# जीनियस एक्ट के तहत स्टेबलकॉइन के सख्त नियमों पर फेडरल रिजर्व ने मांगी जनता से राय

> फेडरल रिजर्व ने पेमेंट स्टेबलकॉइन जारीकर्ताओं के लिए रिजर्व एसेट्स, पूंजी मानकों और बैंकों की मंजूरी प्रक्रिया पर दो नियामक प्रस्ताव पेश कर सार्वजनिक प्रतिक्रिया मांगी है।

**Type:** article · **Category:** क्रिप्टो · **Published:** 2026-09-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/crypto/genius-act-ke-tahata-stablecoin-ke-sakhta-niyamon-para-federal-reserve-ne-mangi-janata-se-raya-38143 · **Language:** Hindi
**Tags:** फेडरल रिजर्व, स्टेबलकॉइन, जीनियस एक्ट, माइकल बार, ट्रेजरी बिल्स, डिजिटल करेंसी, अमेरिकी सीनेट

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने पेमेंट स्टेबलकॉइन जारीकर्ताओं पर कड़े नियामक नियम लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक बोर्ड ने जीनियस एक्ट के तहत निगरानी में आने वाली संस्थाओं के लिए दो विस्तृत नियामक प्रस्ताव तैयार किए हैं और इन पर आम जनता और उद्योग जगत से सुझाव मांगे हैं। इन प्रस्तावों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल टोकन जारी करने वाली कंपनियां बाजार की किसी भी विपरीत परिस्थिति में निवेशकों का पैसा सुरक्षित लौटाने में पूरी तरह सक्षम हों।

## टोकन के पीछे पूरी तरह सुरक्षित रिजर्व का नियम
फेडरल रिजर्व के पहले प्रस्ताव में इस बात पर जोर दिया गया है कि बोर्ड की निगरानी में काम करने वाले सभी पेमेंट स्टेबलकॉइन जारीकर्ताओं को अपने हर जारी किए गए टोकन के बदले शत-प्रतिशत उच्च गुणवत्ता वाले लिक्विड एसेट्स का बैकअप रखना अनिवार्य होगा। इस अनिवार्य रिजर्व में केवल तयशुदा अनुमत संपत्तियां ही शामिल की जा सकेंगी, जिनमें मुख्य रूप से अल्पकालिक ट्रेजरी बिल्स और अन्य बेहद सुरक्षित लिक्विड एसेट्स शामिल हैं। इस व्यवस्था का मकसद यह तय करना है कि टोकन धारक जब भी अपने डिजिटल टोकन के बदले असली रकम मांगे, तो जारीकर्ता के पास तत्काल नकद भुगतान करने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हों।

इसके साथ ही, पहले प्रस्ताव के तहत स्टेबलकॉइन गतिविधियों से पैदा होने वाले क्रेडिट जोखिम और ऑपरेशनल जोखिम से निपटने के लिए मानकीकृत पूंजी आवश्यकताएं भी लागू करने की योजना बनाई गई है। केंद्रीय बैंक व्यापक जोखिम प्रबंधन मानक भी तय करने की तैयारी में है, ताकि तकनीकी गड़बड़ियों, वित्तीय झटकों या संस्थागत विफलता की स्थिति में ग्राहकों का धन सुरक्षित रहे।

## बैंकों के लिए स्टेबलकॉइन जारी करने की मंजूरी प्रक्रिया
फेडरल रिजर्व का दूसरा प्रस्ताव पूरी तरह से उन बैंकों पर केंद्रित है जो सीधे या अपनी सहायक कंपनियों के माध्यम से पेमेंट स्टेबलकॉइन जारी करने की अनुमति चाहते हैं। बोर्ड द्वारा पर्यवेक्षित बैंकों को इसके लिए एक व्यवस्थित और पारदर्शी आवेदन प्रक्रिया से गुजरना होगा। आवेदन करने वाले बैंकों को अपने विस्तृत व्यावसायिक प्लान, वित्तीय आंकड़े और अन्य संबंधित दस्तावेज नियामक के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे।

प्रस्तावित ढांचे में केवल मंजूरी ही नहीं, बल्कि आवेदनों पर अंतिम निर्णय लेने, औपचारिक सुनवाई आयोजित करने और यदि किसी बैंक का आवेदन खारिज होता है तो उसके खिलाफ अपील करने की पूरी कानूनी प्रक्रिया भी स्पष्ट रूप से तय की जा रही है। इससे बैंकिंग क्षेत्र में डिजिटल परिसंपत्ति जारी करने के इच्छुक संस्थानों को स्पष्ट नियमों के भीतर काम करने का रास्ता मिलेगा।

## बाजार के दबाव में भी तुरंत रिडेम्पशन जरूरी
फेडरल रिजर्व के गवर्नर माइकल बार ने इन नए नियामक प्रस्तावों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इस नीतिगत ढांचे का मकसद आवश्यक सुरक्षा उपाय तैयार करना है, ताकि स्टेबलकॉइन एक वैध और सुरक्षित भुगतान साधन के रूप में विकसित हो सकें। गवर्नर माइकल बार ने स्पष्ट चेतावनी दी कि स्टेबलकॉइन जारी करने वाली कंपनियों को बाजार के अत्यधिक तनाव या मंदी के दौर में भी ग्राहकों की रिडेम्पशन मांगों को बिना किसी देरी के पूरा करना होगा।

गवर्नर माइकल बार ने जोर देकर कहा, “स्टेबलकॉइन केवल तभी स्थिर होंगे जब उन्हें विभिन्न परिस्थितियों में समान मूल्य पर भरोसेमंद और तुरंत रिडीम किया जा सके।” उन्होंने रेखांकित किया कि गंभीर वित्तीय तनाव की स्थिति में आमतौर पर अत्यधिक तरल माने जाने वाले सरकारी कर्ज और बॉन्ड के मूल्य पर भी असर पड़ सकता है, जिससे किसी व्यक्तिगत जारीकर्ता और उससे जुड़ी अन्य संस्थाओं पर भारी वित्तीय दबाव बन सकता है।

## ब्याज दर और विदेशी मुद्रा जोखिम पर मांगी प्रतिक्रिया
गवर्नर ने कहा कि वह रिजर्व संपत्तियों पर प्रस्तावित सीमाओं और मानकीकृत पूंजी आवश्यकताओं के प्रावधानों से उत्साहित हैं। इसके साथ ही उन्होंने जनता और विशेषज्ञों से इस बात पर खास तौर पर राय मांगी है कि क्या तैयार किया गया यह नया ढांचा ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव और विदेशी मुद्रा से जुड़े वित्तीय जोखिमों से निपटने के लिए पर्याप्त है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि स्टेबलकॉइन फंड तक पहुंच के मामले में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए सभी उपयोगकर्ताओं के पास बिना किसी शर्त के यूनिवर्सल रिडेम्पशन अधिकार होना बेहद आवश्यक है।

## संसद में क्लैरिटी एक्ट रुका, जीनियस एक्ट बना मुख्य आधार
अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ओर से यह नियामक कदम संसद के ऊपरी सदन सीनेट में क्लैरिटी एक्ट के आगे न बढ़ पाने के ठीक बाद उठाया गया है। सीनेट में पिछले सप्ताह क्लैरिटी एक्ट 49-50 के मत अंतर से आगे बढ़ने में विफल रहा था। इस महत्वपूर्ण विधायी असफलता के बाद, अब अमेरिकी संघीय स्तर पर स्टेबलकॉइन के नियम कायदे तय करने की पूरी प्रक्रिया का मुख्य कानूनी आधार केवल जीनियस एक्ट ही रह गया है। इसी कानून के तहत केंद्रीय बैंक अब डिजिटल भुगतान प्रणालियों को औपचारिक वित्तीय तंत्र के भीतर कड़े नियमों के तहत लाने की तैयारी कर रहा है।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के इस प्रस्ताव से दुनिया भर में डॉलर-पेग्ड स्टेबलकॉइन का इस्तेमाल करने वाले निवेशकों और डिजिटल भुगतान तंत्र पर सीधा असर पड़ेगा।

- **क्रिप्टो निवेशकों के लिए:** अगर यह प्रस्ताव कानून बनता है, तो यूएसडी स्टेबलकॉइन धारकों को पूरी तरह सरकारी ट्रेजरी बिल्स समर्थित रिडेम्पशन की कानूनी सुरक्षा मिलेगी। इसका मतलब है कि बाजार में गिरावट के बावजूद आपके 1 डॉलर टोकन का मूल्य सुरक्षित रहने की संभावना काफी बढ़ जाएगी।
- **वैश्विक वित्तीय नियमों पर असर:** अमेरिकी केंद्रीय बैंक के इस कदम से अन्य देशों के केंद्रीय बैंकों पर भी स्टेबलकॉइन के लिए सख्त रिजर्व नियम बनाने का दबाव बढ़ेगा। इससे डिजिटल एसेट्स क्षेत्र में अनियंत्रित और गैर-पारदर्शी निजी कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगेगी।
- **बैंकिंग सेवाओं में बदलाव:** पारंपरिक बैंकों को अपनी सहायक कंपनियों के जरिए टोकन जारी करने की स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया मिलने जा रही है। इससे आम उपयोगकर्ताओं को आने वाले समय में अपने सामान्य बैंक खातों से सीधे विनियमित डिजिटल भुगतान करने का विकल्प मिल सकता है।
- **पारदर्शिता और ऑडिट:** स्टेबलकॉइन कंपनियों को विदेशी मुद्रा और ब्याज दर से जुड़े जोखिमों पर नियमित रिपोर्टिंग करनी होगी। इससे ग्राहकों को यह जानने में आसानी होगी कि उनका पैसा किन संपत्तियों में निवेश किया गया है।

## ऐसा क्यों हुआ
फेडरल रिजर्व ने यह कदम डिजिटल भुगतान प्रणाली को सुरक्षित करने और वित्तीय संकटों से बचाव के लिए उठाया है। पिछले सप्ताह संसद में एक अन्य महत्वपूर्ण विधेयक के गिरने के बाद नियामक कार्रवाई तेज हुई है।

- **विधायी गतिरोध:** अमेरिकी सीनेट में क्लैरिटी एक्ट 49-50 के करीबी अंतर से आगे नहीं बढ़ सका। इस कारण फेडरल रिजर्व को अब उपलब्ध एकमात्र कानूनी आधार यानी जीनियस एक्ट के तहत नियम बनाने की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ी।
- **वित्तीय स्थिरता और रन का डर:** निजी तौर पर जारी किए जाने वाले स्टेबलकॉइन पर बाजार के दबाव के दौरान लिक्विडिटी संकट का खतरा हमेशा बना रहता है। केंद्रीय बैंक यह सुनिश्चित करना चाहता है कि तनाव के समय भी टोकन का मूल्य टूटे नहीं और सभी ग्राहकों को तुरंत पूरा पैसा मिले।
- **असुरक्षित निवेश प्रथाओं पर रोक:** अतीत में डिजिटल टोकन जारी करने वाली कंपनियों द्वारा असुरक्षित या जोखिम भरे एसेट्स में रिजर्व रखने की चिंताएं सामने आई हैं। नया नियम कंपनियों को केवल शॉर्ट-टर्म ट्रेजरी बिल्स और सुरक्षित लिक्विड संपत्तियों तक सीमित करता है।
- **बैंकिंग तंत्र का एकीकरण:** पारंपरिक बैंकों द्वारा अपनी सहायक कंपनियों के माध्यम से स्टेबलकॉइन जारी करने के बढ़ते रुझान के चलते स्पष्ट दिशा-निर्देशों की आवश्यकता थी। केंद्रीय बैंक ने आवेदन, जांच और अपील की एक औपचारिक प्रशासनिक व्यवस्था तय करने के लिए यह पहल की है।

## सवाल-जवाब

### 1. फेडरल रिजर्व ने किन दो मुख्य विषयों पर प्रस्ताव पेश किए हैं?
फेडरल रिजर्व ने स्टेबलकॉइन के लिए अनिवार्य रिजर्व एसेट्स और पूंजी मानकों तथा बैंकों द्वारा टोकन जारी करने की आवेदन प्रक्रिया पर प्रस्ताव जारी किए हैं।

### 2. यह नियामक कदम किस कानून के तहत उठाया जा रहा है?
यह नियामक प्रक्रिया जीनियस एक्ट के तहत केंद्रीय बैंक द्वारा संचालित की जा रही है।

### 3. पहला प्रस्ताव रिजर्व एसेट्स के बारे में क्या कहता है?
पहले प्रस्ताव के तहत स्टेबलकॉइन जारीकर्ताओं को अपने सभी टोकन के बदले अल्पकालिक ट्रेजरी बिल्स और सुरक्षित लिक्विड एसेट्स का पूरा बैकअप रखना अनिवार्य होगा।

### 4. गवर्नर माइकल बार ने रिडेम्पशन को लेकर क्या कहा?
माइकल बार ने स्पष्ट किया कि स्टेबलकॉइन तभी वास्तव में स्थिर माने जाएंगे जब उन्हें किसी भी बाजार स्थिति में तुरंत और समान मूल्य पर रिडीम किया जा सके।

### 5. क्लैरिटी एक्ट के साथ संसद में क्या हुआ?
अमेरिकी सीनेट में पिछले सप्ताह क्लैरिटी एक्ट 49-50 के मत अंतर से आगे बढ़ने में विफल हो गया था।

### 6. दूसरे प्रस्ताव के तहत बैंकों को क्या जमा करना होगा?
सहायक कंपनियों के जरिए स्टेबलकॉइन जारी करने के इच्छुक बैंकों को व्यावसायिक योजनाएं, वित्तीय दस्तावेज और अन्य जरूरी जानकारियां जमा करनी होंगी।

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