# कॉलेजों में फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट से दाखिला कराने वाले अंतरराज्यीय गिरोह पर शिकंजा, नौ गिरफ्तार

> दिल्ली पुलिस के स्पेशल स्टाफ ने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाकर दिल्ली विश्वविद्यालय समेत कई संस्थानों में दाखिला दिलाने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा करते हुए नौ लोगों को पकड़ा है।

**Type:** article · **Category:** अपराध · **Published:** 2026-10-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/crime/kolejon-men-pharji-divyanga-sartiphiketa-se-dakhila-karane-vale-antararajyiya-giroha-para-shiknja-nau-giraphtara-45004 · **Language:** Hindi
**Tags:** दिल्ली पुलिस, फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र, कॉलेज एडमिशन, दिल्ली विश्वविद्यालय, स्पेशल स्टाफ, यूडीआईडी पोर्टल, अपराध

उच्च शिक्षण संस्थानों में फर्जी दस्तावेजों के सहारे दाखिला दिलाने वाले एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। उत्तरी दिल्ली क्षेत्र में सक्रिय इस नेटवर्क के तार कई राज्यों से जुड़े थे, जो सामान्य छात्रों के फर्जी दिव्यांग यानी पीडब्ल्यूडी प्रमाणपत्र तैयार कर उन्हें आरक्षित कोटे की सीटों पर प्रवेश दिलाते थे। उत्तरी जिले के स्पेशल स्टाफ ने सुनियोजित तरीके से कार्रवाई करते हुए इस अवैध धंधे में शामिल 9 आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। पुलिस टीम ने आरोपियों के ठिकानों से 27 जाली दिव्यांग प्रमाणपत्र समेत भारी मात्रा में डिजिटल उपकरण और अन्य सामग्री बरामद की है।

## दाखिले के लिए बड़े कोर्स और संस्थान थे निशाने पर
उत्तरी जिले की पुलिस उपायुक्त निहारिका भट्ट ने बताया कि यह गिरोह छात्रों को दिल्ली विश्वविद्यालय, बीटेक, जेबीटी और अन्य स्नातक पाठ्यक्रमों में पीडब्ल्यूडी कोटे के तहत दाखिला दिलाने का झांसा देता था। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि इस गिरोह की जड़ें केवल राजधानी तक सीमित नहीं थीं, बल्कि इसका नेटवर्क उत्तर प्रदेश के कई अलग-अलग जिलों में गहराई तक फैला हुआ था। गिरोह के सदस्य उन छात्रों को लक्षित करते थे जो प्रतिष्ठित कॉलेजों में सामान्य मेरिट से प्रवेश पाने में असफल रहते थे या आरक्षित कोटे का अनुचित लाभ उठाना चाहते थे।

## एआई तकनीक से तैयार होते थे फर्जी आधार और पते
पुलिस जांच में इस सिंडिकेट के काम करने के पूरे तौर-तरीके का खुलासा हुआ है। इस पूरे गोरखधंधे का पहला चरण छात्रों की तलाश और उनकी निजी जानकारी जुटाने से शुरू होता था। नेटवर्क से जुड़े तथाकथित शिक्षा सलाहकार सबसे पहले इच्छुक छात्रों से उनके वास्तविक आधार कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो और हस्ताक्षर एकत्र करते थे। इसके बाद इन दस्तावेजों में तकनीकी हेरफेर की जाती थी। गिरोह के सदस्य आधुनिक एआई टूल्स का दुरुपयोग करके आधार कार्ड पर उत्तर प्रदेश के फर्जी पते दर्ज कर देते थे। इन जाली पतों का उपयोग आगे चलकर पीडब्ल्यूडी प्रमाणपत्र की आधिकारिक प्रक्रिया में किया जाता था ताकि संबंधित जिलों से कागजात तैयार करवाए जा सकें।

## यूडीआईडी पोर्टल पर फर्जीवाड़ा और जाली मेडिकल रिपोर्ट
आधार कार्ड में उत्तर प्रदेश का फर्जी पता तैयार करने के बाद आरोपी दिव्यांगता प्रमाणपत्र के लिए आधिकारिक यूडीआईडी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन जमा करते थे। इसके बाद गिरोह में शामिल संपर्कों की मदद से पूरी तरह मनगढ़ंत और जाली मेडिकल रिपोर्ट तैयार की जाती थी। इन फर्जी मेडिकल रिपोर्टों को संबंधित सरकारी प्रणाली में सीधे अपलोड कर दिया जाता था। इस चालबाजी के जरिए पूरी तरह स्वस्थ छात्र को भी कागजों पर दिव्यांग दर्शा दिया जाता था और उसके नाम से वैध दिखने वाला पीडब्ल्यूडी प्रमाणपत्र हासिल कर लिया जाता था।

## प्रति प्रमाणपत्र 20 से 30 हजार रुपये की वसूली और सरकारी सांठगांठ का शक
इस पूरे फर्जीवाड़े के एवज में छात्रों और उनके परिजनों से मोटी रकम वसूली जाती थी। प्रत्येक फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र तैयार करने के बदले आरोपी करीब 20 से 30 हजार रुपये की मांग करते थे। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि ये जाली प्रमाणपत्र उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के सरकारी अस्पतालों और मुख्य चिकित्सा अधिकारी यानी सीएमओ कार्यालयों के नाम से तैयार कराए जा रहे थे। पुलिस को अंदेशा है कि इस व्यापक नेटवर्क को संचालित करने में सरकारी तंत्र और चिकित्सा विभाग से जुड़े कुछ लोगों की भी मिलीभगत हो सकती है, जिसकी विस्तृत जांच की जा रही है।

## नकदी, लग्जरी कार और भारी मात्रा में गैजेट्स जब्त
छापेमारी की कार्रवाई के दौरान स्पेशल स्टाफ ने आरोपियों के कब्जे से उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं, जिनका उपयोग दस्तावेज तैयार करने में किया जाता था। बरामद सामान में लैपटॉप, मैकबुक और डेस्कटॉप कंप्यूटर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त पुलिस ने आरोपियों से 11 मोबाइल फोन, 27 जाली दिव्यांग प्रमाणपत्र और 75 हजार रुपये नकद भी जब्त किए हैं। आरोपियों के पास से एक मर्सिडीज कार भी बरामद की गई है। पुलिस अब इस बात की गहन पड़ताल कर रही है कि यह गिरोह अब तक कितने छात्रों के लिए ऐसे फर्जी दस्तावेज बना चुका है और किन-किन कॉलेजों अथवा पाठ्यक्रमों में इन अवैध प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल कर दाखिला लिया गया है।

## इसका आप पर असर
यह कार्रवाई उन योग्य दिव्यांग छात्रों के अधिकारों की रक्षा करती है जिनकी आरक्षित सीटें फर्जी दस्तावेजों के जरिए हड़पी जा रही थीं।

- **भारत में:** देश भर के मेडिकल और शिक्षा विभागों में दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी करने के सत्यापन नियमों को कड़ा किया जा सकता है। इससे वास्तविक छात्रों को भविष्य में अपनी पहचान और रिपोर्ट सत्यापित कराने के लिए अधिक सतर्क रहना होगा।
- **दिल्ली और यूपी में:** दिल्ली विश्वविद्यालय समेत तकनीकी और शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में पहले से नामांकित पीडब्ल्यूडी कोटे के छात्रों के दस्तावेजों की दोबारा जांच हो सकती है। अगर किसी छात्र का दाखिला फर्जी प्रमाणपत्र पर पाया गया, तो उसका प्रवेश रद्द होने के साथ कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
- **अभिभावकों और छात्रों के लिए:** किसी भी अनधिकृत शिक्षा सलाहकार या एजेंट को फर्जी दस्तावेज बनाने के लिए पैसे देने से सख्त परहेज करना चाहिए। ऐसे गैरकानूनी हथकंडों में शामिल होने पर छात्रों का करियर बर्बाद होने और जेल जाने का सीधा खतरा रहता है।
- **यूडीआईडी सत्यापन के लिए:** सरकारी पोर्टलों पर डिजिटल दस्तावेजों और पते के सत्यापन की सुरक्षा प्रणाली में तकनीकी सुधार किए जा सकते हैं। इससे सामान्य आवेदकों को अपने दस्तावेज अपलोड करते समय केवल आधिकारिक केंद्रों पर ही भरोसा करना चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
यह फर्जीवाड़ा कॉलेज दाखिलों में उच्च कट-ऑफ से बचने और आरक्षित कोटे की खाली सीटों का अनुचित लाभ उठाने के लिए रचा गया था।

- **सीटों की भारी प्रतिस्पर्धा:** दिल्ली विश्वविद्यालय और बीटेक जैसे पाठ्यक्रमों में सामान्य श्रेणी की मेरिट सूची बहुत ऊंची रहती है। इसी दबाव का फायदा उठाकर शिक्षा सलाहकारों ने छात्रों को पीडब्ल्यूडी कोटे की कम मेरिट पर आसान दाखिले का लालच दिया।
- **एआई और डिजिटल छेड़छाड़ की सुविधा:** आरोपियों ने एआई टूल्स का उपयोग करके वैध आधार कार्डों पर उत्तर प्रदेश के पते आसानी से बदल डाले। डिजिटल प्रणाली में प्रारंभिक पते की सख्त जांच न होने का लाभ उठाकर उन्होंने स्थानीय अस्पतालों के अधिकार क्षेत्र में आवेदन कर दिए।
- **प्रशासनिक स्तर पर जांच की खामियां:** सरकारी अस्पतालों और सीएमओ दफ्तरों से जुड़ी चिकित्सा रिपोर्टों को बिना पर्याप्त शारीरिक जांच के पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या स्वास्थ्य तंत्र के भीतर बैठे कर्मचारियों की मिलीभगत से यह संभव हुआ।

## सवाल-जवाब

### 1. दिल्ली पुलिस ने इस मामले में कितने लोगों को गिरफ्तार किया है?
उत्तरी जिले के स्पेशल स्टाफ ने इस फर्जीवाड़े के सिलसिले में 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

### 2. आरोपियों के पास से क्या-क्या सामान बरामद हुआ है?
पुलिस ने 27 फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र, 75 हजार रुपये नकद, 11 मोबाइल फोन, लैपटॉप, मैकबुक, डेस्कटॉप और एक मर्सिडीज कार बरामद की है।

### 3. एक फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के लिए गिरोह कितनी रकम लेता था?
आरोपी एक फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र तैयार करने के बदले 20 से 30 हजार रुपये वसूलते थे।

### 4. यह गिरोह किन पाठ्यक्रमों में दाखिला दिलाने के लिए दस्तावेज बनाता था?
यह नेटवर्क बीटेक, जेबीटी, दिल्ली विश्वविद्यालय और अन्य स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिला दिलाने के लिए फर्जी प्रमाणपत्र बनाता था।

### 5. आरोपी आधार कार्ड में फर्जी पता कैसे तैयार करते थे?
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य एआई टूल्स का उपयोग करके आधार कार्ड में उत्तर प्रदेश के फर्जी पते तैयार करते थे।

### 6. फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र किन कार्यालयों से तैयार कराए जा रहे थे?
जांच में सामने आया है कि ये प्रमाणपत्र उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के सरकारी अस्पतालों और सीएमओ कार्यालयों से बनवाए जा रहे थे।

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