आर्टिफिशियल ने सिलिकॉन वैली के दिग्गजों की खोली पोल, तकनीक के खतरों पर दी गंभीर चेतावनी न्यूयॉर्क फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित हुई फिल्म 'आर्टिफिशियल' ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता की अंधी दौड़ और इसे संचालित करने वाले टेक दिग्गजों के गैर-जिम्मेदाराना रवैये पर तीखा व्यंग्य किया है। न्यूयॉर्क फिल्म फेस्टिवल में निर्देशक लुका गुआडानिनो की नई फिल्म 'आर्टिफिशियल' का प्रीमियर हुआ, जिसने कृत्रिम बुद्धिमत्ता की दुनिया और इसके कर्ता-धर्ताओं को एक बिल्कुल अलग और असहज नजरिए से दुनिया के सामने पेश किया है। आमतौर पर पर्दे पर सिलिकॉन वैली के तकनीकी महारथियों को दूरदर्शी और चमत्कारी व्यक्तित्व के तौर पर दिखाया जाता रहा है, लेकिन इस व्यंग्यात्मक कॉमेडी में उन्हें आत्ममुग्ध, अहंकारी और बेहद उबाऊ लोगों के रूप में चित्रित किया गया है। रूसी अभिनेता यूरी बोरिसोव ने ओपनएआई के सह-संस्थापक इल्या सुत्सकेवर की भूमिका निभाई है, जो एक अजीबोगरीब वैज्ञानिक की तरह दिखाई देते हैं। वहीं सैम ऑल्टमैन की भूमिका में एंड्रयू गारफील्ड उछलते-कूदते एक युवा महत्वाकांक्षी टेक लीडर के रूप में नजर आते हैं, जिसकी शारीरिक बनावट और चाल की खुद ऑल्टमैन ने भी तारीफ की थी। एलन मस्क का किरदार निभाने वाले आईके बैरिनहोल्ट्ज़ कंप्यूटर प्रोग्रामरों की महफिल में अजीब तरह की अकड़ के साथ चलते दिखते हैं, मानो वह किसी बोरेड एप एनएफटी का जीवित रूप हों। न्यूयॉर्क फिल्म फेस्टिवल के प्रीमियर के बाद सवाल-जवाब के सत्र में बैरिनहोल्ट्ज़ ने चुटकी लेते हुए अपने किरदार को एक सामान्य रूप से चलने वाला इंसान बताया, जिसने दर्शकों को हंसने पर मजबूर कर दिया। फिल्म के वितरण को लेकर उपजा विवाद और व्यावसायिक खींचतान इस व्यंग्यात्मक फिल्म का प्रीमियर विवादों से अछूता नहीं रहा। शुरुआत में इस फिल्म को अमेज़न एमजीएम द्वारा रिलीज किया जाना तय हुआ था। हालांकि, जब इस गर्मी के मौसम में अमेज़न ने ओपनएआई के साथ 50 बिलियन डॉलर का एक विशाल समझौता किया, उसके ठीक बाद इस स्टूडियो ने फिल्म को अपने बैनर से पूरी तरह हटा दिया। इसके बाद स्वतंत्र फिल्म वितरक नियोन ने आगे आकर इसके अधिकार हासिल किए और इसे दर्शकों तक पहुंचाने का जिम्मा उठाया। न्यूयॉर्क फिल्म फेस्टिवल के कलात्मक निदेशक डेनिस लिम ने भी मंच पर फिल्म का परिचय देते हुए इस परियोजना के इर्द-गिर्द बने अप्रत्याशित हालात का जिक्र किया। ओपनएआई और इसके प्रमुख निवेशकों को इस फिल्म की कहानी से आपत्ति होना पूरी तरह स्वाभाविक लगता है, क्योंकि यह पूरी फिल्म ऑल्टमैन और एआई क्रांति के मुख्य कर्णधारों को बेहद असंवेदनशील, गैर-जिम्मेदार और केवल अपने मुनाफे पर केंद्रित दिखाती है। वर्ष 2010 में आई डेविड फिन्चर की चर्चित फिल्म 'द सोशल नेटवर्क' ने जहां मार्क जुकरबर्ग और उनके साथियों को उद्योग का मजबूत स्तंभ और भविष्य का शिल्पकार दिखाया था, वहीं 'आर्टिफिशियल' इसके ठीक उलट काम करती है और इन तकनीकी महारथियों को आत्ममुग्धता में डूबे नासमझ व्यक्तियों के रूप में चित्रित करती है। द सोशल नेटवर्क से तुलना और निर्माण शैली में अंतर फिन्चर की फेसबुक पर आधारित फिल्म से इसकी तुलना होना लाजिमी है, क्योंकि दोनों फिल्मों का विषय तकनीक की दुनिया है और दोनों में ही मुख्य भूमिका में एंड्रयू गारफील्ड मौजूद हैं। असल में यह फिल्म केवल ऑल्टमैन पर केंद्रित होने के बजाय इल्या सुत्सकेवर की जीवनी जैसी अधिक महसूस होती है। फिल्म में सुत्सकेवर को मौजूदा एआई लहर का सबसे अहम चालक और इसकी परेशान अंतरात्मा दोनों के रूप में पेश किया गया है। इसके बावजूद निर्देशक लुका गुआडानिनो और लेखक-निर्माता साइमन रिच की शैली फिन्चर के गंभीर और कड़े ड्रामा से एकदम विपरीत है। जहां वह फिल्म शब्दों से भरी एक गंभीर और व्यवस्थित कहानी थी, वहीं 'आर्टिफिशियल' एक गहरे काले हास्य यानी ब्लैक कॉमेडी पर टिकी है जो कई बार अतियथार्थवाद की सीमाओं को छूती है। निर्देशक गुआडानिनो अपनी पिछली फिल्मों 'कॉल मी बाय योर नेम' और 'चैलेंजर्स' जैसी कृतियों में भावनात्मक और शारीरिक तनाव को खूबसूरती से उभारने के लिए जाने जाते हैं, लेकिन यह फिल्म पूरी तरह से नीरस, सादी और भावनात्मक आकर्षण से दूर नजर आती है। इसके दृश्य कई जगहों पर जानबूझकर अनाकर्षक रखे गए हैं। एक दृश्य में प्रोग्रामर अपने मॉडल के सीखने के नए रिकॉर्ड पर जरीटोस की बोतलों से जश्न मनाते हैं, जो बिल्कुल असहज लगता है। वहीं सैन फ्रांसिस्को की ढलान वाली सड़क पर ऑल्टमैन और उनके सहयोगियों का सुत्सकेवर से टकराव वाला अंतिम दृश्य टॉमी वाइजो की चर्चित फिल्म 'द रूम' के ग्रीन-स्क्रीन दृश्यों की याद दिलाता है। प्रदर्शन के बाद गुआडानिनो ने स्पष्ट किया कि यह कहानी सिर्फ एक अलग तरह की मानवीय वासना यानी हर हाल में हावी होने की चाहत को दर्शाती है। सुरक्षा की दलीलें और अस्तित्व का संकट फिल्म में दिखाए गए नैतिक संघर्ष आज की दुनिया की एक कड़वी सच्चाई से जुड़े हैं। ऑल्टमैन सहित पूरी एआई इंडस्ट्री के बड़े चेहरे तकनीक के अनियंत्रित विस्तार पर लगाम लगाने की बातें करते हैं, लेकिन असलियत में इसकी रफ्तार किसी से रुक नहीं रही है। एआई का विकास इतनी तेजी और जटिलता से हो रहा है कि यह धरती पर इंसानी जीवन के तौर-तरीकों को पूरी तरह बदलने का जोखिम पैदा कर रहा है। एंथ्रोपिक के पूर्व कर्मचारी जैकब कॉक्सन ने बताया था कि उनके पूर्व सहयोगी आने वाले कुछ वर्षों को मानवता के लिए आखिरी पड़ाव जैसा मानते हैं। एंथ्रोपिक के एक अन्य शोधकर्ता ने दावा किया था कि एक दशक के भीतर एआई द्वारा सभी इंसानों को खत्म करने की आशंका बन सकती है, हालांकि उन्होंने इस संभावना को 10 प्रतिशत से कम बताया था, जो किसी भी बड़े विनाश के पैमाने पर बेहद खतरनाक आंकड़ा है। फिल्म में बोरिसोव का निभाया शोधकर्ता किरदार कभी झूठ न बोल पाने वाले स्वभाव का है और वह लगातार सुरक्षा उपायों, तकनीक की रफ्तार धीमी करने तथा मानवीय हितों के साथ तालमेल बिठाने की गुहार लगाता रहता है। वहीं दूसरी तरफ पूंजी और घातांकीय तकनीकी विकास की पैरवी करने वालों की जमात खड़ी है जो किसी भी कीमत पर रुकना नहीं चाहती। सुरक्षा का बाजारीकरण और वैश्विक होड़ फिल्म इस बात को भी उजागर करती है कि कैसे सुरक्षा की चिंता खुद एक बड़ा उत्पाद बन चुकी है। एक दृश्य में दिखाया गया है कि ओपनएआई से होने वाले गंभीर नुकसान के अंदेशे को कंपनी के मुनाफे को बढ़ाने वाले साधन के रूप में भुनाया जाता है। खतरे की घंटी बजाना पारदर्शिता और जिम्मेदारी का दिखावा करने का जरिया बन जाता है, जबकि तकनीक के नुकसान पहुंचाने की असीम क्षमता को उसकी उन्नत ताकत का पुख्ता सबूत मान लिया जाता है। यह स्थिति पूरी तरह दोमुंही बन चुकी है। फिल्म यह साफ संदेश देती है कि एआई की दौड़ अब उस मोड़ पर पहुंच चुकी है जहां से लौटना नामुमकिन है। यह तकनीक अब बन चुकी है और यह सवाल पीछे छूट चुका है कि इसे बनाया जाए या नहीं। अब असली लड़ाई इस बात की है कि इस पर किसका नियंत्रण होगा और इसका इस्तेमाल कौन करेगा। कॉक्सन ने अपनी पूर्व कंपनी की तुलना सीधे तौर पर ऐतिहासिक मैनहट्टन प्रोजेक्ट से की थी। जब हर खिलाड़ी अलग नियमों से खेल रहा हो, तब नैतिकता की बातें महज कागजी बनकर रह जाती हैं। अगर ओपनएआई कंप्यूटिंग के भविष्य को नियंत्रित नहीं करेगा, तो एंथ्रोपिक, गूगल या एलन मस्क ऐसा करेंगे। ट्रंप प्रशासन के नजरिए से देखें तो सबसे बड़ा डर चीन के आगे निकलने का है। फिल्म के एक शुरुआती दृश्य में सुत्सकेवर और उनके गुरु तथा नोबेल पुरस्कार विजेता कंप्यूटर वैज्ञानिक जेफ्री हिंटन, जिनका किरदार मार्क रायलेंस ने निभाया है, एक चीनी निवेशक के प्रस्ताव को ठुकराते हैं जो उनके न्यूरल नेटवर्क को ड्रोन और चेहरा पहचानने वाली प्रणालियों में इस्तेमाल करना चाहता था। ग्लैमरस मंच और तकनीक का कड़वा सच एक आम इंसान के लिए, जो तकनीक का उपयोग केवल ईमेल सुधारने या कैलेंडर व्यवस्थित करने तक सीमित रखता है, इस फिल्म की भयावह चेतावनियों को पूरी गंभीरता से समझना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। फिल्म का हर चरित्र पूरी तरह से स्वार्थी या सामाजिक संवेदनाओं से शून्य दिखाई देता है। रोलेक्स द्वारा प्रायोजित एक भव्य फिल्म समारोह और सितारों से सजी पार्टी के बीच जब हॉलीवुड की हस्तियां ऐसी गंभीर चेतावनियों पर विचार करती हैं, तो यह विरोधाभास भी साफ झलकता है। इस पार्टी में टैक्सी ड्राइवर के 80 वर्षीय पटकथा लेखक पॉल श्रेडर भी मौजूद थे, जिन्होंने हाल ही में एक एआई प्रेमिका द्वारा छोड़े जाने की बात स्वीकार की थी। कुल मिलाकर 'आर्टिफिशियल' एआई के भविष्य को लेकर आशंकित लोगों के डर को और पक्का करती है, जबकि इसके समर्थकों को चिढ़ाने का काम करती है। यह व्यंग्य हमारे भविष्य के स्वयंभू निर्माताओं की अजीबोगरीब हरकतों और दंभ को बड़ी बेबाकी से उजागर करता है। प्रीमियर की रात बैरिनहोल्ट्ज़ ने दर्शकों से व्यंग्य भरे अंदाज में कहा था कि भविष्य उज्ज्वल है और हम सब ठीक रहने वाले हैं, जिसके जवाब में पूरे हॉल में केवल एक बेचैन हंसी गूंज उठी। इसका आप पर असर यह फिल्म तकनीक के अनियंत्रित विकास और आम जनता के जीवन पर इसके संभावित खतरों के प्रति जागरूक करती है। • उपभोक्ता जागरूकता: आम उपयोगकर्ताओं को यह समझने का मौका मिलता है कि जिन डिजिटल उपकरणों का वे दैनिक उपयोग कर रहे हैं, उनके पीछे की कॉर्पोरेट नीतियां कितनी जटिल हैं। इससे लोग व्यक्तिगत डेटा और गोपनीयता को लेकर अधिक सतर्क हो सकते हैं। • तकनीकी सुरक्षा नियम: वैश्विक स्तर पर तकनीकी कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए कड़े नियमों की मांग तेज हो सकती है। आने वाले समय में नीति निर्माता कंपनियों पर सुरक्षा मानकों को अनिवार्य करने का दबाव बढ़ा सकते हैं। • रोजगार और भविष्य: यह घटनाक्रम इस बात की ओर संकेत करता है कि कार्यस्थलों पर स्वचालन का प्रभाव बहुत गहरा हो सकता है। पेशेवरों को नई तकनीकी चुनौतियों और बदलावों के अनुसार खुद को ढालने की जरूरत होगी। • डिजिटल निर्भरता: तकनीक पर अत्यधिक भरोसा करने से पहले लोगों को इसके नैतिक और सुरक्षा पहलुओं की पड़ताल करनी होगी। उपयोगकर्ताओं को आभासी प्लेटफॉर्म पर अंधाधुंध निर्भरता से बचने की सलाह दी जाती है। ऐसा क्यों हुआ फिल्म 'आर्टिफिशियल' का निर्माण और इसे लेकर उपजा विवाद आधुनिक तकनीक की बेलगाम होड़ और सिलिकॉन वैली के आंतरिक मतभेदों की सीधी उपज है। • आंतरिक संघर्ष: ओपनएआई के भीतर तकनीक की रफ्तार तेज करने और सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता देने के बीच गहरा वैचारिक मतभेद पैदा हुआ था। इल्या सुत्सकेवर और अन्य वैज्ञानिकों द्वारा उठाए गए सवालों ने इस कहानी को जन्म दिया। • कॉर्पोरेट गठजोड़: अमेज़न द्वारा ओपनएआई में 50 बिलियन डॉलर का भारी निवेश करने के बाद फिल्म के वितरण को लेकर टकराव खड़ा हो गया। बड़े व्यावसायिक हितों के चलते फिल्म को अमेज़न एमजीएम से हटाकर स्वतंत्र वितरक को सौंपना पड़ा। • अस्तित्व की चिंताएं: तकनीकी शोधकर्ताओं द्वारा सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार करना कि उन्नत मॉडल मानवता के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं, इस कथा का मुख्य आधार बना। इन वास्तविक चेतावनियों ने सिनेमाई व्यंग्य के लिए ठोस सामग्री प्रदान की। सवाल-जवाब 1. फिल्म 'आर्टिफिशियल' का निर्देशन किसने किया है? इस फिल्म का निर्देशन लुका गुआडानिनो ने किया है और इसे न्यूयॉर्क फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित किया गया। 2. फिल्म में मुख्य भूमिकाएं किन अभिनेताओं ने निभाई हैं? एंड्रयू गारफील्ड ने सैम ऑल्टमैन, यूरी बोरिसोव ने इल्या सुत्सकेवर और आईके बैरिनहोल्ट्ज़ ने एलन मस्क का किरदार निभाया है। 3. अमेज़न ने इस फिल्म को अपने बैनर से क्यों हटाया? ओपनएआई के साथ 50 बिलियन डॉलर के समझौते के बाद अमेज़न एमजीएम ने इस फिल्म को छोड़ दिया, जिसे बाद में नियोन ने लिया। 4. फिल्म में जेफ्री हिंटन की भूमिका में कौन नजर आता है? नोबेल पुरस्कार विजेता कंप्यूटर वैज्ञानिक जेफ्री हिंटन का किरदार अभिनेता मार्क रायलेंस ने निभाया है। https://trendkia.com/culture/artificial-ne-silicon-valley-ke-diggajon-ki-kholi-pola-takanika-ke-khataron-para-di-gnbhira-chetavani-44171 TrendKia — Har trend, sabse pehle.