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  "type": "article",
  "title": "सूरत में एलपीजी टैंकर से सीधे सिलेंडरों में गैस चोरी का भंडाफोड़, पुलिस ने नौ लोगों को पकड़ा",
  "summary": "सूरत में पार्किंग प्लॉट के अंदर टैंकर से सिलेंडरों में अवैध गैस भरने वाले गिरोह को पुलिस ने रंगे हाथों दबोच लिया, जहां से 88 सिलेंडर और उपकरण जब्त किए गए हैं।",
  "content": "गुजरात के सूरत शहर में रसोई गैस की कालाबाजारी और अवैध रिफिलिंग करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। भेसान और हजीरा को जोड़ने वाले मार्ग पर स्थित एक पार्किंग परिसर के भीतर टैंकर से सीधे घरेलू सिलेंडरों में गैस स्थानांतरित की जा रही थी। गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस की एक टीम ने घेराबंदी करके मौके पर दबिश दी और इस खतरनाक गतिविधि में लगे नौ व्यक्तियों को हिरासत में ले लिया। इस ठिकाने से सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए भरी गई गैस की बड़ी खेप पकड़ी गई है।\n\nछापेमारी के दौरान बरामदगी का ब्योरा\nजांच दल जब पार्किंग परिसर में दाखिल हुआ, तब वहां एक बड़ा एलपीजी टैंकर खड़ा मिला जिससे पाइप जोड़कर कतार में रखे सिलेंडरों को भरा जा रहा था। पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल की तलाशी लेते हुए कुल 84 ऐसे सिलेंडर जब्त किए जिनमें अवैध रूप से गैस भरी जा चुकी थी। इसके अतिरिक्त परिसर से चार खाली सिलेंडर और गैस ट्रांसफर करने के काम में लाई जा रही तीन विशेष पाइपें भी कब्जे में ली गईं। भीड़भाड़ वाले इलाके के पास बिना किसी अग्निशमन या सुरक्षा इंतजाम के यह काम खुलेआम चल रहा था।\n\nसुरक्षा गार्ड की मिलीभगत और किराये का खेल\nप्राथमिक जांच और दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, इस पूरे अवैध कारोबार का मुख्य कर्ताधर्ता पवन सिंह गुज्जर नाम का व्यक्ति है। पवन सिंह ने इस गोरखधंधे को अंजाम देने के लिए महेश जांजवडिया से संपर्क साधा था, जो उसी पार्किंग स्थल पर सुरक्षा गार्ड की नौकरी करता था। महेश ने जमीन के वास्तविक मालिक को बिना कोई भनक लगे परिसर का एक हिस्सा पवन सिंह को 12 हजार रुपये प्रतिमाह के किराये पर दे दिया। जगह हाथ में आने के बाद पवन ने गैस भरने और सिलेंडरों की ढुलाई संभालने के लिए अन्य सहायकों को दिहाड़ी और कमीशन पर तैनात कर लिया।\n\nगेल का टैंकर और पकड़े गए आरोपियों की पहचान\nपुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी लक्ष्मण सिंह रावत सरकारी कंपनी गेल से जुड़ा एलपीजी टैंकर चलाकर उस सुनसान पार्किंग में लाया था। टैंकर के रुकते ही पवन सिंह के साथी पाइपों के जरिए गैस निकालकर सिलेंडरों में भरने के काम में जुट जाते थे। मौके से पकड़े गए सभी नौ लोगों का विवरण पुलिस ने साझा किया है। इनमें 26 वर्षीय मुख्य आरोपी पवन सिंह गुज्जर, 35 वर्षीय सुरेश बोरीवाला, 35 वर्षीय सुरक्षा गार्ड महेश जांजवडिया, 26 वर्षीय पंकज सिंह ठाकुर, 28 वर्षीय देवा सिंह, 28 वर्षीय सुभाष सिंह राजपूत, 24 वर्षीय विशाल भाभोर, 26 वर्षीय दीपक भाभोर और 53 वर्षीय टैंकर चालक लक्ष्मण सिंह रावत शामिल हैं।\n\nसख्त कानूनी धाराओं में मुकदमा और आगे की जांच\nपुलिस प्रशासन ने पकड़े गए सभी आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता के संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है। इसके साथ ही आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 और द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस आपूर्ति एवं वितरण विनियमन आदेश की सुसंगत धाराओं को भी मुकदमे में जोड़ा गया है। डीसीपी शैफाली बरवाल ने बताया कि अधिकारियों को इस ठिकाने पर चल रही संदिग्ध गतिविधियों के बारे में सटीक खुफिया जानकारी मिली थी, जिस पर तुरंत कार्रवाई की गई। जांच अधिकारी अब इस बात की कड़ियां जोड़ रहे हैं कि अवैध रूप से भरे गए इन सिलेंडरों की आपूर्ति किन होटलों, कारखानों या स्थानीय बाजारों में की जानी थी और इस सिंडिकेट के तार किन अन्य लोगों से जुड़े हैं।\n\nइसका आप पर असर\nघरेलू गैस की कालाबाजारी और अवैध रिफिलिंग सीधे तौर पर आम उपभोक्ताओं की जेब और सुरक्षा दोनों पर भारी असर डालती है।\n\n• भारत में: आपूर्ति श्रृंखला से थोक गैस की चोरी होने पर उपभोक्ताओं को वजन में कम गैस मिलने या समय से पहले सिलेंडर खाली होने की समस्या का सामना करना पड़ता है। अपनी सुरक्षा और अधिकारों के लिए सिलेंडर लेते समय डिलीवरी वेंडर के वजन कांटे पर उसकी शुद्ध मात्रा हमेशा अवश्य जांचें।\n• सूरत में: भेसान और हजीरा जैसे भारी ट्रैफिक वाले क्षेत्रों में अनियंत्रित तरीके से गैस ट्रांसफर होने से आसपास रहने वालों के लिए आग का गंभीर खतरा टल गया है। स्थानीय निवासी किसी भी पार्किंग या गोदाम में संदिग्ध रिफिलिंग दिखने पर तुरंत स्थानीय पुलिस हेल्पलाइन पर सूचना दे सकते हैं।\n• वितरण और कालाबाजारी: पकड़े गए सिलेंडर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और अवैध बाजारों में खपाए जाने की आशंका थी, जिस पर पुलिसिया कार्रवाई से विराम लगा है। अधिकृत एजेंसियों के अलावा किसी भी अनाधिकृत डीलर या दलाल से रसोई गैस खरीदना कानूनी जुर्म है।\n• घरेलू बजट: अवैध धंधेबाज सिलेंडरों से गैस काटकर बेचते हैं, जिससे सामान्य परिवार का मासिक खर्च बिना वजह बढ़ जाता है। उपभोक्ता अपने गैस वितरक से वजन सील और सुरक्षा कैप की स्थिति देखकर ही भुगतान करें।\n\nऐसा क्यों हुआ\nमुनाफा कमाने के लालच और सुरक्षा तंत्र में सेंध लगाकर टैंकर से सीधे सिलेंडरों में गैस भरने का यह अवैध नेटवर्क खड़ा किया गया था।\n\n• थोक गैस की हेराफेरी: आधिकारिक संयंत्र से निकले थोक एलपीजी टैंकर को उसके निर्धारित रास्ते से भटकाकर एकांत पार्किंग में लाया गया, ताकि बीच रास्ते में ही गैस चुराई जा सके। आरोपी ड्राइवर ने अतिरिक्त कमाई के लालच में टैंकर को इस अवैध अड्डे पर पहुंचाया था।\n• निजी परिसर का दुरुपयोग: पार्किंग के सुरक्षा गार्ड ने परिसर मालिक की गैरमौजूदगी का फायदा उठाया और 12 हजार रुपये के किराये पर यह जगह पवन सिंह को दे दी। गुप्त स्थान मिल जाने से आरोपियों को बिना किसी की नजर में आए पाइपों से गैस ट्रांसफर करने की सहूलियत मिल गई।\n• अवैध मांग और मार्जिन: होटलों, ढाबों और छोटे कारखानों में बिना कागजी कार्रवाई के सस्ते दामों पर गैस सिलेंडरों की भारी मांग रहती है। इसी अनधिकृत बाजार में ऊंची कीमत पर सिलेंडर बेचकर बड़ा मुनाफा कमाने के इरादे से यह गिरोह काम कर रहा था।\n• खुफिया सूचना से भंडाफोड़: पुलिस तंत्र को भेसान-हजीरा मार्ग पर अनधिकृत रिफिलिंग की पुख्ता जानकारी मिली, जिसके बाद योजनाबद्ध तरीके से की गई छापेमारी ने इस पूरे तंत्र को रंगे हाथों पकड़ लिया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सूरत में पुलिस ने किस जगह पर गैस रिफिलिंग का भंडाफोड़ किया?\nपुलिस ने भेसान-हजीरा रोड पर स्थित एक पार्किंग परिसर में छापेमारी करके इस अवैध गैस रिफिलिंग रैकेट को पकड़ा।\n\n2. मौके से कितने सिलेंडर और उपकरण बरामद किए गए?\nकार्रवाई के दौरान पुलिस ने 84 गैस से भरे सिलेंडर, चार खाली सिलेंडर, तीन रिफिलिंग पाइप और एक एलपीजी टैंकर बरामद किया।\n\n3. इस अवैध कारोबार का मुख्य संचालक कौन था?\nइस पूरे मामले का मुख्य सरगना पवन सिंह गुज्जर है, जिसने सुरक्षा गार्ड की मिलीभगत से पार्किंग में यह काम शुरू किया था।\n\n4. पार्किंग की जगह कितने किराये पर ली गई थी?\nपवन सिंह ने परिसर के गार्ड महेश जांजवडिया से 12 हजार रुपये महीने के किराये पर यह जगह ली थी।\n\n5. गैस का टैंकर किस कंपनी से जुड़ा हुआ था?\nजांच के अनुसार यह एलपीजी गैस टैंकर गेल कंपनी से जुड़ा था, जिसे चालक लक्ष्मण सिंह रावत वहां लेकर आया था।\n\n6. आरोपियों पर किन कानूनों के तहत केस दर्ज किया गया है?\nसभी नौ आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता, आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 और एलपीजी विनियमन आदेश के तहत मामला दर्ज हुआ है।",
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  "category": "अपराध",
  "publishedAt": "2026-09-20",
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    "सूरत पुलिस",
    "एलपीजी सिलेंडर",
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    "आवश्यक वस्तु अधिनियम"
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