# महादेव बेटिंग नेटवर्क में 94 हजार करोड़ की कमाई और संपत्तियों की जब्ती, सौरभ चंद्राकर पर कानूनी शिकंजा

> प्रवर्तन निदेशालय की जांच में महादेव ऑनलाइन बुक और संबंधित प्लेटफॉर्म्स से 94 हजार करोड़ रुपये तक के अवैध कारोबार का खुलासा हुआ है, जिसमें भारी भरकम संपत्तियां कुर्क की गई हैं।

**Type:** article · **Category:** अपराध · **Published:** 2026-11-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/crime/mahadev-betting-network-men-94-hajara-karora-ki-kamai-aura-snpattiyon-ki-jabti-sourabh-chandrakar-para-kanuni-shiknja-54652 · **Language:** Hindi
**Tags:** महादेव सट्टेबाजी, सौरभ चंद्राकर, प्रवर्तन निदेशालय, हवाला कारोबार, मनी लॉन्ड्रिंग, अवैध बेटिंग

अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी के संगठित तंत्र के वित्तीय पहलुओं की जांच कर रही केंद्रीय एजेंसी ने महादेव ऑनलाइन बुक और उससे जुड़े तमाम मंचों के जरिए जुटाए गए अकूत काले धन का विस्तृत ब्योरा तैयार किया है। एजेंसी की छानबीन में सामने आए वित्तीय आकलन के अनुसार, इस पूरे संजाल से हुई कुल गैरकानूनी कमाई का दायरा 88 हजार करोड़ रुपये से 94 हजार करोड़ रुपये के बीच पहुंचता है। इसमें प्राथमिक मंच महादेव ऑनलाइन बुक का हिस्सा ही अकेले लगभग 75 हजार से 80 हजार करोड़ रुपये आंका गया है। इसके अतिरिक्त, इस नेटवर्क के तहत संचालित स्काईएक्सचेंज के जरिए करीब 11 हजार से 12 हजार करोड़ रुपये तथा लोटस-365 के माध्यम से लगभग 2,400 करोड़ रुपये जुटाए जाने का हिसाब मिला है। इस भारी भरकम अवैध कोष में से लगभग 4 हजार से 5 हजार करोड़ रुपये की भारी धनराशि को व्यवस्थित तरीके से भारत से बाहर संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई में बैठे सिंडिकेट संचालकों तक भेजा गया।

## फर्जी बैंक खातों का जाल और हवाला का अंतरराष्ट्रीय तंत्र
सट्टेबाजी के इस विशाल खेल से हासिल होने वाली रकम को सामान्य बैंकिंग प्रणाली की नजरों से बचाने के लिए एक बेहद जटिल और बहुस्तरीय खाता तंत्र खड़ा किया गया था। वित्तीय जांचकर्ताओं के अनुसार, सामान्य नागरिकों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाए गए। इनमें से कई खाते तो धोखे से हथियाए गए पहचान पत्रों के आधार पर तैयार किए गए, जबकि कई अन्य बैंक खातों को उनके मूल धारकों को कमीशन का लालच देकर किराए पर इस्तेमाल में लाया गया। ऑनलाइन गेम और दांव लगाने वाले आम सट्टेबाजों से मिलने वाली पूरी रकम पहले इन्हीं बेनामी और किराए के खातों में जमा कराई जाती थी। इसके तुरंत बाद उस रकम को कई स्तरों के विभिन्न खातों में घुमाकर उसकी मूल उत्पत्ति को छिपाने का प्रयास किया जाता था।

इन खातों से नकदी निकासी के समानांतर ही एक बड़ा हिस्सा अनौपचारिक हवाला चैनलों के माध्यम से सीमा पार स्थानांतरित किया गया। जांच में यह भी उजागर हुआ कि इस प्रकार विदेश भेजी गई काली कमाई को सफेद बनाने के लिए दुबई में कई मुखौटा कंपनियां खड़ी की गईं, वहां महंगी संपत्तियां खरीदी गईं और साथ ही उस धन को भारतीय शेयर बाजार में भी बड़े पैमाने पर खपाया गया। प्रवर्तन निदेशालय के मुताबिक, इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य सट्टेबाजी के अपराध से अर्जित धन को पूरी तरह से वैध कारोबारी लाभ के रूप में दिखाना था।

## दुबई और रास अल खैमाह में 200 करोड़ रुपये का भव्य शादी समारोह
इस पूरे प्रकरण में वित्तीय जांचकर्ताओं का विशेष ध्यान फरवरी 2023 में आयोजित एक भव्य विवाह समारोह पर गया। यूएई के रास अल खैमाह में 10 से 14 फरवरी 2023 के दौरान सौरभ चंद्राकर और हरशिता का विवाह संपन्न हुआ था। इस शादी में बेतहाशा दौलत का खुला प्रदर्शन किया गया, जिस पर एजेंसी के आकलन के मुताबिक करीब 200 करोड़ रुपये नकद खर्च किए गए। इस आयोजन के लिए भारत और अन्य जगहों से वीआईपी अतिथियों को लाने के वास्ते दर्जनों चार्टर्ड विमानों और निजी जेट सेवाओं को किराए पर लिया गया था। सभी मेहमानों के ठहरने, यात्रा, खान-पान और वीजा से जुड़े सभी खर्चों का वहन इसी अवैध कमाई से किया गया।

शादी का प्रबंधन देखने वाली इवेंट कंपनियों, आलीशान होटलों, ट्रैवल एजेंसियों और एविएशन सेवा प्रदाताओं के बही-खातों की पड़ताल में आर-1 इवेंट्स और वाईपीडी वेडिंग्स जैसी संस्थाओं के रिकॉर्ड सामने आए। प्राप्त दस्तावेजों के मुताबिक, अकेले कार्यक्रम आयोजन के एक मद में करीब 112.05 करोड़ रुपये दर्ज पाए गए। इसके अलावा विलासितापूर्ण होटलों के ठहरने पर लगभग 42 करोड़ रुपये, मेहमानों के टिकटों तथा वीजा आदि व्यवस्थाओं पर 37 करोड़ रुपये और निजी विमान सेवाओं पर करीब 7 करोड़ रुपये के भुगतान का अलग-अलग उल्लेख मिला। जांच एजेंसी ने संबंधित सेवा प्रदाताओं के बयानों और दर्ज लेन-देन को जोड़कर कुल खर्च करीब 200 करोड़ रुपये आंका है, जिसका भुगतान हवाला और नकदी के जरिए निपटाया गया। इस शादी में प्रस्तुति देने और शिरकत करने के सिलसिले में कई फिल्मी और टीवी कलाकारों को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया था, यद्यपि केवल समन जारी होना किसी व्यक्ति के कानूनी अपराध को प्रमाणित नहीं करता।

## पारिवारिक नेटवर्क और अन्य सट्टेबाजी पैनलों की पड़ताल
महादेव सिंडिकेट के संगठनात्मक ढांचे की जांच के दौरान सौरभ चंद्राकर के निकटतम पारिवारिक सदस्यों और सहयोगियों के कार्यकलापों की भी गहरी छानबीन की गई। एजेंसी के दस्तावेजों में सौरभ के बड़े भाई गितेश चंद्राकर का नाम प्रमुखता से आया है, जो कथित तौर पर दुबई में रहकर महादेव से जुड़े रोजमर्रा के कामकाज और अन्य समानांतर सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म्स की देखरेख करता था। इन संबंधित शाखाओं में अन्ना रेड्डी, लेजर बुक, फेयर प्ले और अंबानी बुक जैसे मंच शामिल बताए गए हैं।

इसी जांच के सिलसिले में सौरभ के पिता रमेश्वर प्रसाद चंद्राकर के भिलाई स्थित आवास तथा उनके पारिवारिक व्यापारिक ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाए गए। इसके अलावा उसके ससुराल पक्ष से जुड़े परिसरों की भी जांच की गई। वित्तीय जांच के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार, केवल किसी पारिवारिक रिश्ते में होना अथवा किसी परिसर पर तलाशी होना कानूनी तौर पर अपराध साबित नहीं करता; प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व न्यायालय में पेश किए जाने वाले पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर ही तय होता है।

## राजनीतिक संरक्षण और नकदी के कथित लेन-देन के आरोप
इस सट्टेबाजी संजाल को सुचारू रूप से चलाने और कानूनी अड़चनों से बचाने के लिए नौकरशाही और राजनीतिक गलियारों में भारी भरकम रिश्वत पहुंचाने के आरोप भी जांच रिकॉर्ड में दर्ज हैं। इस मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नाम का भी उल्लेख आया है। जांच एजेंसियों के पास मौजूद दस्तावेजों में पुलिस के सहायक उप-निरीक्षक चंद्रभूषण वर्मा, पैनल संचालक सतीश चंद्राकर और हवाला कारोबारी बंधुओं अनिल तथा सुनील दम्मानी के बयानों का संदर्भ है। सतीश चंद्राकर के बयानों के आधार पर यह दावा सामने आया कि वर्ष 2021 से 2023 की अवधि के दौरान लगभग 81 करोड़ रुपये विभिन्न रसूखदारों तक पहुंचाए गए थे, जिनमें शीर्ष प्रशासनिक और राजनीतिक ठिकाने शामिल बताए गए।

इसके अतिरिक्त, 2 नवंबर 2023 को रायपुर में आसिम दास के ठिकानों और एक वाहन से करीब 5.39 करोड़ रुपये की नकदी बरामद की गई थी। एजेंसी का मानना था कि यह नकदी राजनीतिक प्रभाव के लिए वितरित की जानी थी। एक अन्य आरोपी शुभम सोनी के ईमेल पत्राचार में भी राजनीतिक हस्तियों को 508 करोड़ रुपये के भारी भुगतान का दावा किया गया था, जिसमें भूपेश बघेल का नाम लिया गया था। वर्तमान में इन सभी आरोपों की तहकीकात केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की जा रही है। किसी प्राथमिकी में नाम दर्ज होना अथवा किसी आरोपी द्वारा बयान में उल्लेख किया जाना कानूनी रूप से दोष साबित नहीं करता और इस विषय पर न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

## चौदह गिरफ्तारियां और न्यायालयों से दी गई जमानतें
जांच एजेंसी के दस्तावेजों के अनुसार, अगस्त 2023 से जुलाई 2026 के बीच इस मामले में कुल 14 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया। हिरासत में लिए गए लोगों में राज्य पुलिस के कर्मी, पैनल ऑपरेटर, अंतरराष्ट्रीय हवाला कारोबारी, दुबई में संचालन देखने वाले प्रबंधक और शेयर बाजार में निवेश संभालने वाले बिचौलिए शामिल रहे हैं। न्यायिक प्रक्रिया के दौरान चंद्रभूषण वर्मा, सतीश चंद्राकर, दम्मानी बंधु, आसिम दास और नितीश दीवान सहित कई प्रमुख आरोपियों को विभिन्न सक्षम अदालतों से नियमित जमानत प्राप्त हो चुकी है।

दूसरी ओर, प्रमुख कारोबारी विकास गर्ग को जुलाई 2026 में गिरफ्तार किया गया था और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में बंद है। प्रवर्तन निदेशालय ने विशेष अदालत में इस प्रकरण के संबंध में एक मुख्य अभियोजन शिकायत और पांच पूरक शिकायतें पेश की हैं, जिनमें कुल मिलाकर 116 आरोपियों को नामजद किया गया है।

## शेयर बाजार में निवेश और अमेरिकी कंपनी एबिक्स इंक का अधिग्रहण
एजेंसी की पड़ताल केवल सट्टेबाजी के मंचों तक सीमित नहीं रही, बल्कि अवैध कमाई के जरिए बनाई गई जटिल कॉर्पोरेट संरचनाओं तक भी पहुंची। जांचकर्ताओं ने पाया कि स्काईएक्सचेंज के संचालक हरि शंकर तिबरेवाल की विदेशी कंपनियों के जरिए भारी भरकम पूंजी को भारतीय पूंजी बाजार में सुनियोजित रूप से निवेश किया गया। इसी कड़ी में जांच आगे बढ़ते हुए विकास गर्ग और उनकी कंपनियों के खातों तक पहुंची।

एजेंसी का आरोप है कि विदेशी संस्थाओं से घुमाई गई इसी रकम का इस्तेमाल अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी एबिक्स इंक के अधिग्रहण सौदे में भी किया गया था। वित्तीय अभिलेखों के अनुसार, विकास गर्ग और उनकी कंपनियों के खातों में अपराध से अर्जित मानी गई लगभग 940.77 करोड़ रुपये की राशि स्थानांतरित हुई थी, जिसमें से करीब 765.77 करोड़ रुपये सीधे हरि शंकर तिबरेवाल से संबद्ध विदेशी फर्मों से आए थे। इसके परिणामस्वरूप, जून 2026 में लगभग 941 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क करने का वैधानिक आदेश पारित किया गया था, जिस पर विधिक प्रक्रिया जारी है।

## 3,500 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर जब्ती और अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई
अवैध साम्राज्य पर आर्थिक प्रहार करते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने अब तक कुल 11 अनंतिम जब्ती आदेश जारी किए हैं। इन आदेशों में उल्लिखित परिसंपत्तियों के वर्तमान बाजार मूल्य को जोड़कर देखा जाए तो कुल जब्त संपत्तियों का अनुमानित मूल्य करीब 3,500 करोड़ रुपये बैठता है। इसमें लगभग 1,800 करोड़ रुपये की संपत्तियां विदेशी क्षेत्राधिकारों में स्थित हैं, जबकि करीब 1,700 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियां भारत के भीतर मौजूद हैं।

दुबई में ऐसी 22 अचल संपत्तियों की पहचान की गई है, जिनमें सौरभ चंद्राकर और उसके करीबी सहयोगियों से जुड़ी 12 संपत्तियों का मौजूदा बाजार मूल्य ही करीब 1,500 करोड़ रुपये आंका गया है। इन जब्त परिसंपत्तियों में आलीशान विला, मकान, भूखंड, बैंक जमा और कॉर्पोरेट शेयर शामिल हैं। इनमें से सात जब्ती आदेशों को सक्षम न्यायिक प्राधिकरण द्वारा अपनी विधिवत पुष्टि भी दी जा चुकी है।

## ओमान से प्रत्यर्पण प्रक्रिया और विशेष न्यायालय में सुनवाई
मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर के खिलाफ कानूनी घेराबंदी करते हुए एजेंसी ने सितंबर 2023 में सक्षम अदालत से गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट प्राप्त किया था। इसके तुरंत बाद नवंबर 2023 में इंटरपोल के जरिए उसके खिलाफ रेड नोटिस प्रसारित कराया गया। पहले यूएई से प्रत्यर्पण की कूटनीतिक और कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई, जिसके बाद ओमान में उसकी हिरासत सुनिश्चित होने पर भारतीय अधिकारियों ने औपचारिक प्रत्यर्पण अनुरोध प्रेषित किया।

उपलब्ध अभिलेखों में जून और जुलाई 2026 के दौरान प्रत्यर्पण से जुड़े घटनाक्रमों का उल्लेख है, जबकि एक अन्य प्रशासनिक नोट में नवंबर 2026 में उसे भारत लाए जाने का दावा किया गया है। रायपुर स्थित विशेष पीएमएलए अदालत ने 19 जनवरी 2024 को मुख्य शिकायत पर विधिवत संज्ञान लिया था, जिसमें सौरभ चंद्राकर को प्रमुख आरोपी ए-1 के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। उसके विरुद्ध भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून, 2018 के सख्त प्रावधानों के तहत भी कार्रवाई की गुहार लगाई गई है। मामले की त्वरित सुनवाई के लिए अक्टूबर 2026 में दायर अर्जी के बाद विशेष अदालत ने अगली विधिक सुनवाई 5 दिसंबर 2026 के लिए निर्धारित की थी। व्यापक स्तर पर जारी यह जांच अब कानूनी साक्ष्यों की कसौटी पर परखी जा रही है।

## इसका आप पर असर
अवैध ऑनलाइन बेटिंग सिंडिकेट्स पर जांच एजेंसियों के कड़े कदमों से आम नागरिकों के बैंक खातों और डिजिटल सुरक्षा पर सीधा असर पड़ता है।

- **भारत में:** किसी भी अनजान व्यक्ति को कमीशन के बदले अपना बैंक खाता या पहचान पत्र किराए पर देना भारी कानूनी संकट में डाल सकता है। ऐसे खातों को मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल पाए जाने पर खाताधारक पर सीधी दंडात्मक कार्रवाई और खाते सीज होने का खतरा रहता है।
- **छत्तीसगढ़ में:** स्थानीय स्तर पर संचालित अवैध बेटिंग पैनलों और उनसे जुड़े एजेंटों पर निगरानी बेहद सख्त कर दी गई है। राज्य में वित्तीय लेन-देन और संदिग्ध नकद प्रवाह पर पुलिस व केंद्रीय एजेंसियों की निरंतर पैनी नजर बनी हुई है।
- **ऑनलाइन गेमर्स और सट्टेबाजों पर:** अवैध सट्टेबाजी मंचों पर दांव लगाने वाले उपयोगकर्ताओं की जमा पूंजी कभी भी जब्त हो सकती है। बिना विधिक अनुमति वाले गेमिंग पोर्टल्स पर पैसा लगाने पर कानूनी कार्रवाई के साथ पूरी वित्तीय पूंजी डूबने का जोखिम रहता है।
- **डिजिटल वित्तीय सतर्कता:** बैंक खातों में अचानक आने वाले अज्ञात ट्रांजैक्शन की तत्काल बैंक और साइबर सेल को सूचना देना अनिवार्य है। किसी भी संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की अनदेखी करने पर खाताधारक स्वयं जांच के दायरे में आ सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट का यह विशाल साम्राज्य सामान्य गेमिंग की आड़ में सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय हवाला और बेनामी बैंकिंग नेटवर्क के दम पर खड़ा किया गया था।

- **सीधा कारण:** देश भर में फैले हजारों बेनामी बैंक खातों और फर्जी पहचान पत्रों के जरिए आम सट्टेबाजों से सैकड़ों करोड़ रुपये की नियमित उगाही की गई। इस अवैध पूंजी को तुरंत कई स्तरों पर घुमाकर अंतरराष्ट्रीय हवाला मार्गों से विदेश भेज दिया गया।
- **सहायक परिस्थितियां:** ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप के कई समानांतर पैनल बनाकर स्थानीय स्तर पर कमीशन एजेंटों का बड़ा तंत्र तैयार किया गया था। विदेशों में पंजीकृत मुखौटा कंपनियों और भारतीय पूंजी बाजार में निवेश के जरिए काले धन को सफेद दिखाने का प्रयास किया गया।
- **जांच और न्यायिक स्थिति:** जांच एजेंसियों द्वारा पेश की गई मुख्य और पूरक शिकायतों पर विशेष पीएमएलए अदालत ने संज्ञान लिया है। मामले में कई आरोपियों पर मुकदमे की प्रक्रिया चल रही है और न्यायालय द्वारा साक्ष्यों के आधार पर अंतिम फैसला आना बाकी है।

## सवाल-जवाब

### 1. महादेव ऑनलाइन बुक और उससे जुड़े प्लेटफॉर्म्स से कुल कितनी अवैध कमाई का अनुमान है?
प्रवर्तन निदेशालय के दस्तावेजों के अनुसार कुल अवैध कमाई करीब 88 हजार करोड़ रुपये से 94 हजार करोड़ रुपये के बीच आंकी गई है।

### 2. इस मामले में जांच एजेंसियों ने अब तक कितनी संपत्ति जब्त की है?
कुल 11 अनंतिम आदेशों के तहत भारत और विदेश में लगभग 3,500 करोड़ रुपये के मौजूदा बाजार मूल्य की संपत्तियां जब्त की गई हैं।

### 3. सौरभ चंद्राकर की शादी में कितने रुपये खर्च होने का आकलन है?
यूएई के रास अल खैमाह में आयोजित शादी समारोह में जांच एजेंसी ने करीब 200 करोड़ रुपये नकद खर्च होने का आकलन किया है।

### 4. इस प्रकरण में कितने लोगों को नामजद और गिरफ्तार किया गया है?
शिकायतों में कुल 116 आरोपियों के नाम शामिल हैं, जबकि अगस्त 2023 से जुलाई 2026 के बीच 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

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