सुल्तानपुर में श्री देव ज्वेलर्स से 70 लाख की नकबजनी का पर्दाफाश, दिल्ली से दो दबोचे कोटा जिले के सुल्तानपुर में आभूषण दुकान का ताला तोड़कर लाखों के जेवर व नकदी समेटने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के दो सदस्यों को पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी से पकड़ा है। राजस्थान के कोटा जिले में स्थित सुल्तानपुर कस्बे के मुख्य बाजार में हुई बड़ी नकबजनी की गुत्थी को पुलिस टीम ने सुलझा लिया है। भौंरा चौराहे के समीप संचालित श्री देव ज्वेलर्स से करीब 70 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के गहने और तिजोरी में रखी नकदी समेटकर भागे अंतरराज्यीय गिरोह के दो बदमाशों को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान 24 वर्षीय आदिल और 19 वर्षीय आफताब उर्फ बग्गू के तौर पर हुई है। इस पूरी वारदात के पीछे दिल्ली और उत्तर प्रदेश में सक्रिय सलीम नकबजन गैंग की संलिप्तता उजागर हुई है, जिसका मुख्य सरगना सलीम और उसका साथी इमरान अभी फरार हैं। सुबह तड़के दुकान का शटर तोड़कर अंजाम दी वारदात सुल्तानपुर के स्थानीय निवासी परमानंद गुर्जर भौंरा चौराहे के पास श्री देव ज्वेलर्स नाम से अपनी दुकान का संचालन करते हैं। 17 अक्टूबर 2026 की रात वह दुकान को सामान्य दिनों की तरह बंद कर अपने घर चले गए थे। इसके अगले दिन यानी 18 अक्टूबर की सुबह लगभग 5 बजे 4 से 5 नकाबपोश और अज्ञात बदमाश दुकान पर पहुंचे। बदमाशों ने दुकान का मुख्य शटर और ताले काटकर भीतर प्रवेश किया। अंदर रखी अलमारी से सोने और चांदी के तमाम जेवरात चुरा लिए गए, जिनकी अनुमानित कीमत 60 से 70 लाख रुपये आंकी गई है। इसके साथ ही दुकान के भीतर मौजूद सेफ यानी तिजोरी से लगभग 3 से 4 लाख रुपये की नकदी भी निकाल ली गई। घटना का पता चलने पर सुल्तानपुर थाने में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया। सीसीटीवी विश्लेषण और निसान कार की पहचान मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी सुजीत शंकर के निर्देश पर एएसपी रामकल्याण मीणा और इटावा डीएसपी ओमप्रकाश के सुपरविजन में विशेष जांच दल तैयार किया गया। इसमें सुल्तानपुर थाना पुलिस के साथ-साथ एंटी थेफ्ट सेल की टीम को जोड़ा गया। पुलिस टीमों ने घटनास्थल और आसपास के रास्तों पर लगे निगरानी कैमरों की फुटेज का सघन विश्लेषण शुरू किया। तकनीकी पड़ताल में एक निसान कंपनी की सनी मॉडल कार संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त नजर आई। जब फुटेज के सहारे वाहन की आवाजाही को ट्रैक किया गया तो यह जानकारी सामने आई कि यह कार झालिमपुरा 8 लेन टोल प्लाजा पार करते हुए मुंबई दिशा की ओर आगे बढ़ी थी। फर्जी नंबर प्लेट और टोल भुगतान से खुला सुराग जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि शातिर बदमाशों ने पुलिस को भ्रमित करने के लिए कार पर महाराष्ट्र राज्य की फर्जी नंबर प्लेट लगा रखी थी। पुलिस अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने करीब 28 से 30 घंटे तक निरंतर सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच की। इस तकनीकी विश्लेषण से यह तथ्य सामने आया कि आरोपी मूल रूप से दिल्ली की ओर से आए थे। वारदात को अंजाम देने के बाद उन्होंने मुंबई लेन की तरफ जाकर यू-टर्न लिया और वापस दिल्ली के रास्ते पर लौट गए। संदिग्ध वाहन दिल्ली सीमा पर स्थित हिलालपुर टोल से बाहर निकलता हुआ रिकॉर्ड हुआ। वाहन के आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच करने पर कार दिल्ली निवासी सलीम पुत्र अब्दुल जैदी के नाम पर दर्ज पाई गई। इसके साथ ही टोल पर हुए डिजिटल ऑनलाइन भुगतान के विवरण की पड़ताल में इमरान नामक व्यक्ति की सक्रिय भूमिका की पुष्टि हुई। दिल्ली में दबिश और आरोपियों की पृष्ठभूमि डिजिटल और जमीनी साक्ष्यों के आधार पर राजस्थान पुलिस की संयुक्त टीम ने दिल्ली में सुनियोजित दबिश दी। 30 अक्टूबर को पुलिस ने आदिल और आफताब उर्फ बग्गू को हिरासत में लेकर पूछताछ की। प्रारंभिक पूछताछ में दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने सरगना सलीम और इमरान के साथ मिलकर सुल्तानपुर की दुकान में चोरी की योजना बनाई और उसे अंजाम दिया। पुलिस जांच के अनुसार गिरोह का सरगना सलीम मूलतः उत्तर प्रदेश के बरेली जिले का रहने वाला है, जबकि इमरान दिल्ली के सोनिया विहार इलाके का निवासी है। दोनों ही आरोपियों के खिलाफ दिल्ली और उत्तर प्रदेश के विभिन्न पुलिस थानों में हत्या, लूट, डकैती, नकबजनी और चोरी के संगीन आपराधिक मामले पहले से दर्ज हैं। सलीम के खिलाफ आर्म्स एक्ट और हत्या जैसे गंभीर मामले भी विचाराधीन हैं। वर्तमान में सुल्तानपुर पुलिस और एंटी थेफ्ट सेल की टीम फरार सरगना सलीम और इमरान की गिरफ्तारी के साथ लूटी गई नकदी और जेवरात की बरामदगी के लिए लगातार दबिश दे रही है। इसका आप पर असर इस कार्रवाई से अंतरराज्यीय गिरोहों के निशाने पर रहने वाले खुदरा व्यापारियों और आभूषण व्यवसायियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ी है। • भारत में: अंतरराज्यीय स्तर पर संचालित नकबजन गिरोह राज्यों की सीमाएं पार कर छोटे शहरों के प्रतिष्ठानों को निशाना बना रहे हैं। कारोबारियों को डिजिटल सीसीटीवी बैकअप और मजबूत अलार्म सिस्टम सक्रिय रखने की आवश्यकता है। • कोटा में: सुल्तानपुर और आसपास के कस्बों में आभूषण विक्रेताओं के लिए सुरक्षा मानकों की समीक्षा अनिवार्य हो गई है। स्थानीय दुकानदारों को रात के समय निगरानी तंत्र को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए हैं। • व्यापारियों के लिए: दुकानों में भारी मात्रा में नकदी और आभूषण बिना आधुनिक लॉकर सिस्टम के छोड़ना जोखिम भरा साबित हो सकता है। व्यावसायिक संपत्तियों का पूर्ण बीमा कवर रखना नुकसान से बचने के लिए आवश्यक है। • कानूनी कार्रवाई: पुलिस द्वारा दो आरोपियों की धरपकड़ के बाद अन्य फरार सदस्यों पर दबिश तेज कर दी गई है। चोरी गए माल की शीघ्र बरामदगी के लिए टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। ऐसा क्यों हुआ सुल्तानपुर में आभूषण की दुकान को निशाना बनाने के पीछे योजनाबद्ध अंतरराज्यीय साजिश और योजनाबद्ध तरीके से की गई रेकी मुख्य वजह थी। • योजनाबद्ध षड्यंत्र: शातिर सलीम नकबजन गैंग ने दिल्ली से राजस्थान पहुंचकर सुदूर कस्बे की दुकान को चिन्हित किया था। सुनसान समय और भोर के सन्नाटे का लाभ उठाकर सुबह 5 बजे शटर का ताला तोड़ा गया। • पहचान छिपाने के हथकंडे: आरोपियों ने निसान सनी कार पर महाराष्ट्र की जाली नंबर प्लेट लगाकर पुलिस को चकमा देने की साजिश रची थी। टोल नाकों पर त्वरित आवाजाही और यू-टर्न के जरिए उन्होंने सुराग मिटाने का भरसक प्रयास किया। • अपराधिक पृष्ठभूमि: गिरोह का सरगना सलीम और उसका सहयोगी इमरान उत्तर प्रदेश और दिल्ली में हत्या, लूट और डकैती जैसे दर्जनों मामलों में वांछित रहे हैं। गिरोह का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड ही इस तरह की दुस्साहसिक वारदात का आधार बना। सवाल-जवाब 1. सुल्तानपुर में चोरी की यह वारदात कब और किस दुकान में हुई? यह वारदात 18 अक्टूबर 2026 की सुबह करीब 5 बजे भौंरा चौराहे के पास स्थित श्री देव ज्वेलर्स में हुई थी। 2. दुकान से कुल कितने रुपये का माल और नकदी चोरी हुई थी? बदमाश दुकान से 60 से 70 लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवरात और 3 से 4 लाख रुपये की नकदी चुरा ले गए थे। 3. पुलिस ने दिल्ली से किन आरोपियों को गिरफ्तार किया है? पुलिस ने 30 अक्टूबर को दिल्ली से 24 वर्षीय आदिल और 19 वर्षीय आफताब उर्फ बग्गू को गिरफ्तार किया। 4. वारदात में किस गिरोह का नाम सामने आया है और मुख्य सरगना कौन है? इस वारदात में दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कुख्यात सलीम नकबजन गैंग का हाथ सामने आया है, जिसका सरगना सलीम है। 5. आरोपियों तक पहुंचने में पुलिस को क्या महत्वपूर्ण सुराग मिले? सीसीटीवी फुटेज में दिखी निसान सनी कार, हिलालपुर टोल का फुटेज और ऑनलाइन टोल भुगतान के रिकॉर्ड से आरोपियों का पता चला। https://trendkia.com/crime/sultanpur-men-shri-dev-jewelers-se-70-lakha-ki-nakabajani-ka-pardaphasha-delhi-se-do-daboche-54711 TrendKia — Har trend, sabse pehle.