अशोक सिंहल की जन्मशताब्दी: राष्ट्र और समाज सेवा को समर्पित एक असाधारण जीवन देशभर में स्वर्गीय अशोक सिंहल जी की जन्मशताब्दी का वर्ष मनाया जा रहा है। उनके आध्यात्मिक और संगठनात्मक योगदान को याद करते हुए उनके जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। भारतीय संस्कृति के संवर्द्धन और समाज सेवा में अपना पूरा जीवन खपा देने वाले प्रख्यात व्यक्तित्व अशोक सिंहल का जन्मशताब्दी वर्ष शुरू हो चुका है। उनका संपूर्ण जीवन इस बात का प्रमाण है कि व्यक्तिगत उपलब्धियों से कहीं अधिक बड़ा महत्व मानवता और राष्ट्र के कल्याण के लिए समर्पित जीवन का होता है। उन्होंने आध्यात्मिक साधना और सांस्कृतिक जागरण के साथ दशकों तक संगठनात्मक कार्यों को नई ऊंचाइयां दीं। उनके साथ लंबे समय तक काम करने और उनका सानिध्य प्राप्त करने वाले लोगों के लिए वह अनुभव बेहद प्रेरणादायक रहा है। प्रारंभिक जीवन और परिवार की पृष्ठभूमि एक अत्यंत प्रतिष्ठित और संपन्न परिवार में जन्मे अशोक सिंहल के पिता महावीर जी एक कुशल प्रशासक थे। उनके भाई बी.पी. सिंहल पुलिस अधिकारी रहने के बाद संसद सदस्य बने, जबकि दूसरे भाई वी.पी. सिंहल त्रिपुरा राज्य के गठन के समय वहां के मुख्य सचिव बनाए गए थे। परिवार के अन्य सदस्यों ने भी वाणिज्य और कृषि के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की। हालांकि, अशोक जी का मार्ग शुरू से ही पूरी तरह अलग था। कम उम्र से ही उनके भीतर समाज के प्रति करुणा और सेवा की भावना प्रबल हो गई थी। वे भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान के सपने देखते थे और प्रयागराज में संगम तट पर साधु-संतों के बीच रहकर उनकी यह समझ और अधिक गहरी हुई थी। संगठन और सेवा कार्यों का विस्तार युवावस्था से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ने वाले अशोक सिंहल ने देश के कोने-कोने में कठिन यात्राएं कीं। विशेष रूप से गुजरात के आदिवासी इलाकों में उनका जाना और वंचित समाज के उत्थान के लिए योजनाएं बनाना उनकी प्राथमिकता में शामिल था। देश में जब भी कोई प्राकृतिक आपदा आती थी, वे राहत कार्यों में सबसे आगे रहते थे। वर्ष 2001 में कच्छ में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान उनके द्वारा किए गए राहत कार्य आज भी लोगों की स्मृति में जीवंत हैं। उनकी ओजस्वी वाणी और संवाद शैली सभाओं में मौजूद हर व्यक्ति को मंत्रमुग्ध कर देती थी। ऐतिहासिक आंदोलनों और आयोजनों में भूमिका विश्व स्तर पर भारतीय संस्कृति का प्रसार करने में भी उनका योगदान अतुलनीय रहा है। वर्ष 1993 में अमेरिका में आयोजित उस सम्मेलन की परिकल्पना और आयोजन में उनकी मुख्य भूमिका थी जो स्वामी विवेकानंद के शिकागो संबोधन के सौ वर्ष पूरे होने पर हुआ था। इसके अलावा वर्ष 2000 में त्रिनिदाद और टोबैगो के पोर्ट ऑफ स्पेन में आयोजित विश्व हिंदू सम्मेलन में भी उनकी सक्रिय उपस्थिति ने सभी प्रतिनिधियों में अभूतपूर्व ऊर्जा का संचार किया था। राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी ऐतिहासिक और केंद्रीय भूमिका को कभी भुलाया नहीं जा सकता। वर्ष 1991 की बोट क्लब रैली का उनका ओजस्वी संबोधन और आंदोलन के दौरान घायल होने के बावजूद उनका अडिग रहना आज भी लोगों को याद है। अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर के पीछे उनके जैसे मनीषियों का ही निस्वार्थ त्याग और समर्पण जुड़ा हुआ है। शिक्षा, संगीत और सामाजिक समरसता अशोक सिंहल समाज में किसी भी तरह के भेदभाव के सख्त खिलाफ थे और सामाजिक समरसता के प्रबल समर्थक थे। यही कारण था कि उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर की पहली ईंट रखने का कार्य बिहार के वंचित वर्ग से आने वाले कामेश्वर चौपाल के हाथों संपन्न कराने का मार्ग प्रशस्त किया। काशी हिंदू विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने वाले अशोक जी शिक्षा और संगीत से विशेष रूप से जुड़े हुए थे। वे एकल विद्यालयों के माध्यम से देश के दूर-दराज के जनजातीय गांवों तक प्राथमिक शिक्षा पहुंचाने के अभियान में गहराई से सक्रिय रहे। इसके अलावा, उनका संगीत प्रेम भी जगजाहिर था और वे बैठकों में एकल गीत गाकर कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भर दिया करते थे। उनके जीवन के इन्हीं आदर्शों और विचारों को आज की युवा पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता है ताकि राष्ट्र निर्माण के उनके संकल्प को और गति मिल सके। सवाल-जवाब 1. अशोक सिंहल का जन्मशताब्दी वर्ष कब मनाया जा रहा है? 27 सितंबर से स्वर्गीय अशोक सिंहल जी का जन्म-शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है। 2. अशोक सिंहल के परिवार की पृष्ठभूमि क्या थी? उनके पिता महावीर जी एक प्रशासक थे, और उनके भाई बी.पी. सिंहल तथा वी.पी. सिंहल क्रमशः पुलिस अधिकारी, सांसद और त्रिपुरा के मुख्य सचिव रहे थे। 3. अशोक सिंहल ने कौन से प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भाग लिया था? उन्होंने 1993 में अमेरिका में स्वामी विवेकानंद के शिकागो संबोधन के शताब्दी सम्मेलन और वर्ष 2000 में त्रिनिदाद और टोबैगो के पोर्ट ऑफ स्पेन में विश्व हिंदू सम्मेलन में भाग लिया था। 4. राम मंदिर निर्माण में उनकी क्या भूमिका थी? वे राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल थे और उन्होंने इसके निर्माण में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था। 5. शिक्षा के क्षेत्र में उनका क्या योगदान था? उन्होंने बीएचयू से शिक्षा प्राप्त की थी और वे एकल विद्यालय पहल से गहराई से जुड़े थे जो जनजातीय गांवों में बुनियादी शिक्षा पहुंचाती है। प्रेरणा और सबक स्वर्गीय अशोक सिंहल के जीवन से कई महत्वपूर्ण और व्यावहारिक प्रेरणाएं ली जा सकती हैं: • निःस्वार्थ सेवा: व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर समाज के वंचित और अंतिम पंक्ति के लोगों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य करना चाहिए। • कठिन परिश्रम: देश के दूर-दराज के इलाकों और कठिन परिस्थितियों में जाकर जमीनी स्तर पर संगठन और समाज को मजबूत करना चाहिए। • सामाजिक समरसता: समाज से सभी प्रकार के भेदभाव को मिटाकर आपसी भाईचारे और समानता के संदेश को बढ़ावा देना चाहिए। • अध्ययन और शिक्षा: युवा पीढ़ी को निरंतर पुस्तकें पढ़ने, ज्ञान अर्जित करने और दूरदराज के क्षेत्रों में शिक्षा का प्रसार करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। https://trendkia.com/culture/centenary-celebrations-of-ashok-singhal-a-life-dedicated-to-nation-and-society-39807 TrendKia — Har trend, sabse pehle.