टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में बड़ा खुलासा, માત્ર 34 हजार रुपये और विदेश में नौकरी का लालच देकर फंसाए गए थे आरोपी टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले में पुलिस जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। आरोपियों को वारदात को अंजाम देने के लिए मात्र 34 हजार रुपये देने का वादा किया गया था और विदेश में नौकरी का प्रलोभन दिया गया था। बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुई गोलीबारी की घटना की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाली परतें खुलती जा रही हैं। पुलिस पड़ताल में सामने आया है कि इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने के लिए जिन तीन लोगों को तैयार किया गया था, उन्हें बेहद मामूली रकम का लालच दिया गया था। कोटा में रातभर चली मैराथन पूछताछ गिरफ्तारी के बाद तीनों संदिग्धों को कोटा के रेलवे कॉलोनी थाने में रखा गया है, जहां मुंबई पुलिस की टीम ने उनसे गहन पूछताछ की है। मंगलवार, 20 अक्टूबर की सुबह करीब आठ बजे इन्हें सड़क मार्ग के जरिए मुंबई स्थानांतरित करने की पूरी तैयारी कर ली गई थी, ताकि आगे की कड़ियां जोड़ी जा सकें। सुरक्षा एजेंसियों का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि इस सुनियोजित षड्यंत्र का मास्टरमाइंड कौन था, इन्हें हथियार किसने मुमुहैया कराए थे और इस हमले को किस रणनीति के तहत अंजाम दिया गया। महज 34 हजार रुपये और विदेश भेजने का झांसा जांच से जुड़े विवरणों से पता चलता है कि आरोपियों को इस काम के बदले सिर्फ 34 हजार रुपये देने का वादा किया गया था। इसके साथ ही उन्हें विदेश में बेहतर रोजगार दिलाने का सब्जबाग भी दिखाया गया था। इस पूरे तंत्र के पीछे अनिल पंडित नामक शख्स का हाथ होने का शक जताया जा रहा है, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि वह कैलिफोर्निया में बैठकर इस पूरे नेटवर्क को नियंत्रित कर रहा था। हालांकि, इन सभी तथ्यों की मु मुहर आधिकारिक जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लगेगी। ऑनलाइन पेमेंट और जांगी ऐप का इस्तेमाल तपिश के दौरान यह बात भी सामने आई कि संदिग्धों की अनिल पंडित से कभी आमने-सामने मुलाकात नहीं हुई थी। वे सभी केवल जांगी ऐप के माध्यम से एक-दूसरे के संपर्क में रहते थे। मुंबई में ठहरने के दौरान उनके खर्च के लिए प्रतिदिन पांच हजार से दस हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए जाते थे। पैसों के लेन-देन को छिपाए रखने के लिए स्थानीय दुकानदारों और अन्य लोगों के क्यूआर कोड का इस्तेमाल किया जाता था। आरोपी क्यूआर कोड भेजकर पैसे मंगाते थे और पुलिस अब इन सभी ट्रांजैक्शन की कड़ियों को खंगालने में जुटी है। पहचान छिपाने के लिए बदले हुलिया घटना को अंजाम देने के बाद संदिग्धों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए कई पैंतरे अपनाए। वे अंधेरी रेलवे स्टेशन पहुंचे और वहां से लोकल ट्रेन पकड़ी। कुछ स्टेशनों के बाद उतरकर उन्होंने ऑनलाइन कैब बुक की और सूरत की तरफ निकल पड़े, जिसके बाद वे पुणे-जयपुर ट्रेन में सवार हो गए। सफर के दौरान उन्होंने अपने बाल कटवा लिए और कपड़े भी बदल लिए ताकि कोई उन्हें पहचान न सके। कोटा में जब उन्हें दबोचा गया, तब उनका पूरा हुलिया बदला हुआ था। उनके पास से केवल कपड़ों से भरा बैग मिला और कोई हथियार बरामद नहीं हुआ। पुलिस इस बात की भी आशंका तलाश रही है कि उन्होंने रास्ते में ही हथियार कहीं फेंक दिए हों। इसके अलावा, ऋतिक नाम के एक आरोपी द्वारा चोरी की मोटरसाइकिल का बंदोबस्त किए जाने की बात भी प्रकाश में आई है। कचरे के ढेर के पास छिपाए जाते थे हथियार पुलिस को शक है कि इन्हें इंदौर और मुंबई के स्थानीय संपर्कों के जरिए हथियार पहुंचाए जाते थे। हथियारों को सीधे हाथ में देने के बजाय किसी सुनसान इलाके में छिपाया जाता था। इसके बाद आरोपियों को एक लोकेशन और वीडियो भेजा जाता था, जिसकी मदद से वे कचरे के ढेर के पास रखे बक्से तक पहुंचते थे। जांगी ऐप की कार्यप्रणाली की भी तकनीकी जांच की जा रही है क्योंकि इस ऐप पर खाता खोलने के लिए किसी फोन नंबर की आवश्यकता नहीं होती। बातचीत पूरी होने के बाद आरोपी अपने सिम कार्ड भी नष्ट कर देते थे ताकि उनका सुराग न मिल सके। अमृतसर के कारोबारी पर हमले से कनेक्शन इस पूरे प्रकरण की तहकीकात करते हुए पुलिस के सामने एक और एंगल आया है। आरोप है कि रेहान और फूल सिंह नामक दो आरोपियों ने इससे पहले अमृतसर में एक व्यवसायी पर भी हमला किया था। अधिकारी इस पुरानी घटना और मौजूदा मामले के बीच किसी प्रकार के तार जुड़े होने की संभावनाओं की भी गहराई से जांच कर रहे हैं। मुंबई पहुंचने के बाद इनसे होने वाली विस्तृत पूछताछ से ही यह साफ हो पाएगा कि इस संगीन साजिश के पीछे कौन लोग सक्रिय थे। इसका आप पर असर इस घटना से जुड़े खुलासे मुख्य रूप से सेलिब्रिटी सुरक्षा और संगठित अपराध के नए तौर-तरीकों को उजागर करते हैं। • भारत में: फिल्मी हस्तियों की सुरक्षा व्यवस्था और उनके इर्द-गिर्द सक्रिय संदिग्ध नेटवर्क पर एजेंसियां कड़ी नजर रख रही हैं। इस मामले से सोशल मीडिया और विदेशी हैंडलर्स के जरिए युवाओं को फंसाने के मामलों में सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता बढ़ गई है। • मुंबई में: स्थानीय पुलिस और प्रशासन अभिनेताओं के आवास और कार्यस्थलों के आसपास सुरक्षा का पुनरावलोकन कर रहे हैं। आम नागरिकों के लिए यह घटना डिजिटल फ्रॉड और अनजान एप के जरिए आपराधिक गतिविधियों में युवाओं के इस्तेमाल के बढ़ते खतरे को दर्शाती है। ऐसा क्यों हुआ इस हाई-प्रोफाइल मामले के पीछे के कारणों और कार्यप्रणाली की जांच में कई तकनीकी और आर्थिक पहलू सामने आए हैं। • वित्तीय प्रलोभन: आरोपियों को आर्थिक तंगी और विदेश में नौकरी का झांसा देकर इस वारदात को अंजाम देने के लिए तैयार किया गया था। • डिजिटल छद्म आवरण: साजिशकर्ताओं ने अपनी पहचान छिपाने के लिए सामान्य फोन कॉल के बजाय एन्क्रिप्टेड ऐप और स्थानीय दुकानदारों के क्यूआर कोड का इस्तेमाल किया। • आपराधिक नेटवर्क: शुरुआती कड़ियों से संकेत मिलता है कि इस गिरोह के तार अन्य शहरों में हुई पुरानी वारदात और विदेशी ठिकानों से जुड़े हो सकते हैं। सवाल-जवाब 1. टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस के आरोपियों को क्या लालच दिया गया था? आरोपियों को वारदात के बदले मात्र 34 हजार रुपये और विदेश में नौकरी दिलाने का प्रलोभन दिया गया था। 2. आरोपियों को कहां से गिरफ्तार किया गया था? तीनों आरोपियों को कोटा से गिरफ्तार किया गया था और वे फिलहाल मुंबई पुलिस की हिरासत में हैं। 3. संदिग्ध किस ऐप के जरिए संपर्क में रहते थे? जांच के मुताबिक आरोपी जांगी ऐप के माध्यम से आपस में बातचीत करते थे। 4. इस नेटवर्क का संचालन कौन कर रहा था? कैलिफोर्निया में बैठकर अनिल पंडित द्वारा इस नेटवर्क को संचालित करने का शक जताया जा रहा है। https://trendkia.com/crime/tiger-shroff-shooting-case-mein-bada-khulasa-matra-34-hajar-rupaye-aur-videsh-mein-naukri-ka-lalach-50166 TrendKia — Har trend, sabse pehle.