मलकानगिरि में वन्यजीव तस्करों पर बड़ी कार्रवाई, पैंगोलिन की 352 खालों के साथ छह आरोपी गिरफ्तार ओडिशा के मलकानगिरि जिले में वन विभाग ने शनिवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 352 पैंगोलिन की खालें बरामद की हैं और इस सिलसिले में छह तस्करों को गिरफ्तार किया है। ओडिशा के मलकानगिरि जिले में वन विभाग ने वन्यजीवों की अवैध तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। शनिवार को की गई इस कार्रवाई में भारी मात्रा में पैंगोलिन की खालें बरामद की गई हैं और इसके साथ ही छह आरोपियों को भी दबोचा गया है। यह पूरा मामला जंगलों में सक्रिय तस्करों के नेटवर्क पर एक बड़ा प्रहार माना जा रहा है। वन विभाग इस पूरे रैकेट की कड़ियों को जोड़ने में जुटा है। गुप्त सूचना के बाद घेराबंदी और जब्ती मलकानगिरि के संभागीय वन अधिकारी (DFO) साई किरण डीएन के निर्देशन में वन विभाग की टीम को एक बेहद सटीक खुफिया इनपुट मिला था। जानकारी मिली थी कि कुछ संदिग्ध लोग भारी मात्रा में वन्यजीवों के अंगों को लेकर पद्मागिरि-पांड्रीपानी मार्ग से गुजरने की योजना बना रहे हैं। इस खबर के मिलते ही वन विभाग की टीम मुस्तैद हो गई और संबंधित मार्ग पर सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी गई। रास्ते से गुजरने वाले हर संदिग्ध वाहन की बारीकी से जांच शुरू कर दी गई। चेकिंग के दौरान टीम को तीन गाड़ियां आती हुई दिखाई दीं, जिन पर अधिकारियों को शक हुआ। जब इन तीनों वाहनों को रोककर उनकी गहन तलाशी ली गई, तो अधिकारियों के होश उड़ गए। गाड़ियों के अंदर से पैंगोलिन की खालें बरामद हुईं। गिनती करने पर कुल 352 खालें पाई गईं, जिनका कुल वजन लगभग दो किलोग्राम है। वन विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मौके से ही छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया और तस्करी में इस्तेमाल की जा रही तीनों गाड़ियों को जब्त कर लिया। पकड़े गए आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों का पता लगाया जा सके। कानून में सख्त सजा का प्रावधान आपको बता दें कि पैंगोलिन एक अत्यंत संवेदनशील और संरक्षित वन्यजीव है। इसे भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की अनुसूची-1 में शामिल किया गया है। इसका मतलब यह है कि पैंगोलिन को मारना, उसका शिकार करना, उसके शरीर के अंगों को पास रखना या उनका व्यापार करना एक बहुत ही गंभीर और गैर-जमानती अपराध है। इस कानून के तहत दोषियों के खिलाफ बेहद कड़ी कानूनी कार्रवाई और लंबी जेल की सजा का प्रावधान है। पूरे नेटवर्क के खुलासे की कोशिश गिरफ्तार किए गए आरोपियों से अब वन विभाग के अधिकारी कड़ाई से पूछताछ कर रहे हैं। DFO साई किरण डीएन के मुताबिक, जांच टीम इस बात का पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी संख्या में पैंगोलिन की खालें आखिर कहां से लाई गई थीं और इन्हें आगे किस जगह भेजा जाना था। अधिकारियों को पूरा अंदेशा है कि इस मामले के पीछे वन्यजीवों की अंतरराष्ट्रीय या अंतरराज्यीय तस्करी से जुड़ा कोई बड़ा गिरोह काम कर रहा है। पकड़े गए तस्करों से मिलने वाले सुरागों के आधार पर इस रैकेट में शामिल अन्य लोगों की धरपकड़ के लिए आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसका आप पर असर वन्यजीव तस्करी पर की गई इस बड़ी कार्रवाई से साफ है कि सरकार लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण को लेकर बेहद गंभीर है, जिसका सीधा असर क्षेत्रीय सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन पर पड़ता है। • जैर विविधता का संरक्षण: पैंगोलिन को बचाने से दीमक और चींटियों की आबादी प्राकृतिक रूप से नियंत्रित रहती है। इससे ग्रामीण भारत में मिट्टी की उपजाऊ क्षमता और कृषि उत्पादकता बनी रहती है। • मलकानगिरि में वाहनों की कड़ी चेकिंग: पद्मागिरि-पांड्रीपानी मार्ग से गुजरने वाले स्थानीय यात्रियों को वन विभाग और पुलिस की सख्त चेकिंग का सामना करना पड़ सकता है। तस्करी को रोकने के लिए उठाए जा रहे इन कदमों से यात्रा में थोड़ा अधिक समय लग सकता है। • सख्त कानूनी परिणाम: वन्यजीवों या उनके अंगों के अवैध व्यापार में शामिल होने पर बिना जमानत के तुरंत गिरफ्तारी हो सकती है। आम नागरिकों को किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत प्रशासन को देनी चाहिए ताकि वे अनजाने में किसी मुसीबत में न फंसें। • वन्य सुरक्षा और पर्यावरण पर्यटन: ओडिशा के जंगलों में अवैध शिकार पर लगाम लगाने से पर्यटकों और शोधकर्ताओं के लिए ये इलाके सुरक्षित बनेंगे। सुरक्षित जंगल क्षेत्र भविष्य में स्थानीय स्तर पर पर्यावरण पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा देंगे। ऐसा क्यों हुआ यह घटना अंतरराष्ट्रीय ब्लैक मार्केट में पैंगोलिन की खालों की भारी मांग और स्थानीय अधिकारियों को मिली सटीक खुफिया जानकारी के कारण सामने आई। वन विभाग की इस त्वरित कार्रवाई ने ओडिशा में सक्रिय तस्करी के रास्तों को बाधित कर दिया है। • ब्लैक मार्केट में भारी मांग: पारंपरिक वैकल्पिक चिकित्सा में पैंगोलिन की खालों का इस्तेमाल होने की गलत धारणाओं के कारण इनकी भारी मांग रहती है। इसी मोटी कमाई के लालच में स्थानीय शिकारी कानून की परवाह किए बिना इनका अवैध शिकार करते हैं। • सटीक खुफिया जानकारी: मलकानगिरि वन विभाग को तस्करों के परिवहन मार्ग के बारे में बिल्कुल सटीक और समय पर जानकारी मिली थी। इसी इनपुट के आधार पर विभाग सामान्य गश्त के बजाय लक्षित नाकाबंदी करने में सफल रहा। • क्षेत्रीय मार्गों का फायदा उठाना: तस्करों ने मुख्य हाईवे से बचने के लिए पद्मागिरि-पांड्रीपानी जैसे आंतरिक रास्तों को चुना था ताकि वे सुरक्षा जांच से बच सकें। लेकिन वन विभाग की मुस्तैदी ने उनके इस मंसूबे पर पानी फेर दिया। सवाल-जवाब 1. यह वन्यजीव जब्ती किस स्थान पर की गई? यह जब्ती ओडिशा के मलकानगिरि जिले में पद्मागिरि-पांड्रीपानी मार्ग पर की गई। 2. वन विभाग ने कितनी पैंगोलिन खालें बरामद की हैं? विभाग ने कुल 352 पैंगोलिन खालें बरामद की हैं, जिनका कुल वजन करीब दो किलोग्राम है। 3. इस तस्करी मामले में कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है? वन विभाग ने मौके से ही छह लोगों को गिरफ्तार किया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। 4. इस कार्रवाई के दौरान कौन से वाहन जब्त किए गए हैं? तस्करी के माल को ले जाने में इस्तेमाल किए जा रहे तीन वाहनों को वन विभाग ने जब्त किया है। 5. पैंगोलिन को किस कानून के तहत और कौन सी अनुसूची में रखा गया है? पैंगोलिन को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत अनुसूची-1 में रखा गया है, जो इसके शिकार और व्यापार को एक गंभीर अपराध बनाता है। https://trendkia.com/crime/malkangiri-men-vanyajiva-taskaron-para-bari-karravai-pangolin-ki-352-khalon-ke-satha-chhaha-aropi-giraphtara-31981 TrendKia — Har trend, sabse pehle.