# समस्तीपुर में जिस युवक के मर्डर केस में चार लोग गए थे जेल, वही रवि शंकर नोएडा में मिला जीवित

> समस्तीपुर के रोसड़ा इलाके में चार साल पहले दर्ज मर्डर केस में बड़ा मोड़ आया है, जहां कथित तौर पर मृत युवक नोएडा में फल की दुकान पर सही सलामत काम करता पाया गया।

**Type:** article · **Category:** अपराध · **Published:** 2026-10-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/crime/samastipur-men-jisa-yuvaka-ke-mardara-kesa-men-chara-loga-gae-the-jela-vahi-ravi-shankar-noida-men-mila-jivita-43771 · **Language:** Hindi
**Tags:** समस्तीपुर, रोसड़ा, नोएडा, बिहार पुलिस, मर्डर केस, रवि शंकर, गलत गिरफ्तारी

बिहार के समस्तीपुर जिले अंतर्गत रोसड़ा थाना क्षेत्र में चार साल पुराने एक मर्डर केस की पूरी जांच पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जिस दिव्यांग युवक की हत्या और शव गायब करने के आरोप में पुलिस ने चार लोगों को सलाखों के पीछे भेज दिया था, वह व्यक्ति राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के नोएडा में जीवित बरामद हुआ है। स्थानीय ग्रामीण जब उस युवक को पहचान कर सीधे थाने लेकर पहुंचे, तो वहां मौजूद पुलिस पदाधिकारी और कर्मी हक्के-बक्के रह गए। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के सामने आने के बाद समूचे इलाके में सनसनी फैल गई है और तत्कालीन पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

## जुलाई 2022 में दर्ज हुई थी हत्या और शव गायब करने की शिकायत
यह पूरा मामला रोसड़ा थाना क्षेत्र स्थित लालपुर गांव से जुड़ा है। जुलाई 2022 के दौरान लालपुर के रहने वाले मदन यादव ने स्थानीय पुलिस स्टेशन में एक लिखित आवेदन दिया था। इस आवेदन में उन्होंने अपने 20 वर्षीय दिव्यांग तथा मूक-बधिर पुत्र रवि शंकर कुमार की कथित हत्या का आरोप लगाया था। पिता की ओर से दी गई शिकायत में कहा गया था कि सहदेव पंडित, मुकेश पंडित और दिनेश पंडित उनके बेटे से जेसीबी, ट्रैक्टर और आम के बगीचे में जबरन काम कराते थे। शिकायत में आगे यह दावा किया गया था कि काम के दौरान ट्रैक्टर पलटने के चलते रवि शंकर की जान चली गई, जिसके बाद आरोपियों ने साक्ष्य छुपाने के मकसद से शव को कहीं गायब कर दिया। इस मामले में ट्रैक्टर के चालक छोटू महतो को भी नामजद अभियुक्त बनाया गया था।

## तीन आरोपियों की गिरफ्तारी और एक का अदालत में समर्पण
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सहदेव पंडित, मुकेश पंडित और ट्रैक्टर चालक छोटू महतो को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। वहीं चौथे नामजद आरोपी दिनेश पंडित ने कानूनी दबाव के बाद अदालत में सरेंडर कर दिया था। इस प्रकार चार लोगों को एक ऐसे मर्डर केस के सिलसिले में जेल की सजा भुगतनी पड़ी, जिसकी बुनियादी सच्चाई अब पूरी तरह उलटी साबित होती दिख रही है। करीब चार वर्षों तक सभी यह मानते रहे कि रवि शंकर की मौत हो चुकी है, लेकिन हाल ही में सामने आई एक तस्वीर ने पूरे मामले का रुख पलट दिया।

## नोएडा में फल की दुकान पर अचानक हुई युवक की पहचान
इस पूरे मामले में नाटकीय मोड़ 2 अक्टूबर की दोपहर को आया। लालपुर गांव का ही रहने वाला एक अन्य युवक आकाश कुमार मजदूरी के सिलसिले में नोएडा में रहता है। 2 अक्टूबर को दोपहर करीब तीन बजे आकाश बाल कटवाने के लिए सैलून की तरफ जा रहा था। उसी दौरान रास्ते में एक फल की दुकान के पास उसकी नजर वहां काम कर रहे एक लड़के पर पड़ी। ध्यान से देखने पर आकाश ने पाया कि वह कोई और नहीं बल्कि लालपुर का वही रवि शंकर कुमार है, जिसे चार साल पहले मरा हुआ मान लिया गया था। आकाश ने बिना देर किए इस बात की सूचना अपने साथियों और गांव की पंचायत के मुखिया को दी। इसके बाद ग्रामीणों ने उस युवक को अपने संरक्षण में लिया और समस्तीपुर स्थित रोसड़ा थाने लेकर पहुंचे।

## ग्रामीणों का आक्रोश और तत्कालीन जांच अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
जैसे ही रवि शंकर के जीवित वापस लौटने की खबर गांव और आसपास के क्षेत्रों में फैली, सैकड़ों की तादाद में आक्रोशित ग्रामीण रोसड़ा थाना परिसर में जमा हो गए। ग्रामीणों का सीधा कहना है कि जब रवि शंकर पूरी तरह जीवित है, तो चार साल पहले किस आधार पर हत्या की प्राथमिकी दर्ज हुई और किन सबूतों के सहारे चार बेकसूर लोगों को जेल भेज दिया गया। ग्रामीणों ने इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग रखी है। इसके साथ ही ग्रामीणों ने उस समय तैनात रहे तत्कालीन थानाध्यक्ष, केस के जांचकर्ता और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी यानी डीएसपी की भूमिका की गहन जांच कर उनके खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई है।

## पहचान और पुराने रिकॉर्ड्स का पुलिस सत्यापन जारी
थाने में युवक की मौजूदगी के बाद रोसड़ा पुलिस अब कानूनी पेचीदगियों को सुलझाने में जुटी है। पुलिस अधिकारी बरामद युवक की पहचान, शारीरिक पहचान चिह्नों और वर्ष 2022 में दर्ज कांड संख्या से जुड़े सभी दस्तावेजों का सत्यापन कर रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरी जांच पड़ताल और विधिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही औपचारिक रूप से यह स्पष्ट किया जाएगा कि नोएडा में मिला शख्स वही रवि शंकर है अथवा नहीं, और 2022 में दर्ज कराए गए मर्डर केस के पीछे की वास्तविक सच्चाई क्या थी। मुजफ्फरपुर जिले में भी पूर्व में इसी तरह का मामला सामने आ चुका है, जहां चार साल पहले मृत घोषित युवक अपने प्रेम प्रसंग की साजिश के बाद खुद थाने में जीवित हाजिर हुआ था।

## इसका आप पर असर
यह घटना दर्शाती है कि पुलिस जांच में लापरवाही किसी भी निर्दोष नागरिक के जीवन को वर्षों तक जेल की सलाखों के पीछे धकेल सकती है।

- **भारत में:** किसी भी आपराधिक मामले में केवल बयान के आधार पर नहीं बल्कि पुख्ता फॉरेंसिक और वैज्ञानिक साक्ष्यों के बाद ही गिरफ्तारी सुनिश्चित करने की कानूनी मांग तेज हो सकती है। आम नागरिकों के लिए यह समझना जरूरी है कि झूठे आरोप साबित होने पर कानूनी मदद और मुआवजे के प्रावधान मौजूद हैं।
- **समस्तीपुर में:** रोसड़ा और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर जनता का भरोसा बहाल करने के लिए विभाग को कड़ी जांच करनी होगी। गलत तरीके से जेल भेजे गए चार आरोपियों और उनके परिवारों को अब अपने कानूनी अधिकारों और मानहानि के विकल्पों पर आगे बढ़ना होगा।
- **मजदूरों और प्रवासियों के लिए:** अन्य राज्यों में लापता या मूक-बधिर लोगों के मिलने पर तुरंत स्थानीय प्रशासन और परिजनों से संपर्क साधने का यह एक उपयोगी उदाहरण है। परिजनों को अपने दिव्यांग सदस्यों के पहचान पत्र और दस्तावेज हमेशा अद्यतन रखने चाहिए।
- **न्यायिक प्रणाली पर प्रभाव:** बिना शव बरामद किए केवल संदेह के आधार पर दर्ज होने वाले हत्या के मामलों में अदालतों और जांच एजेंसियों की जवाबदेही तय होगी। जांचकर्ताओं द्वारा की गई गंभीर चूक पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय दंड का रास्ता खुल सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह घटना प्राथमिक स्तर पर बिना पर्याप्त साक्ष्यों और बिना शव बरामद किए जल्दबाजी में हत्या का केस दर्ज करने और गिरफ्तारी करने के कारण घटी।

- **अपुष्ट शिकायत पर अंधाधुंध कार्रवाई:** जुलाई 2022 में मदन यादव द्वारा अपने मूक-बधिर बेटे की मौत और शव गायब करने की शिकायत दर्ज कराने पर पुलिस ने बिना शव के सत्यापन के चार लोगों को जेल भेज दिया। जांचकर्ताओं ने यह सत्यापित नहीं किया कि कथित मृतक वास्तव में मारा गया था या केवल लापता हुआ था।
- **युवक का घर छोड़कर चले जाना:** 20 वर्षीय दिव्यांग युवक रवि शंकर किसी तरह समस्तीपुर से भटककर या रोजी-रोटी की तलाश में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के नोएडा पहुंच गया। वहां वह एक फल की दुकान पर सामान्य रूप से काम करने लगा, जबकि उसके पैतृक गांव में उसे मरा हुआ मान लिया गया था।
- **संयोगवश हुई पहचान:** गांव के ही एक परिचित आकाश कुमार द्वारा नोएडा में फल की दुकान पर रवि शंकर को अचानक देखे जाने से यह सच्चाई बाहर आई। अगर आकाश उस समय सैलून जाने के रास्ते में फल की दुकान पर नहीं पहुंचता, तो यह मामला अनसुलझा ही रह जाता।
- **पूर्व में भी घटी समान घटनाएं:** बिहार के मुजफ्फरपुर में भी पूर्व में इसी तरह का मामला सामने आया था जहां चार साल पहले मरा घोषित हुआ युवक बाद में जीवित मिला था। पुलिस का कहना है कि वर्तमान मामले में भी युवक की औपचारिक शिनाख्त और पुराने आरोपों की सत्यता की जांच अभी जारी है।

## सवाल-जवाब

### 1. रवि शंकर कुमार का मामला क्या है?
समस्तीपुर के रोसड़ा के रहने वाले रवि शंकर की 2022 में कथित हत्या के आरोप में चार लोगों को जेल भेजा गया था, लेकिन चार साल बाद वह नोएडा में जीवित मिला है।

### 2. रवि शंकर की पहचान नोएडा में कैसे हुई?
उनके ही गांव के आकाश कुमार ने 2 अक्टूबर को दोपहर करीब 3 बजे सैलून जाते समय एक फल की दुकान पर रवि शंकर को काम करते हुए पहचान लिया।

### 3. इस मामले में किन लोगों को आरोपी बनाया गया था?
रवि शंकर के पिता ने सहदेव पंडित, मुकेश पंडित, दिनेश पंडित और ट्रैक्टर चालक छोटू महतो पर हत्या और शव गायब करने का आरोप लगाया था।

### 4. अब स्थानीय ग्रामीण पुलिस से क्या मांग कर रहे हैं?
ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और निर्दोषों को जेल भेजने वाले तत्कालीन थानाध्यक्ष, जांच अधिकारी और डीएसपी पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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