चैटजीपीटी के दौर में लेखक और प्रकाशन एल्गोरिद्म को मात देने के लिए अपना रहे हैं अनूठी मानवीय शैली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मशीन जैसी भाषा के विरोध में लेखकों और संपादकों ने एक नई साहित्यिक मुहिम शुरू की है। इसमें जानबूझकर लिखावट की खामियों, व्यक्तिगत अनुभवों और अनूठी शैली को तरजीह दी जा रही है। डिजिटल प्रकाशन, साहित्य, पत्रकारिता और कॉर्पोरेट संचार के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के खिलाफ एक नया साहित्यिक आंदोलन आकार ले रहा है। जैसे-जैसे बड़े लैंग्वेज मॉडल साफ-सुथरा, पूर्वानुमान योग्य और एक ही ढांचे में ढला गद्य तैयार कर रहे हैं, वैसे-वैसे लेखक अपनी इंसानी पहचान साबित करने के लिए पारंपरिक नियमों को जानबूझकर तोड़ रहे हैं। एआई-विरोधी यह नई लेखन शैली मशीन की एकरसता के मुकाबले जानबूझकर की गई गलतियों, अप्रत्याशित विराम चिन्हों, व्यक्तिगत अनुभवों और अनूठे मुहावरों को प्राथमिकता दे रही है। मशीनी उपकरणों की गति से मुकाबला करने के बजाय लेखक और संपादक इंसानी सोच की स्वाभाविक विषमताओं को अपना रहे हैं और गैर-पारंपरिक लेखन को प्रामाणिकता की कसौटी बना रहे हैं। एआई-विरोधी लेखन शैली की मुख्य विशेषताएं इस नई शैली की पहचान मुख्य रूप से उन चीजों के बहिष्कार से बनती है जो मशीनी गद्य की पहचान हैं। लेखक एआई की जानी-मानी आदतों जैसे तीन-तीन चीजों की सूचियां बनाना, कर्मवाच्य (पैसिव वॉइस) का प्रयोग करना, और एक खास किस्म के वाक्य विन्यास से दूरी बना रहे हैं। इसके बजाय वे व्यक्तिगत बारीकियों और अनूठे प्रयोगों पर ध्यान दे रहे हैं, जो लेखन के पीछे की कड़ी मेहनत को दर्शाते हैं। इस बदलाव पर बात करते हुए प्रसिद्ध लेखिका रॉबसन बताती हैं कि लैंग्वेज मॉडल के आने के बाद से उनके लिखने के तरीके में बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है। वह घुमावदार विन्यासों से बचती हैं और मशीनी ठहराव से अलग रास्ता चुनती हैं। रॉबसन के लिए लिखना अब मशीनी एकरसता के खिलाफ एक सचेत प्रयास बन गया है। वह मानती हैं कि उनमें अब कम यांत्रिक तरीके से लिखने की चाहत जागी है। वह जानबूझकर छोटी-छोटी अनूठी गलतियां करती हैं, नए मुहावरे गढ़ती हैं और विराम चिन्हों के साथ नए प्रयोग करती हैं ताकि पाठक को शब्द के पीछे छिपे इंसान का एहसास हो सके। रॉबसन का कहना है, "मुझे लगता है कि एआई पूरी तरह से एक नए साहित्यिक आंदोलन को जन्म दे सकता है।" उनका मानना है कि आने वाले समय में व्यावसायिक साहित्य पर मशीनी व्यक्तिगत सुझावों का कब्जा हो सकता है, जबकि गंभीर साहित्य अधिक अनूठे, अनोखे और जटिल रूप की ओर बढ़ेगा। साहित्यिक विवाद और प्रामाणिकता की तलाश यह नया रुझान प्रकाशन जगत में बढ़ती आशंकाओं और जांच-परख के माहौल के बीच सामने आया है। पुस्तकों में मशीनी गद्य के इस्तेमाल के आरोपों ने लेखकों और प्रकाशकों के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। मार्च के महीने में प्रसिद्ध प्रकाशन संस्थान हैचेट ने मिया बलार्ड के हॉरर उपन्यास 'शाई गर्ल' की बिक्री यह आशंका फैलने के बाद रोक दी थी कि इसमें एआई का भारी इस्तेमाल किया गया है। मिया बलार्ड ने इन दावों को पूरी तरह खारिज किया था। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा रखे गए एक स्वतंत्र संपादक ने उनकी पांडुलिपि को एआई सॉफ्टवेयर से गुजार दिया था, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ा। अपनी नई किताबों की तैयारी कर रहीं बलार्ड का कहना है कि अब अपनी लिखावट को अधिक वास्तविक और प्रामाणिक बनाना ही उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसी तरह की एक घटना स्टीवन रोज़नबाउम की पुस्तक 'द फ्यूचर ऑफ ट्रुथ' के साथ हुई, जो इस विषय पर आधारित थी कि एआई कैसे सच्चाई के स्वरूप को बदल रहा है। इस पुस्तक में एआई द्वारा गढ़े गए कई फर्जी उद्धरण शामिल पाए गए, जिसे बाद में स्टीवन रोज़नबाउम ने स्वीकार भी किया। इन घटनाओं ने कई स्थापित लेखकों को अपनी शैली पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है। विक्टोरियन साहित्य से प्रेरित लंबे और जटिल वाक्यों के लिए जानी जाने वाली ऑस्ट्रेलियाई उपन्यासकार और शोधकर्ता एलेन सेवेज मानती हैं कि चैटबॉट्स ने उनकी पसंदीदा शैलीगत विशेषताओं को छीन लिया है। उनका कहना है कि वे तीन के नियम और विशेष विराम चिन्हों के अत्यधिक उपयोग को मिस करती हैं। प्रमुख प्रकाशनों ने व्यक्तिगत अनुभवों को बनाया अनिवार्य डिजिटल पत्रिकाओं और सांस्कृतिक मंचों में भी संपादकीय नीतियों को बदलकर मानवीय आवाज को बढ़ावा दिया जा रहा है। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के प्रोफेसर और ऑनलाइन संस्कृति पत्रिका इयोन के संपादक रिचर्ड फिशर का कहना है कि एआई के बढ़ते प्रभाव ने उन्हें लेखकों को और अधिक इंसानी और बातचीत की शैली में लिखने के लिए प्रोत्साहित करने पर मजबूर किया है। उनका मानना है कि मशीनी मॉडल इंसानों जैसा तीखा या अनूठा गद्य नहीं लिख सकते, इसलिए प्रकाशनों को गद्य के स्वाभाविक अनगढ़पन को तराश कर खत्म नहीं करना चाहिए। इसी तरह के बदलाव अन्य बड़े मीडिया ब्रांड्स में भी देखे जा रहे हैं। जुलाई 2024 में जब मनो सुंदरेसन ने पिचफोर्क में मुख्य संपादक का पद संभाला, तब तक लैंग्वेज मॉडल काफी लोकप्रिय हो चुके थे। ब्लॉगिंग की पृष्ठभूमि से आने वाले मनो सुंदरेसन ने अपने लेखकों को अपनी मौलिक आवाज में लिखने के लिए प्रेरित किया। मीडिया समूह कोंडे नास्ट के स्वामित्व वाले इस संस्थान के संपादकों ने लेखकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि समीक्षाएं लिखते समय किसी भी एआई उपकरण का प्रयोग न किया जाए और व्यक्तिगत अनुभवों को प्राथमिकता दी जाए। मई के महीने में जब प्लेबॉय के मुख्य संपादक फिलिप पिकार्डी ने नए विचारों के लिए अपनी इनबॉक्स खोली, तो उन्हें लगभग 1,000 प्रस्ताव मिले। उन्होंने खुद क्लॉड मॉडल के साथ प्रयोग करके देखा तो पाया कि अधिकांश प्रस्ताव मशीनी तरीके से तैयार किए गए थे। इसके बाद प्लेबॉय ने स्पष्ट नियम बनाया कि वे केवल वही रचनाएं स्वीकार करेंगे जिनमें वास्तविक इंसानी अनुभव शामिल होंगे। उन्होंने लेखकों को फूको और बेल हुक्स जैसे विचारकों से प्रेरणा लेकर नए प्रयोग करने को कहा, जिन्होंने भाषा के पारंपरिक नियमों को चुनौती दी थी। टाइपो का सहारा और एंटी-ग्रामरली टूल की शुरुआत मशीनी लेखन के खिलाफ इस प्रतिरोध ने व्यंग्य और नए तकनीकी नवाचारों को भी जन्म दिया है। क्लिकहोल की लेखिका जेसी मैकगैरी ने अपने एक व्यंग्यात्मक लेख '5 रीजन्स टू लव समर (नो एआई)' में जानबूझकर हिज्जे की गलतियां शामिल कीं और बार-बार यह दावा किया कि इसे इंसान ने लिखा है। मैकगैरी ने बताया कि इन गलतियों को बनाए रखना ज्यादा मेहनत का काम था क्योंकि उन्हें बार-बार ऑटो-करेक्ट सिस्टम को बंद करना पड़ता था। मशीनी एकरसता से अलग हटने की इसी चाहत ने नए एप्लिकेशन्स का रास्ता साफ किया है। अप्रैल में डेवलपर बेन हॉरविट्ज़ ने सिंसियरली नाम का एक नया ऐप पेश किया, जिसे उन्होंने 'एंटी-ग्रामरली' नाम दिया। यह टूल ईमेल में जानबूझकर हिज्जे की छोटी-छोटी गलतियां छोड़ देता है और अंत में मोबाइल से भेजे जाने का संदेश जोड़ता है। जब बेन हॉरविट्ज़ ने फॉर्च्यून 500 कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को सामान्य ईमेल और सिंसियरली से तैयार ईमेल भेजकर परीक्षण किया, तो अधिकारियों ने केवल उन्हीं ईमेल को खोला जिनके विषय में छोटी वर्णमाला और टाइपो मौजूद थे। उनका कहना है कि लोग अब एकरसता से ऊब चुके हैं और मौलिक लेखन की कद्र बढ़ गई है। कारपोरेट रणनीति और इंसानी लेखन का भविष्य यह एआई-विरोधी लहर अब कॉर्पोरेट मार्केटिंग और प्रोफेशनल मंचों पर भी असर दिखा रही है। मार्केटिंग एजेंसी dslx के संस्थापक रे स्लेटर बेरी ने अपनी कंपनी में नियम बनाया है कि सारा कंटेंट केवल प्रथम पुरुष (फर्स्ट पर्सन) में ही लिखा जाएगा, ताकि उसमें लगने वाली मेहनत साफ नजर आए। उनकी एजेंसी हर महीने आंतरिक बैठकें आयोजित करती है जिसमें एआई के रुझानों की समीक्षा की जाती है और अपनी शैली से जुड़े दस्तावेजों को अपडेट किया जाता है, ताकि लिखावट कभी मशीनी न लगे। शिक्षाविदों का भी मानना है कि एआई का दौर अच्छे लेखन के महत्व को फिर से स्थापित कर सकता है। अनुभवी लेखन शिक्षक जॉन वॉर्नर ने अपनी पुस्तक 'मोर दैन वर्ड्स: हाउ टू थिंक अबाउट राइटिंग इन द एज ऑफ एआई' में लिखा कि एआई इंसानी लेखकों की जगह लेने के बजाय असली लेखन कला का मूल्य बढ़ाएगा। जॉन वॉर्नर लंबे समय से छात्रों के पांच-पैराग्राफ वाले पारंपरिक निबंधों और दिखावटी अकादमिक भाषा को खत्म करने का प्रयास कर रहे थे, जो अब चैटजीपीटी का मुख्य आधार बन चुके हैं। भले ही उच्च श्रेणी के स्थापित लेखकों पर इसका सीधा असर न पड़े, लेकिन सामान्य लेखकों के लिए अपनी गुणवत्ता सुधारने का यह बड़ा अवसर है। हालांकि मैकगैरी चेतावनी देती हैं कि भविष्य में एआई इन विरोधी शैलियों की भी नकल करना सीख सकता है। आखिरकार, मशीनी गद्य से बचने का एकमात्र टिकाऊ रास्ता केवल उत्कृष्ट और मौलिक लेखन ही है। इसका आप पर असर पाठकों के लिए: • सामग्री निर्माण में: यदि आप ब्लॉग, ईमेल या सोशल मीडिया पोस्ट लिखते हैं, तो अत्यधिक स्वचालित और मशीनी भाषा से बचें; प्रथम पुरुष (फर्स्ट पर्सन) की भाषा और निजी अनुभव सामग्री को अधिक असरदार बनाते हैं। • पेशेवर संचार में: कॉर्पोरेट ईमेल में अति-सटीक मशीनी भाषा के बजाय सहज, ईमानदार और स्वाभाविक शैली पाठकों और अधिकारियों का ध्यान खींचने में अधिक सफल होती है। सवाल-जवाब 1. एआई-विरोधी लेखन शैली क्या है? यह एक नया साहित्यिक और संपादकीय रुझान है जिसमें लेखक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मशीनी एकरसता से बचने के लिए जानबूझकर व्यक्तिगत अनुभवों, अनूठे मुहावरों और स्वाभाविक खामियों का उपयोग करते हैं। 2. लेखक मशीनी भाषा की पहचान से बचने के लिए किन बातों से परहेज कर रहे हैं? लेखक तीन-तीन की सूचियां बनाने, पैसिव वॉइस का इस्तेमाल करने और एआई द्वारा अत्यधिक उपयोग किए जाने वाले विराम चिन्हों व बनावटी मुहावरों से बच रहे हैं। 3. पिचफोर्क और प्लेबॉय जैसे प्रकाशनों ने अपनी नीतियों में क्या बदलाव किए हैं? इन पत्रिकाओं ने अपनी समीक्षाओं और प्रस्तावों में एआई के उपयोग पर रोक लगा दी है तथा केवल प्रथम पुरुष (फर्स्ट पर्सन) में लिखे गए वास्तविक इंसानी अनुभवों को स्वीकार कर रहे हैं। 4. सिंसियरली (Sinceerly) ऐप की क्या खासियत है? यह ऐप ईमेल में जानबूझकर हिज्जे की छोटी-छोटी गलतियां छोड़ता है और मोबाइल से भेजे जाने का संदेश जोड़ता है, जिससे ईमेल मशीनी न लगकर असली इंसानी संदेश जैसी लगती है। https://trendkia.com/culture/chatgpt-ke-daura-men-lekhaka-aura-prakashana-elgoridma-ko-mata-dene-ke-lie-apana-rahe-hain-anuthi-manaviya-shaili-11867 TrendKia — Har trend, sabse pehle.