# मुंबई में फर्जी कंपनियों का जाल बुनने वाला नीलेश पटेल 10 महीने बाद मध्य प्रदेश से गिरफ्तार

> अहमदाबाद पुलिस ने फर्जी कंपनियां बनाकर बैंकों से करोड़ों की ठगी करने वाले नीलेश पटेल को 10 महीने की तलाश के बाद मध्य प्रदेश के बैतूल से गिरफ्तार किया. आरोपी मुंबई में 'सेमीकॉइन' नाम से एक फर्जी सेमीकंडक्टर कंपनी के जरिए बड़ा निवेश घोटाला रचने की तैयारी में था.

**Type:** article · **Category:** अपराध · **Published:** 2026-09-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/crime/mumbai-men-pharji-knpaniyon-ka-jala-bunane-vala-nilesh-patel-10-mahine-bada-madhya-pradesh-se-giraphtara-28238 · **Language:** Hindi
**Tags:** नीलेश पटेल, अहमदाबाद पुलिस, बैंक धोखाधड़ी, सेमीकॉइन, फर्जी कंपनी घोटाला, गुजरात क्राइम न्यूज

गुजरात पुलिस को लंबे समय से तलाश रहे एक शातिर ठग को आखिरकार गिरफ्तार करने में कामयाबी मिली है, जो हर बार नई पहचान और नई कंपनी बनाकर बैंकों और निवेशकों को चूना लगाता रहा. करीब 10 महीने तक चली तलाश के बाद अहमदाबाद पुलिस ने आरोपी को मध्य प्रदेश से दबोच लिया.

## ऑपरेशन हॉकआई से मिली शुरुआती कड़ी
पिछले साल अहमदाबाद के जोन-7 में पुलिस ने भगोड़े और वांछित अपराधियों को पकड़ने के लिए एक खास मुहिम छेड़ी थी, जिसे 'ऑपरेशन हॉकआई' नाम दिया गया. इस मुहिम के तहत इलाके के 8 पुलिस थानों ने मिलकर फरार आरोपियों की सूची बनाई और उन पर नजर रखनी शुरू की. इसी दौरान 32 भगोड़ों की पहचान हुई, जिनमें एक नाम नीलेश पटेल का भी शामिल था. नीलेश बार-बार अपना ठिकाना और पहचान बदलकर पुलिस को चकमा दे रहा था, जिसकी वजह से शुरुआती कोशिशों में वह हाथ नहीं आ सका.

## 10 महीने बाद बैतूल में मिला सुराग
लंबी मशक्कत के बाद अहमदाबाद पुलिस को पक्की खबर मिली कि नीलेश मध्य प्रदेश के बैतूल इलाके में छिपकर रह रहा है. इसकी पुष्टि होते ही एक पुलिस टीम तुरंत बैतूल रवाना कर दी गई. वहां पहुंचकर गुजरात पुलिस ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई शुरू की और महज कुछ घंटों में ही आरोपी तक पहुंच गई. 18 अगस्त को गिरफ्तारी के बाद टीम उसे लेकर वापस अहमदाबाद पहुंची, जहां उससे पूछताछ का सिलसिला शुरू हुआ.

## पूछताछ में सामने आया बड़ा फर्जीवाड़ा
पूछताछ के दौरान परत-दर-परत कई चौंकाने वाले खुलासे हुए. पुलिस के मुताबिक नीलेश पटेल फर्जी कंपनियां खड़ी कर बड़े पैमाने पर बैंकों से धोखाधड़ी करता था. वह मशीनरी खरीदने के बहाने बैंकों में झूठे कोटेशन जमा करता और उसी आधार पर लोन मंजूर कराने की कोशिश करता था. लोन के एवज में जो संपत्तियां गिरवी दिखाई जाती थीं, उनमें भी बड़ा खेल होता था. कई बार तो असली मालिक को पता ही नहीं होता था कि उसकी संपत्ति के कागजात इस्तेमाल हो रहे हैं, तो कई बार दस्तावेज ही पूरी तरह फर्जी बनाए गए होते थे. अकेले वासना थाने में उसके खिलाफ करीब 90 लाख रुपये की धोखाधड़ी का केस दर्ज है, जबकि क्राइम ब्रांच में दर्ज तीन अलग मामलों में उस पर 14 करोड़ रुपये ठगने का आरोप है.

## मुंबई में खड़ी कीं करीब 20 कंपनियां
पुलिस का कहना है कि फरार होने के बाद नीलेश मुंबई पहुंच गया और वहां 'टॉर्शन' नाम से करीब 20 कंपनियां बना डालीं. इन कंपनियों के बीच आपस में पैसा घुमाकर उसने अपना पूरा जाल बुना. इन्हीं फर्जी कंपनियों की आड़ में उसने कई बड़े बैंकों से हजारों करोड़ रुपये का लोन हासिल करने की कोशिश भी की थी. जांच में यह भी पता चला कि उसने अब अपना अगला निशाना देश के तेजी से उभरते सेमीकंडक्टर कारोबार को बनाया था.

## 'सेमीकॉइन' के जरिए बड़ी ठगी की थी योजना
पुलिस जांच में सामने आया कि नीलेश ने 'टॉर्शन लिबरल साइंटिफिक' नाम से एक फर्जी सेमीकंडक्टर कंपनी भी खड़ी कर ली थी. इसी कंपनी के जरिए वह 'सेमीकॉइन' नाम का एक डिजिटल कॉइन लॉन्च करने की तैयारी में जुटा था, ताकि निवेशकों से बड़ी रकम जुटाई जा सके. लेकिन इससे पहले कि वह आम निवेशकों तक पहुंच पाता, पुलिस उसके ठिकाने तक जा पहुंची और उसका पूरा खेल खत्म हो गया.

## इसका आप पर असर
यह मामला आम निवेशकों और बैंकों को नई तरह के फर्जीवाड़े से सतर्क करता है, खासकर जब कोई अनजान कंपनी सेमीकंडक्टर या डिजिटल कॉइन जैसे चर्चित सेक्टर के नाम पर निवेश मांगे.

- **भारत में:** देश में सेमीकंडक्टर सेक्टर को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ रही है, ऐसे में ठग इसी उत्साह का फायदा उठाकर फर्जी कॉइन या कंपनी के जरिए पैसा जुटाने की कोशिश कर सकते हैं. किसी भी नई कंपनी या डिजिटल कॉइन में पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता जरूर जांच लें.
- **गुजरात और अहमदाबाद में:** वासना थाने और क्राइम ब्रांच में दर्ज मामलों की जांच अब आगे बढ़ेगी, जिससे प्रभावित बैंकों और शिकायतकर्ताओं को न्याय मिलने की उम्मीद बंधी है. जिन बैंकों या लोगों ने आरोपी की कंपनियों को लोन दिया या संपत्ति के दस्तावेज सत्यापित किए, उन्हें जांच में सहयोग करना पड़ सकता है.
- **बैंकों के लिए सबक:** मशीनरी खरीद के नाम पर दिए जाने वाले लोन और गिरवी रखी गई संपत्तियों के दस्तावेजों का सत्यापन और सख्त करना जरूरी हो गया है. असली संपत्ति मालिक की जानकारी और दस्तावेजों की बारीकी से जांच अनिवार्य होनी चाहिए.
- **निवेशकों के लिए चेतावनी:** किसी भी नई कंपनी के डिजिटल कॉइन या निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी रजिस्ट्रेशन और बैकग्राउंड जांच लें. जल्दी मुनाफे का लालच देने वाली स्कीमों से बचना ही समझदारी है.

## सवाल-जवाब

### 1. नीलेश पटेल को कब और कहां से गिरफ्तार किया गया?
उसे 18 अगस्त को मध्य प्रदेश के बैतूल इलाके से गिरफ्तार किया गया.

### 2. उसे पकड़ने के लिए कौन सा अभियान चलाया गया था?
अहमदाबाद के जोन-7 में पिछले साल शुरू हुए 'ऑपरेशन हॉकआई' के तहत उसकी पहचान की गई थी.

### 3. उस पर कितने रुपये की धोखाधड़ी के आरोप हैं?
वासना थाने में करीब 90 लाख रुपये और क्राइम ब्रांच के तीन मामलों में 14 करोड़ रुपये की ठगी के आरोप हैं.

### 4. 'सेमीकॉइन' आखिर है क्या?
यह नीलेश की फर्जी सेमीकंडक्टर कंपनी 'टॉर्शन लिबरल साइंटिफिक' के जरिए लॉन्च किया जाने वाला एक डिजिटल कॉइन था, जिससे निवेशकों से पैसा जुटाने की योजना थी.

### 5. उसने मुंबई में कितनी कंपनियां बनाई थीं?
उसने मुंबई में 'टॉर्शन' नाम से करीब 20 कंपनियां खड़ी की थीं.

### 6. उसकी गिरफ्तारी में इतना समय क्यों लगा?
वह बार-बार अपनी पहचान और ठिकाना बदलता रहा, जिससे पुलिस को उस तक पहुंचने में करीब 10 महीने लग गए.

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