निगम अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।",
  "content": "उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर निगम में करोड़ों रुपये के विकास कार्यों के टेंडर आवंटन में हुए बड़े फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद प्रशासनिक हड़कंप मच गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देशों के बाद शुरू हुई उच्च स्तरीय जांच में ठेकेदारी व्यवस्था के सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है। शुरुआती प्रशासनिक कार्रवाई के तहत अब तक 100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के टेंडर निरस्त कर दिए गए हैं। इसके साथ ही धांधली में शामिल 7 संदिग्ध फर्मों को काली सूची (ब्लैकलिस्ट) में डाल दिया गया है। पुलिस ने मामले में अलग-अलग धाराओं में 6 मुकदमे दर्ज किए हैं और 2 ठेकेदारों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। वहीं, इस पूरे नेटवर्क का कथित सरगना गोविंद शर्मा फिलहाल पुलिस गिरफ्त से बाहर है और उसकी तलाश में कई जगह दबिश दी जा रही है।\n\nसिंडिकेट का खेल और कम दर पर टेंडर हथियाने की साजिश\nजांच एजेंसी द्वारा की गई शुरुआती पड़ताल में टेंडर हासिल करने के संगठित और चौंकाने वाले तरीकों का खुलासा हुआ है। पुलिस जांच के अनुसार नगर निगम में ठेकेदारों का एक मजबूत सिंडिकेट लंबे समय से सक्रिय था। यह सिंडिकेट आपस में ही यह तय कर लेता था कि किस विकास कार्य का टेंडर कौन सी फर्म डालेगी और किसे काम सौंपा जाएगा। प्रतियोगिता को पूरी तरह खत्म करने के लिए कई मामलों में निर्धारित दर से लगभग 15 फीसदी कम रेट पर टेंडर भरवाए जाते थे, जिससे अपनी पसंदीदा फर्म को ठेका दिलाना आसान हो जाता था।\n\nइसके अलावा, सिंडिकेट के सदस्य अन्य बाहरी और नए ठेकेदारों पर दबाव बनाते थे ताकि वे टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा ही न ले सकें। जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि निष्पक्षता का दिखावा करने के लिए लकी ड्रॉ आयोजित किए जाते थे, लेकिन असल में पूरी प्रक्रिया को पहले से ही मैनेज कर लिया जाता था। हालांकि, विशेष जांच टीम (एसआईटी) का कहना है कि इन सभी आरोपों की अंतिम और विधिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो पाएगी।\n\n100 करोड़ के विकास कार्य ठप, भुगतान और पंजीकरण पर लगी रोक\nसिंडिकेट के खुलासे के बाद नगर निगम प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लगभग 100 करोड़ रुपये के लंबित और स्वीकृत टेंडर रद्द कर दिए हैं। इसके साथ ही, विवादित फर्मों और विकास कार्यों से जुड़े करोड़ों रुपये के भुगतानों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। फर्जीवाड़े को रोकने के मकसद से नगर निगम ने नई फर्मों के पंजीकरण की प्रक्रिया को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को दोहराने से रोकने के लिए अब पारदर्शी ऑनलाइन ई-टेंडरिंग प्रणाली लागू करने की योजना तैयार की जा रही है।\n\nपुलिस ने इस फर्जीवाड़े में शामिल प्रमुख फर्मों के मालिकों और संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। नामजद की गई फर्मों में दिलीप बाजपेई, अजय इंटरप्राइजेज, पारसनाथ बिल्डर्स, कैला इंटरप्राइजेज, तिरुपति ट्रेडर्स और जगदंबा इंटरप्राइजेज शामिल हैं। विशेष रूप से जगदंबा इंटरप्राइजेज की आपराधिक संलिप्तता को देखते हुए उसके खिलाफ 2 अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं।\n\nनगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों पर एसआईटी का कसता शिकंजा\nविशेष जांच टीम (एसआईटी) ने अपनी जांच का दायरा केवल ठेकेदारों तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि नगर निगम के विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी बारीकी से जांच की जा रही है। एसआईटी ने नगर निगम प्रशासन से टेंडर प्रक्रिया, वित्तीय भुगतान, फर्मों के पंजीकरण और स्वीकृत विकास परियोजनाओं से संबंधित सभी मूल दस्तावेज और फाइलें तलब की हैं। जांच टीम अधिकारियों से पूछताछ कर यह जानने का प्रयास कर रही है कि जब लंबे समय से टेंडर प्रक्रिया में इतनी बड़ी गड़बड़ी चल रही थी, तो जिम्मेदार अफसरों ने इस पर संज्ञान क्यों नहीं लिया।\n\nएसआईटी की प्रभारी और अपर पुलिस उपायुक्त (एडीसीपी) डॉ. अर्चना सिंह ने बताया कि संबंधित फर्मों की सभी फाइलें हासिल कर ली गई हैं और उनका तकनीकी व वित्तीय अध्ययन जारी है। प्राथमिक जांच में एक फर्म के दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। डॉ. अर्चना सिंह ने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।\n\nमुख्य आरोपी गोविंद शर्मा की तलाश और बड़े गठजोड़ के खुलासे की उम्मीद\nपुलिस की जांच रिपोर्ट के अनुसार, आगरा निवासी गोविंद शर्मा इस पूरे टेंडर सिंडिकेट का मुख्य सरगना है। उसकी फर्म के जरिए नगर निगम की कई बड़ी और बहुमूल्य परियोजनाओं के काम हासिल किए गए थे। पुलिस ने इस सिलसिले में 2 ठेकेदारों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि गोविंद शर्मा फरार चल रहा है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि गोविंद शर्मा की गिरफ्तारी से इस सिंडिकेट के पीछे छिपे कई अन्य प्रभावशाली चेहरों और विभागीय अधिकारियों की साठगांठ का पर्दाफाश होगा।\n\nवर्तमान में एसआईटी की जांच का मुख्य बिंदु यह पता लगाना है कि यह टेंडर घोटाला किस स्तर तक फैला हुआ था, किन-किन लोगों ने अनुचित लाभ पहुंचाया और नगर निगम के किन कर्मचारियों की इसमें सीधी संलिप्तता थी। जांच पूरी होने के बाद ही इस पूरे बहुचर्चित टेंडर घोटाले की वास्तविक तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।\n\nइसका आप पर असर\nकानपुर नगर निगम में हुए टेंडर घोटाले के बाद प्रशासनिक सतर्कता बढ़ गई है और विकास कार्यों के आवंटन की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है।\n\n• भारत में: यह घटना देश भर की नगर पालिकाओं में ई-टेंडरिंग और ऑनलाइन पारदर्शी प्रणाली अपनाने की आवश्यकता को रेखांकित करती है। इससे विभिन्न राज्यों के स्थानीय निकायों में टेंडर आवंटन की निगरानी मजबूत होगी और वित्तीय अनियमितताओं पर रोक लगेगी।\n• कानपुर में: फर्जीवाड़े की जांच के कारण शहर में जारी और प्रस्तावित बुनियादी विकास कार्य अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकते हैं। सड़कों और नाली निर्माण जैसी परियोजनाओं के रुकने से स्थानीय नागरिकों को कुछ समय के लिए असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।\n• ठेकेदारों पर असर: नई फर्मों के पंजीकरण पर रोक और सख्त जांच के कारण अब केवल प्रमाणित और पारदर्शी एजेंसियों को ही नए काम मिलेंगे। फर्जी सिंडिकेट खत्म होने से ईमानदार और नए ठेकेदारों को प्रतिस्पर्धा का सही अवसर प्राप्त होगा।\n• प्रशासनिक जवाबदेही: अधिकारियों की जांच से प्रशासनिक मशीनरी में जवाबदेही बढ़ेगी। इससे नगर निगम के कर्मचारियों और ठेकेदारों के बीच साठगांठ की गुंजाइश कम होगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कानपुर नगर निगम टेंडर घोटाले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?\nजांच के तहत 100 करोड़ रुपये से अधिक के टेंडर रद्द किए गए हैं, 7 फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया गया है, 6 एफआईआर दर्ज हुई हैं और 2 ठेकेदारों को गिरफ्तार किया गया है।\n\n2. टेंडर सिंडिकेट का मुख्य सरगना कौन है?\nपुलिस के अनुसार आगरा निवासी गोविंद शर्मा इस सिंडिकेट का मुख्य सरगना है, जो फिलहाल फरार है और उसकी तलाश जारी है।\n\n3. किन-किन फर्मों के खिलाफ पुलिस मुकदमे दर्ज किए गए हैं?\nपुलिस ने दिलीप बाजपेई, अजय इंटरप्राइजेज, पारसनाथ बिल्डर्स, कैला इंटरप्राइजेज, तिरुपति ट्रेडर्स और जगदंबा इंटरप्राइजेज के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए हैं।\n\n4. क्या नगर निगम के अधिकारियों की भी जांच की जा रही है?\nहां, एसआईटी अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है और टेंडर, भुगतान तथा पंजीकरण से जुड़ी फाइलें तलब की गई हैं।\n\n5. नगर निगम भविष्य में टेंडर धांधली रोकने के लिए क्या कदम उठा रहा है?\nनगर निगम ने नई फर्मों के पंजीकरण पर रोक लगा दी है और भविष्य के सभी कामों के लिए पारदर्शी ऑनलाइन ई-टेंडरिंग व्यवस्था लागू करने की तैयारी की है।",
  "url": "https://trendkia.com/crime/kanpur-nagara-nigama-men-karoron-ke-pharjivare-para-sit-ki-bari-karravai-100-karora-ke-theke-nirasta-aura-7-pharmon-para-laga-bain-23440",
  "category": "अपराध",
  "publishedAt": "2026-08-28",
  "tags": [
    "कानपुर नगर निगम",
    "टेंडर घोटाला",
    "योगी आदित्यनाथ",
    "एसआईटी जांच",
    "गोविंद शर्मा",
    "यूपी अपराध",
    "ई-टेंडरिंग"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}