# दिल्ली और एनसीआर में दुष्कर्म की वारदातों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, स्वतः संज्ञान लेते हुए दिए जांच के निर्देश

> राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते यौन अपराधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। अदालत ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

**Type:** article · **Category:** अपराध · **Published:** 2026-09-28 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/crime/supreme-court-takes-suo-motu-cognizance-of-rising-rape-cases-in-delhi-ncr-expresses-deep-anguish-39815 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली एनसीआर, दुष्कर्म मामला, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला, महिला सुरक्षा, आपराधिक न्याय, स्वतः संज्ञान

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने कड़ा कदम उठाया है। पार्क में हुई सामूहिक दुष्कर्म की घटना और चलती बस में एक नाबालिग से हुई बर्बरता जैसी गंभीर वारदातों का स्वतः संज्ञान लेते हुए न्यायालय ने इस पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने इस पूरे मामले की सुनवाई करते हुए व्यवस्था की नाकामी पर तीखी टिप्पणी की है।

 

## सुप्रीम कोर्ट ने की निर्भया कांड से तुलना

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा हालात साल 2012 के बहुचर्चित निर्भया मामले की दर्दनाक यादों को ताजा कर रहे हैं। पीठ ने कहा कि इस तरह के जघन्य अपराध यह दर्शाते हैं कि जमीन पर सुरक्षा तंत्र किस हद तक कमजोर हो चुका है। बार-बार सामने आ रही ऐसी घटनाओं से यह साफ होता है कि कानून व्यवस्था को और अधिक मुस्तैद करने की सख्त जरूरत है ताकि अपराधियों के मन में डर पैदा हो सके।

 

## प्रशासन और पुलिस की जवाबदेही पर उठे सवाल

न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं किया जा सकता है। इस दिशा में प्रशासन और पुलिस महकमे की जवाबदेही तय करना अब अत्यंत आवश्यक हो गया है। अधिकारियों की तरफ से बरती जा रही ढिलाई के कारण ही अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और लगातार ऐसी वीभत्स घटनाएं सामने आ रही हैं। अदालत ने इस मामले में जनहित याचिका दर्ज करने का निर्देश देते हुए आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।

## इसका आप पर असर
यह फैसला राजधानी और देश भर में महिला सुरक्षा के उपायों को कड़ा करने की दिशा में बड़ा प्रभाव डाल सकता है।

- **राष्ट्रीय स्तर पर:** देशभर के सभी राज्यों और महानगरों में पुलिस प्रशासन महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को लेकर अपनी कार्यप्रणाली की नए सिरे से समीक्षा करेगा। इस सख्ती से कानून लागू करने वाली एजेंसियों पर त्वरित कार्रवाई करने का भारी दबाव बढ़ेगा।

- **दिल्ली-एनसीआर में:** दिल्ली और आसपास के इलाकों में नाइट पेट्रोलिंग, सार्वजनिक स्थलों की निगरानी और परिवहन सुरक्षा के नियमों को अधिक सख्त बनाया जाएगा। स्थानीय पुलिस को संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बल बढ़ाने और त्वरित प्रतिक्रिया दल तैनात करने के निर्देश दिए जाएंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
दिल्ली और एनसीआर में लगातार सामने आ रही वीभत्स घटनाओं और पुलिस महकमे की सुस्ती के चलते शीर्ष अदालत को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा है।

- **बढ़ते जघन्य अपराध:** पार्क में गैंगरेप और चलती बस में नाबालिग से दरिंदगी जैसी घटनाओं ने कानून व्यवस्था की पोल खोल दी, जिससे अदालत को स्वतः हस्तक्षेप करना पड़ा।

- **प्रशासनिक लापरवाही:** स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक तंत्र की तरफ से सुरक्षा मानकों के पालन में लगातार कोताही बरती जा रही थी।

- **पिछली घटनाओं की पुनरावृत्ति:** साल 2012 के निर्भया कांड जैसे हालात दोबारा उभरने से समाज और न्यायपालिका में गहरी चिंता फैल गई थी।

## सवाल-जवाब

### 1. सुप्रीम कोर्ट ने किस मामले में स्वतः संज्ञान लिया है?
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और एनसीआर में महिलाओं के खिलाफ लगातार बढ़ रहे यौन अपराधों और दुष्कर्म की वारदातों पर स्वतः संज्ञान लिया है।

### 2. इस मामले की सुनवाई किस पीठ ने की है?
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ द्वारा की गई है।

### 3. अदालत ने किस पुरानी घटना का जिक्र किया है?
अदालत ने सुनवाई के दौरान साल 2012 के बहुचर्चित निर्भया कांड की दर्दनाक यादों का जिक्र किया है।

### 4. सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन को क्या निर्देश दिए हैं?
अदालत ने इस मामले में जनहित याचिका दर्ज करने का निर्देश देते हुए पुलिस और प्रशासन की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया है।

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