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  "type": "article",
  "title": "अमेरिकी सीनेट में क्लैरिटी एक्ट अटकने से डिजिटल एसेट बाजार को मिली नई ऊर्जा, मैट हॉगन ने गिनाए फायदे",
  "summary": "अमेरिकी सीनेट में क्लैरिटी एक्ट के पारित न होने के बाद बिटवाइज़ के सीआईओ मैट हॉगन का कहना है कि सख्त प्रतिबंधों से बचने के कारण क्रिप्टो बाजार में उल्लेखनीय उछाल देखा गया है।",
  "content": "अमेरिकी सीनेट में क्लैरिटी एक्ट को आगे बढ़ाने में मिली विफलता के बाद डिजिटल एसेट बाजार में एक नया रुख देखने को मिला है। आमतौर पर किसी व्यापक विधायी मसौदे के रुकने को बाजार के लिए नकारात्मक माना जाता है, लेकिन इस बार हालात इसके विपरीत नजर आ रहे हैं। बिटवाइज़ के मुख्य निवेश अधिकारी (सीआईओ) मैट हॉगन ने बुधवार को स्पष्ट किया कि इस कानून के रुकने से उद्योग को राहत मिली है और टोकनाइजेशन तथा रेवेन्यू पैदा करने वाले टोकन्स के विकास का रास्ता और साफ हुआ है।\n\nसंसद में विधेयक के रुकने के तुरंत बाद प्रमुख डिजिटल संपत्तियों में तेजी दर्ज की गई। बिटकॉइन की कीमतों में 8 प्रतिशत का इजाफा हुआ, जबकि इथेरियम ने 7 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की। इसके अलावा नियर, यूनिसवैप और एवलांच जैसी अन्य संपत्तियों ने इससे भी बड़ा उछाल हासिल किया। विश्लेषकों का मानना है कि बिल के गिर जाने से उन जटिल कानूनी शर्तों से मुक्ति मिल गई है, जो अगर लागू हो जातीं तो कई अहम कारोबारी मॉडल्स पर भारी बंदिशें लग सकती थीं।\n\nसीनेट में क्लैरिटी एक्ट के अटकने की पृष्ठभूमि\nशुरुआती दौर में डिजिटल परिसंपत्ति उद्योग ने क्लैरिटी एक्ट का पुरजोर समर्थन किया था, क्योंकि इससे नियमों में स्पष्टता आने की उम्मीद थी। हालांकि, सीनेट के स्तर पर अंतिम वार्ताओं के दौरान ऐसे समझौते किए गए जो सेक्टर के कई हिस्सों की गतिविधियों को गंभीर रूप से सीमित कर सकते थे। इन नए संशोधनों की वजह से उद्योग के प्रतिनिधियों की चिंताएं काफी बढ़ गई थीं।\n\nकानून के विफल होने के बाद नियामकों को नए नियमों पर अधिक तेजी से कदम उठाने का अवसर मिला है। हॉगन का कहना है कि कानून के अभाव में विनियामक तंत्र ने व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया है, जिससे नई तकनीकों को लंबे समय तक कानूनी अध्ययनों में फंसे रहने की जरूरत नहीं पड़ी है।\n\nस्टेबलकॉइन यील्ड पर टकराव और 50 लाख डॉलर का जुर्माना\nविधेयक के गिरने का सबसे गहरा असर स्टेबलकॉइन क्षेत्र पर पड़ा है। मसौदे पर बातचीत के दौरान सबसे बड़ा विवाद इस बात पर केंद्रित था कि क्या क्रिप्टो एक्सचेंज अपने ग्राहकों को स्टेबलकॉइन रखने के बदले ब्याज या रिवॉर्ड दे सकते हैं। पारंपरिक बैंकिंग संस्थानों ने ऐसे किसी भी प्रावधान का कड़ा विरोध किया था जो डिजिटल प्लेटफॉर्मों को इस प्रकार के लाभ देने की अनुमति देता हो।\n\nक्लैरिटी एक्ट के अंतिम मसौदे में यह सख्त प्रावधान शामिल किया गया था कि एक्सचेंज या प्लेटफॉर्म किसी भी रूप में ग्राहकों को स्टेबलकॉइन पर यील्ड या ब्याज नहीं दे सकेंगे। इतना ही नहीं, इस नियम का उल्लंघन करने पर प्रति उल्लंघन 50 लाख डॉलर तक के भारी जुर्माने का प्रस्ताव था। यदि यह कानून पारित हो जाता, तो प्लेटफॉर्मों के लिए स्टेबलकॉइन पर किसी भी प्रकार का प्रोत्साहन देना पूरी तरह गैरकानूनी हो जाता।\n\nजीनियस एक्ट और पारंपरिक बैंकों के सामने खड़ी विडंबना\nभले ही क्लैरिटी एक्ट कानून का रूप नहीं ले सका, लेकिन पूर्व से मौजूद जीनियस एक्ट पूरी तरह प्रभावी बना हुआ है। जीनियस एक्ट के तहत स्टेबलकॉइन जारी करने वाली कंपनियों पर तो ब्याज देने की रोक है, परंतु यह कानून क्रिप्टो एक्सचेंजों पर वैसी पाबंदी नहीं लगाता। इस कानूनी स्थिति की वजह से एक्सचेंज अपने प्लेटफॉर्म पर स्टेबलकॉइन बैलेंस रखने वाले यूजर्स को रिवॉर्ड की पेशकश करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं।\n\nमैट हॉगन ने इस परिस्थिति पर टिप्पणी करते हुए लिखा है कि पारंपरिक बैंकों की हठधर्मिता उनके अपने हितों के खिलाफ चली गई है। बैंकों के समझौता न करने की जिद का बड़ा विडंबनापूर्ण परिणाम यह होगा कि हर स्टेबलकॉइन को पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था से बाजार हिस्सेदारी छीनने में मदद मिलेगी। प्लेटफॉर्म्स की ओर से दिए जाने वाले इन रिवॉर्ड्स के चलते अधिक पूंजी पारंपरिक खातों से निकलकर डिजिटल एसेट्स में आ सकती है।\n\nसिक्योरिटाइज और बड़े वित्तीय संस्थानों की टोकनाइजेशन पहल\nइस विधायी गतिरोध का सीधा लाभ वित्तीय संपत्तियों के टोकनाइजेशन को मिला है। अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (एसईसी) के नए नियमों के तहत टोकनाइजेशन प्लेटफॉर्म्स को मजबूत समर्थन मिला है। यह मौजूदा व्यवस्था पांच वर्षों के लिए सीमित है, जिसमें अमेरिकी शेयर बाजारों में सूचीबद्ध स्टॉक्स शामिल हैं और कुछ वॉल्यूम सीमाएं भी तय की गई हैं। इसके बावजूद यह ढांचा उद्योग को कई वर्षों तक विनियामक अध्ययनों के इंतजार के बजाय सीधे व्यावहारिक प्रयोग करने की सुविधा देता है।\n\nइस पूरे घटनाक्रम में सिक्योरिटाइज को एक प्रमुख लाभार्थी माना जा रहा है। सिक्योरिटाइज कंपनी ब्लैककॉक, अपोलो और केकेआर जैसे वैश्विक फंड्स के लिए टोकनाइजेशन इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराती है। इसके साथ ही यह ब्लैककॉक के बीडल (BUIDL) फंड के ट्रांसफर एजेंट के रूप में भी अपनी सेवाएं दे रही है। बड़े संस्थागत निवेशकों के इस क्षेत्र में उतरने से ब्लॉकचेन पर संपत्तियों के डिजिटलीकरण को नई गति मिल रही है।\n\nप्रोटोकॉल रेवेन्यू बायबैक और एसईसी का स्पष्टीकरण\nक्लैरिटी एक्ट के रुकने का एक और फायदा उन टोकन्स को मिला है जो अपने प्रोटोकॉल से प्राप्त राजस्व का इस्तेमाल टोकन बायबैक के लिए करते हैं। इनमें नियर और यूनिसवैप जैसे प्रमुख टोकन शामिल हैं। हॉगन ने बताया कि क्लैरिटी कानून के न होने पर रेवेन्यू-जेनरेटिंग टोकन्स के लिए नियम अधिक स्पष्ट साबित हुए हैं, जबकि बिल लागू होने पर यह स्थिति धुंधली हो सकती थी।\n\nप्रस्तावित कानून में इस बात को लेकर भ्रम था कि क्या बायबैक कार्यक्रम किसी टोकन के विनियामक वर्गीकरण को बदलकर उसे सिक्योरिटी की श्रेणी में डाल सकता है। सीनेट में विधेयक के रद्द होने के बाद एसईसी ने एक एफएक्यू में यह स्पष्ट किया कि यदि कोई नेटवर्क पूरी तरह से काम कर रहा है, तो केवल बायबैक कार्यक्रम की घोषणा करने से वह टोकन सिक्योरिटी नहीं बन जाता। इस आधिकारिक रुख से परियोजनाओं को अपने नेटवर्क राजस्व का उपयोग करने का भरोसा मिला है।\n\nनियामकीय अनिश्चितता के बीच मुख्यधारा में विस्तार\nडिजिटल परिसंपत्ति क्षेत्र के सामने भविष्य में नियामकों द्वारा अपनी नीति बदलने का जोखिम हमेशा बना रहता है। इस पहलू पर हॉगन ने स्वीकार किया कि भविष्य में नियामकों का नजरिया बदलने की संभावना एक मुख्य चुनौती हो सकती है।\n\nहालांकि, प्रमुख वित्तीय संस्थानों द्वारा ब्लॉकचेन तकनीक को लगातार अपनाए जाने के कारण अब किसी भी नियामकीय यू-टर्न की संभावना कम होती जा रही है। जब पारंपरिक वित्त जगत के सबसे बड़े घराने इस प्रणाली में निवेश कर रहे हैं, तो नियमों को पूरी तरह से उलट देना आसान नहीं होगा। इस बीच व्यापक बाजार में बुधवार को बिटकॉइन 83,000 डॉलर के स्तर पर समर्थन बनाए रखने के संघर्ष में दिखा, इथेरियम भी इसी के अनुरूप कारोबार कर रहा था, जबकि रिपल 1.50 डॉलर के ऊपर टिकने का प्रयास कर रहा था। वहीं पाई नेटवर्क 0.0910 डॉलर के पार दर्ज किया गया।\n\nइसका आप पर असर\nअमेरिकी सीनेट में क्लैरिटी एक्ट के रुकने से वैश्विक स्तर पर क्रिप्टो एक्सचेंज यूजर्स और टोकन निवेशकों के लिए कई अहम व्यावहारिक लाभ सुरक्षित हो गए हैं।\n\n• क्रिप्टो निवेशकों के लिए: विभिन्न एक्सचेंजों पर रखे गए स्टेबलकॉइन बैलेंस पर मिलने वाले आकर्षक यील्ड और रिवॉर्ड्स पहले की तरह जारी रहेंगे। यदि यह कानून लागू हो जाता, तो प्लेटफॉर्म्स पर यील्ड देने पर पूर्ण प्रतिबंध लग जाता और प्रति उल्लंघन 50 लाख डॉलर का जुर्माना लागू होता।\n• टोकन धारकों के लिए: नियर और यूनिसवैप जैसे प्रोटोकॉल के लिए रेवेन्यू बायबैक कार्यक्रम जारी रखना कानूनी रूप से अधिक सुरक्षित हो गया है। एसईसी ने साफ किया है कि कार्यरत नेटवर्क पर केवल बायबैक की घोषणा करने से टोकन को सिक्योरिटी नहीं माना जाएगा।\n• पारंपरिक बैंक ग्राहकों के लिए: बैंकों द्वारा स्टेबलकॉइन पर पाबंदी लगवाने की कोशिश नाकाम होने से निवेशकों के पास पारंपरिक खातों के मुकाबले डिजिटल एसेट्स में अधिक विकल्प बने रहेंगे। इससे उपयोगकर्ता अपनी नकदी को अधिक रिटर्न देने वाले डिजिटल माध्यमों में स्थानांतरित कर सकते हैं।\n• संस्थागत उत्पादों के ग्राहकों के लिए: सिक्योरिटाइज, ब्लैककॉक और अपोलो जैसी संस्थाओं द्वारा लाए जा रहे टोकनाइज्ड फंड्स में तेजी आएगी। 5 साल के सीमित दायरे और वॉल्यूम प्रतिबंधों के तहत अमेरिकी शेयरों के टोकनाइजेशन के नए प्रयोग सीधे बाजार में उपलब्ध होंगे।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह घटनाक्रम अमेरिकी संसद में क्लैरिटी एक्ट को लेकर हुए राजनीतिक गतिरोध और अंतिम मसौदे में शामिल की गई सख्त पाबंदियों के कारण सामने आया। कानून बनाने की प्रक्रिया में पारंपरिक बैंकों के कड़े विरोध ने ऐसी शर्तें जोड़ दी थीं जो क्रिप्टो उद्योग के मौजूदा कारोबारी मॉडल को नुकसान पहुंचा रही थीं।\n\n• अंतिम समझौतों पर विवाद: क्लैरिटी एक्ट के अंतिम प्रारूप में क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स द्वारा स्टेबलकॉइन पर ब्याज देने पर पूर्ण रोक लगाने का प्रस्ताव था। इस प्रावधान ने उद्योग जगत की प्राथमिक चिंताओं को बढ़ा दिया, जिससे विधेयक का सर्वसम्मत समर्थन समाप्त हो गया।\n• पारंपरिक बैंकों का दबाव: पारंपरिक वित्तीय संस्थानों ने इस बात का भारी विरोध किया कि गैर-बैंकिंग क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स अपने ग्राहकों को स्टेबलकॉइन पर यील्ड या रिवॉर्ड्स दें। बैंकों के अड़ियल रुख के कारण विधेयक में अत्यधिक सख्त जुर्माने जोड़े गए, जिससे कानून आगे नहीं बढ़ सका।\n• मौजूदा कानूनों की मौजूदगी: पहले से लागू जीनियस एक्ट केवल स्टेबलकॉइन जारीकर्ताओं पर ब्याज देने की पाबंदी लगाता है, एक्सचेंजों पर नहीं। सीनेट में नया बिल अटकने से यह पुराना ढांचा प्रभावी रहा और एसईसी को अलग से दिशा-निर्देश जारी करने की गुंजाइश मिली।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. क्लैरिटी एक्ट के सीनेट में विफल होने के बाद प्रमुख क्रिप्टोकरेंसीज पर क्या असर पड़ा?\nविधेयक के अटकने के बाद बिटकॉइन में 8 प्रतिशत और इथेरियम में 7 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि नियर, यूनिसवैप और एवलांच में इससे भी अधिक उछाल आया।\n\n2. क्लैरिटी एक्ट के अंतिम मसौदे में स्टेबलकॉइन यील्ड पर क्या प्रावधान था?\nअंतिम मसौदे में एक्सचेंजों द्वारा ग्राहकों को स्टेबलकॉइन पर किसी भी प्रकार का ब्याज या यील्ड देने पर पूर्ण प्रतिबंध था, जिसके उल्लंघन पर 50 लाख डॉलर तक के जुर्माने का प्रावधान था।\n\n3. जीनियस एक्ट के तहत एक्सचेंजों को क्या छूट मिली हुई है?\nजीनियस एक्ट स्टेबलकॉइन जारीकर्ताओं पर तो ब्याज देने की रोक लगाता है, लेकिन एक्सचेंजों पर यह पाबंदी लागू नहीं होती, जिससे वे ग्राहकों को रिवॉर्ड दे सकते हैं।\n\n4. टोकनाइजेशन के क्षेत्र में सिक्योरिटाइज कंपनी की क्या भूमिका है?\nसिक्योरिटाइज ब्लैककॉक, अपोलो और केकेआर के फंड्स को टोकनाइजेशन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदान करती है और ब्लैककॉक के बीडल फंड की ट्रांसफर एजेंट के रूप में काम करती है।\n\n5. एसईसी ने रेवेन्यू बायबैक वाले टोकन्स को लेकर क्या स्पष्टीकरण दिया है?\nएसईसी ने एफएक्यू में स्पष्ट किया है कि यदि कोई नेटवर्क पूरी तरह कार्यात्मक है, तो केवल बायबैक कार्यक्रम की घोषणा करने से उसका टोकन सिक्योरिटी नहीं बन जाता।\n\n6. मैट हॉगन के अनुसार क्रिप्टो बाजार के लिए मुख्य विनियामक जोखिम क्या है?\nहॉगन के अनुसार सबसे बड़ा जोखिम यह है कि भविष्य में नियामक अपनी नीति या दृष्टिकोण बदलकर नए प्रतिबंध लगा सकते हैं।",
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  "category": "क्रिप्टो",
  "publishedAt": "2026-10-01",
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