# बॉलीवुड में अपार प्रसिद्धि के बाद भी भागलपुर की गलियों में लौटते थे किशोर कुमार, जानें बिहार से उनकी आत्मीयता का किस्सा

> हिंदी सिनेमा के महान गायक किशोर कुमार का जन्म भले ही मध्य प्रदेश के खंडवा में हुआ था, लेकिन उनका दिल बिहार के भागलपुर से गहरा जुड़ाव रखता था। आदमपुर की राजबाड़ी से लेकर गंगा की लहरों तक फैली उनकी यादें आज भी शहर में जीवंत हैं।

**Type:** article · **Category:** कल्चर · **Published:** 2026-08-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/culture/bolivuda-men-apara-prasiddhi-ke-bada-bhi-bhagalpur-ki-galiyon-men-lautate-the-kishore-kumar-janen-bihar-se-unaki-atmiyata-ka-kissa-15049 · **Language:** Hindi
**Tags:** किशोर कुमार, भागलपुर, बिहार, दुर्गा पूजा, अशोक कुमार, बॉलीवुड

हिंदी सिनेमा के संगीत जगत में अपनी असाधारण गायकी और अभिनय से दशकों तक एकछत्र राज करने वाले किशोर कुमार की पहचान किसी परिचय की मोहताज नहीं है। मुंबई को अपनी कर्मभूमि बनाकर अपार प्रसिद्धि हासिल करने वाले इस दिग्गज कलाकार के जीवन का एक बेहद खूबसूरत और आत्मीय अध्याय बिहार के भागलपुर शहर से भी गहराई से बंधा हुआ था। फिल्मी दुनिया की चकाचौंध और स्टारडम के शिखर पर होने के बावजूद वे समय निकालकर भागलपुर लौटते रहते थे। वहां वे किसी बड़े बॉलीवुड सुपरस्टार की तरह नहीं, बल्कि एक साधारण नागरिक और परिवार के प्यारे सदस्य की भांति गलियों में घूमते, रिश्तेदारों से मिलते और शहर के सांस्कृतिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर भाग लेते थे।

## मातृभूमि से जुड़ाव और आदमपुर की राजबाड़ी का इतिहास
मध्य प्रदेश के खंडवा शहर में जन्मे किशोर कुमार की पारिवारिक जड़ों का एक महत्वपूर्ण सिरा बिहार के भागलपुर से सीधे जुड़ता है। यह संबंध केवल किसी सामान्य रिश्तेदारी तक सीमित नहीं था, बल्कि उनकी माता गौरी देवी का मायका भागलपुर के आदमपुर क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक राजबाड़ी परिसर में था। दस्तावेज और स्थानीय ऐतिहासिक संदर्भों में किशोर कुमार के नाना का उल्लेख दो अलग-अलग नामों, शिवचंद्र बनर्जी और सतीश चंद्र बनर्जी के रूप में मिलता है। इसी मातृ परिवार के कारण भागलपुर स्थित राजबाड़ी उनके बचपन से ही एक आत्मीय शरणस्थली और स्मृतियों का केंद्र बनी रही।

बचपन के दिनों में किशोर कुमार अपनी मां के साथ भागलपुर की इसी राजबाड़ी में लंबा वक्त बिताया करते थे। बचपन में शहर के माहौल में रचे-बसे ये संस्कार उनके मन में इस कदर रच-बस गए कि आगे चलकर जब वे मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री में एक शीर्ष गायक और अभिनेता के रूप में स्थापित हो गए, तब भी उनका अपनी ननिहाल की इस धरती से भावनात्मक लगाव कभी कम नहीं हुआ।

## दुर्गा पूजा की परंपरा और मंच अभिनय में सहभागिता
मुंबई में व्यस्ततम पेशेवर दिनचर्या के बीच भी किशोर कुमार भागलपुर की यात्राओं के लिए समय निकाल ही लेते थे। विशेष रूप से 1960 के दशक तक वे लगभग हर साल दुर्गा पूजा के पावन अवसर पर भागलपुर अवश्य पहुंचते थे। त्योहार के दौरान उनका यह प्रवास केवल अपने सगे-संबंधियों से मिलने तक सीमित नहीं रहता था, बल्कि वे शहर के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में पूरी तरह घुल-मिल जाते थे।

भागलपुर में आयोजित होने वाली प्रसिद्ध कालीबाड़ी और दुर्गाबाड़ी पूजा समितियों के कार्यक्रमों में किशोर कुमार की सक्रिय भूमिका रहती थी। इन समितियों द्वारा मंचित किए जाने वाले स्थानीय नाटकों में वे स्वयं एक कलाकार के रूप में अभिनय करते थे। शहरवासी आज भी गर्व से याद करते हैं कि कैसे देश का इतना बड़ा फनकार बिना किसी अहम् के स्थानीय रंगमंच पर आम कलाकारों के साथ मंच साझा किया करता था।

## 1970 की अंतिम यात्रा और साइकिल की यादगार सवारी
ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, भागलपुर शहर में किशोर कुमार की अंतिम दर्ज यात्रा वर्ष 1970 में हुई थी। उस दौरान वे शहर के प्रसिद्ध सैंडीज कंपाउंड मैदान में आयोजित एक विशाल सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लेने आए थे। उस यादगार यात्रा में उनके साथ प्रख्यात अभिनेत्री और गायिका सुलक्षणा पंडित भी भागलपुर पहुंची थीं।

उसी 1970 की यात्रा से जुड़ी एक बेहद दिलचस्प और आत्मीय घटना आज भी भागलपुर के लोगों के दिलों में तरोताजा है। शहर के एक पुराने निवासी के संस्मरणों के अनुसार, उन्होंने किशोर कुमार को माणिक सरकार चौक के निकट बड़े ही सहज अंदाज में साइकिल चलाते हुए देखा था। वे चौक के पास स्थित प्रसिद्ध फागू शाह की दुकान से अपने मनपसंद देसी मिष्ठान खरीदकर लौट रहे थे। जब रास्ते में शहरवासियों ने अपने प्रिय गायक को साइकिल पर देखा, तो उनके पीछे प्रशंसकों की एक उत्साहपूर्ण भीड़ जमा हो गई थी। यह घटना किशोर कुमार की सादगी और आम जनता से उनके सीधे जुड़ाव का अनुपम उदाहरण मानी जाती है।

## सुल्तानगंज के आम के बाग और गंगा नदी में नौकाविहार
किशोर कुमार के ननिहाल से जुड़े रिश्तेदार सोमनाथ बनर्जी ने अपने संस्मरणों में बताया कि किशोर कुमार जब भी भागलपुर आते, तो वे अपने मामा शानू बनर्जी के घर आदमपुर में रुकते और अपनों के साथ फुर्सत के पल बिताते थे। पारिवारिक यादों में सुल्तानगंज स्थित परिवार के पारंपरिक आम के बागों की सैर और वहां ताजे आमों का आनंद लेना उनकी पसंदीदा गतिविधियों में शामिल था। इसके अतिरिक्त, भागलपुर में बहती पवित्र गंगा नदी में नाव से घूमने का आकर्षण भी उन्हें बार-बार खींच लाता था।

## अशोक कुमार का विवाह और भागलपुर की अमर विरासत
भागलपुर से गाढ़ा पारिवारिक रिश्ता केवल किशोर कुमार तक ही सीमित नहीं रहा। उनके बड़े भाई और हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अशोक कुमार का विवाह भी इसी शहर से ताल्लुक रखने वाले एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। इस तरह गांगुली परिवार की दो पीढ़ियों का जुड़ाव भागलपुर की पावन धारा से बना रहा।

यद्यपि किशोर कुमार आज भौतिक रूप से हमारे बीच उपस्थित नहीं हैं, परंतु भागलपुर की फिजाओं में उनकी यादें आज भी पूरी जीवंतता के साथ रची-बसी हैं। आदमपुर की राजबाड़ी की दीवारों, दुर्गा पूजा के पांडालों, माणिक सरकार चौक की गलियों और फागू शाह की मिष्ठान दुकान की कहानियों में इस महान गायक की सादगी और प्रेम का किस्सा हमेशा अमर रहेगा।

## सवाल-जवाब

### 1. किशोर कुमार का बिहार के भागलपुर से क्या रिश्ता था?
किशोर कुमार की माता गौरी देवी का मायका भागलपुर के आदमपुर स्थित राजबाड़ी में था, जिसके कारण बचपन से ही उनका इस शहर से गहरा पारिवारिक जुड़ाव रहा।

### 2. दुर्गा पूजा के दौरान किशोर कुमार भागलपुर में क्या करते थे?
1960 के दशक तक वे लगभग हर साल दुर्गा पूजा पर भागलपुर आते थे और स्थानीय कालीबाड़ी व दुर्गाबाड़ी समितियों द्वारा आयोजित मंच नाटकों में स्वयं अभिनय करते थे।

### 3. भागलपुर में किशोर कुमार की आखिरी यात्रा कब हुई थी?
उनकी अंतिम दर्ज यात्रा 1970 में हुई थी, जब उन्होंने सैंडीज कंपाउंड मैदान में आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लिया था और उनके साथ सुलक्षणा पंडित भी आई थीं।

### 4. क्या गांगुली परिवार के किसी अन्य सदस्य का संबंध भी भागलपुर से था?
हां, किशोर कुमार के बड़े भाई और मशहूर अभिनेता अशोक कुमार का विवाह भी भागलपुर से जुड़े परिवार में हुआ था।

## प्रेरणा और सबक
किशोर कुमार के जीवन और भागलपुर से उनके जुड़ाव से मिलने वाले प्रमुख संदेश:

- **अपनी जड़ों का सम्मान:** स्टारडम की बुलंदियों पर पहुंचने के बाद भी अपनी पारिवारिक और सांस्कृतिक जड़ों से निरंतर जुड़े रहना।
- **सादगी और सहजता:** देश के शीर्ष गायक और अभिनेता होने के बावजूद आम जनता के बीच बिना किसी अहंकार के साइकिल पर घूमना।
- **सामुदायिक जीवन में सहभागिता:** स्थानीय दुर्गा पूजा समितियों के मंच नाटकों में एक साधारण कलाकार की तरह पूरे समर्पण के साथ भाग लेना।
- **पारिवारिक रिश्तों को प्राथमिकता:** व्यस्ततम पेशेवर करियर के बीच रिश्तेदारों के साथ समय बिताना और आम के बागों व गंगा नदी की सैर जैसी छोटी-छोटी खुशियों का आनंद लेना।

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