ओमान से भारत लाया गया महादेव ऐप का कर्ताधर्ता, भिलाई के मामूली विक्रेता से अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट तक का सफर सल्तनत ऑफ ओमान से प्रत्यर्पित कर भारत लाए गए सौरभ चंद्राकर पर हजारों करोड़ रुपये के अवैध सट्टेबाजी तंत्र, बेनामी खातों और हवाला नेटवर्क के संचालन का शिकंजा कस गया है। अवैध सट्टेबाजी और वित्तीय धोखाधड़ी के अंतरराष्ट्रीय तंत्र से जुड़े बहुचर्चित मामले में केंद्रीय जांच एजेंसियों को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। सल्तनत ऑफ ओमान से कानूनी प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मुख्य अभियुक्त सौरभ चंद्राकर को औपचारिक रूप से भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की हिरासत में सौंप दिया गया है। भिलाई के एक साधारण इलाके से निकलकर संयुक्त अरब अमीरात में अकूत साम्राज्य खड़ा करने वाले इस शख्स पर व्यवस्थित ढंग से गैरकानूनी सट्टा गिरोह चलाने, बेनामी कंपनियों के जरिए रकम की हेराफेरी करने और विदेशी जमीन पर महंगी संपत्तियां खरीदने का दायरा लगातार विस्तृत होता जा रहा है। भिलाई की संकरी गलियों से खाड़ी देशों तक का विस्तार जांच के आधिकारिक विवरण के अनुसार, छत्तीसगढ़ के भिलाई में रहने वाला यह परिवार स्थानीय स्तर पर जूस फैक्ट्री नामक एक छोटी सी दुकान संचालित करता था। इसी प्रतिष्ठान पर काम करते हुए सौरभ चंद्राकर को हर महीने लगभग 15 हजार रुपये की मामूली आय प्राप्त होती थी। सामान्य आर्थिक पृष्ठभूमि से संबंध रखने वाले इस युवक की जिंदगी में बदलाव तब आया, जब उसने सट्टेबाजी के डिजिटल मंचों की दुनिया में कदम रखा। तारीख 16 फरवरी 2022 को उसने देश की सीमाएं छोड़ दीं और खाड़ी क्षेत्र पहुंचकर अपने इस पूरे अनैतिक कारोबार को वैश्विक स्तर पर पुनर्गठित करना शुरू किया। दुबई में पैर जमाने के बाद उसने अपने प्रमुख सहयोगी रवि उप्पल के साथ मिलकर महादेव ऑनलाइन बुक नाम से एक संगठित मंच तैयार किया। दोनों मुख्य संचालकों ने वहां की एक निवेश संस्था के दस्तावेजों में विला को अपना आधिकारिक पता दर्ज कराया। इसके बाद उनकी दिनचर्या में निजी विमानों के सफर, कई देशों के महंगे दौरे और अति विलासितापूर्ण जीवनशैली शामिल हो गई। भारतीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय ने पाया कि इन तमाम विलासिता भरे खर्चों की भरपाई उसी अवैध सट्टे की काली कमाई से की जा रही थी। तकनीकी ढांचा और पैनल वितरण की कार्यप्रणाली प्रवर्तन निदेशालय की जांच पड़ताल में यह तथ्य सामने आया कि महादेव ऐप का संचालन कोई साधारण खेल नहीं, बल्कि पूरी तरह योजनाबद्ध सिंडिकेट था। भारत और संयुक्त अरब अमीरात में फैले करीब 3,200 अलग-अलग पैनलों के जरिए यह तंत्र चौबीसों घंटे सक्रिय रहता था। इन पैनलों के माध्यम से क्रिकेट प्रतियोगिताओं, फुटबॉल लीग, टेनिस टूर्नामेंट और ताश से जुड़े बाजी लगाने वाले खेलों पर दांव लगवाए जाते थे। इस मूल नेटवर्क के अतिरिक्त रेड्डी अन्ना, लोटस365, फेयरप्ले और स्काईएक्सचेंज जैसे अन्य प्लेटफॉर्म भी इसी तंत्र से गहराई से संबद्ध थे। दुबई में बैठे प्रमुख योजनाकार इन पैनलों को संचालित करने के इच्छुक स्थानीय लोगों को विशेष लॉगिन आईडी और पासवर्ड मुहैया कराते थे। किसी नए व्यक्ति को इस अवैध तंत्र से जुड़ने के लिए शुरुआत में ही 15 से 20 लाख रुपये तक की अग्रिम राशि चुकानी पड़ती थी। इसके पश्चात संबंधित पैनल ऑपरेटर स्थानीय स्तर पर कर्मचारियों की भर्ती, जरूरी मोबाइल हैंडसेट, इंटरनेट कनेक्शन और लेनदेन के लिए बैंक खातों का बंदोबस्त करता था। आम दांव लगाने वालों को लुभाने के लिए टेलीग्राम और व्हाट्सएप समूहों का सहारा लिया जाता था, जहां शुरुआती जमा पर आकर्षक प्रोत्साहन और फर्जी लाभ के वादे किए जाते थे। मुनाफे का बंटवारा और धोखेबाजी का गणित इस पूरे गोरखधंधे में वित्तीय नियंत्रण पूरी तरह शीर्ष संचालकों के हाथों में केंद्रित था। हफ्ते दर हफ्ते पैनल स्तर पर होने वाली कुल कमाई का हिसाब-किताब तैयार किया जाता था। जांच रिपोर्ट के अनुसार, पैनलों से निकलने वाले शुद्ध मुनाफे का 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा सीधे दुबई बैठे मास्टरमाइंडों तक भेजा जाता था, जबकि शेष हिस्सा स्थानीय पैनल व्यवस्थापकों को उनके जोखिम और खर्चों के बदले दिया जाता था। व्यवस्थापकों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म के भीतर ऐसे गुप्त तकनीकी अवरोध बना रखे थे कि साधारण उपभोक्ता कभी बड़ा लाभ घर न ले जा सके। जब भी कोई खिलाड़ी सट्टे में बहुत बड़ी राशि जीतने में सफल हो जाता, तो तकनीकी स्तर पर उसकी आईडी को तत्काल ब्लॉक अथवा निलंबित कर दिया जाता था। इस चालाकी के कारण खिलाड़ी अपनी जीती हुई राशि को निकाल पाने में पूरी तरह असमर्थ हो जाते थे और धन सिंडिकेट के भीतर ही अटका रह जाता था। हवाला के रास्ते विदेश भेजी गई अवैध कमाई मनी लॉन्ड्रिंग की पड़ताल में यह बात स्पष्ट हुई कि सट्टेबाजी के जरिए हासिल किए गए अरबों रुपये कभी भी सीधे प्रमुख संचालकों के आधिकारिक खातों में नहीं जाते थे। इसके लिए धोखाधड़ी से तैयार किए गए केवाईसी दस्तावेजों, कमीशन पर किराए पर लिए गए खातों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के नाम पर खोले गए सैकड़ों बैंक खातों की एक लंबी श्रृंखला इस्तेमाल की जाती थी। इन खातों में जमा की गई रकम को तुरंत छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर दिया जाता था। विभाजित की गई धनराशि में से काफी बड़ा हिस्सा स्थानीय स्तर पर नकद निकालकर भूमिगत हवाला नेटवर्क के जरिए विदेशी ठिकानों पर पहुंचा दिया जाता था। एजेंसी के वित्तीय आकलन के अनुसार, इस पूरे संजाल से अपराध से अर्जित कुल संपत्ति लगभग 88 हजार करोड़ रुपये से लेकर 94 हजार करोड़ रुपये तक आंकी गई है। इसमें अकेले मुख्य महादेव ऑनलाइन बुक नेटवर्क से 75 हजार से 80 हजार करोड़ रुपये, स्काईएक्सचेंज के जरिए 11 हजार से 12 हजार करोड़ रुपये तथा लोटस365 मंच से लगभग 2,400 करोड़ रुपये का काला धन जुटाए जाने का अनुमान दर्ज किया गया है। रास अल खैमाह में 200 करोड़ का शाही विवाह सौरभ चंद्राकर के इस अकूत साम्राज्य का सबसे खुला प्रदर्शन फरवरी 2023 में देखने को मिला। संयुक्त अरब अमीरात के रास अल खैमाह में स्थित वाल्डोर्फ एस्टोरिया होटल में 10 से 14 फरवरी तक चले वैवाहिक समारोह में पानी की तरह पैसा बहाया गया। हर्षिता नाम की दुल्हन के साथ संपन्न हुए इस आयोजन पर जांच दल के अनुसार तकरीबन 200 करोड़ रुपये विशुद्ध नकद और हवाला माध्यमों से खर्च किए गए थे। मेहमानों को भारत से लाने के लिए नागपुर से तीन विशेष चार्टर्ड विमानों का परिचालन कराया गया, जबकि मनोरंजन जगत की प्रमुख हस्तियों को लाने ले जाने के लिए कई अन्य निजी जेट तैनात किए गए थे। वित्तीय अभिलेखों की पड़ताल में मुंबई स्थित आर-1 इवेंट्स और वाईपीडी वेडिंग्स नामक कंपनियों के रिकॉर्ड्स की जब्ती की गई। इन जांचों में स्पष्ट हुआ कि इवेंट मैनेजमेंट पर लगभग 112 करोड़ रुपये, पांच सितारा होटल की व्यवस्था पर 42 करोड़ रुपये, अतिथियों के विमान टिकट, आवास और वीजा प्रक्रियाओं पर 37 करोड़ रुपये तथा हवाई जहाजों के किराये पर करीब 7 करोड़ रुपये नकद व अनौपचारिक रास्तों से चुकाए गए थे। फिल्म जगत की हस्तियों और सहयोगियों पर शिकंजा इस भव्य विवाह समारोह में प्रस्तुति देने और शिरकत करने के लिए भारतीय सिनेमा तथा संगीत जगत के अनेक जाने-माने कलाकारों को आमंत्रित किया गया था। इस सिलसिले में टाइगर श्रॉफ, नेहा कक्कड़, विशाल ददलानी, नुसरत भरूचा और सनी लियोनी जैसे कलाकारों के नाम सार्वजनिक चर्चाओं में आए। जांच एजेंसी ने आगे बढ़ते हुए अक्टूबर 2023 में फिल्म व मनोरंजन जगत से जुड़े रणबीर कपूर, कपिल शर्मा, हुमा कुरैशी, हिना खान और श्रद्धा कपूर को समन जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया था। सिंडिकेट के पारिवारिक और आंतरिक ताने-बाने की जांच में सौरभ के बड़े भाई गितेश चंद्राकर की भूमिका भी उजागर हुई। गितेश दुबई में रहकर लेजर बुक, अंबानी बुक, रेड्डी अन्ना और फेयरप्ले जैसे अनुषंगी मंचों का काम देखता था। आधिकारिक समन के बावजूद उपस्थित न होने पर उसके नाम से रखी गई लगभग 59.5 लाख रुपये की संपत्ति कुर्क कर ली गई। इसके अतिरिक्त रवि उप्पल, वित्तीय लेनदेन व विवाह के खर्चों को संभालने वाले विकास छपरिया, नकदी प्रबंधन से जुड़े शुभम सोनी और अतुल अग्रवाल जैसे कई सहयोगियों की पहचान कर उनकी घरेलू व अंतरराष्ट्रीय संपत्तियों पर सीजर के आदेश जारी किए गए। राजनीतिक संरक्षण और कानूनी मुकदमों का क्रम इस बड़े मामले में गैरकानूनी गतिविधियों को बिना किसी प्रशासनिक बाधा के चालू रखने के लिए स्थानीय तंत्र को रिश्वत देने का पहलू भी जांच के दायरे में आया। प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, पुलिस अधिकारियों और राजनीतिक प्रभाव वाले व्यक्तियों को लायजनिंग मनी के तौर पर भारी भरकम रकम पहुंचाई जाती थी। इस संबंध में चंद्रभूषण वर्मा, सतीश चंद्राकर और हवाला कारोबारी बंधुओं अनिल व सुनील दम्मानी के बयानों को रिकॉर्ड पर लिया गया। दिनांक 2 नवंबर 2023 को रायपुर में असिम दास नामक व्यक्ति के कब्जे और उसके वाहन से 5.39 करोड़ रुपये की नकदी बरामद की गई थी। असिम दास ने अपने शुरुआती बयान में इस रकम को तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तक पहुंचाने का दावा किया था, जिसके बाद शुभम सोनी के इलेक्ट्रॉनिक पत्राचार में भी ऐसे वित्तीय लेनदेनों के आरोप सामने आए। इसी आधार पर आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा ने मार्च 2024 में प्राथमिकी दर्ज की, जबकि केंद्रीय जांच ब्यूरो ने दिसंबर 2024 में विधिवत केस दर्ज किया, जिसमें भूपेश बघेल को भी नामजद किया गया। छापेमारी, संपत्ति जब्ती और अदालती प्रक्रिया अगस्त 2023 से जुलाई 2026 की समयावधि के दौरान केंद्रीय जांच एजेंसी ने छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और बिहार सहित अनेक राज्यों में करीब 190 ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान संचालित किए। इन कार्यवाहियों के दौरान नकदी, आभूषण, शेयर बाजार के निवेश और बैंक खातों को मिलाकर कुल 2,014 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां जब्त अथवा फ्रीज की गईं। वर्तमान बाजार मूल्यांकन के अनुसार कुल कुर्क संपत्ति का मूल्य करीब 3,500 करोड़ रुपये बैठता है, जिसमें 1,800 करोड़ की संपत्ति विदेशों में और 1,700 करोड़ की घरेलू संपत्तियां शामिल हैं। दुबई में स्थित 22 चिन्हित अचल संपत्तियों में से 12 संपत्तियां सौरभ और उसके करीबी सहयोगियों की हैं, जिनकी बाजार कीमत 1,500 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस पूरे मामले की एक अन्य महत्वपूर्ण कड़ी विदेशी कंपनियों के जरिए अमेरिकी तकनीकी फर्म एबिक्स इंक के अधिग्रहण की कोशिश से जुड़ी है। स्काईएक्सचेंज के व्यवस्थापक हरी शंकर तिबरेवाल के जरिए करीब 766 करोड़ रुपये की रकम विकास गर्ग से जुड़ी कंपनियों में भेजी गई थी। विकास गर्ग को 14 जुलाई 2026 को हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद वह न्यायिक हिरासत में बंद है और उससे जुड़ी 941 करोड़ की संपत्ति कुर्क की गई है। पूरे प्रकरण में अब तक 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि आरोपपत्रों में कुल 116 लोगों को नामजद किया गया है। रायपुर की विशेष अदालत द्वारा सितंबर 2023 में जारी गैर-जमानती वारंट और नवंबर 2023 के इंटरपोल रेड नोटिस के पश्चात अब भारत में इस मुख्य सूत्रधार के खिलाफ कानूनी शिकंजा पूरी मजबूती से कसा जाएगा। इसका आप पर असर अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी और फर्जी बैंक खातों के जरिए वित्तीय हेराफेरी पर यह अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई सीधे तौर पर आम नागरिकों की डिजिटल और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी है। • भारत में: डिजिटल सट्टेबाजी ऐप के जरिए आम जनता की गाढ़ी कमाई ठगने और फर्जी केवाईसी के जरिए बैंक खातों के दुरुपयोग पर कड़ी निगरानी बढ़ाई जा रही है। किसी भी गैरकानूनी ऐप पर पैसे लगाने या अनजान लोगों को अपने पहचान पत्र व बैंक खाते किराए पर देने से बचें, क्योंकि ऐसा करने पर आप सीधे आपराधिक जांच के घेरे में आ सकते हैं। • छत्तीसगढ़ में: राज्य में वर्षों से फैले अवैध सट्टेबाजी तंत्र और स्थानीय पैनल संचालकों के खिलाफ स्थानीय पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की छापेमारी और तेज होगी। स्थानीय निवासियों को साइबर धोखाधड़ी के प्रति सजग रहने और अवैध सट्टे के प्रलोभन से दूर रहने की सख्त आवश्यकता है। • खाताधारकों के लिए: कम कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते या डिजिटल वॉलेट का विवरण किसी तीसरे व्यक्ति को सौंपना भारी कानूनी संकट पैदा कर सकता है। अगर आपका कोई बैंक खाता किसी अवैध लेन-देन में पाया जाता है, तो खाता सीज होने के साथ कानूनी कार्रवाई भी तय है। • गेमिंग उपयोगकर्ताओं के लिए: अनाधिकृत और गैरकानूनी सट्टेबाजी वेबसाइटों पर दांव लगाना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि जीत की रकम का भुगतान न मिलने पर कोई कानूनी सुरक्षा भी नहीं मिलती। केवल वैध, सरकारी नियमों के अधीन आने वाले प्लेटफॉर्मों की ही पहचान करें और किसी भी अज्ञात ऐप पर निवेश न करें। ऐसा क्यों हुआ यह मामला भारत में अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी के विशाल नेटवर्क, उससे अर्जित काले धन को ठिकाने लगाने के लिए अपनाए गए हथकंडों और अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों के आपसी सहयोग के चलते इस मुकाम तक पहुंचा। • अवैध सट्टेबाजी का संगठित प्रसार: मोबाइल ऐप और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों का दुरुपयोग कर देश भर में हजारों अवैध सट्टा पैनल खड़े किए गए, जिससे साधारण लोगों से अरबों रुपये जुटाए गए। केंद्रीय जांच एजेंसी ने छत्तीसगढ़ पुलिस की प्राथमिक सूचना के आधार पर 6 अक्टूबर 2022 को धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत व्यापक पड़ताल शुरू की थी। • फर्जी खातों और हवाला से रकम की निकासी: एकत्र किए गए सट्टे के धन को छिपाने के लिए शेल कंपनियों, बेनामी बैंक खातों और अंतरराष्ट्रीय हवाला रास्तों का उपयोग किया गया ताकि असली लाभार्थियों की पहचान न हो सके। भारी मात्रा में धन दुबई की कंपनियों, अचल संपत्तियों और घरेलू शेयर बाजार में विदेशी निवेश के नाम पर लगाया गया। • अंतरराष्ट्रीय कानूनी दबाव और रेड नोटिस: रायपुर की विशेष अदालत द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट और इंटरपोल द्वारा नवंबर 2023 में जारी रेड नोटिस के बाद भारतीय एजेंसियों ने विदेशी सरकारों से संपर्क साधा। ओमान सल्तनत के साथ प्रत्यर्पण संधि और कानूनी औपचारिकताओं के सफल क्रियान्वयन ने आरोपी की भारत वापसी संभव बनाई। सवाल-जवाब 1. सौरभ चंद्राकर को किस देश से भारत लाया गया है? सौरभ चंद्राकर को सल्तनत ऑफ ओमान से कानूनी प्रत्यर्पण प्रक्रिया के जरिए भारत लाया गया है। 2. महादेव ऑनलाइन बुक ऐप के जरिए कुल कितने अपराध से अर्जित धन का अनुमान है? जांच एजेंसी के अनुमान के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क से जुड़ी अवैध कमाई लगभग 88 हजार करोड़ रुपये से 94 हजार करोड़ रुपये के बीच है। 3. दुबई में आयोजित शादी पर कितना धन खर्च होने का आरोप है? फरवरी 2023 में रास अल खैमाह में आयोजित विवाह समारोह पर लगभग 200 करोड़ रुपये नकद और अनौपचारिक माध्यमों से खर्च करने का आरोप है। 4. जांच एजेंसियों ने अब तक कितनी संपत्ति जब्त या कुर्क की है? मामले में लगभग 2,014 करोड़ रुपये की नकदी, शेयर और गहने जब्त किए गए हैं, जबकि कुल कुर्क संपत्ति का मौजूदा बाजार मूल्य करीब 3,500 करोड़ रुपये है। https://trendkia.com/crime/oman-se-bharata-laya-gaya-mahadev-aipa-ka-kartadharta-bhilai-ke-mamuli-vikreta-se-antararashtriya-sindiketa-taka-ka-saphara-54657 TrendKia — Har trend, sabse pehle.