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  "title": "व्हाट्सऐप पर दिल्ली के जिला जज बनकर साइबर ठगों ने मांगी वित्तीय मदद, वकीलों की सतर्कता से दर्ज हुई FIR",
  "summary": "दिल्ली में साइबर अपराधियों ने प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज की फोटो लगाकर वकीलों से पैसों की मांग की, लेकिन एक वकील की समझदारी से फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हो गया।",
  "content": "देश की राजधानी दिल्ली में न्यायिक अधिकारियों के नाम पर वकीलों को ठगने का एक बड़ा मामला सामने आया है। साइबर अपराधियों ने एक वरिष्ठ जज की तस्वीर और नाम का गलत इस्तेमाल करते हुए व्हाट्सऐप पर फर्जी प्रोफाइल बनाई और कई वकीलों से आपातकालीन आर्थिक मदद के नाम पर पैसे मांगे। हालांकि, तीस हजारी कोर्ट के एक सतर्क वकील की सूझबूझ से यह साइबर ठगी समय रहते पकड़ में आ गई। इस घटना के बाद वकीलों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।\n\nव्हाट्सऐप पर जज की फोटो लगाकर भेजा गया मैसेज\nयह पूरा वाकया 24 अगस्त का है, जब दिल्ली बार एसोसिएशन के सीनियर मेंबर एग्जीक्यूटिव और 39 वर्षीय वकील गगनप्रीत सिंह के व्हाट्सऐप पर एक अनजान नंबर से संदेश आया। मैसेज भेजने वाले ने खुद को दिल्ली जिला अदालत का जज बताते हुए लिखा कि यह उनका नया नंबर है और हालचाल पूछा। मैसेज के साथ व्हाट्सऐप पर प्रोफाइल फोटो के रूप में प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज, वेस्ट, विजय कुमार दहिया की आधिकारिक तस्वीर लगी हुई थी।\n\nशुरुआत में डिस्प्ले पिक्चर देखकर वकील गगनप्रीत सिंह को लगा कि यह वास्तव में जज का ही संदेश है, इसलिए उन्होंने बातचीत आगे बढ़ाई। लेकिन जैसे ही सामने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि वह इस समय थाईलैंड में हैं और उसे अचानक पैसों की सख्त जरूरत है, वैसे ही वकील को अनहोनी की आशंका हुई। किसी न्यायिक अधिकारी द्वारा इस तरह सीधे व्हाट्सऐप पर पैसे मांगे जाने से उन्हें गहरा संदेह हुआ और उन्होंने तुरंत कोई भी रकम ट्रांसफर करने के बजाय मामले की हकीकत जानने का फैसला किया।\n\nकोर्ट रूम में जज को देखकर खुला फर्जीवाड़े का राज\nसच्चाई का पता लगाने के लिए वकील गगनप्रीत सिंह बिना कोई देर किए तीस हजारी कोर्ट परिसर स्थित जज विजय कुमार दहिया के कोर्ट रूम में पहुंचे। वहां का नजारा देखकर वे हैरान रह गए, क्योंकि जज खुद अपनी अदालत में मौजूद होकर मुकदमों की सुनवाई कर रहे थे। जब गगनप्रीत सिंह ने उन्हें व्हाट्सऐप चैट दिखाई और पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी, तो जज भी चौंक गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे थाईलैंड नहीं गए हैं और न ही उन्होंने किसी से पैसे मांगे हैं। अपनी फोटो और पद के इस तरह के मिसयूज पर उन्होंने गहरी चिंता जताई।\n\nइसके बाद जब इस घटना की जानकारी बार एसोसिएशन के अन्य सदस्यों को दी गई, तो पता चला कि यह जाल सिर्फ एक वकील तक सीमित नहीं था। ठग ने दिल्ली बार एसोसिएशन के कई मौजूदा और पूर्व पदाधिकारियों को भी इसी तरह के मैसेज भेजकर इमरजेंसी फंड की मांग की थी। वकील गगनप्रीत सिंह ने बताया कि डिस्प्ले पिक्चर जज की होने के कारण शुरुआत में लोग बात करने लगे थे, लेकिन जैसे ही पैसे मांगने की बात आई, सभी को ठगी का अहसास हो गया और मामला उजागर हो गया।\n\nसाइबर सेल और सब्जी मंडी थाने में FIR दर्ज\nमामले की गंभीरता को देखते हुए गगनप्रीत सिंह ने फर्जी व्हाट्सऐप चैट के स्क्रीनशॉट, संबंधित फोन नंबर और प्रोफाइल फोटो साइबर सेल तथा सब्जी मंडी पुलिस स्टेशन को सौंप दिए। पुलिस ने प्राप्त सबूतों के आधार पर 26 अगस्त को एफआईआर दर्ज कर ली।\n\nपुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज, वेस्ट के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर फर्जी तरीके से पैसे मांगना न्यायपालिका की साख के लिए अत्यंत खतरनाक है। अपराधी दिल्ली बार एसोसिएशन के सदस्यों को गुमराह कर वित्तीय नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे। फिलहाल पुलिस की साइबर टीम उस नंबर की कॉल डिटेल, लोकेशन और जुड़े बैंक खातों की तकनीकी जांच कर रही है। हालांकि, अब तक इस मामले में किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।\n\nइसका आप पर असर\nयह मामला दर्शाता है कि साइबर अपराधी अब उच्च अधिकारियों की तस्वीरें लगाकर लोगों का भरोसा जीतने का नया तरीका अपना रहे हैं।\n\n• भारत में: अनजान नंबरों से व्हाट्सऐप पर आने वाले पैसों के अनुरोधों पर तुरंत विश्वास न करें। यदि कोई परिचित या अधिकारी अचानक इमरजेंसी में रकम मांगे, तो पैसे भेजने से पहले दूसरे माध्यम से उनकी पहचान की पुष्टि जरूर करें।\n• दिल्ली में: बार एसोसिएशन और कोर्ट परिसरों से जुड़े वकीलों को ऐसे फर्जी मैसेज मिलने पर तुरंत साइबर सेल में रिपोर्ट दर्ज करानी चाहिए। स्थानीय पुलिस और साइबर विंग ने दिल्ली के अदालती परिसरों में डिजिटल सतर्कता बढ़ाने की सलाह दी है।\n• आपातकालीन पैसों की मांग: यदि कोई व्यक्ति विदेश यात्रा या इमरजेंसी का हवाला देकर रकम ट्रांसफर करने को कहे, तो बैंक खाते का नाम ध्यान से जांचें। आधिकारिक या व्यक्तिगत सत्यापन के बिना ऑनलाइन पेमेंट करने से बचें।\n• प्रोफाइल फोटो की सत्यता: किसी भी सोशल मीडिया अकाउंट पर किसी अधिकारी की फोटो लगी होने का मतलब यह नहीं कि वह असली खाता है। साइबर ठग इंटरनेट से तस्वीरें चुराकर फर्जी प्रोफाइल तैयार कर लेते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. दिल्ली में वकीलों को ठगने के लिए किस अधिकारी के नाम का इस्तेमाल किया गया?\nठगों ने प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज, वेस्ट, विजय कुमार दहिया की फोटो और नाम का इस्तेमाल कर फर्जी व्हाट्सऐप प्रोफाइल बनाई थी।\n\n2. इस साइबर ठगी के प्रयास को किस वकील ने नाकाम किया?\nदिल्ली बार एसोसिएशन के सीनियर मेंबर एग्जीक्यूटिव और वकील गगनप्रीत सिंह ने अपनी सतर्कता से इस ठगी को नाकाम किया।\n\n3. ठग ने व्हाट्सऐप मैसेज में क्या दावा किया था?\nमैसेज भेजने वाले ने खुद को थाईलैंड में होना बताया और आपातकालीन स्थिति का हवाला देते हुए पैसों की मांग की थी।\n\n4. वकील गगनप्रीत सिंह को ठग पर संदेह कैसे हुआ और उन्होंने क्या किया?\nपैसे मांगे जाने पर संदेह होने पर वकील सीधे कोर्ट रूम पहुंचे, जहां जज खुद मौजूद थे और उन्होंने पैसों की मांग से पूरी तरह इनकार किया।\n\n5. पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?\nसाइबर सेल और सब्जी मंडी पुलिस स्टेशन को शिकायत मिलने के बाद 26 अगस्त को एफआईआर दर्ज की गई है और मामले की जांच की जा रही है।",
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  "category": "अपराध",
  "publishedAt": "2026-09-02",
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    "दिल्ली पुलिस",
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    "तीस हजारी कोर्ट",
    "व्हाट्सऐप स्कैम",
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