{
  "type": "article",
  "title": "बाबू देवकीनंदन जिस हवेली को बनवाकर कभी लौटे ही नहीं, जानें वजह",
  "summary": "वाराणसी की मशहूर देवकीनंदन हवेली को बाबू देवकीनंदन ने 10 बीघे जमीन पर बनवाया था, लेकिन एक लिफ्ट न मिलने के गुस्से में वो इसे छोड़कर हमेशा के लिए चले गए।",
  "content": "बनारस की गलियों में ऐसी कई हवेलियां छिपी हैं जिनके पत्थरों में सदियों पुरानी कहानियां दफन हैं। इन्हीं में से एक है बाबू देवकीनंदन की वह आलीशान हवेली, जिसे उन्होंने बड़े शौक से बनवाया लेकिन एक रात भी वहां नहीं गुजारी। इस हवेली की नक्काशी और बनावट आज भी लोगों को हैरान कर देती है।\n\nकौन थे बाबू देवकीनंदन?\nसीनियर जर्नलिस्ट हिमांशु राज पांडेय के मुताबिक, बाबू देवकीनंदन मूल रूप से प्रयागराज के रहने वाले थे। ब्रिटिश शासन में उनकी अंग्रेज अफसरों से गहरी नजदीकी थी, यही वजह रही कि अंग्रेजों ने उन्हें वाराणसी के रामापुरा इलाके की जिम्मेदारी सौंप दी। यहां वो टैक्स कलेक्टर के पद पर तैनात हुए। इसी नौकरी के चलते वो प्रयागराज छोड़कर वाराणसी आ बसे और यहीं 10 बीघे जमीन पर अपनी शानदार हवेली खड़ी करवाई।\n\nलिफ्ट की जिद ने बदल दी पूरी कहानी\nउस दौर में अंग्रेज सरकार ने इंग्लैंड से खास ऑर्डर देकर तीन लिफ्ट भारत मंगाई थीं। बाबू देवकीनंदन की इच्छा थी कि इन तीन लिफ्ट में से एक उनकी अपनी हवेली में लगे। इसके लिए उन्होंने पूरा जोर लगा दिया, लेकिन किसी वजह से उन्हें वो लिफ्ट नसीब नहीं हुई। यह बात उन्हें इतनी नागवार गुजरी कि उन्होंने अपनी बनाई हुई इस आलीशान हवेली को हमेशा के लिए छोड़ दिया। इसके बाद वो कभी वापस बनारस नहीं लौटे और न ही कभी दोबारा इस हवेली में कदम रखा।\n\n150 साल पुरानी यह हवेली आज भी है धरोहर\nदेवकीनंदन हवेली को बने करीब 150 साल हो चुके हैं। पत्थरों से बनी यह विशाल इमारत आज भी बनारस की धरोहर के तौर पर खड़ी है, हालांकि इसका कुछ हिस्सा अब जर्जर हो चुका है। पांच मंजिला इस हवेली में कुल 48 कमरे हैं और हर कमरा हवादार बनाया गया है। हवेली में भारतीय स्थापत्य कला की झलक साफ दिखती है। यहां कई बरामदे हैं और एक विशाल आंगन भी मौजूद है। बनारस शहर में इतनी बड़ी और आलीशान हवेलियां अब बहुत कम बची हैं।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: ऐसी ऐतिहासिक हवेलियों की कहानियां देश भर के हेरिटेज और इतिहास में दिलचस्पी रखने वाले पर्यटकों को वाराणसी जैसी जगहों की तरफ खींच सकती हैं।\n• वाराणसी में: स्थानीय प्रशासन और पर्यटन विभाग के लिए यह याद दिलाता है कि जर्जर होती देवकीनंदन हवेली जैसी धरोहरों के संरक्षण पर ध्यान देने की जरूरत है, ताकि शहर की यह अनोखी विरासत बची रहे।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बाबू देवकीनंदन कौन थे?\nवो मूल रूप से प्रयागराज के रहने वाले थे और ब्रिटिश शासन में वाराणसी के रामापुरा इलाके में टैक्स कलेक्टर के पद पर तैनात थे।\n\n2. बाबू देवकीनंदन ने हवेली क्यों छोड़ दी?\nइंग्लैंड से मंगाई गई तीन लिफ्ट में से एक अपनी हवेली में न लगवा पाने की वजह से वो इतने दुखी हुए कि उन्होंने हवेली हमेशा के लिए छोड़ दी।\n\n3. देवकीनंदन हवेली कब बनी थी?\nइस हवेली का निर्माण करीब 150 साल पहले हुआ था।\n\n4. हवेली में कुल कितने कमरे हैं?\nइस हवेली में कुल 48 कमरे हैं और हर कमरा हवादार बनाया गया है।\n\n5. हवेली कितने बीघे जमीन पर बनी है?\nयह हवेली 10 बीघे जमीन पर बनाई गई थी।\n\n6. क्या यह हवेली आज भी मौजूद है?\nहां, यह आज भी धरोहर के तौर पर मौजूद है, हालांकि इसका कुछ हिस्सा जर्जर हो चुका है।\n\n7. हवेली कितनी मंजिल की है?\nयह पांच मंजिला हवेली है, जिसमें कई बरामदे और एक विशाल आंगन है।",
  "url": "https://trendkia.com/culture/babu-devkinandan-jisa-haveli-ko-banavakara-kabhi-laute-hi-nahin-janen-vajaha-4549",
  "category": "कल्चर",
  "publishedAt": "2026-07-04",
  "tags": [
    "बाबू देवकीनंदन",
    "वाराणसी हवेली",
    "बनारस की हवेली",
    "देवकीनंदन हवेली",
    "वाराणसी हेरिटेज",
    "पुरानी हवेली की कहानी"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}