अदालतों के पुराने स्टांप पेपर पर उकेरी जा रही कला, दिल्ली हाट में जयपुर के महेश प्रजापति की पेंटिंग्स बिखेर रही हैं जादू जयपुर के नेशनल अवार्डी कलाकार महेश प्रजापति दिल्ली हाट में अपनी अनोखी कला लेकर पहुंचे हैं, जहां वे अदालतों के पुराने स्टांप पेपर, पोस्टकार्ड और बही-खातों पर पारंपरिक मिनिएचर पेंटिंग बना रहे हैं। देशभर के हुनरमंद कलाकार इन दिनों अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए दिल्ली हाट पहुंचे हैं। इसी फेहरिस्त में राजस्थान की राजधानी जयपुर से ताल्लुक रखने वाले नेशनल अवार्डी कलाकार महेश प्रजापति भी शामिल हैं। उन्होंने अपनी अद्भुत कलाकारी के जरिए पुराने और ऐतिहासिक दस्तावेजों को एक बिल्कुल नया और जीवंत रूप देना शुरू किया है। उनकी इन खास पेंटिंग्स की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें किसी आम कैनवास या कागज के बजाय बीते जमाने के स्टांप पेपर, पुराने पोस्टकार्ड, बही-खाते और उर्दू किताबों के ऐतिहासिक पन्नों का इस्तेमाल किया जाता है। पुराने दस्तावेजों पर जीवंत होती राजस्थानी संस्कृति महेश प्रजापति ने अपनी इस अनूठी यात्रा के बारे में बात करते हुए बताया कि वह 16 तारीख से दिल्ली में मौजूद हैं और यहां आने वाले कला प्रेमियों से उन्हें बेहद शानदार प्रतिक्रिया मिल रही है। उनके पास मौजूद ये पुराने स्टांप पेपर वे दस्तावेज हैं जिनका इस्तेमाल ऐतिहासिक काल में राजा-महाराजाओं के दौर के दौरान अदालतों और अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यों के लिए किया जाता था। इन प्राचीन और पीले पड़ चुके कागजों पर उन्होंने पारंपरिक कला शैली का उपयोग करते हुए बाघ समेत कई मनमोहक और सुंदर पेंटिंग उकेरी हैं। केवल स्टांप पेपर तक ही उनकी कला सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने पुराने पोस्टकार्ड, बही-खाते और उर्दू किताबों के पन्नों को भी अपनी कला का मुख्य हिस्सा बनाया है। उनका मानना है कि इन पुराने दस्तावेजों के ऊपर तैयार की जाने वाली ये पेंटिंग्स देखने में केवल कलात्मक और आकर्षक ही नहीं लगतीं, बल्कि ये हमारी प्राचीन संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत को भी सहेजकर रखने का एक बेहतरीन माध्यम हैं। प्राकृतिक रंगों और 24 कैरेट सोने का अद्भुत मेल इस अनूठी कला शैली की एक और बड़ी विशेषता यह है कि महेश पूरी तरह से हाथ से बने हुए कागज और प्राकृतिक रंगों का उपयोग करते हैं। उनकी कई चुनिंदा पेंटिंग्स में असली 24 कैरेट सोने का बारीक काम भी किया जाता है। वह बताते हैं कि इस तरह की बेहद सूक्ष्म मिनिएचर आर्ट को तैयार करने में बहुत अधिक धैर्य, एकाग्रता और कड़ी मेहनत की आवश्यकता होती है। पेंटिंग्स में सोने के इस्तेमाल के कारण कुछ कलाकृतियों की लागत और उनका मूल्य भी बढ़ जाता है। इन खूबसूरत पेंटिंग्स की कीमतें उनके काम की बारीकी और उनमें इस्तेमाल की गई सामग्री के हिसाब से तय की जाती हैं। पुराने पोस्टकार्ड पर तैयार की गई पेंटिंग्स 500 रुपये, 1000 रुपये और 1500 रुपये तक की कीमत में आसानी से मिल जाती हैं। वहीं दूसरी तरफ, पुराने स्टांप पेपर पर उकेरी गई कुछ खास कलाकृतियों की शुरुआती कीमत 3000 रुपये से होती है और यह बढ़कर 10 हजार से 15 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। महेश बताते हैं कि अपनी इस पारंपरिक कला के जरिए उन्हें हर महीने लगभग 25 हजार से 40 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है। साल 2007 में मिला था नेशनल मेरिट अवॉर्ड कला के क्षेत्र में उनके बहुमूल्य योगदान को देखते हुए महेश प्रजापति को साल 2007 में प्रतिष्ठित नेशनल मेरिट अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा सरकारी स्तर पर उन्हें देश के बाहर विदेशों जैसे लंदन और थाईलैंड में भी अपनी कला का प्रदर्शन करने के शानदार अवसर मिल चुके हैं। वह केवल अपनी कला तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मिनिएचर आर्ट की तमाम बारीकियां और गुर दूसरे इच्छुक लोगों को भी सिखा चुके हैं ताकि यह पारंपरिक कला आगे भी जीवित रहे। सवाल-जवाब 1. महेश प्रजापति वर्तमान में अपनी कला कहां प्रदर्शित कर रहे हैं? महेश प्रजापति अपनी कला का प्रदर्शन दिल्ली हाट में कर रहे हैं। 2. वे अपनी पेंटिंग्स में किन पुरानी चीजों का इस्तेमाल करते हैं? वे अदालतों के पुराने स्टांप पेपर, पुराने पोस्टकार्ड, बही-खाते और उर्दू किताबों के पन्नों का इस्तेमाल करते हैं। 3. उनकी पेंटिंग्स में किस कीमती धातु का उपयोग किया जाता है? उनकी कुछ खास पेंटिंग्स में 24 कैरेट सोने का बारीक काम किया जाता है। 4. इन पेंटिंग्स की कीमत कितनी होती है? पेंटिंग्स की कीमत 500 रुपये से शुरू होकर 15 हजार रुपये तक होती है। 5. महेश प्रजापति को नेशनल मेरिट अवॉर्ड किस वर्ष मिला था? उन्हें साल 2007 में नेशनल मेरिट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। प्रेरणा और सबक महेश प्रजापति की यह कला यात्रा पारंपरिक हुनर और पुराने संसाधनों के बेहतर उपयोग की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश करती है। • कौशल में महारत: किसी भी पारंपरिक कला में लंबी साधना और धैर्य रखकर शीर्ष स्तर पर पहुंचा जा सकता है। • बेकार चीजों का उपयोग: पुराने और अनुपयोगी दस्तावेजों या कागजों को रचनात्मक सोच के जरिए मूल्यवान उत्पाद में बदला जा सकता है। • विरासत का संरक्षण: अपनी संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहर को कला के माध्यम से जीवंत और सुरक्षित रखा जा सकता है। • वैश्विक पहचान: अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर स्थानीय कलाकार भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति अर्जित कर सकते हैं। https://trendkia.com/culture/adalaton-ke-purane-stamp-paper-para-ukeri-ja-rahi-kala-dilli-haat-men-jaipur-ke-mahesh-prajapati-ki-paintings-bikhera-rahi-hain-ja-57308 TrendKia — Har trend, sabse pehle.