# फर्जी ट्रैफिक चालान मैसेज भेजकर 10 करोड़ रुपये उड़ाने वाला गिरोह पकड़ा गया, पांच गिरफ्तार

> दिल्ली पुलिस ने ट्रैफिक चालान, डिलीवरी वेरिफिकेशन और रिवॉर्ड पॉइंट के नाम पर फर्जी लिंक भेजकर लोगों के बैंक खातों से 10 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

**Type:** article · **Category:** अपराध · **Published:** 2026-10-31 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/crime/pharji-traiphika-chalana-maiseja-bhejakara-10-karora-rupaye-urane-vala-giroha-pakara-gaya-pancha-giraphtara-54030 · **Language:** Hindi
**Tags:** साइबर अपराध, ट्रैफिक चालान, दिल्ली पुलिस, ऑनलाइन ठगी, क्रेडिट कार्ड फ्रॉड, विंगो कैश

मोबाइल फोन पर ट्रैफिक चालान भुगतान के नाम पर आने वाले संदेशों के जरिए बड़े पैमाने पर साइबर ठगी को अंजाम दिया जा रहा था। जब एक पीड़ित ने ऐसे ही एक मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक किया, तो उसके क्रेडिट कार्ड से 2 लाख 21 हजार रुपये निकाल लिए गए। इस घटना के बाद 28 नवंबर 2025 को साइबर पुलिस स्टेशन में पहली प्राथमिकी दर्ज कराई गई। जांच आगे बढ़ने पर यह साधारण धोखाधड़ी का मामला न रहकर एक व्यापक अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क निकला, जिसके शिकार सैकड़ों आम नागरिक बन चुके थे।

## जांच में हुआ 544 शिकायतों और 10 करोड़ की धोखाधड़ी का खुलासा
साइबर थाने में मामला दर्ज होने के बाद जब जांच टीमों ने तकनीकी साक्ष्य जुटाए, तो सामने आया कि ठगों ने आम लोगों को फंसाने के लिए करीब 3,300 फर्जी एसएमएस भेजे थे। जांच के दौरान पूरे देश से इस तरह के तौर-तरीकों से जुड़ी लगभग 544 औपचारिक शिकायतें सामने आईं। पुलिस के अनुसार, यह संगठित सिंडिकेट अब तक लोगों को कुल मिलाकर करीब 10 करोड़ रुपये से अधिक की चपत लगा चुका है। जालसाज लोगों की जल्दबाजी और डिजिटल भुगतान की नियमित आदतों का गलत फायदा उठा रहे थे।

## मैसेज भेजने के लिए अपनाए गए कई तरह के झांसे
साइबर अपराधी अलग-अलग बहानों से लोगों के मोबाइल पर खतरनाक लिंक भेज रहे थे। प्राथमिक तरीका ट्रैफिक चालान का डर दिखाकर तत्काल निपटान का झांसा देना था। चालान के अलावा, पार्सल डिलीवरी वेरिफिकेशन और रिवॉर्ड पॉइंट्स हासिल करने जैसे आकर्षक संदेश भी लोगों को भेजे जा रहे थे। जब भी कोई नागरिक चालान के डर से या डिलीवरी की पुष्टि के लिए मैसेज में मौजूद लिंक पर टैप करता, उसके संवेदनशील वित्तीय विवरण चोरी हो जाते थे और बैंक खाते या क्रेडिट कार्ड से पैसे साफ हो जाते थे।

## ‘विंगो कैश’ ऐप के जरिए ऑटोमैटिक एसएमएस ब्रॉडकास्ट का खेल
तकनीकी जांच के दौरान पता चला कि संदेश भेजने के लिए ‘विंगो कैश’ नाम के एक मोबाइल ऐप्लिकेशन का इस्तेमाल किया जा रहा था। जब कोई आम उपयोगकर्ता इस ऐप पर रिवॉर्ड रिडीम करने का प्रयास करता, तो सिस्टम उसके फोन का नियंत्रण बैकग्राउंड में हासिल कर लेता था। इसके बाद मात्र 30 सेकंड के भीतर उस उपभोक्ता के फोन से अपने आप 9 से 12 फर्जी एसएमएस अलग-अलग नंबरों पर भेज दिए जाते थे। इसके बदले संबंधित ऐप यूजर को प्रति गतिविधि केवल 1 से 3 रुपये का मामूली भुगतान किया जाता था। इस चालाकी से ठग अपने निजी नंबर उजागर किए बिना आम नागरिकों के नंबरों से ही फर्जी लिंक प्रसारित कर रहे थे।

## कुवैत के बैंक और मुंबई की फर्म से जुड़े वित्तीय लेन-देन के तार
अपराध से कमाए गए पैसों की कड़ियों की पड़ताल करने पर वित्तीय लेनदेन का दायरा केवल घरेलू खातों तक सीमित नहीं मिला। जांच एजेंसियों ने पाया कि इस पूरी प्रक्रिया में कुवैत के एक नेशनल बैंक का नाम सामने आया है। इसके साथ ही, मुंबई स्थित श्री बालाजी एंटरप्राइजेज नामक एक व्यावसायिक इकाई के खाते से भारी मात्रा में लेन-देन किए जा रहे थे। विस्तृत पड़ताल में यह तथ्य सामने आया कि श्री बालाजी एंटरप्राइजेज के खाते का इस्तेमाल करते हुए महज तीन दिनों के भीतर 41 हजार से अधिक उपयोगकर्ताओं के बैंक खातों से ट्रांजेक्शन किए गए थे।

## पांच मुख्य आरोपी गिरफ्तार, भारी मात्रा में सामान जब्त
पुलिस ने इस व्यापक नेटवर्क के संचालन में शामिल पांच प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए व्यक्तियों की पहचान मोती सिंह बघेला, हरशपाल, विक्की, विशाल दास वैष्णव और ब्रजेश कुमार के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, ये सभी आरोपी फर्जी बैंक खाते खुलवाने, कंपनियों के जाली दस्तावेज तैयार करने और अवैध धन के हस्तांतरण की प्रक्रिया का संचालन कर रहे थे।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से जांच अधिकारियों ने 15 मोबाइल फोन, एक टैबलेट, 59 डेबिट कार्ड, 52 पासबुक और चेकबुक बरामद की हैं। इसके अतिरिक्त, कंपनियों की 14 मुहरें, 5 पीओएस मशीनें, 8 क्यूआर कोड स्कैनर, एक सोने की चेन और अपराध में इस्तेमाल की गई एक कार भी जब्त की गई है। इस कार्रवाई से 10 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने वाले गिरोह की कार्यप्रणाली पूरी तरह उजागर हो गई है।

## इसका आप पर असर
अज्ञात नंबरों से आने वाले किसी भी चालान या डिलीवरी मैसेज पर क्लिक करने से बैंक खाते खाली हो सकते हैं।

- **भारत में:** यदि आपको किसी अनजान नंबर से चालान या कूरियर का एसएमएस मिले, तो उसमें दिए लिंक पर कभी क्लिक न करें। आधिकारिक सरकारी पोर्टल या परिवहन वेबसाइट पर जाकर ही वाहन के वास्तविक चालान की जांच करें।
- **दिल्ली में:** ट्रैफिक पुलिस से जुड़े किसी भी मैसेज के मामले में केवल आधिकारिक विभाग के माध्यम से सत्यापन करें। संदिग्ध संदेश मिलने पर तत्काल स्थानीय साइबर थाने या राष्ट्रीय हेल्पलाइन पर सूचना दें।
- **ऐप उपयोगकर्ताओं के लिए:** रिवॉर्ड या कैशबैक देने वाले अनधिकृत ऐप्लिकेशन्स को फोन में इंस्टॉल करने से बचें। ऐसे ऐप बैकग्राउंड में आपके मोबाइल से हजारों धोखाधड़ी वाले मैसेज भेज सकते हैं।
- **क्रेडिट कार्ड धारकों के लिए:** अपने कार्ड पर ऑनलाइन ट्रांजेक्शन लिमिट तय रखें और अनचाहे लिंक पर ओटीपी साझा न करें। किसी भी अनधिकृत ट्रांजेक्शन की स्थिति में तुरंत बैंक से संपर्क कर कार्ड ब्लॉक करवाएं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह बड़ा साइबर घोटाला लोगों की जल्दबाजी और तकनीकी कमजोरियों का फायदा उठाकर योजनाबद्ध तरीके से चलाया जा रहा था।

- **सीधा कारण:** पीड़ितों ने बिना जांचे फर्जी एसएमएस के लिंक पर क्लिक कर अपनी संवेदनशील वित्तीय जानकारी दर्ज कर दी थी। इससे जालसाजों को सीधे क्रेडिट कार्ड और बैंक खातों से पैसे निकालने की सुविधा मिल गई।
- **परिस्थितियों का फायदा:** चालान का जुर्माना बढ़ने के डर से लोग संदेश देखते ही तत्काल भुगतान करने का प्रयास करते हैं। ठगों ने आम जनता की इसी जल्दबाजी और ऑनलाइन पेमेंट की नियमित आदत को निशाना बनाया।
- **तकनीकी नेटवर्क:** अपराधियों ने ‘विंगो कैश’ जैसे ऐप का इस्तेमाल कर आम लोगों के फोनों से स्वचालित रूप से हजारों मैसेज ब्रॉडकास्ट किए। इससे प्राथमिक स्तर पर असली अपराधियों के नंबर पहचानना काफी कठिन हो गया।
- **जाली बैंकिंग ढांचा:** सिंडिकेट ने श्री बालाजी एंटरप्राइजेज जैसी फर्जी कंपनियों और विदेशी बैंक खातों के जरिए धन शोधन का ताना-बाना बुन रखा था। इन खातों के माध्यम से चंद दिनों में हजारों ट्रांजेक्शन कर पैसे निकाल लिए गए।

## सवाल-जवाब

### 1. ट्रैफिक चालान के नाम पर ठगी का यह मामला कब दर्ज हुआ था?
एक पीड़ित के क्रेडिट कार्ड से 2 लाख 21 हजार रुपये कटने के बाद 28 नवंबर 2025 को साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

### 2. इस साइबर गिरोह ने अब तक कितने लोगों को और कितने रुपये की चपत लगाई है?
पुलिस जांच में इस नेटवर्क से जुड़ी 544 शिकायतें सामने आई हैं और 10 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की बात पुष्ट हुई है।

### 3. आरोपियों ने फर्जी लिंक भेजने के लिए किस ऐप का इस्तेमाल किया था?
जालसाजों ने ‘विंगो कैश’ नामक ऐप का उपयोग किया, जो यूजर द्वारा रिवॉर्ड रिडीम करते ही 30 सेकंड में 9 से 12 एसएमएस खुद भेज देता था।

### 4. इस मामले में किन-किन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है?
पुलिस ने मोती सिंह बघेला, हरशपाल, विक्की, विशाल दास वैष्णव और ब्रजेश कुमार को गिरफ्तार किया है।

### 5. वित्तीय जांच में किन बैंक खातों और कंपनियों के नाम सामने आए हैं?
जांच में कुवैत के एक नेशनल बैंक और मुंबई स्थित श्री बालाजी एंटरप्राइजेज के खाते का पता चला, जिससे 41 हजार से अधिक खातों में लेनदेन हुआ था।

### 6. आरोपियों के पास से पुलिस ने क्या सामान बरामद किया है?
पुलिस ने 15 मोबाइल फोन, 59 डेबिट कार्ड, 52 पासबुक व चेकबुक, 14 मुहरें, 5 पीओएस मशीनें, 8 क्यूआर स्कैनर, सोने की चेन और एक कार जब्त की है।

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