क्रिप्टो में भारी डेटा जुटाने के बजाय जीरो-नॉलेज तकनीक अपनाएं रेगुलेटर: हेस्टर पियर्स अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (एसईसी) की कमिश्नर हेस्टर पियर्स ने वित्तीय निगरानी में पारंपरिक डेटा संग्रह को बदलकर क्रिप्टोग्राफिक टूल्स और जीरो-नॉलेज प्रूफ़्स अपनाने की वकालत की है। वित्तीय अपराधों और अवैध गतिविधियों पर नकेल कसने के नाम पर दशकों से चला आ रहा भारी डेटा संग्रह का मॉडल अब आधुनिक विकेंद्रीकृत प्रणालियों के दौर में अप्रभावी साबित हो रहा है। अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (एसईसी) की कमिश्नर हेस्टर पियर्स ने इस पारंपरिक व्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाते हुए नियामकों से अनुरोध किया है कि वे पारंपरिक नो-योर-कस्टमर (केवाईसी), एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (एएमएल) और सघन वित्तीय निगरानी आवश्यकताओं की रूपरेखा पर पुनर्विचार करें। उनके अनुसार आधुनिक क्रिप्टोग्राफिक साधन व्यक्तिगत प्राइवेसी को सुरक्षित रखते हुए निगरानी व्यवस्था को कहीं अधिक सक्षम और सुरक्षित विकल्प प्रदान कर सकते हैं। दशकों पुरानी निगरानी व्यवस्था पर पुनर्विचार का आह्वान मौजूदा वित्तीय और बैंकिंग ढांचे में किसी भी गैरकानूनी लेन-देन या वित्तीय प्रणाली के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए सिर्फ एक ही तरीका दशकों से अपनाया जा रहा है, और वह है ग्राहकों से अधिक से अधिक निजी जानकारी एकत्र करना। हेस्टर पियर्स ने एक बयान में कहा, 'दशकों से वित्तीय धोखाधड़ी को पकड़ने का तरीका सिर्फ एक ही रहा है: अधिक से अधिक डेटा इकट्ठा करना।' इस पुरानी व्यवस्था में वित्तीय संस्थान अपने ग्राहकों के नाम, जन्मतिथि, आवासीय पते और सरकारी पहचान संख्या एकत्र करते हैं। इसके अलावा हर लेन-देन पर चौबीसों घंटे नज़र रखी जाती है और थोड़ी भी असामान्य या निर्धारित सीमा से जुड़ी गतिविधि दिखने पर सस्पिशियस एक्टिविटी रिपोर्ट तैयार करके सरकारी एजेंसियों को भेजी जाती है। तकनीक के अभूतपूर्व विकास के बावजूद यह व्यवस्था आज भी वैसी ही बनी हुई है जैसी कई दशक पहले थी। पियर्स ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, 'यह तरीका बहुत प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रहा है, और आधुनिक तकनीक हमारे इस पुराने ढर्रे से काफी आगे निकल चुकी है, इसलिए अब बदलाव का समय आ गया है।' उनका मानना है कि पारंपरिक व्यवस्था अपराधों को पूरी तरह रोकने में असमर्थ रही है, जबकि आम नागरिकों और संस्थानों पर बेवजह का कागजी और तकनीकी बोझ लाद रही है। डेटा के बड़े भंडारों से बढ़ता प्राइवेसी और सुरक्षा का खतरा नागरिकों की व्यक्तिगत और व्यावसायिक जानकारी के अंधाधुंध संकलन से गंभीर सुरक्षा खतरे पैदा हो रहे हैं। पियर्स ने आगाह किया कि सरकारी विभागों अथवा निजी कॉर्पोरेट सर्वरों में जमा होने वाला हर अतिरिक्त डेटा पॉइंट सेंधमारी का जोखिम कई गुना बढ़ा देता है। जब भी किसी संस्था के पास संवेदनशील रिकॉर्ड सुरक्षित रहते हैं, तो उन जानकारियों के लीक होने, हैक होने या दुरुपयोग होने की संभावना अपने आप बढ़ जाती है। आधुनिक दौर में जब डेटा चोरी की घटनाएं आम हो चुकी हैं, तब निजी डेटा के विशाल भंडार आम नागरिकों की वित्तीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन चुके हैं। समाधान के रूप में जीरो-नॉलेज प्रूफ़्स और क्रिप्टोग्राफी इस गंभीर संकट के विकल्प के तौर पर जीरो-नॉलेज प्रूफ़्स एक बेहद सुरक्षित और व्यावहारिक समाधान पेश करते हैं। पियर्स ने क्रिप्टोग्राफी की क्षमता को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि इसके ज़रिये किसी व्यक्ति की संवेदनशील निजी जानकारी को छुए या देखे बिना भी किसी खास तथ्य या पात्रता की पुष्टि की जा सकती है। उन्होंने एट्रिब्यूट-आधारित क्रेडेंशियल्स का उदाहरण पेश किया, जिनकी मदद से यह प्रमाणित किया जा सकता है कि कोई निवेशक तयशुदा उम्र पूरी करता है या नहीं, वह अधिकृत निवेशक की श्रेणी में आता है या नहीं, अथवा उसका नाम किसी सरकारी प्रतिबंध सूची में तो दर्ज नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पूरी जांच प्रक्रिया के दौरान क्रेडेंशियल के पीछे मौजूद मूल व्यक्तिगत डेटा को किसी के सामने उजागर करने की कोई आवश्यकता नहीं होती। जीरो-नॉलेज तकनीक इस सत्यापन को एक कदम और आगे ले जाती है। इसकी मदद से कोई भी प्रतिपक्ष यह पुष्टि कर सकता है कि सामने वाला व्यक्ति सभी कानूनी और नियामक शर्तों को पूरा करता है, जबकि उस प्रतिपक्ष को उस व्यक्ति की पहचान, व्यक्तिगत नाम, आय या पते की कोई जानकारी नहीं मिलती। हेस्टर पियर्स ने इस प्रक्रिया को समझाते हुए कहा, 'एक जीरो-नॉलेज प्रूफ़ सामने वाले पक्ष को यह बता सकता है कि 'हां, यह व्यक्ति आपकी पात्रता शर्तों को पूरा करता है', बिना इसके कि उस पक्ष को आपका नाम, आमदनी या घर का पता पता चले।' नई नियामक व्यवस्था और पब्लिक ब्लॉकचेन की भूमिका व्यक्तिगत जानकारी सौंपने की अनिवार्यता को कम करने और डेटा तक पहुंच रखने वाली संस्थाओं की संख्या को घटाने के लिए आवश्यक तकनीक पहले से ही पूरी तरह विकसित और उपलब्ध है। पियर्स के अनुसार, वर्तमान में सबसे बड़ी ज़रूरत एक ऐसी नियामक व्यवस्था की है जो इन नए क्रिप्टोग्राफिक टूल्स के व्यावहारिक उपयोग की अनुमति दे और उन्हें सक्रिय रूप से बढ़ावा दे। उन्होंने संघीय नियामक एजेंसियों और विनियमित वित्तीय संस्थानों से अपील की कि वे अनिवार्य डेटा संग्रह के पुराने नियमों को छोड़कर तकनीकी रूप से संभव होने पर एट्रिब्यूट-आधारित सत्यापन की दिशा में कदम बढ़ाएं। इसके अतिरिक्त, हेस्टर पियर्स ने वित्तीय पारदर्शिता को बढ़ाने के लिए पब्लिक ब्लॉकचेन नेटवर्क के महत्व को भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि पुराने कागजी या केंद्रीकृत रिकॉर्ड की तुलना में पब्लिक लेजर कहीं अधिक पारदर्शी होते हैं और उनके साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या फेरबदल करना बेहद कठिन होता है। इसके साथ ही, ब्लॉकचेन फॉरेंसिक्स के आधुनिक विश्लेषण टूल्स कानून प्रवर्तन एजेंसियों को लेन-देन के पूरे इतिहास की जांच करने और संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने की पूरी सहूलियत देते हैं। पियर्स का यह बयान एसईसी द्वारा हाल ही में घोषित इनोवेशन एग्जम्पशन की चर्चा के संदर्भ में सामने आया है। यह छूट क्रिप्टो नेटवर्क पर ऑटोमेटेड मार्केट मेकर्स के माध्यम से टोकनाइज्ड सिक्योरिटीज के व्यापार के लिए एक अस्थायी व्यवस्था मुहैया कराती है। उन्होंने इस इनोवेशन एग्जम्पशन को टोकनाइज्ड सिक्योरिटीज बाजारों की सुविधा प्रदान करने वाले मध्यस्थों और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्मों के लिए दीर्घकालिक नियम तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पुल बताया। इसका आप पर असर वित्तीय संस्थानों द्वारा ग्राहकों की निजी जानकारी एकत्र करने के तरीकों में बदलाव से डिजिटल लेन-देन के दौरान प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा का स्तर काफी बढ़ सकता है। • क्रिप्टो निवेशकों और उपयोगकर्ताओं के लिए: लेन-देन के समय पहचान पत्र, नाम और पता जैसे संवेदनशील विवरण बार-बार साझा करने की मजबूरी खत्म हो सकती है। जीरो-नॉलेज प्रूफ़्स के जरिए आपकी पहचान गुप्त रखते हुए भी यह प्रमाणित किया जा सकेगा कि आप सभी कानूनी शर्तों को पूरा करते हैं। • डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी: वित्तीय कंपनियों और सरकारी सर्वरों पर भारी मात्रा में निजी रिकॉर्ड जमा करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। केंद्रीय डेटाबेस खत्म होने से बड़े पैमाने पर होने वाले डेटा लीक, हैकिंग और साइबर धोखाधड़ी के खतरे काफी हद तक टल जाएंगे। • वित्तीय संस्थानों और फिनटेक के लिए: भारी-भरकम ग्राहक डेटा को सालों तक सुरक्षित स्टोर करने और उसका अनुपालन संभालने का खर्च घट जाएगा। कंपनियां एट्रिब्यूट-आधारित क्रिप्टोग्राफिक टूल्स का उपयोग करके बिना कानूनी पचड़े के तेज़ सत्यापन प्रक्रिया लागू कर सकेंगी। • कानून प्रवर्तन और निगरानी: जांच एजेंसियों को पब्लिक ब्लॉकचेन नेटवर्क पर स्पष्ट और छेड़छाड़-रहित रिकॉर्ड उपलब्ध होंगे। ब्लॉकचेन फॉरेंसिक्स के इस्तेमाल से अवैध धन के प्रवाह और संदिग्ध लेन-देन का विश्लेषण अधिक सटीक तरीके से हो सकेगा। ऐसा क्यों हुआ दशकों से लागू पारंपरिक वित्तीय निगरानी मॉडल आधुनिक विकेंद्रीकृत तकनीकों के सामने अप्रभावी साबित हो रहा है, जिससे नियामक संस्थाओं के भीतर बदलाव की मांग उठने लगी है। • पारंपरिक निगरानी की विफलता: कई दशकों से वित्तीय अपराध रोकने के लिए केवल ग्राहकों का अधिक से अधिक डेटा इकट्ठा करने की नीति अपनाई गई है। यह तरीका तकनीकी प्रगति के साथ कदम मिलाने में विफल रहा है और अवैध वित्तीय गतिविधियों को रोकने में खास प्रभावी साबित नहीं हुआ है। • डेटा संचय से जुड़े सुरक्षा खतरे: सरकारी और निजी संस्थानों द्वारा व्यक्तिगत और गोपनीय व्यावसायिक जानकारी के लगातार संचय से डेटा लीक और दुरुपयोग की आशंका बढ़ गई है। जितना अधिक डेटा जमा किया जाता है, उसके गलत हाथों में जाने का जोखिम उतना ही बड़ा हो जाता है। • क्रिप्टोग्राफिक विकल्पों की उपलब्धता: जीरो-नॉलेज प्रूफ़्स और एट्रिब्यूट-आधारित क्रेडेंशियल्स जैसी प्रौद्योगिकियां अब व्यावहारिक रूप से उपलब्ध हैं। इनके ज़रिये बिना किसी व्यक्ति की निजी पहचान जाने यह सत्यापित किया जा सकता है कि वह निवेशक पात्रता या प्रतिबंध नियमों को पूरा करता है। • टोकनाइज्ड मार्केट्स का विस्तार: एसईसी द्वारा क्रिप्टो नेटवर्कों पर ऑटोमेटेड मार्केट मेकर्स के जरिए टोकनाइज्ड सिक्योरिटीज के व्यापार के लिए इनोवेशन एग्जम्पशन की घोषणा ने नई नियामक रूपरेखा की जरूरत को सामने ला दिया है। यह छूट भविष्य के दीर्घकालिक नियमों के लिए एक शुरुआती पुल का काम कर रही है। सवाल-जवाब 1. एसईसी कमिश्नर हेस्टर पियर्स ने वित्तीय नियमों में क्या बदलाव करने की मांग की है? उन्होंने नियामकों से पारंपरिक केवाईसी और एएमएल डेटा संकलन नियमों को बदलकर प्राइवेसी की रक्षा करने वाले क्रिप्टोग्राफिक टूल्स और जीरो-नॉलेज प्रूफ़्स अपनाने का आह्वान किया है। 2. वर्तमान केवाईसी और एएमएल व्यवस्था में क्या कमियां बताई गई हैं? पारंपरिक व्यवस्था तकनीक के साथ कदम मिलाने में असफल रही है और भारी मात्रा में निजी डेटा एकत्र करने के कारण डेटा लीक व दुरुपयोग का गंभीर खतरा पैदा करती है। 3. जीरो-नॉलेज प्रूफ़्स वित्तीय निगरानी में किस प्रकार मदद कर सकते हैं? यह तकनीक किसी व्यक्ति का नाम, पता या आमदनी उजागर किए बिना सामने वाले पक्ष को यह प्रमाणित करने की सुविधा देती है कि वह व्यक्ति सभी आवश्यक नियामक शर्तें पूरी करता है। 4. एसईसी का इनोवेशन एग्जम्पशन क्या है? यह एक अस्थायी ढांचा है जो क्रिप्टो नेटवर्कों पर ऑटोमेटेड मार्केट मेकर्स के माध्यम से टोकनाइज्ड सिक्योरिटीज के व्यापार की अनुमति देता है। https://trendkia.com/crypto/kripto-men-bhari-deta-jutane-ke-bajaya-jiro-noleja-takanika-apanaen-reguletara-hester-peirce-38117 TrendKia — Har trend, sabse pehle.