# नौकरी दिलाने के नाम पर वसूली, संगम विहार के फर्जी कॉल सेंटर से पांच गिरफ्तार

> दिल्ली पुलिस ने संगम विहार के झरोदा माजरा इलाके में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश कर पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, जो बड़ी कंपनियों में नौकरी दिलाने के बहाने बेरोजगार युवाओं से पैसे ऐंठ रहे थे।

**Type:** article · **Category:** अपराध · **Published:** 2026-09-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/crime/naukari-dilane-ke-nama-para-vasuli-sangam-vihar-ke-pharji-kola-sentara-se-pancha-giraphtara-28639 · **Language:** Hindi
**Tags:** दिल्ली कॉल सेंटर ठगी, फर्जी जॉब रैकेट, संगम विहार, टाटा मोटर्स जॉब स्कैम, जॉब है सपोर्ट ऐप, दिल्ली पुलिस एएटीएस, भर्ती धोखाधड़ी

राजधानी दिल्ली में बेरोजगार युवाओं को बड़ी कंपनियों में नौकरी दिलाने का लालच देकर उनकी जेब खाली करने वाला एक गिरोह आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया। नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट की एंटी-ऑटो थेफ्ट स्क्वाड यानी एएटीएस की टीम ने संगम विहार स्थित झरोदा माजरा इलाके में छापा मारकर पांच आरोपियों को धर दबोचा है।

## गुप्त सूचना पर हुई कार्रवाई
यह पूरा मामला उस वक्त सामने आया जब पुलिस को 1 सितंबर को एक भरोसेमंद सूचना मिली कि झरोदा माजरा इलाके में एक कॉल सेंटर से नौकरी के नाम पर वसूली की जा रही है। एएटीएस और नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट की संयुक्त टीम ने पहले इस जानकारी की तस्दीक की और उसके बाद बताए गए पते पर दबिश दी। पुलिस टीम जब वहां पहुंची तो कमरे में कई टेली-कॉलर हेडफोन लगाए लगातार फोन पर उम्मीदवारों से बात करते मिले।

## नौकरी ऐप से जुटाया जाता था डेटा
जांच में पुलिस को पता चला कि आरोपी सीधे उन लोगों को फोन करते थे जो सच में नौकरी ढूंढ रहे थे, और भर्ती प्रक्रिया के अलग-अलग बहानों से उनसे रकम मांगते थे। शुरुआती पूछताछ में यह भी सामने आया कि पूरा खेल एक तय स्क्रिप्ट के हिसाब से चलाया जाता था, ताकि किसी उम्मीदवार को शक न हो। गिरोह के सदस्य फोन पर बताते थे कि नीचे लिखे पदों पर वैकेंसी निकली है

- डेटा एंट्री ऑपरेटर
- डेटा एनालिस्ट
- वेब डिजाइनर
- अकाउंटेंट

इसके बाद उम्मीदवार को बताया जाता था कि उसकी प्रोफाइल शॉर्टलिस्ट हो चुकी है, बस भर्ती की अगली कड़ी शुरू करने के लिए थोड़ी सी रकम जमा करनी होगी। उम्मीदवारों तक पहुंचने के लिए आरोपी “जॉब है सपोर्ट” नाम के मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करते थे, जहां असली नौकरी तलाशने वाले लोग अपनी डिटेल भरकर अलग-अलग कंपनियों में आवेदन करते हैं। पुलिस के मुताबिक गिरोह खासतौर पर उन आवेदकों को चुनता था जिन्होंने टाटा मोटर्स में वैकेंसी के लिए फॉर्म भरा था, और फिर खुद को उसी कंपनी की भर्ती टीम का सदस्य बताकर उन्हें कॉल किया करता था, यह भरोसा दिलाते हुए कि चयन लगभग तय है।

## 499 रुपये से शुरू हुआ खेल, फिर मांगें कभी खत्म न हुईं
ठगी की शुरुआत लगभग हर मामले में सिर्फ 499 रुपये से होती थी, जिसे कूरियर खर्च या रजिस्ट्रेशन फीस का नाम दिया जाता था। रकम इतनी छोटी रखी जाती थी कि उम्मीदवार बिना ज्यादा सोच-विचार के भुगतान कर देते थे। मगर यह पहली किस्त तो बस शुरुआत भर होती थी। एक बार पैसा आते ही आरोपी हर कुछ दिन में कोई नया बहाना गढ़ लेते, कभी दस्तावेज सत्यापन के नाम पर तो कभी रजिस्ट्रेशन पूरा करने के नाम पर अगली किस्त मांग ली जाती। पीड़ित को हर बार यकीन दिलाया जाता कि नौकरी लगभग पक्की हो चुकी है और सिर्फ एक आखिरी भुगतान के बाद ऑफर लेटर हाथ में होगा।

## इनकार करते ही नंबर हो जाता था ब्लॉक
जिस पल कोई उम्मीदवार आगे पैसे देने से मना करता या अपनी असमर्थता जताता, आरोपी तुरंत उसका मोबाइल नंबर ब्लॉक कर हर तरह का नाता तोड़ लेते थे, जिसके बाद पीड़ित के पास न शिकायत का कोई सिरा बचता था और न पैसा वापस पाने का कोई जरिया। छापेमारी में पुलिस ने कॉल सेंटर से कई अहम चीजें बरामद कीं, जिनमें शामिल हैं

- 9 मोबाइल फोन
- एक टैबलेट
- 7 डेबिट कार्ड
- दो बैंक पासबुक
- मोबाइल नंबर दर्ज तीन नोटपैड
- 6,730 रुपये नकद

अब पुलिस इन्हीं बरामद सामानों की कड़ियां जोड़कर यह पता लगाने में जुटी है कि यह नेटवर्क कितने बड़े इलाके में फैला था और अब तक कितने बेरोजगार युवाओं को इसका शिकार बनाया जा चुका है।

## इसका आप पर असर
यह मामला दिखाता है कि नौकरी दिलाने के नाम पर बड़ी कंपनियों का हवाला देकर पैसे मांगने वाले गिरोह अब भी सक्रिय हैं, इसलिए कोई भी "शॉर्टलिस्ट" वाला कॉल आंख मूंदकर भरोसा करने लायक नहीं है।

- **देशभर में:** जो लोग नौकरी के ऐप या पोर्टल पर अपनी डिटेल डालते हैं, उन्हें रजिस्ट्रेशन, कूरियर या डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के नाम पर मांगे जाने वाले पैसों से सावधान रहना चाहिए, क्योंकि असली कंपनियां आवेदन प्रोसेस करने के लिए पैसे नहीं मांगतीं। अगर पहले ही ऐसी कोई रकम दी जा चुकी है, तो पेमेंट की रसीद संभालकर साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
- **दिल्ली में:** संगम विहार और आसपास के इलाकों में पुलिस बरामद फोन, डेबिट कार्ड और नोटपैड के आधार पर और नंबरों की जांच करेगी, जिससे आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। जिन लोगों को हाल में ऐसी संदिग्ध कॉल आई हो, वे नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट पुलिस से संपर्क कर सकते हैं।
- **ऐप इस्तेमाल करने वालों के लिए:** जिन लोगों ने “जॉब है सपोर्ट” ऐप पर टाटा मोटर्स सहित किसी भी कंपनी में आवेदन किया है, उन्हें भर्ती से जुड़े किसी भी कॉल की पुष्टि कंपनी के आधिकारिक माध्यम से ही करनी चाहिए।
- **पेमेंट को लेकर सतर्कता:** चूंकि ठगी सिर्फ 499 रुपये से शुरू होकर बार-बार की मांग में बदल गई, इसलिए एक बार पेमेंट करने के बाद अगर फिर से पैसे मांगे जाएं तो उसे तुरंत खतरे का संकेत समझना चाहिए।

## सवाल-जवाब

### 1. फर्जी कॉल सेंटर कहां चल रहा था?
यह दिल्ली के संगम विहार स्थित झरोदा माजरा इलाके में चल रहा था।

### 2. कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया?
दिल्ली पुलिस की एएटीएस और नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट टीम ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया।

### 3. इस मामले की शुरुआत कैसे हुई?
1 सितंबर को पुलिस को इस फर्जी कॉल सेंटर के बारे में गुप्त सूचना मिली थी।

### 4. आरोपी किन नौकरियों का लालच देते थे?
वे डेटा एंट्री ऑपरेटर, डेटा एनालिस्ट, वेब डिजाइनर और अकाउंटेंट जैसी नौकरियों का ऑफर देते थे।

### 5. पीड़ितों से पहली बार कितने रुपये मांगे जाते थे?
पहली किस्त के तौर पर 499 रुपये मांगे जाते थे, जिसे कूरियर या रजिस्ट्रेशन चार्ज बताया जाता था।

### 6. आरोपी किस कंपनी के आवेदकों को निशाना बनाते थे?
वे खासतौर पर टाटा मोटर्स में नौकरी के लिए आवेदन करने वालों को टारगेट करते थे।

### 7. आरोपी उम्मीदवारों की जानकारी कैसे जुटाते थे?
वे “जॉब है सपोर्ट” नाम के एक ऐप का इस्तेमाल करते थे, जहां उम्मीदवार अपनी डिटेल भरते हैं।

### 8. पेमेंट देने से मना करने पर क्या होता था?
आरोपी तुरंत उम्मीदवार का मोबाइल नंबर ब्लॉक कर देते और संपर्क खत्म कर लेते थे।

### 9. छापे में पुलिस को क्या-क्या बरामद हुआ?
पुलिस को 9 मोबाइल फोन, एक टैबलेट, 7 डेबिट कार्ड, दो बैंक पासबुक, तीन नोटपैड और 6,730 रुपये नकद मिले।

### 10. अब पुलिस क्या कर रही है?
पुलिस बरामद सामान की मदद से यह पता लगा रही है कि नेटवर्क कितना बड़ा था और कितने लोगों को निशाना बनाया गया।

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