{
  "type": "article",
  "title": "प्रियंका गांधी के नाम पर एआई से हो रही ठगी, वीडियो बनाकर मांगे जा रहे पैसे",
  "summary": "प्रियंका गांधी वाड्रा की फर्जी एआई वीडियो और आवाज का इस्तेमाल कर साइबर ठग लोगों को निवेश के नाम पर ठगने की कोशिश कर रहे हैं। इस संबंध में वायनाड सांसद के कार्यालय ने इंस्टाग्राम पर स्कैम अलर्ट जारी किया है।",
  "content": "वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के नाम और उनकी पहचान का इस्तेमाल कर साइबर ठगों द्वारा लोगों को ठगे जाने का नया मामला सामने आया है। ठगों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का सहारा लेते हुए उनकी हूबहू आवाज और फोटो से फर्जी वीडियो तैयार किए हैं। इन वीडियो के जरिए लोगों को लुभावनी निवेश योजनाओं में पैसे लगाने के लिए उकसाया जा रहा है। इस पूरी गतिविधि से प्रियंका गांधी बेहद चिंतित हैं और उनके कार्यालय ने इस पर सख्त कदम उठाते हुए गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक औपचारिक 'स्कैम अलर्ट' जारी किया है।\n\nसोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है जाल\nकार्यालय की ओर से स्पष्ट किया गया है कि व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम और तमाम अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रियंका गांधी की एआई जनरेटेड फर्जी तस्वीरों और वीडियो को धड़ल्ले से वायरल किया जा रहा है। इन भ्रामक वीडियो में आम जनता को अलग-अलग माध्यमों में पूंजी निवेश करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। कार्यालय ने जनता को चेताया है कि ये सभी वीडियो पूरी तरह से धोखाधड़ी का हिस्सा हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे ऐसे किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें, किसी भी योजना में निवेश से बचें और इस प्रकार के आपत्तिजनक पोस्ट को तुरंत रिपोर्ट और ब्लॉक करें।\n\n \n\nपहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले\nइस तरह की तकनीकी धोखाधड़ी का शिकार देश के अन्य बड़े चेहरे भी हो चुके हैं। बीते महीने अगस्त में देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम पर भी एक फर्जी वीडियो प्रसारित किया गया था, जिसका सरकार की तरफ से तुरंत खंडन किया गया था। उस फर्जी वीडियो में यह दावा पेश किया गया था कि महज बाईस हजार रुपए के शुरुआती निवेश के जरिए प्रत्येक सप्ताह साढ़े पांच लाख रुपए तक की भारी कमाई की जा सकती है। यह असल में एक फर्जी निवेश योजना का प्रचार था, जिसकी सच्चाई सामने आने पर बड़ा खुलासा हुआ। केंद्र सरकार की पीआईबी फैक्ट चेक यूनिट ने अपनी जांच में इस बात की पुष्टि की थी कि वह वीडियो पूरी तरह से फर्जी था और उसे एआई तकनीक की मदद से गढ़ा गया था।\n\nसुरक्षा एजेंसियों की चेतावनी और बढ़ती चिंता\nपीआईबी ने तब भी यह बात साफ की थी कि वित्त मंत्री ने कभी भी ऐसी किसी भी निवेश योजना या वित्तीय प्लेटफॉर्म का समर्थन नहीं किया है। जनता से बार-बार यह अनुरोध किया जाता है कि वे ऐसे शातिर जालसाजों के झांसे में न आएं जो झूठी और फर्जी योजनाओं का लालच देकर लोगों की गाढ़ी कमाई हड़पने की फिराक में रहते हैं। आधुनिक दौर में साइबर ठग लोगों का विश्वास जीतने के लिए नित नए और उन्नत तरीके अपना रहे हैं। देश के बड़े राजनेताओं और प्रतिष्ठित हस्तियों के चेहरे और आवाज की क्लोनिंग करके लोगों को आसानी से विश्वास में लिया जा रहा है और उनसे लाखों तथा करोड़ों रुपए की ठगी को अंजाम दिया जा रहा है।\n\nसुरक्षित रहने के लिए क्या कदम उठाएं\nसाइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का यह कहना है कि यदि कोई भी वीडियो या संदेश आपको अत्यधिक और रातों-रात मुनाफे का लालच दे रहा है, तो आपको तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। किसी भी अज्ञात या अनजान लिंक पर क्लिक करने से हमेशा बचना चाहिए और किसी भी वित्तीय निवेश योजना में अपनी पूंजी लगाने से पहले उसकी प्रामाणिकता की पूरी जांच अवश्य कर लेनी चाहिए। यदि सरकार या देश के किसी भी नेता की तरफ से कोई भी आधिकारिक योजना लाई जाती है, तो उसकी पुष्टि हमेशा संबंधित आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ही करनी चाहिए।\n\nइसका आप पर असर\nयह घटना दिखाती है कि कैसे एआई तकनीक आम आदमी की सुरक्षा और गाढ़ी कमाई के लिए बड़ा खतरा बन रही है।\n\n• भारत में: देश भर के डिजिटल उपयोगकर्ताओं को अब सोशल मीडिया पर दिखने वाले किसी भी बड़े नेता के निवेश वाले विज्ञापनों पर आंख मूंदकर भरोसा करने से बचना चाहिए।\n• वायनाड और केरल में: स्थानीय निवासियों और विशेषकर क्षेत्रीय मतदाताओं को सांसद के नाम पर वायरल हो रहे ऐसे किसी भी फर्जी वीडियो से सतर्क रहने की जरूरत है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nसाइबर ठगों द्वारा इस तरह के कारनामों को अंजाम देने के पीछे उन्नत तकनीकों का दुरुपयोग और लोगों का नेताओं के प्रति सहज विश्वास मुख्य वजह है।\n\n• एआई तकनीक का विकास: डीपफेक तकनीक और वॉयस क्लोनिंग टूल की आसान उपलब्धता के कारण ठग अब किसी भी प्रसिद्ध चेहरे की हूबहू नकल तैयार कर लेते हैं।\n• आसान वित्तीय लाभ का लालच: ठग ऐसी योजनाएं बनाते हैं जो लोगों को कम समय में बड़ा मुनाफा कमाने का झांसा देती हैं, जिससे लोग आसानी से फंस जाते हैं।\n• बढ़ती साइबर आपराधिक गतिविधियां: अपराधी लगातार नए तरीकों की खोज में रहते हैं ताकि कानून की पकड़ से बचते हुए ऑनलाइन माध्यमों से ठगी की जा सके।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. प्रियंका गांधी के नाम पर किस तरह का स्कैम फैलाया जा रहा है?\nसाइबर ठग एआई की मदद से उनके नाम और आवाज वाले फर्जी वीडियो बनाकर लोगों से निवेश करने की मांग कर रहे हैं।\n\n2. इस स्कैम की जानकारी सबसे पहले किसने और कहां सार्वजनिक की?\nप्रियंका गांधी के कार्यालय ने गुरुवार को इंस्टाग्राम पर एक आधिकारिक स्कैम अलर्ट जारी कर इसकी जानकारी दी।\n\n3. इससे पहले किस बड़े नेता के नाम पर ऐसा फर्जी वीडियो सामने आया था?\nअगस्त महीने में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम पर भी इसी तरह का एआई फर्जी वीडियो सामने आया था।\n\n4. पीआईबी की फैक्ट चेक यूनिट ने पिछली घटना के बारे में क्या बताया था?\nपीआईबी ने स्पष्ट किया था कि वित्त मंत्री ने किसी भी निवेश योजना का समर्थन नहीं किया है और वह वीडियो पूरी तरह फर्जी था।\n\n5. आम नागरिक इस तरह के साइबर फ्रॉड से कैसे बच सकते हैं?\nकिसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें, पैसे का निवेश करने से पहले सच्चाई जांच लें और आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा करें।",
  "url": "https://trendkia.com/crime/saibara-fraudsters-use-ai-to-impersonate-priyanka-gandhi-in-investment-scam-30733",
  "category": "अपराध",
  "publishedAt": "2026-09-10",
  "tags": [
    "प्रियंका गांधी",
    "एआई स्कैम",
    "साइबर फ्रॉड",
    "डीपफेक",
    "वायनाड",
    "इंस्टाग्राम"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}