बड़े प्रकाशकों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दखल से लेखकों में आक्रोश, बंद हुआ नोआ चैटबॉट मैकमिलन और पेंगुइन रैंडम हाउस जैसे प्रमुख प्रकाशक जहां आंतरिक कामकाज में एआई टूल लागू करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं मशहूर लेखक पारदर्शिता न मिलने और रचनात्मकता छीनने के विरोध में खुद किताबें प्रकाशित करने पर विचार कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय पुस्तक प्रकाशन उद्योग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के बढ़ते इस्तेमाल ने प्रकाशकों, संपादकों और स्थापित लेखकों के बीच एक गहरा तनाव पैदा कर दिया है। अमेरिका के शीर्ष पांच बड़े पुस्तक प्रकाशकों में शुमार मैकमिलन द्वारा आंतरिक कामकाज के लिए पेश किए गए एक विशेष एआई चैटबॉट को कर्मचारियों की उदासीनता और तकनीकी कमियों के बाद बंद करना पड़ा है। वहीं दूसरी ओर, लाखों प्रतियां बेचने वाले कई लोकप्रिय लेखक प्रकाशकों की इन गोपनीय तकनीकों से बेहद नाराज हैं और पारंपरिक प्रकाशकों से नाता तोड़कर स्वतंत्र रूप से अपनी पुस्तकें छापने का मन बना रहे हैं। मैकमिलन का आंतरिक एआई सहायक नोआ और उसके बंद होने की कहानी मैकमिलन ने अपने कर्मचारियों के लिए नोआ नामक एक एआई चैटबॉट पेश किया था। नोआ का पूरा नाम नो ऑर्डिनरी असिस्टेंट रखा गया था, जिसे कई मानव सहायकों ने अपने काम के प्रति अपमानजनक माना। कर्मचारियों को भेजे गए आधिकारिक ईमेल के जरिए नोआ का परिचय दिया गया था, जिसे जर्मन सॉफ्टवेयर कंपनी चैप्टर ने तैयार किया था। यह सॉफ्टवेयर कंपनी मैकमिलन की मूल कंपनी होल्ट्जब्रिंक द्वारा समर्थित है। कंपनी के आंतरिक संवाद में कर्मचारियों को भरोसा दिलाया गया था कि नोआ पूरी तरह सुरक्षित वातावरण में काम करता है, जहां गोपनीय और मालिकाना हक वाली सामग्री बिना किसी तीसरे पक्ष के साथ साझा होने के जोखिम के दर्ज की जा सकती है। इसका सीधा मतलब यह था कि यह एक बंद एंटरप्राइज टूल था जो नए मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए उपयोगकर्ताओं के डेटा को सुरक्षित या साझा नहीं करता था। शुरुआती प्रशिक्षण सत्रों के दौरान ही मैकमिलन के कर्मियों को सतर्क किया गया था कि यह एआई टूल तथ्यहीन या काल्पनिक बातें गढ़ सकता है, इसलिए इसके द्वारा तैयार किए गए हर दस्तावेज की इंसानों द्वारा तथ्यात्मक जांच अनिवार्य होगी। इसके बावजूद प्रबंधन ने कर्मचारियों को ईमेल लिखने, विज्ञापन या प्रचार के मसौदे तैयार करने, विपणन शोध करने और नए विचारों पर मंथन के लिए नोआ का इस्तेमाल करने हेतु प्रोत्साहित किया। कर्मचारियों को यह विशेष हिदायत दी गई थी कि वे लेखकों की पांडुलिपियों का केवल एक सीमित प्रतिशत हिस्सा ही इस चैटबॉट में पेस्ट करें। नोआ में बातचीत के लहजे को बदलने की सुविधा भी दी गई थी, जिसमें हल्का-फुल्का, संयमित, निराशावादी, व्यंग्यात्मक और खेदपूर्ण जैसे विकल्प शामिल थे। एक इन-पर्सन प्रशिक्षण सत्र के दौरान चैप्टर के एक प्रतिनिधि ने कर्मचारियों को आश्वस्त करते हुए कहा था कि उनकी सॉफ्टवेयर कंपनी अच्छी तरह समझती है कि प्रकाशक बेहद महत्वपूर्ण चीज यानी कंटेंट का काम संभाल रहे हैं। इस पर एक कर्मचारी ने टिप्पणी करते हुए कहा कि वे तो यह मानकर चल रहे थे कि वे साहित्य का प्रकाशन कर रहे हैं, न कि महज सामान्य कंटेंट का। साल 2024 के उत्तरार्ध में कर्मचारियों को प्रदर्शन समीक्षा के लिए अपने वार्षिक लक्ष्य निर्धारित करने में भी नोआ की मदद लेने के लिए प्रेरित किया गया। आंतरिक ईमेल में बताया गया कि नोआ से वार्षिक लक्ष्य लिखवाने के लिए विशेष प्रॉम्प्ट तैयार किया गया है। हालांकि, कर्मचारियों ने इसे बेहद गैर-भरोसेमंद और अनुपयोगी पाया। उनका कहना था कि यह प्रणाली इतनी खराब थी कि किसी ने भी इसका स्वेच्छा से उपयोग नहीं किया। अक्टूबर 2025 में एक कंपनी-व्यापी ईमेल के जरिए सूचित किया गया कि चैप्टर नोआ की सेवा हमेशा के लिए समाप्त कर रहा है। गूगल जेमिनी का परीक्षण और प्रकाशक का आधिकारिक रुख नोआ को बंद किए जाने के बाद से ही मैकमिलन का नेतृत्व अपनी प्रकाशन प्रक्रियाओं में गूगल जेमिनी को जोड़ने के प्रयास में लगा हुआ है। कुछ संपादकों ने साहित्यिक एजेंटों की ओर से मिलने वाले पुस्तक प्रस्ताव पत्रों का मूल्यांकन करने के लिए जेमिनी के साथ प्रयोग भी किए, लेकिन इस प्रक्रिया में जेमिनी द्वारा तैयार किए गए निष्कर्ष संपादकों के अनुसार पूरी तरह बेकार साबित हुए। इस पूरे मामले पर मैकमिलन में संचार और समुदाय मामलों की उपाध्यक्ष केली कॉलिन्स का कहना है कि प्रकाशन गृह अपने सामान्य कारोबार के लिए जेमिनी का इस्तेमाल करता है, लेकिन साहित्यिक एजेंटों के सबमिशन पत्रों के मूल्यांकन सहित प्रकाशन प्रक्रिया के किसी भी हिस्से में जेमिनी का उपयोग करने का कोई औपचारिक निर्देश नेतृत्व की ओर से नहीं दिया गया है। कॉलिन्स ने यह भी कहा कि सामने आई बातें इस बात को सही ढंग से नहीं दर्शातीं कि नोआ को कैसे पेश और संप्रेषित किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनी कर्मचारियों की जागरूकता और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए इंसानों को केंद्र में रखकर एआई के प्रति एक विचारशील दृष्टिकोण अपनाती है। मैकमिलन को प्रतिवर्ष बेची जाने वाली किताबों की संख्या के लिहाज से अमेरिका के शीर्ष पांच बड़े प्रकाशकों में सबसे छोटा माना जाता है। इसका साहित्यिक छाप फर्रार, स्ट्रॉस एंड गिरौक्स सैली रूनी, यियुन ली और बेन लर्नर जैसे दिग्गजों की कृतियां छापता है, जबकि टॉर बुक्स विज्ञान कथा और फंतासी लेखक जॉन स्काल्जी, मार्था वेल्स और न्नेदी ओकोराफोर का प्रकाशन घर है। पेंगुइन रैंडम हाउस और चैटजीपीटी एंटरप्राइज का बढ़ता दखल उद्योग के शीर्ष पांच प्रकाशकों में शामिल अन्य संस्थान भी अपने कर्मचारियों पर एआई उपकरणों को अपनाने का दबाव बना रहे हैं, जबकि दूसरी ओर हशेट, मैकमिलन और पेंगुइन रैंडम हाउस का जर्मन प्रभाग खुद प्रमुख एआई कंपनियों के खिलाफ कॉपीराइट उल्लंघन के मुकदमे लड़ रहे हैं। पेंगुइन बुक्स और रैंडम हाउस के 2013 के विलय के बाद बना पेंगुइन रैंडम हाउस उद्योग का सबसे बड़ा प्रकाशक है। यहां के कर्मचारियों को एआई सीखने के सत्रों में चैटजीपीटी एंटरप्राइज का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, भले ही प्रकाशक का जर्मन प्रभाग ओपनएआई पर बौद्धिक संपदा चोरी का मुकदमा चला रहा हो। फरवरी महीने में हे हाउस के प्रतिनिधियों ने, जिसे 2023 में पेंगुइन रैंडम हाउस ने अधिग्रहित किया था, कुछ कर्मचारियों के सामने एक प्रस्तुति दी। इसमें बताया गया कि पिछले एक साल में चैटजीपीटी एंटरप्राइज किस तरह उनकी मुख्य उत्पादकता, रचनात्मकता और सहयोग का प्रमुख माध्यम बन चुका है। इस प्रस्तुति में बताए गए निवेश पर रिटर्न के चार मुख्य स्तंभों में से एक स्तंभ रचनात्मकता था, जिसके तहत विचार निर्माण, सामग्री विकास और कहानी कहने के नए तरीके शामिल थे। वरिष्ठ अधिकारियों के प्रोत्साहन के बावजूद कर्मचारी चैटजीपीटी के इस्तेमाल से बचने की कोशिश कर रहे हैं। कर्मियों का कहना है कि यह उनके काम को और अधिक जटिल बना देता है। वहीं कुछ प्रबंधकों ने कर्मचारियों को स्पष्ट रूप से कहा है कि वे प्रचार सामग्री लिखने और कवर डिजाइन करने जैसे रचनात्मक कार्यों में एआई का सहारा न लें, जिससे निचले स्तर पर भारी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। पेंगुइन रैंडम हाउस में कॉर्पोरेट संचार और सामाजिक जिम्मेदारी की कार्यकारी उपाध्यक्ष एवं निदेशक क्लेयर वॉन शिलिंग ने ईमेल के जरिए बताया कि उनका प्रकाशन गृह एआई को किसी भी महत्वपूर्ण नई तकनीक की तरह देखता है। उन्होंने कहा कि स्पष्ट सिद्धांतों और सुरक्षा उपायों के मार्गदर्शन में यह पता लगाया जा रहा है कि यह उपकरण उनके काम में कैसे उचित सहयोग दे सकता है, जिसमें लेखकों और कंपनी की बौद्धिक संपदा की सुरक्षा के साथ-साथ प्रकाशन में मानवीय रचनात्मकता और निर्णय की आवश्यक भूमिका को बनाए रखना शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके विभिन्न समूहों और छापों को यह तय करने का अधिकार है कि विपणन, प्रचार और डिजाइन जैसे विशिष्ट कार्यप्रवाहों में एआई का उपयोग कब और कैसे किया जाए। लेखकों की नाराजगी, टूटना विश्वास और कानूनी अनुबंधों की जंग एआई के इस अनियंत्रित उपयोग ने पुस्तक जगत के सबसे सफल लेखकों और प्रकाशकों के आपसी संबंधों में भारी दरार डाल दी है। जिन स्थापित लेखकों की 3 करोड़ से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं, वे प्रकाशकों के रुख से बेहद आहत हैं। एक सर्वाधिक बिकने वाले लेखक ने बताया कि उन्हें अपनी किताब की जो प्रचार सामग्री मिली, उसमें ऐसे मनगढ़ंत उद्धरण शामिल थे जो किताब में थे ही नहीं। यह एआई द्वारा की गई गलती थी, लेकिन प्रकाशक लगातार यह दावा करता रहा कि सामग्री मशीन से तैयार नहीं की गई है। लेखक ने आरोप लगाया कि उन्हें सच्चाई छुपाकर भ्रमित किया गया। हालिया अनुबंध वार्ताओं के दौरान एक अन्य चर्चित लेखक ने पाया कि शीर्ष पांच प्रकाशकों में से एक भी प्रकाशक यह लिखित गारंटी देने को तैयार नहीं हुआ कि उनकी किताबों पर किसी भी स्तर पर एआई का उपयोग नहीं किया जाएगा। लेखकों का कहना है कि इससे उस मूलभूत विश्वास को चोट पहुंच रही है जो लेखक और प्रकाशक के बीच अनिवार्य रूप से होना चाहिए। लेखकों में इस बात को लेकर भी तीव्र असंतोष है कि प्रकाशक एक तरफ तो एआई कंपनियों से अरबों के कानूनी समझौते हासिल कर रहे हैं और दूसरी तरफ उसी एआई का इस्तेमाल अपने खुद के कर्मियों से काम करवाने के लिए कर रहे हैं। लेखकों ने यह भी रेखांकित किया कि प्रकाशकों द्वारा की जा रही छंटनी के कारण संपादकों पर काम का अत्यधिक बोझ बढ़ गया है, जिससे कई संपादक अपना अस्तित्व बचाने के लिए क्लाउड जैसे एआई मॉडल पर निर्भर हो रहे हैं। एक लेखक ने बताया कि संपादक पांडुलिपियों को पूरी तरह पढ़ने के बजाय क्लाउड की मदद से प्रचार भाषा तैयार कर रहे हैं, जिसका किताब की वास्तविक भावना से कोई संबंध नहीं होता। कई लेखकों और एजेंटों को तो संपादकों ने संशोधन की योजनाएं खुद बनाने को कहा है क्योंकि संपादकों के पास खुद पढ़ने का समय नहीं बचा है। पारदर्शिता की मांग और सेल्फ पब्लिशिंग का उभरता विकल्प लेखक समुदाय अब प्रकाशकों से स्पष्ट नीति और खुलासे की मांग कर रहा है। लेखकों का कहना है कि कम से कम यह खुलासा किया जाना चाहिए कि एआई का इस्तेमाल कब और कैसे हो रहा है। लेखकों की मांग है कि शीर्ष पांचों बड़े प्रकाशक एक साथ बैठें और एआई के नैतिक उपयोग को लेकर एक साझा आचार संहिता तैयार करें जिसका वे कड़ाई से पालन करें। इस गतिरोध के बीच कई प्रसिद्ध लेखक पारंपरिक प्रकाशकों को हमेशा के लिए छोड़ने पर विचार कर रहे हैं। उनका तर्क है कि यदि प्रकाशक हर काम मशीनों से ही कराने जा रहे हैं तो फिर लेखकों को पारंपरिक प्रकाशकों के पास जाने की क्या आवश्यकता है। लेखिका मो रयान ने सोशल मीडिया मंच ब्लूस्काई पर लिखा कि उन्होंने कभी भी प्रकाशन के अन्य मॉडलों को हेय दृष्टि से नहीं देखा है और भविष्य की किताबों के लिए खुद प्रकाशन करना हर बीतते दिन के साथ अधिक व्यावहारिक विकल्प नजर आ रहा है। उनकी पुस्तक बर्न इट डाउन हार्परकॉलिन्स द्वारा प्रकाशित की गई थी। मैकमिलन के टॉर पब्लिशिंग ग्रुप के साथ 2024 में 10 किताबों का ऐतिहासिक अनुबंध करने वाले प्रसिद्ध विज्ञान कथा लेखक जॉन स्काल्जी ने लिखा कि यदि उन्हें पता चले कि उनकी किताबों का पीआर एआई द्वारा तैयार किया गया है तो उन्हें बेहद गुस्सा आएगा। उन्होंने कहा कि रोजाना दर्जनों एआई निर्मित ईमेल देखने के कारण ऐसी कृत्रिम भाषा तुरंत पहचान में आ जाती है और उसे तुरंत खारिज कर दिया जाता है, इसलिए प्रकाशक ऐसा करके अपनी नई किताबों का कोई भला नहीं कर रहे हैं। मजबूत पाठक वर्ग वाले लेखकों को अब प्रकाशकों के संस्थागत ढांचे की जरूरत महसूस नहीं हो रही है। उदाहरण के लिए, ब्रैंडन सैंडरसन अपनी फंतासी पुस्तकें मैकमिलन के टॉर बुक्स से प्रकाशित कराते हैं, लेकिन 2022 में उन्होंने चार नई किताबें स्वतंत्र रूप से प्रकाशित करने के लिए किकस्टार्टर पर अपने पाठकों से केवल 24 घंटों में 1.5 करोड़ डॉलर यानी 15 मिलियन डॉलर से अधिक जुटा लिए थे। लेखकों का कहना है कि प्रकाशकों ने हमेशा लेखकों को एक अड़चन माना है और अब वे उन्हें अप्रासंगिक बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन विडंबना यह है कि एआई का इस्तेमाल करके वे अनजाने में खुद अपने ही अस्तित्व को अप्रासंगिक बना रहे हैं। इसका आप पर असर पुस्तक उद्योग में एआई के बढ़ते इस्तेमाल से पाठकों को मिलने वाली किताबों की गुणवत्ता और लेखकों के अधिकारों पर सीधा असर पड़ रहा है। • किताबों की गुणवत्ता पर असर: प्रकाशकों द्वारा एआई से प्रचार और समीक्षाएं तैयार कराने से पाठकों को भ्रामक जानकारी मिल सकती है। संपादकीय स्तर पर इंसानी समीक्षा कम होने से किताबों में तथ्यात्मक गलतियां बढ़ने का जोखिम है। • लेखकों की कमाई और स्वायत्तता: बड़े लेखक अब पारंपरिक प्रकाशकों के बजाय सीधे पाठकों से जुड़कर किताबें प्रकाशित करने की ओर बढ़ रहे हैं। यदि स्थापित लेखक क्राउडफंडिंग चुनते हैं तो पाठकों को अपनी पसंदीदा किताबें खरीदने के लिए नए मंचों का सहारा लेना होगा। • रचनात्मकता बनाम लागत कटौती: प्रकाशक मुनाफा बढ़ाने और कर्मचारियों पर बोझ कम करने के लिए एआई टूल्स पर निर्भर हो रहे हैं। इससे नए और उभरते लेखकों को मिलने वाला मार्गदर्शन और सहयोग काफी घट सकता है। • पारदर्शिता की नई मांग: पाठक और लेखक दोनों अब यह स्पष्ट नियम चाहते हैं कि किताबों के किस हिस्से में मशीन की मदद ली गई है। आने वाले समय में पुस्तक अनुबंधों में एआई के उपयोग पर कड़े नियम शामिल होने की संभावना है। ऐसा क्यों हुआ यह घटनाक्रम प्रकाशकों द्वारा लागत घटाने की होड़, कॉपीराइट पर दोहरे रवैये और एआई टूल्स की तकनीकी सीमाओं के कारण सामने आया है। • लागत घटाने का कॉर्पोरेट दबाव: प्रकाशकों ने कर्मचारियों की छंटनी के बाद काम का बोझ संभालने के लिए आंतरिक एआई बॉट्स पेश किए। कार्यबल कम होने के कारण प्रबंधन ने ईमेल, मार्केटिंग और प्रस्ताव जांचने जैसे कामों को स्वचालित करने की कोशिश की। • तकनीकी विफलता और अविश्वास: नोआ और जेमिनी जैसे टूल्स प्रकाशन उद्योग की साहित्यिक जरूरतों को पूरा करने में पूरी तरह नाकाम रहे। जब एआई ने किताबों के काल्पनिक उद्धरण और गैर-भरोसेमंद मूल्यांकन दिए, तो कर्मचारियों और लेखकों का इस पर से भरोसा उठ गया। • कॉपीराइट का विरोधाभास: एक तरफ प्रकाशक अपनी बौद्धिक संपदा चुराने के आरोप में एआई कंपनियों पर मुकदमे ठोक रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अपने आंतरिक दफ्तरों में उन्हीं टूल्स को बढ़ावा दे रहे हैं। प्रकाशकों के इस दोहरे चरित्र ने लेखकों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया। सवाल-जवाब 1. मैकमिलन ने नोआ नामक एआई सहायक को क्यों बंद किया? कर्मचारियों ने इसे अनुपयोगी और अविश्वसनीय पाया, जिसके कारण कोई इसका उपयोग नहीं कर रहा था और अंततः अक्टूबर 2025 में इसे हमेशा के लिए बंद कर दिया गया। 2. नोआ का पूरा नाम क्या था और इसे किसने बनाया था? नोआ का पूरा नाम 'नो ऑर्डिनरी असिस्टेंट' था और इसे जर्मन सॉफ्टवेयर कंपनी चैप्टर ने विकसित किया था। 3. मशहूर लेखक प्रकाशकों से क्यों नाराज हैं? लेखक इस बात से नाराज हैं कि प्रकाशक बिना बताए उनकी किताबों और मार्केटिंग में एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं और अनुबंध में एआई पर रोक की गारंटी नहीं दे रहे। 4. पेंगुइन रैंडम हाउस में किस एआई टूल का उपयोग किया जा रहा है? पेंगुइन रैंडम हाउस में कर्मचारियों को प्रशिक्षण सत्रों के दौरान चैटजीपीटी एंटरप्राइज का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। 5. ब्रैंडन सैंडरसन ने स्वतंत्र प्रकाशन का क्या उदाहरण पेश किया? ब्रैंडन सैंडरसन ने 2022 में किकस्टार्टर पर चार किताबें खुद प्रकाशित करने के लिए मात्र 24 घंटों में 1.5 करोड़ डॉलर जुटाए थे। https://trendkia.com/culture/bare-prakashakon-men-ai-ke-dakhala-se-lekhakon-men-akrosha-bnda-hua-noa-chaitabota-52796 TrendKia — Har trend, sabse pehle.