# विशाखापट्टनम नौसेना जासूसी मामला: ‘एंजेल पायल’ के फर्जी जाल में फंसे कर्मचारी

> विशाखापट्टनम नौसेना डॉकयार्ड से जुड़े जासूसी कांड में काउंटर इंटेलिजेंस सेल ने दो और लोगों को दबोच लिया है। इस मामले में अब तक चार गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और पाकिस्तान से जुड़े हनीट्रैप नेटवर्क का खुलासा हुआ है।

**Type:** article · **Category:** अपराध · **Published:** 2026-10-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/crime/visakhapatnam-navy-espionage-case-employees-trapped-by-angel-payal-48116 · **Language:** Hindi
**Tags:** विशाखापट्टनम, नौसेना, जासूसी, काउंटर इंटेलिजेंस, आंध्र प्रदेश, हनीट्रैप

आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में स्थित नौसेना डॉकयार्ड की सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां सोशल मीडिया के जरिए संवेदनशील रक्षा जानकारी पाकिस्तान भेजने का सनसनीखेज षड्यंत्र रचा गया था। इस जासूसी नेटवर्क का दायरा काफी बड़ा है और इसमें इंटरनेट पर सक्रिय एक फर्जी प्रोफाइल की अहम भूमिका रही है।

 

## फेसबुक पर रची गई जासूसी की साजिश

जांच एजेंसियों के अनुसार इस पूरी योजना के केंद्र में ‘एंजेल पायल’ नाम की एक अज्ञात महिला थी, जिसने सोशल मीडिया पर एक कृत्रिम पहचान बनाई थी। करीब डेढ़ दशक पहले इंटरनेट पर खासी चर्चा में आए कैटफिशिंग मामलों की तर्ज पर ही इस प्रोफाइल का इस्तेमाल किया गया। इस फर्जी अकाउंट के जरिए नौसेना से जुड़े दो कर्मचारियों को आपस में जोड़ा गया और उन्हें गोपनीय रक्षा दस्तावेज पाकिस्तानी ऑपरेटिव्स तक पहुंचाने के लिए तैयार किया गया। महिला ने खुद को दुबई की एक शिपिंग कंपनी का कर्मचारी बताया था जो क्रू और जहाजों के लिए लॉजिस्टिक्स संभालती है।

 

## दो नए आरोपियों की गिरफ्तारी

इस कड़ी में कार्रवाई करते हुए आंध्र प्रदेश काउंटर इंटेलिजेंस सेल ने गुरुवार को दो अन्य व्यक्तियों को हिरासत में लिया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान बोंगु रवि (30) और कदरी श्रीनिवास (31) के रूप में हुई है, जो टीडी इंजीनियरिंग कंपनी के लिए काम करते हैं और उनका नाता विशाखापट्टनम नौसेना डॉकयार्ड से रहा है। इस ताजा कार्रवाई के बाद इस सनसनीखेज प्रकरण में अब तक कुल चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

 

## दुबई से लौटा आरोपी और पुलिस का शिकंजा

कदरी श्रीनिवास अक्टूबर के शुरुआती सप्ताह में सऊदी अरब चला गया था, जिसके बाद पुलिस ने उसे वापस लाने के लिए कूटनीतिक और कानूनी दबाव बनाया। बढ़ते दबाव के आगे झुकते हुए वह 11 अक्टूबर को नई दिल्ली के हवाई अड्डे पर उतरा, जहां पहले से ही विशाखापट्टनम सिटी पुलिस और काउंटर इंटेलिजेंस सेल के अधिकारी उसकी प्रतीक्षा कर रहे थे। उसे तुरंत अपनी हिरासत में लेकर विशाखापट्टनम लाया गया। इससे पहले 6 अक्टूबर को भी इसी सेल ने बड़ी कार्रवाई करते हुए इस जासूसी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था।

 

## ऑपरेशन फायरवॉल के तहत कार्रवाई

इस पूरे राष्ट्रव्यापी अभियान को ‘ऑपरेशन फायरवॉल-2026’ का नाम दिया गया है, जिसकी शुरुआत 1 अक्टूबर को की गई थी। इसके तहत कुल 12 विशेष टीमों का गठन किया गया, जिन्हें देश के 10 अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तैनात किया गया है। इन क्षेत्रों में आंध्र प्रदेश के अलावा केरल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, गोवा, दिल्ली, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ और बिहार शामिल हैं, जहां संदिग्ध गतिविधियों की पड़ताल की जा रही है।

 

## पाकिस्तानी खुफिया तंत्र का तरीका

जांच अधिकारियों का मानना है कि पाकिस्तानी खुफिया ऑपरेटिव्स, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं, सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट तैयार करती हैं। वे रक्षा प्रतिष्ठानों के पास काम करने वाले कर्मचारियों को निशाना बनाती हैं और उन्हें पैसों का लालच देकर अथवा अन्य तरीकों से अपने जाल में फंसाती हैं। इस मामले की गूंज कई राज्यों तक है और अभी भी करीब 18 संदिग्धों की तलाश जारी है, जिनमें से 13 का संबंध सीधे तौर पर नौसेना से बताया जा रहा है।

 

## कानूनी कार्रवाई और पहले की गिरफ्तारियां

इस सिलसिले में पहली एफआईआर 2 सितंबर को विजयवाड़ा के काउंटर इंटेलिजेंस पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी, जबकि दूसरी एफआईआर 12 अक्टूबर को विशाखापट्टनम के मल्कापुरम थाने में आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत पंजीकृत हुई। उसी दिन मुख्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल कर दी गई। इससे पहले इस मामले में प्रदीप मुखर्जी को गिरफ्तार किया गया था, जिसने एक पाकिस्तानी ऑपरेटिव के लिए व्हाट्सऐप अकाउंट एक्टिवेट करने में मदद की थी। इसके अलावा नौसेना अधिकारियों के लिए अनुबंधित चालक के रूप में काम करने वाले अन्नाम साई वरप्रसाद को भी गिरफ्तार किया गया था, जिसने पैसों के एवज में जानकारियां साझा की थीं। इन दोनों को विजयवाड़ा अदालत ने 14 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

## इसका आप पर असर
यह मामला भारत की रक्षा सुरक्षा और गोपनीय प्रतिष्ठानों की संवेदनशीलता को रेखांकित करता है, जिसका सीधा असर संवेदनशील क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर पड़ता है।

- **भारत में:** रक्षा प्रतिष्ठानों के आसपास काम करने वाले सभी कर्मियों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल और ऑनलाइन संपर्कों को लेकर सुरक्षा दिशा-निर्देशों को और अधिक कड़ा कर दिया गया है।

- **विशाखापट्टनम में:** नौसेना डॉकयार्ड और उससे जुड़ी इंजीनियरिंग कंपनियों में कार्यरत कर्मचारियों की पृष्ठभूमि की नए सिरे से जांच और निगरानी बढ़ाई जा रही है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह घटना सोशल मीडिया पर बनाई गई फर्जी प्रोफाइल के माध्यम से रक्षा कर्मियों को निशाना बनाने वाले खुफिया तंत्र के कारण संभव हुई। पाकिस्तानी खुफिया ऑपरेटिव्स ने कर्मचारियों को वित्तीय लाभ का लालच देकर संवेदनशील सामरिक जानकारियां हासिल करने का प्रयास किया था।

- **फर्जी प्रोफाइल का इस्तेमाल:** ‘एंजेल पायल’ जैसे नामों से बनाए गए छद्म सोशल मीडिया खातों का उपयोग कर्मचारियों का भरोसा जीतने के लिए किया गया।

- **वित्तीय प्रलोभन:** आरोपियों को भारी रकम देने का झांसा देकर उन्हें प्रतिबंधित रक्षा क्षेत्रों से जुड़ी गोपनीय जानकारियां साझा करने के लिए उकसाया गया।

- **भौगोलिक दूरी:** एक ही कंपनी में अलग-अलग स्थानों पर तैनात कर्मचारियों के बीच ऑनलाइन माध्यमों से संपर्क होने के कारण इस षड्यंत्र को अमलीजामा पहनाना आसान हो गया।

## सवाल-जवाब

### 1. विशाखापट्टनम नौसेना जासूसी मामले में अब तक कुल कितने लोगों की गिरफ्तारी हुई है?
इस मामले में कुल चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

### 2. ताजा गिरफ्तारियां किन लोगों की हुई हैं?
काउंटर इंटेलिजेंस सेल ने बोंगु रवि और कदरी श्रीनिवास को गिरफ्तार किया है।

### 3. यह जासूसी किस माध्यम से संचालित की जा रही थी?
यह जासूसी फेसबुक पर ‘एंजेल पायल’ नामक फर्जी अकाउंट के जरिए चलाई जा रही थी।

### 4. इस राष्ट्रव्यापी अभियान को क्या नाम दिया गया है?
इस अभियान का नाम ‘ऑपरेशन फायरवॉल-2026’ रखा गया है।

### 5. यह अभियान कितने राज्यों में चलाया जा रहा है?
यह अभियान आंध्र प्रदेश सहित 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलाया जा रहा है।

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