पशुओं के सप्लीमेंट को शिशुओं की ड्रॉप्स बताकर बेचने वाले सूरत के मेडिकल स्टोर पर छापा, संचालक पकड़ाया सूरत में जानवरों के लिक्विड फीड सप्लीमेंट को छोटी शीशियों में भरकर बच्चों की लिव.52 ड्रॉप्स के फर्जी लेबल के साथ बेचने का भंडाफोड़ हुआ है। संयुक्त कार्रवाई में दुकान संचालक को हिरासत में लेकर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सूरत शहर में मासूमों की सेहत को गंभीर खतरे में डालने वाले एक बेहद चौंकाने वाले फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। शहर के अठवा क्षेत्र में स्थित एक दवा की दुकान पर जानवरों के इलाज में काम आने वाले लिक्विड सप्लीमेंट को नन्‍हें बच्चों की ड्रॉप्स बनाकर बेचा जा रहा था। इस पूरे गोरखधंधे को स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) क्राइम ब्रांच और खाद्य एवं औषधि विभाग के संयुक्त दल ने अचानक छापा मारकर उजागर किया। गुप्त सूचना के आधार पर मेडिकल स्टोर पर अचानक कार्रवाई सूरत पुलिस आयुक्त वाबांग जामीर के आदेश और SOG डीसीपी राजदीपसिंह नकुम की देखरेख में शहर भर के दवा प्रतिष्ठानों में चल रही अनियमिमताओं पर निगरानी रखी जा रही थी। इसी अभियान के दौरान जांच दल को ठोस जानकारी मिली कि अठवा इलाके में एक मेडिकल स्टोर पर मवेशियों के उपचार वाला तरल पदार्थ छोटी शीशियों में भरकर उस पर बाल चिकित्सा दवा के फर्जी लेबल चिपकाए जा रहे हैं। इस गोपनीय सूचना के मिलते ही SOG के पुलिस निरीक्षक ए.एस. सोनारा तथा पुलिस उपनिरीक्षक आर.एस. भाटिया की अगुवाई में पुलिस और औषधि नियंत्रण अधिकारियों ने बड़ेखा चकला स्थित 'श्री शांतिनाथ मेडिकल स्टोर' पर दबिश दी। 5 लीटर के केन से छोटी बोतलों में रीफिलिंग का खेल छापेमारी की इस कार्रवाई के दौरान दुकान का संचालन कर रहे मोहम्मद साजिद इब्राहिम मुल्ला को अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया। दुकान के भीतर की गई गहन पड़ताल में सामने आया कि वहां जानवरों के लिए निर्मित 'हिमालय लिव.52 प्रोटेक लिक्विड एनिमल फीड सप्लीमेंट' के 5 लीटर वाले बड़े केन रखे हुए थे। आरोपी इसी केन से तरल निकालकर उसे 60 मिलीलीटर की खाली बोतलों में भरता था और उन पर 'लिव.52 ड्रॉप्स 60 ML' के हूबहू दिखने वाले फर्जी स्टीकर लगाकर आम ग्राहकों को बेच देता था। दुकान से जब्त की गई सामग्री दवा नियंत्रण दल और पुलिस ने मौके से जालसाजी में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री को सील कर अपने कब्जे में ले लिया है • लिव.52 ड्रॉप्स (60 मिलीलीटर) का फर्जी लेबल लगी एक भरी हुई बोतल • हिमालय लिव.52 प्रोटेक (एनिमल फीड सप्लीमेंट) का 5 लीटर क्षमता वाला केन • दवा भरने के लिए रखी गईं 60 मिलीलीटर और 100 मिलीलीटर की खाली शीशियां, ढक्कन और स्टॉपर भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए डीसीपी राजदीपसिंह नकुम ने कहा, "पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि घटना की आगे की विस्तृत जांच अठवा पुलिस स्टेशन की टीम कर रही है। साथ ही शहरवासियों से सतर्क रहने का आग्रह किया गया है कि वे कोई भी औषधि खरीदते समय उसके लेबल, बैच नंबर और पैकेजिंग की बारीकी से जांच करें तथा बिना चिकित्सीय परामर्श के कभी दवा न खरीदें। इसका आप पर असर यह घटना सीधे तौर पर बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी दवाओं की सुरक्षा और मेडिकल स्टोरों से खरीददारी में सावधानी बरतने की गंभीर जरूरत को रेखांकित करती है। • भारत में: देश भर के उपभोक्ताओं के लिए यह चेतावनी है कि वे बच्चों की सिरप या ड्रॉप्स खरीदते समय सील और पैकेजिंग की बारीकी से जांच करें। कोई भी दवा केवल अधिकृत और भरोसेमंद दवा विक्रेताओं से ही बिल के साथ खरीदें। • सूरत में: अठवा और आसपास के इलाकों में रहने वाले अभिभावक हाल ही में खरीदी गई दवाइयों की बोतल और लेबल का दोबारा मिलान करें। यदि किसी ने हाल ही में संबंधित दुकान से ऐसी ड्रॉप्स ली हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। • उपभोक्ता अधिकार: पैकेजिंग में किसी भी प्रकार की संदिग्ध प्रिंटिंग या ढीली सील दिखने पर उसकी शिकायत औषधि नियंत्रण विभाग से करें। बिना वैध बैच नंबर और मैन्युफैक्चरिंग विवरण वाली शीशियों को स्वीकार न करें। • दवा दुकानों की जांच: स्थानीय प्रशासन द्वारा खुदरा दवा दुकानों के स्टॉक और लाइसेंस के औचक निरीक्षण तेज किए जा सकते हैं। खुदरा विक्रेताओं को अपनी सप्लाई चेन के बिल दुरुस्त रखने होंगे। ऐसा क्यों हुआ यह गोरखधंधा पशुओं के सस्ते सप्लीमेंट को महंगे बाल चिकित्सा ब्रांड के नाम पर बेचकर अनुचित मुनाफा कमाने के उद्देश्य से किया जा रहा था। • कम लागत में अधिक मुनाफा: मवेशियों के पोषण के लिए मिलने वाले 5 लीटर के बड़े केन की कीमत की तुलना में 60 मिलीलीटर की बाल चिकित्सा शीशियों को ऊंचे दामों पर बेचकर अवैध लाभ कमाने की साजिश रची गई। • ब्रांड की लोकप्रियता का दुरुपयोग: लिव.52 बच्चों के पाचन और लीवर के लिए एक अत्यधिक प्रचलित दवा है, जिस कारण अभिभावक इसके लेबल पर बिना अधिक संदेह किए भरोसा कर लेते हैं। • लापरवाह पैकेजिंग की उपलब्धता: बाजार में खाली प्लास्टिक शीशियां, ढक्कन और हूबहू दिखने वाले नकली स्टीकर आसानी से मिल जाने के कारण इस तरह के अवैध रीफिलिंग रैकेट को अंजाम दिया जा सका। • जांच में खुलासा: पुलिस और औषधि विभाग को प्राप्त सटीक गुप्त सूचना के कारण समय रहते इस दुकान की गतिविधियों को पकड़कर मामले की विस्तृत आपराधिक जांच शुरू की गई। सवाल-जवाब 1. सूरत में मेडिकल स्टोर पर किस बात को लेकर छापा मारा गया? दुकान में पशुओं के 5 लीटर के लिक्विड फीड सप्लीमेंट को छोटी शीशियों में भरकर बच्चों की लिव.52 ड्रॉप्स के फर्जी स्टीकर लगाकर बेचा जा रहा था। 2. यह कार्रवाई सूरत के किस इलाके और किस दुकान पर हुई? यह कार्रवाई अठवा स्थित बड़ेखा चकला में 'श्री शांतिनाथ मेडिकल स्टोर' पर की गई। 3. छापेमारी के दौरान किस व्यक्ति को हिरासत में लिया गया? दुकान के संचालक मोहम्मद साजिद इब्राहिम मुल्ला को जांच दल ने मौके से हिरासत में लिया। 4. मौके से पुलिस और ड्रग्स विभाग को क्या सामान मिला? अधिकारियों को 5 लीटर का एनिमल फीड केन, 60 मिलीलीटर की एक भरी नकली बोतल तथा कई खाली शीशियां, ढक्कन और स्टॉपर मिले। 5. आरोपी के खिलाफ किस कानून के तहत कार्रवाई की गई है? आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है। 6. पुलिस ने आम जनता से क्या सावधानी बरतने की अपील की है? सूरत पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे दवा खरीदते समय लेबल और पैकिंग की जांच करें तथा डॉक्टर की सलाह के बिना दवा न लें। https://trendkia.com/crime/pashuon-ke-saplimenta-ko-shishuon-ki-drops-batakara-bechane-vale-surat-ke-medikala-stora-para-chhapa-snchalaka-pakaraya-47458 TrendKia — Har trend, sabse pehle.