नीट 2024 में सीबीआई से मिली क्लीन चिट, फिर बिहार ईओयू के सामने संजीव मुखिया ने कैसे कबूले तीन बड़े पेपर लीक नीट-2024 मामले में सीबीआई से क्लीन चिट पाने वाले संजीव मुखिया ने बिहार ईओयू की पूछताछ में 2017 नीट, 2023 सिपाही भर्ती और बीपीएससी टीआरई-3 पेपर लीक में अपनी भूमिका स्वीकार कर ली है। बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक कराने वाले नेटवर्क के कथित मास्टरमाइंड संजीव मुखिया ने राज्य की जांच एजेंसी के सामने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई की ओर से नीट-2024 मामले में क्लीन चिट पाए संजीव मुखिया ने बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की कड़ी पूछताछ में तीन अलग-अलग बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक करवाने में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है। इस नाटकीय मोड़ के बाद अब देश की शीर्ष जांच एजेंसी की तफ्तीश पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि जिस आरोपी को सीबीआई ने नीट-2024 मामले में बेदाग मान लिया था, उसी ने बिहार की जांच एजेंसी के सामने अपने पुराने गुनाहों का पूरा चिट्ठा खोलकर रख दिया है। सीबीआई की क्लीन चिट के बाद ईओयू की बड़ी सफलता सामान्यतः जब भी देश में किसी बड़े फर्जीवाड़े या राष्ट्रीय स्तर के मामले में निष्पक्ष जांच की आवश्यकता महसूस होती है, तो प्रकरण की कमान सीबीआई को सौंपी जाती है। लाखों छात्रों और अभ्यर्थियों को यह विश्वास रहता है कि केंद्रीय एजेंसी हर स्तर पर निष्पक्ष जांच करके दोषियों को बेनकाब करेगी। हालांकि, बिहार के इस बहुचर्चित पेपर लीक प्रकरण में परिस्थितियां पूरी तरह से अलग नजर आ रही हैं। साल 2024 में हुए नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में सीबीआई ने संजीव मुखिया को क्लीन चिट दे दी थी। इसके विपरीत, जब बिहार की आर्थिक अपराध इकाई ने अपनी जांच आगे बढ़ाई और संजीव मुखिया से कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने बिना किसी झिझक के अपना जुर्म कबूल कर लिया। अब सरकारी और प्रशासनिक गलियारों में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि सीबीआई जिस मास्टरमाइंड के खिलाफ कोई सबूत नहीं जुटा सकी, उससे राज्य की ईओयू ने इतनी आसानी से सच कैसे उगलवा लिया। तीन प्रमुख भर्ती परीक्षाओं में कबूला अपना हाथ ईओयू के अधिकारियों द्वारा की गई लंबी पूछताछ के दौरान संजीव मुखिया ने यह स्वीकार किया कि वह पिछले कई वर्षों से भर्ती परीक्षाओं को प्रभावित करने वाले सिंडिकेट में शामिल था। उसने स्पष्ट रूप से माना कि साल 2017 की नीट (NEET) परीक्षा, साल 2023 की सीएसबीसी (CSBC) सिपाही भर्ती परीक्षा और बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित बीपीएससी शिक्षक बहाली टीआरई-3 (BPSC TRE-3) परीक्षा के पेपर लीक कराने में उसकी सीधी भूमिका थी। इन तीनों बड़ी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने से लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया था। अब बिहार ईओयू इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि इस पूरी साजिश को रचने और अमलीजामा पहनाने में संजीव मुखिया के साथ और कौन-कौन से मददगार, सॉल्वर और प्रभावशाली लोग शामिल थे। कॉलेज में नौकरी, सॉल्वर गैंग और पटना से गिरफ्तारी पेपर लीक सिंडिकेट का यह मास्टरमाइंड संजीव मुखिया बिहार के नालंदा जिले के नगरसौना गांव का निवासी है। वह नालंदा कॉलेज की नूरसराय शाखा में टेक्निकल असिस्टेंट के पद पर कार्यरत था। अपने इस पद और पहुंच का फायदा उठाते हुए उस पर लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक कराने और संगठित सॉल्वर गैंग चलाने के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। नीट-यूजी 2024 में नाम सामने आने के बाद वह लगातार पुलिस को चकमा दे रहा था और लगभग 11 महीने तक फरार रहने में कामयाब रहा। बाद में 24-25 मई 2025 की रात को बिहार पुलिस की ईओयू टीम ने पटना के सगुना मोड़ के पास स्थित एक अपार्टमेंट से उसे दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद हुई इस पूछताछ ने साबित कर दिया है कि वह राज्य में प्रश्नपत्र लीक करने वाले एक व्यापक नेटवर्क का संचालन कर रहा था। इसका आप पर असर इस बड़े खुलासे से बिहार सहित देशभर के लाखों प्रतियोगी अभ्यर्थियों और सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं पर सीधा असर पड़ेगा। • भारत भर के अभ्यर्थियों पर: केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर परीक्षार्थियों के भरोसे पर असर पड़ सकता है। इससे राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में निष्पक्षता और जांच मानकों को लेकर नई बहस छिड़ेगी। • बिहार के परीक्षार्थियों पर: राज्य में पूर्व में प्रभावित हुई भर्ती परीक्षाओं के अभ्यर्थियों को जवाबदेही और पारदर्शिता की उम्मीद जगी है। जांच में प्रगति से भविष्य की परीक्षाओं को सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी। • आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं पर: परीक्षा एजेंसियां प्रश्नपत्रों की छपाई, वितरण और सेंटरों पर सुरक्षा ऑडिट को अधिक कड़ा करेंगी। बायोमेट्रिक और डिजिटल निगरानी व्यवस्था को और सख्त बनाया जाएगा। • कानूनी कार्रवाई पर: सिंडिकेट के अन्य प्रमुख ऑपरेटरों और सॉल्वर गैंग के सदस्यों के खिलाफ शिकंजा कसना तय माना जा रहा है। इससे संगठित गिरोहों पर कार्रवाई तेज होगी। ऐसा क्यों हुआ सीबीआई द्वारा क्लीन चिट दिए जाने के बावजूद बिहार ईओयू की पूछताछ में संजीव मुखिया का कबूलनामा कई व्यवस्थित कारणों और स्थानीय जांच दृष्टिकोण का परिणाम है। • स्थानीय नेटवर्क की गहरी समझ: बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई के पास राज्य के भीतर सक्रिय सॉल्वर गैंग्स और उनके स्थानीय संपर्कों की विस्तृत मैपिंग उपलब्ध थी। इसी जमीनी इनपुट के आधार पर ईओयू संजीव मुखिया से सटीक सवाल पूछने में सफल रही। • पुराने मामलों का डेटा और लिंक: ईओयू के पास 2017 नीट, 2023 सिपाही भर्ती और बीपीएससी टीआरई-3 मामलों के पुरातात्विक साक्ष्य मौजूद थे। जब मुखिया का इन सबूतों से सामना कराया गया, तो उसके पास इनकार का विकल्प नहीं रहा। • जांच के दायरे का अंतर: सीबीआई की जांच मुख्यतः नीट-2024 के विशिष्ट कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर सीमित थी। दूसरी ओर, राज्य एजेंसी ने उसके बहुवर्षीय आपराधिक इतिहास और पूरे सिंडिकेट पर ध्यान केंद्रित किया। सवाल-जवाब 1. संजीव मुखिया कौन है और उस पर क्या आरोप हैं? संजीव मुखिया बिहार के नालंदा जिले का निवासी है और नालंदा कॉलेज में टेक्निकल असिस्टेंट था। उस पर प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक करने और सॉल्वर गैंग चलाने के गंभीर आरोप हैं। 2. ईओयू के सामने संजीव मुखिया ने किन परीक्षाओं के पेपर लीक करने की बात कबूली? उसने 2017 की नीट परीक्षा, 2023 की सीएसबीसी सिपाही भर्ती परीक्षा और बीपीएससी शिक्षक बहाली टीआरई-3 का पेपर लीक कराने की बात स्वीकार की है। 3. नीट-2024 मामले में सीबीआई ने क्या कदम उठाया था? नीट-2024 प्रश्नपत्र लीक मामले में सीबीआई की जांच के दौरान संजीव मुखिया को क्लीन चिट दे दी गई थी। 4. संजीव मुखिया को कहां से और कब गिरफ्तार किया गया था? उसे 24-25 मई 2025 की रात को बिहार ईओयू द्वारा पटना के सगुना मोड़ के पास स्थित एक अपार्टमेंट से गिरफ्तार किया गया था। 5. संजीव मुखिया कितने समय तक पुलिस की पकड़ से दूर रहा? नीट-यूजी 2024 मामले में नाम सामने आने के बाद वह लगभग 11 महीने तक पुलिस की गिरफ्त से फरार रहा था। https://trendkia.com/crime/neet-2024-men-cbi-se-mili-klina-chita-phira-bihar-eou-ke-samane-sanjeev-mukhiya-ne-kaise-kabule-tina-bare-pepara-lika-30807 TrendKia — Har trend, sabse pehle.