मुंबई एनआईए अदालत में आतंकी आरोपी का हंगामा, जज को दी धमकी के बाद मेडिकल रिपोर्ट ने खोली पोल मुंबई की विशेष एनआईए अदालत में आईएसआईएस मॉड्यूल के आरोपी ताबिस सिद्दीकी ने जज और उनके परिवार को धमकी दी। हालांकि अस्पताल की मानसिक जांच रिपोर्ट ने उसके बीमारी के दावे की पूरी पोल खोल दी। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई स्थित विशेष राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण अदालत की कार्यवाही के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब आतंकवाद के एक मामले में गिरफ्तार आरोपी ने न्यायिक गरिमा को ताक पर रखकर खुली चुनौती दे दी। जुलाई 2023 के दौरान पकड़े गए आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट से जुड़े मॉड्यूल के अभियुक्त ताबिस सिद्दीकी को जब विशेष जज अभय जोगलेकर के समक्ष पेश किया गया, तो उसने अदालत परिसर में ही जमकर उपद्रव किया। कठघरे में खड़े होकर उसने न केवल मौजूदा व्यवस्था और शासन प्रणाली के प्रति घृणा जताई, बल्कि सीधे पीठासीन न्यायिक अधिकारी को भी निशाने पर ले लिया। कोर्ट रूम में तीखी बदसलूकी और खुलेआम दी गई धमकी अदालती कार्यवाही शुरू होते ही आरोपी ने पहले अदालत के संबंध में अनुचित सवाल पूछे और फिर सीधे दुर्व्यवहार पर उतर आया। भरे कोर्ट रूम में चिल्लाते हुए उसने साफ तौर पर कहा कि उसे देश की मौजूदा सरकार के प्रति कोई सम्मान नहीं है। इसके साथ ही उसने न्यायपालिका के लिए बेहद आपत्तिजनक और असंसदीय भाषा का सहारा लिया। हद तो तब पार हो गई जब उसने सीधे पीठासीन जज को डराने का प्रयास करते हुए कहा कि वह उन्हें और उनके परिवार को देख लेगा। अदालत में मौजूद वकीलों, सुरक्षाकर्मियों और अन्य लोगों के लिए यह आचरण बेहद स्तब्ध करने वाला था। जेजे अस्पताल की रिपोर्ट से बेनकाब हुआ ढोंग आरोपी की इस आक्रामक हरकत पर अदालत ने सख्त रुख अख्तियार किया और उसके आचरण की कड़ी भर्त्सना की। जब पीठासीन जज ने उसके पूर्व चिकित्सीय दस्तावेजों और जांच रिपोर्टों की पड़ताल की, तो आरोपी की असली मंशा पूरी तरह उजागर हो गई। सरकारी जे. जे. अस्पताल में कराए गए उसके मनोवैज्ञानिक परीक्षण के दस्तावेजों में स्पष्ट दर्ज था कि आरोपी को वर्तमान में कोई गंभीर या बड़ी मानसिक बीमारी नहीं है। अदालत ने इस रिकॉर्ड के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि आरोपी किसी भी प्रकार से मानसिक विकार से ग्रस्त नहीं है, बल्कि वह केवल कानूनी प्रक्रिया को बाधित करने, मुकदमे की सुनवाई टालने और कठोर सजा से बचने के लिए विक्षिप्तता का स्वांग रच रहा था। सख्त न्यायिक आदेश: भौतिक पेशी पर तत्काल रोक इस पूरे घटनाक्रम और चिकित्सीय सच के सामने आने के बाद विशेष अदालत ने आरोपी के विरुद्ध कड़ा प्रशासनिक और न्यायिक निर्णय सुनाया। अदालत ने स्पष्ट आदेश पारित किया कि इस आरोपी को अब व्यक्तिगत रूप से अदालत कक्ष में लाने की कतई आवश्यकता नहीं है। सुरक्षा जोखिमों और अदालती शांति बनाए रखने के उद्देश्य से निर्देश दिए गए कि अगले आदेश तक आरोपी ताबिस सिद्दीकी की सभी भविष्य की पेशियां केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग माध्यम से ही कराई जाएं, ताकि वह दोबारा न्यायिक कक्ष का माहौल दूषित न कर सके। महाराष्ट्र आईएसआईएस मॉड्यूल और एनआईए की कार्रवाई इस पूरे मामले की जड़ें जुलाई 2023 की उस बड़ी सुरक्षा कार्रवाई से जुड़ी हैं, जब राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण ने महाराष्ट्र भर में कई संदिग्ध ठिकानों पर व्यापक छापेमारी की थी। उस अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के सक्रिय स्लीपर सेल से ताल्लुक रखने वाले कुल सात संदिग्धों को हिरासत में लिया था, जिनमें ताबिस सिद्दीकी भी शामिल था। जांच एजेंसी के विवरण के अनुसार, ये सभी लोग आतंकी संगठन के भारत-विरोधी एजेंडे को फैलाने, नौजवानों को कट्टरपंथी बनाने और उनका ब्रेनवाश करने में जुटे हुए थे। छापेमारी के समय इन ठिकानों से आपत्तिजनक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, देशविरोधी दस्तावेज और भड़काऊ सोशल मीडिया सामग्री भी जब्त की गई थी। अब अदालत में न्यायाधीश को प्रत्यक्ष धमकी देने के बाद आरोपी के खिलाफ कानूनी शिकंजा और अधिक कसना तय माना जा रहा है। इसका आप पर असर यह घटना न्यायिक परिसरों में विचाराधीन आतंकवाद के आरोपियों की सुरक्षा व्यवस्था और सुनवाई के तौर-तरीकों पर सीधा प्रभाव डालती है। • भारत में: देश भर की संवेदनशील अदालतों में आतंकी मामलों के बंदियों की भौतिक पेशी के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के उपयोग को अधिक प्राथमिकता दी जाएगी। इससे अदालती परिसरों में न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं की व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रोटोकॉल सख्त होंगे। • मुंबई में: मुंबई की विशेष अदालतों में बंदियों की सुरक्षा जांच और पेशी के नियम तत्काल प्रभाव से कड़े किए गए हैं। संबंधित जेल और सुरक्षा कर्मियों को ऐसे आक्रामक आरोपियों की निगरानी को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। • मुकदमे की कार्यवाही पर: मुकदमों में मानसिक बीमारी का बहाना बनाकर देरी करने की रणनीति पर अदालती सख्ती बढ़ेगी। सरकारी अस्पतालों की आधिकारिक जांच रिपोर्टों के आधार पर झूठे दावों को तुरंत खारिज कर त्वरित सुनवाई सुनिश्चित की जाएगी। • न्यायिक सुरक्षा तंत्र पर: संवेदनशील राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों की सुनवाई करने वाले न्यायाधीशों और उनके परिवारों की व्यक्तिगत सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। प्रत्यक्ष धमकियों को संज्ञान में लेकर सुरक्षा घेरे को पुख्ता किया जाएगा। ऐसा क्यों हुआ यह घटनाक्रम अदालत में आरोपी द्वारा कानूनी परिणाम से बचने के सुनियोजित प्रयास और जांच में पकड़े गए उसके पुराने आतंकी संबंधों के टकराव के कारण उत्पन्न हुआ। • प्रत्यक्ष कारण: आरोपी ताबिस सिद्दीकी ने कानूनी सजा और मुकदमे की प्रक्रिया से बचने के इरादे से अदालत में आक्रामक व्यवहार किया और मानसिक रूप से अस्वस्थ होने का नाटक रचा। उसने जानबूझकर न्यायाधीश को धमकाकर अदालती कार्यवाही को बाधित करने का प्रयास किया। • जांच और गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि: जुलाई 2023 में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण ने महाराष्ट्र में छापेमारी कर इस्लामिक स्टेट मॉड्यूल के सात संदिग्धों को पकड़ा था, जिनमें सिद्दीकी भी था। इन आरोपियों पर देश विरोधी गतिविधियों को बढ़ाने और युवाओं के ब्रेनवाश के गंभीर आरोप हैं। • मेडिकल रिकॉर्ड से सच उजागर: सरकारी जे. जे. अस्पताल द्वारा किए गए मनोवैज्ञानिक परीक्षण में किसी भी प्रकार की बड़ी मानसिक विकृति नहीं पाई गई थी। इस रिपोर्ट की आधिकारिक पुष्टि के कारण आरोपी का बीमारी का नाटक तुरंत बेनकाब हो गया। सवाल-जवाब 1. मुंबई की अदालत में आरोपी ने क्या धमकी दी? आरोपी ताबिस सिद्दीकी ने विशेष जज अभय जोगलेकर को धमकी दी कि वह उन्हें और उनके परिवार को देख लेगा। 2. आरोपी ताबिस सिद्दीकी की मानसिक जांच रिपोर्ट में क्या पाया गया? सरकारी जे. जे. अस्पताल की रिपोर्ट के अनुसार आरोपी को कोई बड़ी मानसिक बीमारी नहीं है और वह केवल नाटक कर रहा था। 3. अदालत ने आरोपी की भविष्य की पेशी को लेकर क्या आदेश दिया? अदालत ने निर्देश दिया कि आरोपी को अब व्यक्तिगत रूप से लाने के बजाय केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया जाए। 4. यह मामला किस जांच और किस संगठन से संबंधित है? यह मामला जुलाई 2023 में एनआईए द्वारा महाराष्ट्र में पकड़े गए सात आरोपियों के इस्लामिक स्टेट मॉड्यूल से संबंधित है। https://trendkia.com/crime/mumbai-nia-adalata-men-atnki-aropi-ka-hngama-judge-ko-di-dhamaki-ke-bada-medikala-riporta-ne-kholi-pola-45012 TrendKia — Har trend, sabse pehle.