सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मुंबई धमाके के दोषी अबू सलेम की समय से पहले रिहाई की याचिका खारिज सुप्रीम कोर्ट ने 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे गैंगस्टर अबू सलेम की समय से पहले रिहाई की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद उसका जेल से बाहर आने का रास्ता फिलहाल बंद हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में दोषी ठहराए गए कुख्यात गैंगस्टर अबू सलेम को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने उसकी समय से पहले रिहाई की मांग वाली याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसके चलते उसके फिलहाल जेल से बाहर आने की सभी उम्मीदें खत्म हो गई हैं। अबू सलेम ने अपनी 25 साल की सजा पूरी होने का दावा करते हुए जल्दी रिहाई की गुहार लगाई थी, जिसे देश की शीर्ष अदालत ने नामंजूर कर दिया है। अदालत में क्या रहा कानूनी संघर्ष गैंगस्टर अबू सलेम ने अपनी सजा की अवधि पूरी होने का हवाला देते हुए समय से पहले रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी उसकी उम्रकैद की सजा में छूट और जल्दी रिहाई की अर्जी को खारिज कर दिया था। इसके अलावा, निचली अदालत और टाडा कोर्ट के तर्कों को भी आधार बनाया गया था जिसके तहत जुर्माना भरने या कानूनी शर्तों को पूरा करने की बात सामने आई थी। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और महाराष्ट्र सरकार ने लगातार उसकी रिहाई का कड़ा विरोध किया था। सरकार और जांच एजेंसियों का पक्ष सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार और जांच एजेंसियों ने अदालत को बताया कि अबू सलेम एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का अपराधी है और उसके खिलाफ बेहद गंभीर मामले दर्ज हैं। सरकार ने यह भी आशंका जताई थी कि यदि उसे पेरोल या रिहाई मिलती है, तो वह दोबारा फरार हो सकता है या कानून की गिरफ्त से दूर भागने की कोशिश कर सकता है। प्रशासन ने टाडा कोर्ट के हवाले से यह भी स्पष्ट किया था कि तय जुर्माना राशि भरे बिना उसकी रिहाई कानूनी रूप से संभव नहीं है। 1993 के मुंबई धमाकों का मामला अबू सलेम 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के मुख्य साजिशकर्ताओं और आरोपियों में शामिल है। इन धमाकों ने देश की आर्थिक राजधानी को दहला कर रख दिया था जिनमें सैकड़ों लोगों की जान गई थी और भारी तबाही हुई थी। लंबी कानूनी प्रक्रिया, प्रत्यर्पण और मुकदमों के बाद उसे अदालत ने दोषी करार दिया था और उम्रकैद की सजा सुनाई थी। समय-समय पर उसने अपनी सजा में छूट या पैरोल के लिए याचिकाएं दाखिल की हैं, लेकिन अदालतों ने हर बार उसकी गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि को देखते हुए राहत देने से इनकार किया है। इसका आप पर असर सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से साफ हो गया है कि गंभीर अपराधों के मामलों में अदालतों का रुख बेहद सख्त है और दोषियों को आसानी से राहत नहीं मिलेगी। • भारत में: यह फैसला देश की आपराधिक न्याय प्रणाली में कड़े रुख को रेखांकित करता है जिससे यह संदेश जाता है कि जघन्य अपराधों के दोषियों को तय नियमों के तहत ही सजा भुगतनी होगी। • मुंबई में: 1993 के बम धमाकों से प्रभावित पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए यह फैसला कानूनी मोर्चे पर एक बड़ी राहत और न्याय की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। ऐसा क्यों हुआ गैंगस्टर अबू सलेम की रिहाई की याचिका खारिज होने के पीछे उसके द्वारा किए गए गंभीर अपराध और कानूनी प्रावधानों की जटिलताएं मुख्य वजह रही हैं। • सजा की अवधि और दावे: अबू सलेम ने 25 साल की कैद पूरी होने का दावा करते हुए रिहाई मांगी थी, जिसका जांच एजेंसियों और सरकार ने कड़ा विरोध किया। • अदालतों का सख्त रुख: बॉम्बे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके आपराधिक इतिहास को ध्यान में रखते हुए अर्जी नामंजूर कर दी। • जुर्माने और शर्तें: टाडा अदालत के नियमों के अनुसार जुर्माना भरे बिना और कानूनी प्रक्रिया पूरी किए बिना उसकी रिहाई संभव नहीं थी। • फरार होने का जोखिम: महाराष्ट्र सरकार ने अदालत में आशंका जताई थी कि बाहर आने पर आरोपी के दोबारा फरार होने का बड़ा खतरा है। सवाल-जवाब 1. सुप्रीम कोर्ट ने अबू सलेम की किस याचिका को खारिज किया है? सुप्रीम कोर्ट ने अबू सलेम की समय से पहले रिहाई और सजा में छूट की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। 2. अबू सलेम किस मामले में सजा काट रहा है? अबू सलेम 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। 3. अबू सलेम ने रिहाई के लिए क्या तर्क दिया था? उसने अपनी 25 साल की सजा पूरी होने का दावा करते हुए समय से पहले रिहाई की मांग की थी। 4. किस अदालत ने इससे पहले उसकी याचिका ठुकराई थी? बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी इससे पहले अबू सलेम की उम्रकैद की सजा में छूट और जल्दी रिहाई की अर्जी खारिज कर दी थी। 5. सरकार और एजेंसियों ने उसकी रिहाई का विरोध क्यों किया? सरकार और जांच एजेंसियों ने उसके अंतरराष्ट्रीय अपराधी होने और बाहर आने पर दोबारा फरार होने की आशंका जताई थी। https://trendkia.com/crime/suprima-korta-ka-bara-phaisala-munbai-dhamake-ke-doshi-abu-salem-ki-samaya-se-pahale-rihai-ki-yachika-kharija-30721 TrendKia — Har trend, sabse pehle.