शाहजहांपुर के भोले बाबा मंदिर में दो साधुओं की संदिग्ध मौत, लकड़ी की चिता पर जलाए गए शव शाहजहांपुर के सूथा गांव स्थित भोले बाबा मंदिर में दो साधुओं के शव जलते मिलने से सनसनी फैल गई। पुलिस ने मंदिर पर कब्जे के आरोप में मृतक साधु के भतीजे को हिरासत में लिया है। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जहां एक मंदिर परिसर के भीतर दो साधुओं के शव संदिग्ध परिस्थितियों में जलते हुए पाए गए। लकड़ी की चिता बनाकर दोनों शवों को आग के हवाले किया गया था, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। सुबह के वक्त मंदिर परिसर से भारी मात्रा में काला धुआं उठता देखकर जब आसपास के ग्रामीण दौड़कर मौके पर पहुंचे, तो वहां का भयावह दृश्य देखकर हर कोई दंग रह गया। एक साधु का पार्थिव शरीर लपटों में घिरकर जल रहा था, जबकि पास ही पड़े दूसरे साधु का शरीर लगभग पूरी तरह जलकर कंकाल का रूप ले चुका था। दोनों के शव एक-दूसरे से करीब 10 मीटर की दूरी पर पड़े हुए थे। घटनास्थल का खौफनाक मंजर और ग्रामीणों की कोशिशें यह पूरी घटना खुदागंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सूथा गांव की है। गांव की मुख्य आबादी से लगभग एक किलोमीटर दूर भोले बाबा मंदिर स्थित है। गुरुवार सुबह करीब 7 बजे जब स्थानीय निवासियों ने मंदिर की तरफ से अचानक धुआं निकलता देखा, तो किसी अनहोनी की आशंका के चलते वे तुरंत मंदिर की ओर दौड़े। वहां पहुंचते ही लोगों ने देखा कि मंदिर परिसर में आग धधक रही थी। ग्रामीणों ने बिना देर किए तुरंत आग बुझाने का भरसक प्रयास किया, परंतु जब तक लपटों पर काबू पाया जा सका, तब तक दोनों साधुओं की सांसें थम चुकी थीं। प्रारंभिक आशंकाओं के अनुसार, हत्या के उपरांत साक्ष्य मिटाने और पहचान छुपाने के इरादे से ही दोनों शवों को लकड़ियों के ढेर पर रखकर जलाया गया था। मंदिर और दोनों साधुओं की पृष्ठभूमि भोले बाबा मंदिर में 70 वर्षीय गोपाल दास और उनके शिष्य 60 वर्षीय बाबा बिहारी दास एक साथ रहकर पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान संभालते थे। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, गोपाल दास मूल रूप से अजीजगंज मोहल्ले के निवासी थे और एक जाने-माने कथावाचक के रूप में जाने जाते थे। वे पिछले लगभग 20 वर्षों से इसी भोले बाबा मंदिर में रहकर धर्म-कर्म की गतिविधियां कर रहे थे। वहीं दूसरे साधु बिहारी दास स्थानीय सूथा गांव के ही रहने वाले थे। बिहारी दास अपने पांच भाइयों में दूसरे नंबर पर थे और उन्होंने विवाह नहीं किया था। वे पिछले करीब 10 सालों से मंदिर सेवा से जुड़े थे। पहले वे गांव में स्थित ठाकुर जी मंदिर में निवास करते थे, लेकिन लगभग एक महीने पहले ही उन्होंने गोपाल दास को अपना गुरु मानकर उनका शिष्यत्व ग्रहण किया था। इसके बाद से दोनों साधु भोले बाबा मंदिर में ही एक साथ रह रहे थे। मंदिर के संरक्षक की तहरीर और भतीजे पर आरोप मंदिर के संरक्षक शिवकुमार सिंह ने इस गंभीर मामले में पुलिस को औपचारिक तहरीर दी है। तहरीर में आरोप लगाया गया है कि मंदिर परिसर पर अवैध कब्जा करने की बदनीयती से इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया गया। संरक्षक ने गांव के ही रहने वाले सुमित सिंह नाम के 35 वर्षीय युवक पर मंदिर में आग लगाने और साधुओं की जान लेने का सीधा आरोप लगाया है। विशेष बात यह है कि आरोपी सुमित सिंह मृतक साधु बिहारी दास का सगा भतीजा है। सुमित शादीशुदा है और उसके परिवार में पत्नी नीलम के अलावा 10 साल के दो जुड़वा बच्चे हैं, जिनमें एक बेटा और एक बेटी शामिल हैं। पुलिस की शुरुआती जांच-पड़ताल में यह बात भी निकलकर सामने आई है कि सुमित मानसिक बीमारी से ग्रस्त है और वर्तमान में उसका चिकित्सकीय उपचार चल रहा है। फोरेंसिक जांच, साक्ष्य संकलन और पुलिस की कार्रवाई सूचना प्राप्त होते ही स्थानीय पुलिस का उच्चाधिकारी दल फौरन वारदात वाली जगह पर पहुंच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी यानी FSL की टीम को भी तुरंत मौके पर बुलाया गया। FSL विशेषज्ञों ने घटनास्थल का चप्पा-चप्पा छाना, साक्ष्य एकत्रित किए और जरूरी नमूने सील किए। इसके साथ ही इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को भी बारीकी से खंगाला जा रहा है ताकि घटना के वक्त मंदिर में आने-जाने वाले संदिग्धों की पहचान की जा सके। पुलिस ने मुख्य आरोपी सुमित सिंह को अपनी हिरासत में ले लिया है और उससे गहन पूछताछ की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ होगी मौत की असली वजह गांव के स्तर पर इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं और अलग-अलग बातें भी कही जा रही हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मंदिर संरक्षक की लिखित तहरीर के आधार पर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर लिया गया है। दोनों साधुओं के शवों को कब्जे में लेकर विधिक प्रक्रिया पूरी करते हुए पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेजा गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि साधुओं की हत्या किन परिस्थितियों और किस तरह के हथियारों या तरीकों से की गई, इसका अंतिम और पुख्ता खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने और विस्तृत पुलिस विवेचना पूरी होने के बाद ही संभव हो सकेगा। इसका आप पर असर यह घटना ग्रामीण इलाकों में अकेले रहने वाले धार्मिक पुजारियों और मंदिर परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। • भारत में: देशभर के एकांत धार्मिक स्थलों और अखाड़ों में रहने वाले पुजारियों की निजी सुरक्षा को लेकर सतर्कता और स्थानीय स्तर पर निगरानी की मांग बढ़ सकती है। धार्मिक ट्रस्टों और ग्राम समितियों को अपने परिसरों में सुरक्षा कैमरे लगाने और नियमित गश्त सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जा सकते हैं। • शाहजहांपुर में: जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित प्राचीन और एकांत मंदिरों में पुलिस पेट्रोलिंग और सतर्कता तुरंत बढ़ाई जा सकती है। स्थानीय ग्रामीणों और मंदिर समितियों को किसी भी पारिवारिक विवाद अथवा संदिग्ध व्यक्ति की उपस्थिति की सूचना तुरंत नजदीकी थाने में देने के लिए जागरूक किया जाएगा। • ग्रामीणों के लिए: संपत्ति और धार्मिक ट्रस्टों से जुड़े पुराने पारिवारिक विवादों को समय रहते कानूनी रूप से सुलझाने की जरूरत रेखांकित हुई है। यदि परिवार में कोई सदस्य गंभीर मानसिक बीमारी से जूझ रहा है, तो उसकी उचित चिकित्सकीय निगरानी अनिवार्य हो जाती है। • मंदिर संरक्षकों के लिए: मंदिर परिसरों में अनाधिकृत प्रवेश रोकने के लिए चारदीवारी और निगरानी तंत्र को मजबूत करना आवश्यक हो गया है। संरक्षकों को पुजारियों और सेवादारों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखने की सलाह दी जा रही है। ऐसा क्यों हुआ शाहजहांपुर के भोले बाबा मंदिर में दो साधुओं की यह संदिग्ध मौत मंदिर परिसर पर अवैध कब्जे की मंशा और पारिवारिक विवाद की पृष्ठभूमि में घटी बताई जा रही है। पुलिस और मंदिर संरक्षक की शिकायतों के अनुसार, मुख्य आरोपी की मानसिक स्थिति और संपत्ति हथियाने की लालसा इस घटना के केंद्र में नजर आ रही है। • मंदिर पर कब्जे का प्रयास: मंदिर के संरक्षक शिवकुमार सिंह ने लिखित तहरीर में आरोप लगाया है कि आरोपी सुमित सिंह मंदिर की जमीन और परिसर पर कब्जा करने की नीयत रखता था। इसी विवाद के चलते साधुओं को रास्ते से हटाने और मंदिर में आग लगाने की बात सामने आई है। • पारिवारिक संबंध और निकटता: आरोपी सुमित सिंह मृतक साधु बिहारी दास का सगा भतीजा है, जिसके चलते उसकी मंदिर परिसर तक स्वाभाविक पहुंच थी। एक महीने पहले ही बिहारी दास ने भोले बाबा मंदिर में स्थायी रूप से रहना शुरू किया था, जिससे पारिवारिक खींचतान बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। • आरोपी की मानसिक बीमारी: पुलिस जांच में पता चला है कि 35 वर्षीय आरोपी सुमित मानसिक रूप से बीमार है और उसका इलाज चल रहा है। उसकी अनियंत्रित मानसिक स्थिति ने इस हिंसक वारदात में कितनी भूमिका निभाई, इसकी जांच की जा रही है। • साक्ष्य मिटाने की कोशिश: मंदिर में मौजूद सूखी लकड़ियों से चिता बनाकर शवों को जलाने की कोशिश की गई ताकि हत्या के निशान पूरी तरह मिट जाएं। हालांकि मौत की असल वजह और घटनाक्रम की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही होगी। सवाल-जवाब 1. शाहजहांपुर के किस इलाके में यह घटना घटी है? यह घटना शाहजहांपुर जिले के खुदागंज थाना क्षेत्र के सूथा गांव में स्थित भोले बाबा मंदिर में घटी है। 2. मृतक साधुओं के नाम और उम्र क्या हैं? मृतकों की पहचान 70 वर्षीय कथावाचक गोपाल दास और उनके 60 वर्षीय शिष्य बाबा बिहारी दास के रूप में हुई है। 3. पुलिस ने इस मामले में किसे हिरासत में लिया है? पुलिस ने 35 वर्षीय सुमित सिंह को हिरासत में लिया है, जो मृतक साधु बिहारी दास का सगा भतीजा है। 4. मंदिर के संरक्षक ने अपनी तहरीर में क्या आरोप लगाया है? मंदिर संरक्षक शिवकुमार सिंह ने आरोप लगाया है कि सुमित सिंह ने मंदिर पर कब्जा करने की नीयत से आग लगाकर इस वारदात को अंजाम दिया। 5. आरोपी सुमित सिंह की पृष्ठभूमि के बारे में पुलिस को क्या जानकारी मिली है? जांच में सामने आया है कि सुमित विवाहित है, उसके 10 साल के दो जुड़वा बच्चे हैं और वह मानसिक बीमारी का इलाज करा रहा है। 6. साधुओं की मौत का सही कारण कब स्पष्ट होगा? पुलिस के अनुसार दोनों साधुओं के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की सटीक वजह स्पष्ट होगी। https://trendkia.com/crime/shahjahanpur-ke-bhole-baba-mndira-men-do-sadhuon-ki-sndigdha-mauta-lakari-ki-chita-para-jalae-gae-shava-41335 TrendKia — Har trend, sabse pehle.