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  "type": "article",
  "title": "प्रसाद में जहर मिलाकर ली थी 10 लोगों की जान, एलुरु के सीरियल किलर वेल्लंकी सिम्हाद्री को उम्रकैद",
  "summary": "आंध्र प्रदेश के एलुरु में कर्ज चुकाने और संपत्ति हड़पने के लिए साइनाइड वाला प्रसाद खिलाकर दस लोगों की हत्या करने वाले वेल्लंकी सिम्हाद्री को अदालत ने उम्रकैद सुनाई है, जबकि जहर देने वाले साथी को 10 साल जेल हुई।",
  "content": "आंध्र प्रदेश के एलुरु इलाके में आस्था और विश्वास की आड़ में रचे गए एक खौफनाक हत्याकांड के सिलसिले का अंत आखिरकार अदालत के कड़े फैसले के साथ हुआ। लोगों को उनकी तकदीर बदलने का झांसा देकर और भगवान का पवित्र प्रसाद बताकर जानलेवा जहर देने वाले वेल्लंकी सिम्हाद्री को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। अपराध की दुनिया में शिवा साइनाइड के नाम से चर्चित हुए इस शख्स ने महज बीस महीनों के भीतर दस बेगुनाह लोगों को मौत की नींद सुला दिया था। जांच में सामने आया कि उसने अपने शिकारों में जान-पहचान वाले लोगों, दोस्तों और यहां तक कि अपनी सगी दादी और बहन तक को नहीं बख्शा।\n\nप्रॉपर्टी बाजार में बर्बादी और जुर्म की राह\nफरवरी 2018 से पहले की बात करें तो 38 साल का वेल्लंकी सिम्हाद्री रियल एस्टेट के कारोबार में हाथ आजमा रहा था। उसका सपना बड़े रुतबे और अथाह दौलत के साथ राजा जैसी जिंदगी जीने का था। उसने अपनी सारी जमा-पूंजी और भारी कर्ज लेकर जमीन-जायदाद के धंधे में लगा दी। लेकिन बाजार में आई मंदी और गलत फैसलों के चलते उसका सारा पैसा डूब गया। देखते ही देखते वह पूरी तरह कंगाल होकर सड़क पर आ गया और लेनदारों का तकादा लगातार बढ़ने लगा। कर्ज के दलदल से बाहर निकलने और दोबारा रईस बनने की सनक ने उसके दिमाग में एक रूह कंपा देने वाली साजिश को जन्म दिया। उसने तय किया कि वह दूसरों की किस्मत संवारने का ढोंग करेगा और उनकी दौलत हड़प लेगा।\n\nपहली वारदात: 40 लाख रुपए और चांदी की अंगूठी\nसिम्हाद्री ने अपने जानलेवा खेल का पहला दांव 15 फरवरी 2018 को खेला। उसने वल्लभनेनी उमामहेश्वर को अपना पहला निशाना बनाया। उमामहेश्वर को यह भरोसा दिलाया गया कि एक विशेष पूजा और प्रसाद से उनका भाग्य पूरी तरह बदल जाएगा। सिम्हाद्री ने पूजा के बाद उन्हें जो प्रसाद खाने को दिया, उसमें घातक साइनाइड मिला हुआ था। प्रसाद जीभ पर रखते ही उमामहेश्वर तड़पने लगे और कुछ ही पलों में उन्होंने दम तोड़ दिया। इसके बाद सिम्हाद्री मौके से 40 लाख रुपए की नकदी और चांदी की एक अंगूठी समेटकर फरार हो गया। पहली ही वारदात में मिली इतनी बड़ी रकम और बिना किसी रुकावट के बच निकलने की वजह से उसका हौसला बढ़ गया और पुलिस की पकड़ में आने का डर उसके दिल से निकल गया।\n\nपारंपरिक दवा और प्रसाद के नाम पर सिलसिलेवार हत्याएं\nपहले कत्ल के बाद सिम्हाद्री ने इसे एक व्यवस्थित धंधा बना लिया। फरवरी 2018 से लेकर अक्टूबर 2019 के बीच उसने आंध्र प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में कुल 10 लोगों की जान ले ली। वह केवल उन्हीं लोगों को चुनता था, जो पहले से उस पर गहरा भरोसा करते थे। कुछ लोगों को उसने किस्मत चमकाने का प्रसाद दिया, तो कुछ को बहलाया कि यह गुप्त जड़ी-बूटियों से बनी एक चमत्कारी पारंपरिक दवा है। जैसे ही पीड़ित जहर के असर से बेहोश होकर गिरते, वह उनके पास मौजूद सोने-चांदी के सारे आभूषण और नकदी लेकर गायब हो जाता। इस पूरे खूनी खेल का एकमात्र मकसद रियल एस्टेट में बर्बाद हुई अपनी हैसियत को दोबारा पाना और अय्याशी भरी जिंदगी जीना था।\n\nदसवें शिकार ने खोला राज, सीसीटीवी फुटेज से खुला भेद\nसिम्हाद्री एक के बाद एक नौ लोगों को मौत के घाट उतार चुका था, लेकिन उसका दसवां कत्ल ही उसके गुनाहों के अंत का कारण बना। 17 अक्टूबर 2019 को एलुरु के रहने वाले काटी नागराजू संदिग्ध और अचेत अवस्था में पाए गए। नागराजू घटना से ठीक एक शाम पहले अपनी पत्नी से यह कहकर निकले थे कि वह बैंक जा रहे हैं, मगर वे घर वापस नहीं लौटे। जब मामले की पड़ताल शुरू हुई, तो एक अहम सीसीटीवी फुटेज सामने आई जिसमें नागराजू के साथ वेल्लंकी सिम्हाद्री दिखाई दे रहा था। इस सुराग ने जांच की पूरी दिशा सिम्हाद्री की तरफ मोड़ दी। सघन पूछताछ और सबूत जुटाने के बाद नवंबर 2019 में पुलिस ने सिम्हाद्री को गिरफ्तार कर लिया।\n\nघर, गहने और साइनाइड की बरामदगी\nगिरफ्तारी के बाद जब सिम्हाद्री से कड़ाई से पूछताछ हुई तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने माना कि आलीशान लाइफस्टाइल और महंगे शौक पूरे करने के लिए उसने सभी दस हत्याएं की थीं। मारे गए दस लोगों में 7 पुरुष और 3 महिलाएं शामिल थीं। उसने लूटे हुए पैसों से एलुरु में एक बना-बनाया मकान खरीदा था, जबकि दूसरा नया मकान खुद बनवाया था। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से एक प्लास्टिक के डिब्बे में रखा साइनाइड, भारी मात्रा में सोने के आभूषण और 1,63,400 रुपए नकद बरामद किए गए। जांच में यह भी सामने आया कि सिम्हाद्री को यह खतरनाक जहर शेख अमीनउल्लाह बाबू नाम का व्यक्ति लाकर देता था। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बाबू को भी धर दबोचा।\n\nअदालत का फैसला: ताउम्र जेल की सलाखें\nइस पूरे मामले की सुनवाई अदालत में कई सालों तक चली, जहां पुलिस ने ठोस वैज्ञानिक साक्ष्य, बरामद जहर और गवाहों के बयान पेश किए। जनवरी 2026 में अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुनाया। मुख्य आरोपी वेल्लंकी सिम्हाद्री यानी शिवा साइनाइड को दस लोगों की नृशंस हत्या और लूट के जुर्म में उम्रकैद की सजा सुनाई गई। वहीं, हत्या में इस्तेमाल होने वाला जहर सप्लाई करने वाले उसके साथी शेख अमीनउल्लाह बाबू को 10 साल के कठोर कारावास का दंड दिया गया।\n\nइसका आप पर असर\nयह फैसला दिखाता है कि अंधविश्वास और किसी भी परिचित पर आंख मूंदकर भरोसा करना कितना खतरनाक हो सकता है।\n\n• भारत में: यह मामला देश भर के नागरिकों को सचेत करता है कि किसी भी अपरिचित अथवा परिचित व्यक्ति द्वारा दिए गए अज्ञात खाद्य पदार्थ या भस्म को प्रसाद समझकर ग्रहण न करें। लोग चमत्कार और किस्मत चमकाने जैसे भ्रामक दावों में न पड़ें और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।\n• एलुरु और आंध्र प्रदेश में: इस क्षेत्र के लोग अब जहर और रासायनिक पदार्थों की खुली बिक्री को लेकर अधिक सतर्क रहेंगे। स्थानीय प्रशासन को औद्योगिक रसायनों और साइनाइड जैसे जानलेवा पदार्थों के वितरण पर निगरानी के सख्त नियम लागू करने होंगे।\n• वित्तीय सुरक्षा: भारी कर्ज और नुकसान से निपटने के लिए शॉर्टकट या चमत्कारी रास्तों की तलाश करने से बचें। अपनी संपत्ति, नकदी और सोने-चांदी के लेन-देन को हमेशा औपचारिक बैंकिंग माध्यमों से ही अंजाम दें।\n• अपराध नियंत्रण: अदालत द्वारा उम्रकैद और दस साल के कारावास की सजा से कानून व्यवस्था पर आम जनता का भरोसा मजबूत होगा। ऐसे मामलों में कठोर सजा समाज में अपराधियों के लिए कड़ा संदेश देती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह अपराध श्रृंखला रियल एस्टेट कारोबार में हुए भारी आर्थिक नुकसान और आसानी से दौलत हासिल करने की अंधी सनक के कारण शुरू हुई थी।\n\n• आर्थिक तंगी और कर्ज: सिम्हाद्री ने 2018 से पहले रियल एस्टेट में भारी निवेश किया था, लेकिन पूरा पैसा डूब जाने से वह कंगाल हो गया था। लेनदारों के दबाव और अपनी टूटी वित्तीय स्थिति को रातों-रात सुधारने के लिए उसने अमीर बनने का खूनी रास्ता चुना।\n• विश्वास का फायदा और अंधविश्वास: आरोपी ने केवल उन्हीं लोगों को निशाना बनाया जो पहले से उसे जानते थे और उसकी बातों पर यकीन करते थे। उसने लोगों की धार्मिक आस्था और किस्मत संवारने की लालसा का फायदा उठाकर उन्हें साइनाइड मिला प्रसाद खिलाया।\n• साइनाइड की आसान उपलब्धता: अपराध को अंजाम देने में सबसे बड़ी कड़ी जहर की आपूर्ति थी, जो उसे शेख अमीनउल्लाह बाबू के जरिए आसानी से मिल जाती थी। घातक रसायनों पर निगरानी की कमी ने उसे लगातार बीस महीनों तक बेखौफ होकर दस हत्याएं करने का मौका दिया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. वेल्लंकी सिम्हाद्री कौन है और उसे किस नाम से जाना जाता था?\nवेल्लंकी सिम्हाद्री आंध्र प्रदेश के एलुरु का रहने वाला एक सीरियल किलर है, जिसे अपराध जगत में 'शिवा साइनाइड' के नाम से जाना जाता था।\n\n2. सिम्हाद्री ने कुल कितने लोगों की हत्या की और शिकारों में कौन शामिल थे?\nसिम्हाद्री ने कुल 10 लोगों की हत्या की, जिनमें 7 पुरुष और 3 महिलाएं शामिल थीं। उसने अपनी सगी दादी और बहन की भी जान ले ली थी।\n\n3. सिम्हाद्री लोगों को कैसे मारता था?\nवह लोगों को किस्मत चमकाने का झांसा देकर भगवान का प्रसाद या चमत्कारी पारंपरिक दवा बताकर साइनाइड खिला देता था।\n\n4. पुलिस ने सिम्हाद्री को कैसे और कब पकड़ा?\n17 अक्टूबर 2019 को काटी नागराजू की हत्या के बाद पुलिस को मिले सीसीटीवी फुटेज में सिम्हाद्री उनके साथ दिखा था, जिसके आधार पर नवंबर 2019 में उसे गिरफ्तार किया गया।\n\n5. अदालत ने सिम्हाद्री और उसके साथी को क्या सजा सुनाई?\nजनवरी 2026 में अदालत ने वेल्लंकी सिम्हाद्री को उम्रकैद और साइनाइड सप्लाई करने वाले शेख अमीनउल्लाह बाबू को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।",
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  "category": "अपराध",
  "publishedAt": "2026-09-19",
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    "वेल्लंकी सिम्हाद्री",
    "शिवा साइनाइड",
    "एलुरु क्राइम",
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    "उम्रकैद की सजा"
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