चित्रकूट में प्राचीन धरोहरों के संरक्षण को मिली हरी झंडी, गोड़ा की चंदेलकालीन संरचनाओं और सोमनाथ मंदिर के कायाकल्प पर खर्च होंगे 65 लाख रुपये चित्रकूट जिले में स्थित चंदेलकालीन मंदिरों और प्राचीन सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए 65 लाख रुपये की योजना स्वीकृत की गई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और जिला प्रशासन की इस पहल से ऐतिहासिक स्थलों को संरक्षित कर क्षेत्रीय पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा। भगवान श्रीराम की पावन तपोभूमि के रूप में प्रसिद्ध धर्मनगरी चित्रकूट में सदियों पुरानी ऐतिहासिक और धार्मिक विरासतों को बचाने की एक बड़ी पहल शुरू की गई है। लंबे समय से उचित रखरखाव के अभाव, मौसम की मार और समय के थपेड़ों के कारण जर्जर हो चुकी प्राचीन इमारतों के अस्तित्व पर संकट गहराने लगा था। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने मिलकर जिले की पौराणिक तथा ऐतिहासिक धरोहरों का कायाकल्प करने का निर्णय लिया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत ऐतिहासिक संरचनाओं के वैज्ञानिक संरक्षण और पुनर्स्थापन पर कुल 65 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इससे न केवल इन अमूल्य ऐतिहासिक संपत्तियों को नया जीवन मिलेगा, बल्कि चित्रकूट जिले में पर्यटन की व्यापक संभावनाओं को भी नए पंख लगेंगे। गोड़ा गांव के चंदेलकालीन मंदिरों का 15 लाख रुपये से होगा कायाकल्प चित्रकूट जिला मुख्यालय से लगभग 21 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम गोड़ा में चंदेल राजवंश के समय निर्मित कई दुर्लभ मंदिरों के अवशेष बिखरे पड़े हैं। यह ऐतिहासिक स्थल प्रसिद्ध भरतकूप के निकट झांसी-मीरजापुर राष्ट्रीय राजमार्ग-35 से करीब डेढ़ किलोमीटर दक्षिण दिशा में स्थित है। इन प्राचीन मंदिरों के क्षतिग्रस्त मंडपों, चबूतरों और आधार संरचनाओं को संरक्षित करने की जिम्मेदारी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को सौंपी गई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने करीब 15 लाख रुपये की लागत से संरक्षण और पुनर्स्थापन का कार्य औपचारिक रूप से शुरू करा दिया है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य इन ऐतिहासिक अवशेषों को उनके वास्तविक और मूल प्राचीन स्वरूप में वापस लाना है। राजस्थान के विशेषज्ञ कारीगर करेंगे पत्थर दर पत्थर पुनर्स्थापन संरक्षण अभियान को अत्यंत सावधानीपूर्वक और वैज्ञानिक तकनीकों के साथ पूरा किया जा रहा है। चित्रकूट के जिलाधिकारी पुलकित गर्ग के अनुसार, गोड़ा स्थित चंदेलकालीन धरोहर के संरक्षण का कार्य वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान पूरा करने की समयसीमा निर्धारित की गई है। इस जीर्णोद्धार प्रक्रिया के दौरान मंदिर के मंडप में लगे विशाल और भारी पत्थरों को ऊपरी सतह से लेकर नींव तक क्रमबद्ध और सुरक्षित तरीके से एक-एक करके निकाला जाएगा। इसके बाद विशेषज्ञ प्रत्येक पत्थर की मजबूती, भौतिक स्थिति और वास्तुशिल्पीय संरचना का गहन अध्ययन करेंगे और फिर उसे उसके मूल स्थान पर वापस सटीक रूप से स्थापित करेंगे। इसके साथ ही मंदिर परिसर के क्षतिग्रस्त प्लेटफार्म और सीढ़ियों की मरम्मत कर उन्हें भी नया रूप दिया जाएगा। स्मारक को असामाजिक तत्वों और क्षति से सुरक्षित रखने के लिए चारों तरफ की चारदीवारी की व्यापक मरम्मत की जाएगी तथा उसके ऊपर मजबूत बार ग्रिल लगाए जाएंगे। आधुनिक तकनीक के साथ-साथ पारंपरिक स्थापत्य कला का संतुलन बनाए रखने के लिए विशेष रूप से राजस्थान से दक्ष और अनुभवी कारीगरों की टीम बुलाई गई है। मानिकपुर के चर गांव में स्थित सोमनाथ मंदिर के लिए 50 लाख मंजूर इसी संरक्षण श्रृंखला के तहत मानिकपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले चर गांव में स्थित प्राचीन सोमनाथ मंदिर के पुनर्स्थापन की भी विस्तृत योजना तैयार की गई है। ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस मंदिर को इसके पुरातन वैभव में लौटाने के लिए करीब 50 लाख रुपये की अनुमानित लागत से जीर्णोद्धार का काम कराया जाएगा। जिलाधिकारी ने पुष्टि की है कि इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए पहली किस्त की राशि स्वीकृत की जा चुकी है और जल्द ही जमीनी स्तर पर काम में तेजी आएगी। प्रशासन की इस दूरगामी पहल से चित्रकूट की प्राचीन स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलने की उम्मीद है। धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ ऐतिहासिक महत्व वाले इन स्थलों के विकसित होने से स्थानीय रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। इसका आप पर असर • भारत में: भारत की प्राचीन चंदेलकालीन स्थापत्य कला और सांस्कृतिक धरोहरों का वैज्ञानिक संरक्षण होने से देश के ऐतिहासिक पर्यटन मानचित्र को मजबूती मिलेगी। • चित्रकूट में: ऐतिहासिक गोड़ा और चर गांव के मंदिरों के सुंदर कायाकल्प से जिले में नए पर्यटन स्थल विकसित होंगे और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। सवाल-जवाब 1. चित्रकूट में किन ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण का काम शुरू हुआ है? चित्रकूट के गोड़ा गांव स्थित चंदेलकालीन मंदिरों और मानिकपुर के चर गांव स्थित प्राचीन सोमनाथ मंदिर के संरक्षण और जीर्णोद्धार का काम शुरू हुआ है। 2. गोड़ा गांव के मंदिरों के जीर्णोद्धार पर कितना खर्च आएगा? गोड़ा गांव के चंदेलकालीन मंदिरों के संरक्षण पर लगभग 15 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा कराया जा रहा है। 3. मानिकपुर के सोमनाथ मंदिर के लिए कितनी राशि स्वीकृत की गई है? मानिकपुर विकासखंड के चर गांव में स्थित प्राचीन सोमनाथ मंदिर के कायाकल्प के लिए लगभग 50 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। 4. गोड़ा के चंदेलकालीन मंदिरों के संरक्षण का काम कब तक पूरा होगा? चित्रकूट के जिलाधिकारी पुलकित गर्ग के अनुसार, गोड़ा की ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण कार्य को वित्तीय वर्ष 2026-27 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। 5. मंदिरों के पुनर्स्थापन के लिए कहां से कारीगर बुलाए गए हैं? पारंपरिक स्थापत्य और आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के समन्वय से जीर्णोद्धार कार्य को अंजाम देने के लिए राजस्थान से विशेषज्ञ कारीगरों की टीम बुलाई गई है। https://trendkia.com/culture/chitrakoot-men-prachina-dharoharon-ke-snrakshana-ko-mili-hari-jhndi-goda-ki-chndelakalina-snrachanaon-aura-somnath-mndira-ke-kayak-18767 TrendKia — Har trend, sabse pehle.