कर्नाटक लोक सेवा आयोग में बड़ा भ्रष्टाचार, IAS ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के घर ईडी की छापेमारी और रिश्वत के आरोप कर्नाटक लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली और रिश्वतखोरी के मामलों के बीच, पूर्व परीक्षा नियंत्रक और IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय ने छापेमारी की है। इस पूरे घोटाले में करोड़ों की रिश्वत और भाई-भतीजावाद के गंभीर आरोप सामने आए हैं। देशभर में परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों और पेपर लीक को लेकर छात्रों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों के बाद झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के खिलाफ छात्रों ने मोर्चा खोला, तो छत्तीसगढ़ के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में भी पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन हुए। अब दक्षिण भारत के राज्य कर्नाटक से एक बड़े भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है, जहां कर्नाटक लोक सेवा आयोग यानी KPSC की भर्ती परीक्षाओं में गंभीर धांधली के आरोप लगे हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले की तपिश अब प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंच गई है, जिसके चलते प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने ताबड़तोड़ छापेमारी की कार्रवाई की है। कैंडिडेट की शिकायत से खुला पूरा राज कर्नाटक लोक सेवा आयोग राज्यभर में सरकारी नौकरियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित कराने की जिम्मेदारी संभालता है। इस साल 8 जनवरी को पशुपालन और मत्स्य पालन विभाग के तहत वेटनरी ऑफिसर के 400 पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। इसके बाद 17 जुलाई को इस परीक्षा का फाइनल रिजल्ट जारी किया गया। इस परिणाम से बुरी तरह परेशान होकर एक कैंडिडेट डॉ. मंजूनाथ ने 25 जुलाई को कर्नाटक विधानसभा थाने में परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी होने की शिकायत दर्ज कराई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोप लगाया गया कि कम से कम 29 उम्मीदवारों ने परीक्षा से पहले ही अवैध तरीके से प्रश्न-पत्र हासिल कर लिए थे। इसके अलावा, आयोग के चेयरमैन, सदस्यों और कई कर्मचारियों के करीबी रिश्तेदार फाइनल रिजल्ट की मेरिट लिस्ट में सबसे ऊपर पाए गए, जिससे भाई-भतीजावाद के आरोप तूल पकड़ गए। চেयरमैन पर भाई-भतीजावाद और पद के दुरुपयोग के आरोप इस पूरे विवाद के केंद्र में KPSC के चेयरमैन शिवशंकरप्पा एस. साहूकार हैं, जिन्हें उनके पद से हटाने की मांग जोर पकड़ रही है। साहूकार पर भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप हैं। सबसे बड़ा विवाद तब खड़ा हुआ जब उनकी बेटी को एक गलत इनकम सर्टिफिकेट के आधार पर सरकारी नौकरी मिलने का मामला सामने आया। इस राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल पर बात करते हुए कर्नाटक के गृहमंत्री प्रियांक खड़गे ने जानकारी दी कि राज्यपाल ने उन्हें यानी साहूकार को पहले सस्पेंड कर दिया था, जिसके खिलाफ वह हाईकोर्ट चले गए थे। अदालत ने राज्यपाल से कहा था कि वे राज्य सरकार की सलाह और सहायता के आधार पर इस पर निर्णय लें। इसके बाद कैबिनेट की बैठक में भी इस पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा की गई है। एक करोड़ तक की रिश्वत और कई ठिकानों पर ED के छापे जांच में यह बात सामने आई है कि कुछ बिचौलियों ने उम्मीदवारों से संपर्क साधा और उन्हें परीक्षा में चयनित कराने के एवज में प्रति उम्मीदवार 80 लाख रुपए से लेकर 1 करोड़ रुपए तक की भारी-भरकम रिश्वत की मांग की। इसी मनी-लॉन्ड्रिंग की जांच को आगे बढ़ाते हुए 18 अगस्त को ED ने KPSC से जुड़े भर्ती घोटालों के सिलसिले में एक बड़ा तलाशी अभियान शुरू किया। प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी PMLA की धारा 17 के तहत कर्नाटक के बेंगलुरु, हासन, चित्रदुर्ग, दावणगेरे, रायचूर, कारवार, कलबुर्गी और बेलगावी समेत कुल 21 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे गए। इसके अलावा गुजरात के अहमदाबाद में भी तलाशी ली गई। इस कार्रवाई के दायरे में KPSC का मुख्य कार्यालय, चेयरमैन शिवशंकरप्पा एस. साहूकार और सदस्य शांता होसमनी के आवास, कथित बिचौलियों के ठिकाने और परीक्षा कॉपियों के डिजिटल मूल्यांकन का काम देखने वाली कंपनी एडुटेस्ट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के दफ्तर शामिल रहे। IAS ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार की भूमिका और संदिग्ध गतिविधियां इस पूरे घोटाले में जिस अधिकारी का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है, वे 2016 बैच के कर्नाटक-कैडर के अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार हैं। वे वर्तमान में उद्योग और वाणिज्य विभाग में MSME के निदेशक के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसी साल मार्च के महीने में उन्हें KPSC के परीक्षा नियंत्रक के पद से हटा दिया गया था, हालांकि इस साल जून में वह इस पद पर आए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि वे 20 अगस्त से लगातार संपर्क से बाहर चल रहे हैं और उन्होंने दिल्ली जाने के लिए फ्लाइट का टिकट भी बुक किया था। ED ने अभी तक किसी भी मुख्य संदिग्ध की गिरफ्तारी या औपचारिक जब्ती के बारे में आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है। बताया जा रहा है कि 20 अगस्त को बेंगलुरु से दिल्ली के लिए उड़ान भरने के बाद गंगवार का कोई अता-पता नहीं रहा। उन्होंने आखिरी समय में 30200 रुपए चुकाकर इंडिगो की फ्लाइट बुक की थी और राष्ट्रीय राजधानी पहुंचने के बाद से उनसे संपर्क टूट गया। ईडी की छापेमारी के दौरान घर पर हुई नाटकीय घटना रविवार दोपहर को सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स यानी CRPF के जवानों के साथ ED के अधिकारी तीन गाड़ियों में सवार होकर बेंगलुरु के जयामहल रोड पर स्थित ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के आवास पर पहुंचे। शुरुआती दौर में वहां तैनात सिक्योरिटी गार्ड्स ने अधिकारियों को बिल्डिंग के परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया। उनका कहना था कि उन्हें अंदर जाने के लिए सीधे ज्ञानेंद्र से निर्देश चाहिए। सूत्रों के मुताबिक, अधिकारियों ने लगभग दो घंटे तक इंतजार किया और जब गंगवार के फोन से सुरक्षाकर्मियों को आदेश मिला, तब जाकर उन्हें अंदर जाने दिया गया। हालांकि, अधिकारियों की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं, क्योंकि घर का मुख्य दरवाजा अंदर से बंद था। ताला तोड़ने और अंदर प्रवेश करने के लिए उन्हें एक स्थानीय चाबी बनाने वाले को बुलाना पड़ा। इस पूरी कानूनी प्रक्रिया के दौरान पड़ोसियों को गवाह के तौर पर शामिल किया गया था। इसी तरह उत्तर प्रदेश के बरेली में भी गंगवार के घर की तलाशी ली गई, हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उस वक्त वे वहां मौजूद थे या नहीं। भले ही KPSC मामले में गंगवार की भूमिका की जांच की जा रही है, लेकिन ED ने अभी यह साफ नहीं किया है कि उनके घर की तलाशी लेने के लिए उनके पास कोई पुख्ता शुरुआती सबूत मौजूद था या नहीं। इसका आप पर असर भारत में: प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और भ्रष्टाचार के मामलों से देश के लाखों युवाओं का भविष्य अधर में लटकता है और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। कर्नाटक में: राज्य के उम्मीदवारों और छात्रों के लिए इस भर्ती घोटाले की निष्पक्ष जांच से सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता सुनिश्चित होने और भ्रष्ट अधिकारियों पर नकेल कसने की उम्मीद जगी है। सवाल-जवाब 1. KPSC घोटाला क्या है और यह कैसे सामने आया? यह कर्नाटक लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और भाई-भतीजावाद का मामला है, जिसका खुलासा 25 जुलाई को एक उम्मीदवार डॉ. मंजूनाथ द्वारा पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बाद हुआ। 2. इस मामले में किस IAS अधिकारी के घर ईडी ने छापेमारी की है? प्रवर्तन निदेशालय ने KPSC के पूर्व परीक्षा नियंत्रक और 2016 बैच के IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के ठिकानों पर छापेमारी की है। 3. उम्मीदवारों के चयन के लिए कितनी रिश्वत की मांग की जा रही थी? आरोप है कि बिचौलियों द्वारा उम्मीदवारों से परीक्षा में चयन के लिए प्रति उम्मीदवार 80 लाख रुपए से लेकर 1 करोड़ रुपए तक की रिश्वत मांगी गई थी। 4. KPSC के चेयरमैन पर क्या आरोप लगाए गए हैं? KPSC के चेयरमैन शिवशंकरप्पा एस. साहूकार पर भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के आरोप हैं, जिसमें उनकी बेटी को गलत इनकम सर्टिफिकेट के आधार पर नौकरी मिलने का मामला भी शामिल है। 5. ईडी की छापेमारी किन-किन स्थानों पर की गई? ईडी ने कर्नाटक के 21 जिलों और शहरों के अलावा गुजरात के अहमदाबाद में KPSC कार्यालय, अधिकारियों के आवास और मूल्यांकन से जुड़ी कंपनी के दफ्तरों पर छापे मारे। https://trendkia.com/crime/karnataka-public-service-commission-scam-ed-raids-former-controller-ias-gyanendra-kumar-gangwar-over-bribery-allegations-21044 TrendKia — Har trend, sabse pehle.