# कॉइनबेस ने अमेरिकी खुदरा निवेशकों के लिए आईपीओ आवंटन की सुविधा शुरू की, ओउरा से होगी शुरुआत

> क्रिप्टो एक्सचेंज कॉइनबेस ने अमेरिकी खुदरा ग्राहकों के लिए सीधे अपने ऐप से आईपीओ शेयरों के आवंटन के लिए अनुरोध करने की सुविधा पेश की है, जिसमें पहला ऑफर ओउरा का होगा।

**Type:** article · **Category:** क्रिप्टो · **Published:** 2026-09-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/crypto/coinbase-ne-ameriki-khudara-niveshakon-ke-lie-ipo-avntana-ki-suvidha-shuru-ki-oura-se-hogi-shuruata-36255 · **Language:** Hindi
**Tags:** कॉइनबेस, आईपीओ, ओउरा, खुदरा निवेश, बिटकॉइन, क्रिप्टो बाजार, एपेक्स क्लियरिंग, शेयर बाजार

प्रमुख डिजिटल एसेट प्लेटफॉर्म कॉइनबेस ने संयुक्त राज्य अमेरिका के पात्र खुदरा ग्राहकों के लिए एक नया वित्तीय दरवाजा खोलते हुए प्राथमिक इक्विटी बाजार में सीधी एंट्री की है। अब इस प्लेटफॉर्म के योग्य अमेरिकी उपयोगकर्ता सीधे अपने मोबाइल ऐप के माध्यम से चुनिंदा आरंभिक सार्वजनिक निर्गमों में शेयर आवंटन के लिए आवेदन कर सकेंगे। कंपनी अपने मंच को एक व्यापक वित्तीय हब के रूप में विकसित कर रही है, जहां उपयोगकर्ता किसी कंपनी के पूरे कारोबारी सफर के दौरान अलग-अलग चरणों में निवेश के अवसरों से जुड़ सकें।

## ओउरा के साथ खुलेगा नया अध्याय
इस नई वित्तीय पेशकश के तहत पहला सार्वजनिक निर्गम स्मार्ट रिंग निर्माता ओउरा का होगा। ओउरा का आईपीओ कॉइनबेस कैपिटल मार्केट्स के जरिए उपलब्ध कराया जाने वाला पहला सौदा बनने जा रहा है। कॉइनबेस के अनुसार, इस पहल का मकसद अपने अमेरिकी ग्राहकों को सार्वजनिक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध होने से पहले ही उच्च मांग वाली कंपनियों में शुरुआती भागीदारी का अवसर प्रदान करना है। संस्थागत निवेशकों के पारंपरिक वर्चस्व वाले प्राथमिक इक्विटी बाजार में यह कदम आम व्यक्तिगत निवेशकों की पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

## ऐप से आवेदन और बोली लगाने की प्रक्रिया
पात्र निवेशकों को इन प्राथमिक पेशकशों में हिस्सा लेने के लिए कॉइनबेस ऐप में एक समर्पित आईपीओ पेज दिया गया है। जब भी किसी कंपनी के सार्वजनिक निर्गम के लिए संभावित मूल्य दायरा तय हो जाएगा, तो निवेशक अपने खाते में जरूरी पूंजी जोड़कर जितने शेयर खरीदना चाहते हैं, उसके लिए कंडीशनल ऑफर टू बाय जमा कर सकते हैं। ऑर्डर अवधि पूरी होने तक ग्राहकों को अपनी आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुसार अपने अनुरोधों में संशोधन करने, उन्हें रद्द करने या नए सिरे से प्रस्ताव भेजने की पूरी छूट रहेगी।

ऑर्डर विंडो बंद होने के बाद, उपलब्ध शेयरों का वितरण कॉइनबेस की आंतरिक आवंटन प्रणाली के आधार पर किया जाएगा। आवंटित शेयर आईपीओ मूल्य पर ही सीधे ग्राहक के खाते में जमा कर दिए जाएंगे। हालांकि, आवंटन की प्रक्रिया पूरी तरह से सिंडिकेट अंडरराइटर्स द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले शेयरों की कुल संख्या और खुदरा ग्राहकों की कुल मांग पर निर्भर करेगी। यदि मांग बहुत अधिक रहती है तो संभव है कि ग्राहकों को आंशिक आवंटन मिले या फिर कुछ निवेशकों को कोई भी शेयर आवंटित न हो पाए।

## तुरंत मुनाफावसूली रोकने के लिए सख्त पाबंदियां
इस पूरी व्यवस्था को दीर्घकालिक निवेशकों के अनुकूल बनाने के लिए कॉइनबेस ने शेयर आवंटन प्रणाली में कड़े नियम जोड़े हैं। जो निवेशक आवंटित शेयरों को लंबे समय तक अपने पास रखने की योजना बनाते हैं, उन्हें इस प्रणाली में प्राथमिकता दी जाएगी। यदि कोई ग्राहक आईपीओ में शेयर मिलने के 30 दिनों के भीतर उन्हें बेच देता है, तो उस पर अगले 60 दिनों के लिए भविष्य के आईपीओ में भाग लेने पर अस्थायी रोक लगाई जा सकती है। इसके अलावा, बार-बार शुरुआती दिनों में शेयर बेचकर निकलने वाले उपयोगकर्ताओं को आने वाले निर्गमों में बहुत छोटा आवंटन मिलेगा या फिर उनके आवंटन के मौके काफी कम कर दिए जाएंगे।

## ब्रोकर-डीलर ढांचा और क्लियरिंग व्यवस्था
इस प्राथमिक बाजार पेशकश में कॉइनबेस कैपिटल मार्केट्स एक बेस्ट-एफर्ट्स सेलिंग-ग्रुप सदस्य के रूप में काम करेगी। यह ब्रोकर-डीलर संस्था सीधे सौदों का अंडरराइटिंग नहीं करेगी और न ही शेयरों की कोई प्रत्यक्ष इन्वेंटरी अपने पास रखेगी। इसके बजाय, यह अपने तमाम खुदरा ग्राहकों के ऑर्डर्स को एकत्रित करेगी और अपने क्लियरिंग पार्टनर एपेक्स क्लियरिंग कॉर्पोरेशन के माध्यम से आगे रूट करेगी।

कॉइनबेस ने स्पष्ट किया है कि कॉइनबेस कैपिटल मार्केट्स केवल अपने ग्राहकों की ओर से एक स्वतंत्र एजेंट के रूप में काम करती है और वह ग्राहकों के सौदों के विपरीत पक्ष में कोई व्यापारिक दांव नहीं लगाती है। संस्था का इरादा आने वाले समय में जैसे-जैसे अतिरिक्त सेलिंग-ग्रुप आवंटन उपलब्ध होंगे, अपने मंच पर नए आईपीओ अवसरों की संख्या और दायरे को और अधिक विस्तार देने का है।

## प्राइवेट इक्विटी से पब्लिक लिस्टिंग तक का विस्तार
आईपीओ बाजार में यह कदम उस वित्तीय रणनीति का अगला चरण है जिसकी शुरुआत जून में प्री-आईपीओ परपेचुअल फ्यूचर्स की पेशकश के साथ हुई थी। उस समय कंपनी ने स्पेसएक्स से जुड़े अनुबंध की शुरुआत की थी, जिससे उपयोगकर्ता किसी निजी कंपनी के शेयर प्रत्यक्ष रूप से खरीदे बिना भी उसकी लिस्टिंग से पूर्व मूल्य में होने वाले उतार-चढ़ाव में भाग ले सकते थे। अब सीधे इक्विटी आवंटन की सुविधा के साथ प्लेटफॉर्म निजी मूल्यांकन से लेकर सार्वजनिक लिस्टिंग तक की पूरी प्रक्रिया को अपने एक ही पारिस्थितिकी तंत्र में समेटने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

## क्रिप्टो बाजार की ताजा हलचल
इक्विटी बाजार में कॉइनबेस के इस विस्तार के बीच डिजिटल एसेट बाजारों में भी तेज गतिविधियां देखने को मिली हैं। पेपे के दाम में पिछले 24 घंटों के दौरान लगभग 30% की जबरदस्त तेजी दर्ज की गई, जिसने अधिकांश प्रमुख क्रिप्टो परिसंपत्तियों को पीछे छोड़ दिया। डेरिवेटिव्स आंकड़ों के अनुसार, इसी समयावधि में $2 मिलियन से अधिक का शॉर्ट स्क्वीज हुआ, जिसने ट्रेडर्स को इस मीम कॉइन में अपनी पोजीशन वापस खरीदने के लिए मजबूर कर दिया। तकनीकी संकेतकों में तेजी की गति मजबूत होने से इसके लिए सकारात्मक माहौल देखा जा रहा है।

उधर, सबसे बड़ी डिजिटल परिसंपत्ति बिटकॉइन $85,000 के ऊपर मजबूती से कारोबार कर रही है। सकारात्मक संस्थागत इनफ्लो, अगस्त के बाद स्ट्रैटेजी की पहली बीटीसी खरीदारी, और क्लैरिटी एक्ट की विफलता के बाद वैकल्पिक नियामक विस्तारों के बीच बाजार का रुख रचनात्मक बना हुआ है। वहीं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस श्रेणी के टोकनों में बिटटेंसर (टीएओ) और एफईटी ने पिछले 24 घंटों में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले टोकनों के रूप में अपनी जगह बनाई है।

दूसरी ओर, सप्ताह की शुरुआत में लगभग 9% की बढ़त दर्ज करने के बाद रिपल (एक्सआरपी) और स्टेलर (एक्सएलएम) स्थिर हो गए हैं। तकनीकी गति के संकेतक एक्सआरपी और एक्सएलएम में सकारात्मक मूल्य गतिविधियों का समर्थन कर रहे हैं और आगे रैली की संभावना जताते हैं, यद्यपि मिले-जुले डेरिवेटिव्स डेटा के कारण ट्रेडर्स सतर्क रुख अपना रहे हैं। वहीं एथेरियम सोमवार को $2,700 के स्तर से ऊपर पहुंच गया। क्लैरिटी एक्ट के सीनेट में आगे न बढ़ पाने और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर वृद्धि की चिंताओं के बावजूद निवेशकों ने इसके रियलाइज्ड प्राइस स्तर का मजबूती से बचाव किया। पिछले सप्ताह एथेरियम फिसलकर $2,400 के नीचे चला गया था, लेकिन इस प्रमुख ऑल्टकॉइन का रियलाइज्ड प्राइस या औसत ऑन-चेन लागत आधार $2,310 के ठीक आसपास बना हुआ है।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी खुदरा निवेशकों को अब पारंपरिक संस्थागत बाधाओं के बिना सीधे अपने मोबाइल ऐप से आगामी कंपनियों के आईपीओ में शेयर आवंटन मांगने का सीधा रास्ता मिल गया है।

- **खुदरा निवेशकों के लिए:** अमेरिकी खुदरा उपयोगकर्ता अब कॉइनबेस ऐप से ओउरा जैसी कंपनियों के आईपीओ में सीधे कंडीशनल ऑफर जमा कर सकते हैं। हालांकि, उन्हें ध्यान रखना होगा कि अधिक मांग होने पर आंशिक आवंटन या शून्य शेयर मिलने का जोखिम भी बना रहेगा।
- **अल्पावधि ट्रेडर्स पर असर:** आवंटन मिलने के 30 दिनों के भीतर शेयर बेचने पर अगले 60 दिनों के लिए आईपीओ में भाग लेने पर रोक लग जाएगी। लगातार जल्दी शेयर बेचने वालों को भविष्य के आवंटनों में बहुत कम या न के बराबर शेयर मिलने का नुकसान उठाना पड़ेगा।
- **आदेश प्रक्रिया में सुविधा:** बोली लगाने की खुली अवधि के दौरान निवेशक अपने आवेदन में कभी भी बदलाव या उसे रद्द कर सकते हैं। इसके लिए बस खाते में पहले से पर्याप्त फंड होना और अपेक्षित मूल्य सीमा के भीतर बोली लगाना आवश्यक होगा।
- **क्रिप्टो निवेशकों के लिए:** ऐप उपयोगकर्ताओं को अब सिर्फ डिजिटल टोकन ही नहीं, बल्कि इक्विटी परिसंपत्तियों में भी विविधता लाने का मंच मिल रहा है। इससे एक ही प्लेटफॉर्म से क्रिप्टो और पारंपरिक आईपीओ दोनों में पूंजी प्रबंधन आसान हो जाएगा।

## ऐसा क्यों हुआ
कॉइनबेस अपने प्लेटफॉर्म को केवल क्रिप्टो ट्रेडिंग तक सीमित न रखकर एक बहु-संपत्ति विनिमय केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहता है। इसके साथ ही वह संस्थागत निवेशकों के एकाधिकार वाले प्राथमिक आईपीओ बाजार में खुदरा भागीदारी की बढ़ती मांग को भुना रहा है।

- **व्यापक वित्तीय मंच की रणनीति:** कंपनी अपने उपयोगकर्ताओं को कंपनियों के पूरे जीवनचक्र, यानी निजी मूल्यांकन से लेकर सार्वजनिक लिस्टिंग तक हर चरण में निवेश सुविधा देना चाहती है। इससे पहले जून में पेश किए गए प्री-आईपीओ परपेचुअल फ्यूचर्स इसी विस्तार की पहली कड़ी थे।
- **खुदरा इक्विटी पहुंच की मांग:** प्राथमिक बाजार में आम तौर पर बड़े संस्थागत फंड्स को ही आईपीओ आवंटन में तरजीह मिलती है, जिससे खुदरा निवेशक वंचित रह जाते थे। कॉइनबेस कैपिटल मार्केट्स ने एपेक्स क्लियरिंग कॉर्पोरेशन के साथ साझेदारी करके खुदरा मांग को एकत्रित करने का रास्ता तैयार किया है।
- **दीर्घकालिक स्थिरता की जरूरत:** आईपीओ शेयर मिलते ही तुरंत मुनाफावसूली करने की प्रवृत्ति से नव-सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में भारी अस्थिरता आती है। इसी वजह से कंपनी ने 30 दिन के भीतर शेयर बेचने पर 60 दिन का प्रतिबंध लगाने का नियम बनाया है।

## सवाल-जवाब

### 1. कॉइनबेस के आईपीओ आवंटन में सबसे पहले किस कंपनी के शेयर मिलेंगे?
इस नई सुविधा के तहत पहला सार्वजनिक निर्गम स्मार्ट रिंग बनाने वाली कंपनी ओउरा का होगा।

### 2. क्या आईपीओ में आवेदन करने वाले सभी ग्राहकों को शेयर मिलना तय है?
नहीं, शेयर आवंटन अंडरराइटर्स द्वारा उपलब्ध कराए गए शेयरों और कुल मांग पर निर्भर करता है, जिससे ऑर्डर आंशिक रूप से मिल सकते हैं या बिल्कुल नहीं भी मिल सकते हैं।

### 3. आवंटित शेयर 30 दिन के अंदर बेचने पर क्या जुर्माना लगेगा?
यदि कोई निवेशक 30 दिनों के भीतर शेयर बेचता है, तो उस पर अगले 60 दिनों तक नए आईपीओ में भाग लेने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

### 4. क्या कॉइनबेस इन कंपनियों के आईपीओ का सीधा अंडरराइटर है?
नहीं, कॉइनबेस कैपिटल मार्केट्स केवल बेस्ट-एफर्ट्स सेलिंग-ग्रुप सदस्य और एजेंट के रूप में काम करती है तथा ऑर्डर्स को एपेक्स क्लियरिंग कॉर्पोरेशन के जरिए रूट करती है।

### 5. पेपे और बिटकॉइन में हालिया कारोबार का क्या रुख रहा?
पेपे में शॉर्ट स्क्वीज के चलते 24 घंटे में लगभग 30% का उछाल आया, जबकि बिटकॉइन संस्थागत इनफ्लो के सहारे $85,000 के ऊपर मजबूती से बना रहा।

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