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  "type": "article",
  "title": "मेरठ के चर्चित हत्याकांड में फांसी के फैसले के बीच जानिए दुनिया के प्रमुख देशों में मृत्युदंड के कानूनी तरीके",
  "summary": "मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में दो दोषियों को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद भारत समेत अमेरिका, चीन, जापान, सऊदी अरब और ईरान में मौत की सजा देने की कानूनी प्रक्रियाओं पर नजर डाली जा रही है.",
  "content": "उत्तर प्रदेश के मेरठ में सामने आए चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई है. सौरभ राजपूत की हत्या से जुड़े इस सनसनीखेज मामले में न्यायालय ने लगभग 13 महीने तक चली न्यायिक सुनवाई पूरी होने के पश्चात अपना अंतिम निर्णय सुनाया. हमारे देश में मौत की सजा का प्रावधान केवल अत्यंत दुर्लभ और जघन्य अपराधों के मामलों में ही लागू किया जाता है, जिसके कारण यह न्यायिक फैसला पूरे देश में व्यापक चर्चा का केंद्र बन गया है. इस महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम के परिप्रेक्ष्य में यह समझना बेहद प्रासंगिक हो जाता है कि भारत के अलावा विश्व के अन्य प्रमुख राष्ट्रों में गंभीर अपराधों के दोषियों को मृत्युदंड देने के लिए कौन से कानूनी तौर-तरीके अपनाए जाते हैं.\n\nभारतीय कानूनी व्यवस्था में मृत्युदंड की रूपरेखा\nभारत में सामान्य आपराधिक न्याय प्रणाली के अंतर्गत मृत्युदंड के क्रियान्वयन के लिए फांसी पर लटकाने का वैधानिक नियम है. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 393(5) के कानूनी प्रावधानों के मुताबिक, अदालत द्वारा जब किसी दोषी को मौत की सजा सुनाई जाती है, तो औपचारिक आदेश में यह स्पष्ट निर्देश दर्ज होता है कि दोषी को तब तक गले के फंदे से लटका कर रखा जाए जब तक कि उसकी सांसें पूरी तरह थम न जाएं. देश के कानून के तहत मृत्युदंड की व्यवस्था केवल असाधारण और बेहद संगीन अपराधों तक ही सीमित रखी गई है. ऐतिहासिक आंकड़ों के संदर्भ में देखें तो स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से अब तक भारत में 720 अपराधियों को फांसी के फंदे पर लटकाया जा चुका है. देश में फांसी की सबसे अंतिम तामील वर्ष 2020 में हुई थी, जब निर्भया मामले में संलिप्त पाए गए 4 दोषियों को फांसी दी गई थी.\n\nअमेरिका में राज्यों के अनुसार निर्धारित कानूनी तरीके\nसंयुक्त राज्य अमेरिका में दोषियों को मौत की सजा देने की प्रक्रिया वहां के अलग-अलग राज्यों के स्थानीय कानूनों और नियमों पर निर्भर करती है. अमेरिकी व्यवस्था में सभी राज्यों के भीतर मृत्युदंड का प्रावधान लागू नहीं है और जिन राज्यों में यह वैधानिक रूप से मान्य है, वहां भी प्रक्रियाएं भिन्न हैं. वहां सबसे अधिक प्रचलित और प्रमुख तरीका लीथल इंजेक्शन यानी जानलेवा रासायनिक सुई का माना जाता है. इसके अतिरिक्त कई राज्यों के कानूनी प्रावधानों में बिजली की कुर्सी, गोलियां दागने वाले फायरिंग स्क्वॉड, प्राणघातक गैस चैंबर और हाल के समय में नाइट्रोजन गैस के जरिए दम घोंटने जैसी प्रणालियां भी शामिल की गई हैं.\n\nचीन में मृत्युदंड के तरीके और गोपनीय आंकड़े\nचीन में गंभीर अपराधों के मामलों में दोषियों को मृत्युदंड देने के लिए मुख्य रूप से दो प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया जाता है, जिनमें जानलेवा इंजेक्शन लगाना और गोली मारना शामिल हैं. हालांकि, चीनी शासन व्यवस्था में मृत्युदंड की सजा और उसके क्रियान्वयन से जुड़े आधिकारिक आंकड़े कभी भी सार्वजनिक मंचों पर उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं. इस गोपनीयता के कारण वहां हर वर्ष कितने अपराधियों को मौत की सजा सुनाई जाती है और दोनों में से किस तरीके को कितनी बार अपनाया गया, इसका कोई सटीक या निष्पक्ष मूल्यांकन करना हमेशा से एक कठिन चुनौती बना रहता है.\n\nजापान में फांसी की परंपरा और पारदर्शिता का मुद्दा\nदुनिया के अत्यंत विकसित देशों की सूची में शामिल जापान उन चुनिंदा उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है जहां आज भी मृत्युदंड की कानूनी व्यवस्था को बरकरार रखा गया है. जापानी न्याय प्रणाली में दोषियों को मृत्युदंड देने के लिए फांसी पर लटकाने का ही नियम अपनाया जाता है. हालांकि, वहां इस पूरी प्रक्रिया के संचालन, उसमें पारदर्शिता के स्तर और सजा दिए जाने से पहले कैदियों को दी जाने वाली पूर्व सूचना के तौर-तरीकों को लेकर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों द्वारा समय-समय पर गंभीर आपत्तियां उठाई जाती रही हैं.\n\nसऊदी अरब में सिर कलम करने की सजा\nसऊदी अरब में मृत्युदंड की सजा देने के लिए ऐतिहासिक रूप से सिर कलम करने की प्रथा लंबे समय से अमल में लाई जाती रही है. एमनेस्टी इंटरनेशनल के 2025 के ताजा विवरणों के अनुसार, वहां सिर कलम करने के अलावा गोली मारकर मौत की सजा दिए जाने की घटनाओं का भी उल्लेख मिलता है. सऊदी अरब में मृत्युदंड के व्यापक प्रयोग तथा जिन विभिन्न अपराध श्रेणियों के लिए यह कठोर सजा मुकर्रर की जाती है, उन पर वैश्विक मानवाधिकार संस्थाएं निरंतर अपनी गहरी चिंता व्यक्त करती आई हैं.\n\nईरान में फांसी और सार्वजनिक दंड का चलन\nईरान की कानूनी व्यवस्था में मृत्युदंड के तहत दोषियों को फांसी के फंदे पर लटकाने का नियम प्रचलित है. एमनेस्टी इंटरनेशनल द्वारा वर्ष 2025 में दर्ज किए गए रिकॉर्ड के मुताबिक, ईरान में कुछ मामलों में सार्वजनिक रूप से लोगों के सामने मृत्युदंड दिए जाने के उदाहरण भी सामने आए हैं. विश्व भर के मानवाधिकार संगठन वहां मृत्युदंड की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि, मुकदमों के दौरान निष्पक्ष सुनवाई से जुड़ी कमियों और पूरी न्यायिक प्रक्रिया में स्पष्टता तथा पारदर्शिता के अभाव पर निरंतर सवाल उठाते रहे हैं.\n\nइसका आप पर असर\nयह समाचार विभिन्न देशों में न्यायिक दंड प्रणालियों के संचालन और कानून व्यवस्था के प्रति नागरिकों की बुनियादी समझ को स्पष्ट करता है.\n\n• भारत में: नागरिकों को यह समझना आवश्यक है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 393(5) के तहत मृत्युदंड केवल दुर्लभतम और जघन्य अपराधों में ही दिया जाता है. कानूनी रूप से फांसी की तामील की प्रक्रिया बेहद सख्त और लंबी न्यायिक समीक्षा के बाद ही संपन्न होती है.\n• उत्तर प्रदेश में: मेरठ की अदालत द्वारा 13 महीने के भीतर फैसला सुनाया जाना राज्य में संगीन अपराधों के त्वरित अदालती निपटारे को दर्शाता है. स्थानीय स्तर पर यह फैसला समाज में गंभीर अपराधों के प्रति सख्त न्यायिक संदेश स्थापित करता है.\n• अंतरराष्ट्रीय स्तर पर: विदेशों में रहने या यात्रा करने वाले लोगों के लिए संबंधित देशों के कठोर आपराधिक कानूनों और वहां के दंड विधान को जानना जरूरी होता है. अमेरिका, सऊदी अरब और चीन जैसे देशों में मृत्युदंड के नियम स्थानीय सीमाओं और अपराध श्रेणियों के अनुसार काफी अलग हैं.\n• मानवाधिकार जागरूकता: यह विवरण वैश्विक स्तर पर निष्पक्ष सुनवाई और न्यायिक पारदर्शिता के महत्व को रेखांकित करता है. आम नागरिक यह जान पाते हैं कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं किन आधारों पर विभिन्न देशों की मृत्युदंड प्रक्रियाओं की निगरानी करती हैं.\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह तुलनात्मक विश्लेषण मेरठ की एक स्थानीय अदालत द्वारा सौरभ राजपूत हत्याकांड के दो दोषियों को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद सामने आया है. इस चर्चित फैसले ने यह विमर्श उत्पन्न किया कि विभिन्न न्यायिक प्रणालियां चरम दंड को किस प्रकार लागू करती हैं.\n\n• सीधा कारण: मेरठ की अदालत ने लगभग 13 महीने चली सुनवाई के पश्चात मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को हत्या के जघन्य अपराध का दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड सुनाया. इस बहुचर्चित अदालती आदेश ने मृत्युदंड के कानूनी तरीकों पर वैश्विक ध्यान आकर्षित किया.\n• कानूनी पृष्ठभूमि: भारत में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत केवल जघन्य अपराधों में ही फांसी का वैधानिक आदेश दिया जाता है. आजादी के बाद से 720 लोगों को फांसी दी गई है, जिसमें सबसे हालिया अमल 2020 में निर्भया मामले के 4 दोषियों पर हुआ था.\n• वैश्विक भिन्नताएं: अलग-अलग देशों ने अपने इतिहास, सामाजिक संरचना और संवैधानिक व्यवस्था के आधार पर मौत की सजा के अलग-अलग साधन जैसे घातक इंजेक्शन, सिर कलम करना, गोली मारना या फांसी चुने हैं. मानवाधिकार संस्थाएं इन सभी प्रक्रियाओं में निष्पक्षता और मानवीय मानकों को लेकर लगातार सवाल उठाती रही हैं.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मेरठ के नीला ड्रम हत्याकांड में अदालत ने क्या फैसला सुनाया?\nअदालत ने लगभग 13 महीने चली न्यायिक सुनवाई के बाद सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई है.\n\n2. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 393(5) में फांसी को लेकर क्या नियम है?\nइस धारा के अनुसार मृत्युदंड के आदेश में यह निर्देशित किया जाता है कि दोषी को तब तक गर्दन से लटका कर रखा जाए जब तक कि उसकी मृत्यु न हो जाए.\n\n3. आजादी के बाद से भारत में कितने लोगों को फांसी दी जा चुकी है?\nस्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से भारत में अब तक कुल 720 दोषियों को फांसी की सजा दी गई है.\n\n4. भारत में सबसे अंतिम बार फांसी कब और किसे दी गई थी?\nभारत में अंतिम बार फांसी वर्ष 2020 में दी गई थी, जब निर्भया मामले के 4 दोषियों को फांसी के फंदे पर लटकाया गया था.\n\n5. अमेरिका में मृत्युदंड देने के लिए कौन से मुख्य तरीके अपनाए जाते हैं?\nअमेरिका में सबसे ज्यादा जानलेवा इंजेक्शन का इस्तेमाल होता है, जबकि कुछ राज्यों में बिजली की कुर्सी, फायरिंग स्क्वॉड, गैस और नाइट्रोजन गैस जैसे तरीके भी कानूनन मान्य हैं.\n\n6. चीन में मृत्युदंड के आंकड़ों का सटीक आकलन करना कठिन क्यों है?\nचीन में मृत्युदंड से जुड़े आधिकारिक आंकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराए जाते, जिसके कारण वहां सजा पाने वालों की सही संख्या का पता लगाना मुश्किल रहता है.\n\n7. जापान में मृत्युदंड किस प्रक्रिया के तहत दिया जाता है?\nजापान में मृत्युदंड के लिए फांसी का प्रावधान है, जहां प्रक्रिया की पारदर्शिता और कैदियों को दी जाने वाली पूर्व सूचना पर सवाल उठते रहे हैं.\n\n8. एमनेस्टी इंटरनेशनल की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब और ईरान में कौन से तरीके दर्ज किए गए?\nरिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब में सिर कलम करने और गोली मारने का उल्लेख है, जबकि ईरान में फांसी देने के साथ-साथ कुछ सार्वजनिक मृत्युदंड के मामले दर्ज किए गए हैं.",
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  "category": "अपराध",
  "publishedAt": "2026-10-14",
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