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  "type": "article",
  "title": "मुंबई के मलाड में बंद पड़े केंद्र के डीप फ्रीजर से मिला बुजुर्ग का शव, बेटी ने चार साल तक क्यों छिपाकर रखा",
  "summary": "मलाड में एक बंद पड़े डे केयर केंद्र के फ्रीजर में चार साल से सुरक्षित रखा 78 वर्षीय बुजुर्ग का शव मिला, जिसे उनकी बेटी वैज्ञानिक संरक्षण के लिए अमेरिका ले जाने की तैयारी कर रही थी।",
  "content": "पश्चिमी उपनगर मलाड में संपत्ति नवीनीकरण के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है। वहां एक बंद पड़े व्यावसायिक केंद्र में रखे गहरे फ्रीजर से 78 वर्षीय बुजुर्ग का पार्थिव शरीर बरामद हुआ। जांच पड़ताल में यह तथ्य उजागर हुआ कि दिवंगत बुजुर्ग की 40 वर्षीय संतान ने उनका दाह संस्कार या दफन करने के बजाय पिछले चार वर्षों से शव को रासायनिक और शीतलन तकनीक के सहारे सुरक्षित रख छोड़ा था। जून 2022 से चल रहे इस गुप्त संरक्षण का राज तब खुला, जब जगह के मालिक ने पुनर्निर्माण कार्यों के सिलसिले में चॉल को पूरी तरह खाली कराने की औपचारिक पहल की।\n\nमकान के नवीनीकरण के दौरान खुला गहरा राज\nमलाड पूर्व की यह चॉल तकरीबन 2000 वर्ग फुट के भूभाग पर फैली हुई है। संपत्ति स्वामी ने हाल ही में पूरे ढांचे के पुनर्विकास की रूपरेखा तैयार की थी और किराएदारों को जगह खाली करने का निर्देश दिया था। जब मजदूर और सफाईकर्मी परिसर का जायजा ले रहे थे, तब एक बड़े डीप फ्रीजर के भीतर रखा पार्थिव शरीर देखकर वे दंग रह गए। सूचना मिलने पर कानून प्रवर्तन दल तुरंत मौके पर पहुंचा और स्थिति को अपने नियंत्रण में लिया। फ्रीजर को सील करके शव को बाहर निकाला गया और आसपास के सभी लोगों से सघन पूछताछ शुरू की गई।\n\nप्राकृतिक निधन और अमेरिका भेजने की गुप्त योजना\nप्रारंभिक छानबीन में किसी प्रकार के आपराधिक षड्यंत्र या हत्या की आशंका को खारिज कर दिया गया है। संबंधित 78 वर्षीय वृद्ध गंभीर रूप से कैंसर रोग से ग्रसित थे। जून 2022 में दिल का दौरा पड़ने के कारण उनका देहांत हुआ था, जिसका बाकायदा पंजीकृत चिकित्सक द्वारा जारी किया गया वैध मृत्यु प्रमाणपत्र भी बेटी के पास मौजूद है। अंधेरी पश्चिम इलाके में रहने वाली बेटी अपने पिता से अत्यधिक भावनात्मक लगाव रखती थी और इस वियोग को स्वीकार नहीं कर पा रही थी।\n\nपुलिस पूछताछ में परिवार ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद शव को अमेरिका में स्थित एक आधुनिक शव संरक्षण संस्थान तक पहुंचाना था। यह विदेशी संस्था वैज्ञानिक पद्धतियों से पार्थिव शरीरों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की विशेषज्ञता रखती है। बेटी इस जटिल प्रक्रिया के लिए लगातार जरूरी कानूनी परामर्श ले रही थी, संस्थान के प्रतिनिधियों से संपर्क बनाए हुए थी और आवश्यक भारी धनराशि जुटाने के लिए बचत करने में जुटी थी। इसी प्रतीक्षा में उसने बंद पड़े केंद्र के खाली फ्रीजर का सहारा लिया।\n\nकिराएदारी की कड़ी और जांच का दायरा\nपरिसर के मूल मालिक ने अधिकारियों को जानकारी दी कि उसने साल 2022 की शुरुआत में यह जगह अब्दुल रहमान नामक व्यक्ति को लीज पर दी थी। बाद में अब्दुल रहमान ने यह जगह किसी अन्य प्रबंधन समूह को दे दी, जिसने वहां एक स्वास्थ्य क्लिनिक और डे केयर सेंटर का संचालन शुरू किया। करीब एक माह पूर्व यह केंद्र पूरी तरह बंद हो चुका था। केंद्र के संचालकों ने दावा किया है कि उन्हें शीतलन उपकरण के अंदर रखे इस शव के बारे में तनिक भी भनक नहीं थी।\n\nअधिकारियों ने संपत्ति के मालिक, केंद्र प्रबंधकों और परिजनों के बयान दर्ज कर लिए हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पुलिस टीम ने परिजनों से सीधी बातचीत की है। अब परिवार को यह तय करना होगा कि वे अंतिम संस्कार संपन्न कराएंगे या शव को बीएमसी को सौंपेंगे। इसके लिए आवश्यक कानूनी दस्तावेज हासिल करने होंगे और निर्धारित सरकारी शुल्क का भुगतान करना होगा।\n\nइसका आप पर असर\nयह घटना असामान्य परिस्थितियों में शव संरक्षण और उससे जुड़े कड़े कानूनी नियमों को रेखांकित करती है।\n\n• नागरिकों के लिए: किसी भी परिजन के देहांत के बाद स्थानीय नगर निकाय को सूचित करना और वैध रीति से अंतिम संस्कार करना अनिवार्य कानूनी दायित्व है। मृत्यु प्रमाणपत्र होने के बावजूद शव को अनधिकृत निजी स्थानों पर वर्षों तक रोके रखना गंभीर कानूनी पेचीदगियां खड़ी कर सकता है।\n• संपत्ति मालिकों के लिए: व्यावसायिक या आवासीय परिसरों को सब-लीज पर देते समय किरायेदारों की गतिविधियों पर नियमित निगरानी आवश्यक है। अनाधिकृत गतिविधियों या लावारिस उपकरणों के उपयोग से मालिक भी अप्रत्याशित कानूनी जांच के दायरे में आ सकते हैं।\n• विदेश में शव ले जाने के नियम: किसी भी मृतक के पार्थिव शरीर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक या अंतिम संस्कार के लिए ले जाने हेतु दूतावास और स्वास्थ्य मंत्रालय की कड़ी मंजूरी चाहिए होती है। इसमें भारी खर्च और लंबी कागजी प्रक्रिया शामिल होती है जिसे बिना आधिकारिक अनुमति के अंजाम नहीं दिया जा सकता।\n• नगर निगम शुल्क और प्रक्रिया: लावारिस या विवादित मामलों में शव का निपटारा नगर निगम के नियमों के अनुसार होता है। इसके लिए परिवार को वैध प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने के साथ निर्धारित निगम शुल्क जमा कराना पड़ता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह असामान्य स्थिति एक बेटी के अत्यधिक भावनात्मक जुड़ाव और वैज्ञानिक संरक्षण की अधूरी योजना के कारण उत्पन्न हुई।\n\n• भावनात्मक लगाव और योजना: बुजुर्ग पिता की मृत्यु जून 2022 में प्राकृतिक कारणों से हुई थी, लेकिन बेटी उन्हें खोने के सदमे को स्वीकार नहीं कर सकी। उसने एक अमेरिकी वैज्ञानिक संस्था के जरिए शव को भविष्य के लिए संरक्षित कराने की योजना बनाई थी।\n• वित्तीय और कानूनी अड़चनें: विदेश में शव को संरक्षित कराने के लिए भारी भरकम धनराशि और जटिल कानूनी स्वीकृतियों की आवश्यकता थी। बेटी इन वर्षों में इसी खर्च के लिए पैसे जुटाने और सलाह लेने में व्यस्त रही, जिससे मामला चार साल तक खिंच गया।\n• परिसर का खाली होना: डे केयर केंद्र बंद होने के बाद खाली पड़े फ्रीजर का उपयोग इस काम के लिए किया गया। जब मकान मालिक ने 2000 वर्ग फुट की चॉल को पुनर्विकास के लिए खाली कराया, तब यह छिपा हुआ मामला उजागर हुआ।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मलाड में बुजुर्ग का शव कहां से मिला?\nमलाड पूर्व में स्थित 2000 वर्ग फुट की एक चॉल में बंद पड़े डे केयर सेंटर के डीप फ्रीजर से शव बरामद हुआ।\n\n2. बुजुर्ग की मृत्यु कब और कैसे हुई थी?\nबुजुर्ग कैंसर से पीड़ित थे और जून 2022 में 78 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से उनका प्राकृतिक निधन हुआ था।\n\n3. बेटी ने शव को चार साल तक फ्रीजर में क्यों रखा?\nबेटी शव को वैज्ञानिक संरक्षण के लिए अमेरिका स्थित एक संस्था के पास भेजने की तैयारी कर रही थी और इसके लिए फंड जुटा रही थी।\n\n4. इस मामले का खुलासा किस तरह हुआ?\nमकान मालिक द्वारा संपत्ति के पुनर्विकास के लिए परिसर खाली कराने की प्रक्रिया के दौरान फ्रीजर से यह शव बरामद हुआ।\n\n5. क्या पुलिस को इस मामले में किसी अपराध का संदेह है?\nपुलिस ने बताया कि मौत प्राकृतिक थी और बेटी के पास डॉक्टर द्वारा जारी वैध मृत्यु प्रमाणपत्र भी मौजूद है।\n\n6. अब शव के अंतिम संस्कार को लेकर क्या कदम उठाए जा रहे हैं?\nपुलिस ने परिजनों से चर्चा की है, जिसके बाद वे कानूनी औपचारिकताएं और शुल्क चुकाकर अंतिम संस्कार या बीएमसी को सौंपने का निर्णय लेंगे।",
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  "category": "अपराध",
  "publishedAt": "2026-09-30",
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    "मुंबई पुलिस",
    "मलाड",
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