{
  "type": "article",
  "title": "गे डेटिंग की दुनिया में गूज़ ऐप ने दोस्ती का वादा किया, लेकिन कुछ यूज़र्स को अब भी बाहर जैसा महसूस हो रहा है",
  "summary": "गे पुरुषों के लिए दोस्ती को प्राथमिकता देने का दावा करने वाले नए इनवाइट-ओनली ऐप गूज़ ने पिछले महीने लॉन्च होने के बाद से काफी यूज़र्स को आकर्षित किया है, लेकिन कई यूज़र्स असंगत मॉडरेशन, वेरिफिकेशन में सेंध लगाने वाली फर्जी प्रोफाइल और ऐप के मैप पर नस्लीय विविधता की कमी की शिकायत कर रहे हैं।",
  "content": "गे पुरुषों के लिए एक नया इनवाइट-ओनली सोशल ऐप गूज़ खुद को 'एंटी-एल्गोरिद्म' बताते हुए बाज़ार में उतरा है और दावा करता है कि यह स्वाइप-हैवी हुकअप ऐप्स से अलग, दोस्ती को प्राथमिकता देता है। पिछले महीने लॉन्च होने के बाद से इसने काफी यूज़र्स को अपनी ओर खींचा है, लेकिन कई यूज़र्स से हुई बातचीत में एक मिली-जुली तस्वीर सामने आती है, कुछ को इसकी 'दोस्ती-पहले' सोच पसंद आई, तो कुछ ने कंटेंट मॉडरेशन में गड़बड़ी, वेरिफिकेशन से बचकर निकल गई फर्जी प्रोफाइल और ऐप के अपने मैप पर नस्लीय विविधता की कमी की शिकायत की।\n\nहुकअप ऐप्स से अलग दिखने की कोशिश\nगूज़ काम करता है कुछ-कुछ राया जैसे, यानी सिर्फ इनवाइट पर चलने वाला मेंबर्स क्लब। नए यूज़र्स इनवाइट कोड से जुड़ सकते हैं या एक्सेस के लिए अप्लाई कर सकते हैं, और कम से कम एक मामले में मंज़ूरी दो घंटे से भी कम समय में मिल गई। लेकिन ऐप के फीचर्स पर गौर करें तो ज़्यादातर चीज़ें जानी-पहचानी लगती हैं। यूज़र्स 'वेव' भेज सकते हैं और रोज़ाना सात डायरेक्ट मैसेज तक भेज सकते हैं। इसका लाइव मैप बताता है कि दूसरे यूज़र्स कहां मौजूद हैं, ठीक स्निफीज़ जैसा, और फेसबुक की तरह इसमें अलग-अलग इलाकों में 'चेक-इन' करने का विकल्प भी है। स्नैपचैट की तरह यहां चैट गायब होने की सुविधा है, और प्रोफाइल फोटो एक तय समय पर बदलती रहती हैं, बिल्कुल इंस्टाग्राम स्टोरीज़ जैसा अंदाज़। स्क्रीनशॉट न ले पाने की सुविधा भी है, जो राया के उस नियम जैसी है जो दूसरों की फोटो सेव करने से रोकता है।\n\nएक क्रिएटर की सेल्फी हुई फ्लैग\nएरिक हॉल न्यूयॉर्क शहर में रहने वाले ओनलीफैंस क्रिएटर हैं, जिनके एक्स पर 8 लाख से ज़्यादा फॉलोअर्स हैं। उनका कहना है कि काम के सिलसिले में उन्हें 'हर वक़्त' हुकअप करना पड़ता है, और शायद इसीलिए गूज़ का दोस्ती वाला दावा उन्हें दिलचस्प लगा। साइनअप के दौरान उन्होंने पूरी तरह कपड़ों में ली गई कुछ सेल्फी चुनीं, जिनमें एक फोटो में वे काली शर्ट, बेसबॉल कैप और नीली जींस पहने नज़र आए और शर्ट ऊपर उठाकर अपने एब्स दिखा रहे थे। उनकी एक्स बायो में खुद के बारे में बेहद खुले शब्दों में लिखा है, लेकिन गूज़ की प्रोफाइल में उन्होंने कहीं नहीं बताया कि वे एडल्ट परफॉर्मर के तौर पर काम करते हैं। इसके बावजूद जब वे अपनी एप्लिकेशन का स्टेटस देखने के लिए दोबारा लॉगिन हुए, तो उन्हें नई फोटो अपलोड करने और कम्युनिटी गाइडलाइंस पढ़ने को कहा गया। उनका अकाउंट 'अनुचित' कहकर फ्लैग कर दिया गया था। उन्हें मिले मैसेज में लिखा था, 'न्यूडिटी, पोर्नोग्राफी और यौन रूप से भड़काऊ अश्लील कंटेंट गूज़ पर मान्य नहीं है। यौन गतिविधि या सेवाओं से जुड़ा कोई भी व्यावसायिक लेन-देन कभी न करें।'\n\nयह वाकया जुलाई में सामने आई उस जानकारी के कुछ महीनों बाद हुआ है, जिसमें बताया गया था कि गूज़ के सह-संस्थापक डेविड अलियागास ने कथित तौर पर एआई से बने इंस्टाग्राम अकाउंट्स के एक बड़े नेटवर्क का इस्तेमाल कर नए यूज़र्स को ऐप की ओर खींचने की कोशिश की थी। उस मार्केटिंग विवाद ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया था, जो तब से गूज़ के साथ जुड़ा हुआ है, क्या ऐप सच में वैसा दोस्ती-केंद्रित समुदाय बना रहा है जैसा वह दावा करता है, या फिर नरम मार्केटिंग सिर्फ पुराने हुकअप फॉर्मेट पर नई परत भर है।\n\nयूज़र्स ने उठाए 'एंटी-हुकअप' डिज़ाइन पर सवाल\nLGBTQIA+ समुदाय के कई सदस्यों ने ऑनलाइन इस दावे पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वैनिश मोड और स्क्रीनशॉट प्रोटेक्शन जैसे फीचर आमतौर पर बोल्ड फोटो भेजने से जुड़े होते हैं, न कि सामान्य दोस्ताना बातचीत से। टिकटॉक पर एक यूज़र ने पूछा, 'अगर आप किसी खास तरह की फोटो नहीं भेज रहे, तो आपको इन दोनों चीज़ों की ज़रूरत ही क्यों है?' वहीं एक्स पर एक और यूज़र ने सीधे शब्दों में लिखा, 'तो क्या हम गूज़ ऐप पर वही कर रहे हैं या नहीं???'\n\nदोस्ताना बातचीत भी हो जाती है फ्लर्टी\nऑस्टिन, टेक्सास के 31 वर्षीय हेयरस्टाइलिस्ट हंटर लॉरेंस दूसरे डेटिंग ऐप्स की लेन-देन जैसी थकाऊ बातचीत से ऊब चुके थे, इसलिए गूज़ की दोस्ती वाली सोच ने उन्हें आकर्षित किया। लेकिन शुरुआत में ही बातचीत थोड़ी बोल्ड हो गई। वे बताते हैं कि उन्होंने एक मैच से बस इतना पूछा, 'कैसे हो?' जवाब मिला, 'सच बताऊं तो सुबह-सुबह मस्ती में हूं।' फोन पर यह किस्सा सुनाते हुए लॉरेंस हंस पड़ते हैं, 'लड़के आखिर लड़के ही हैं।' उस बातचीत के बाद चैट वहीं खत्म हो गई, लेकिन लॉरेंस, जो पिछले महीने ऐप लॉन्च होने के बाद से इसे लगातार इस्तेमाल कर रहे हैं, कहते हैं कि उनकी ज़्यादातर बातचीत सीधी-सादी ही रही है। उनका मानना है कि गूज़ असल में गे पुरुषों के लिए एक हर-काम वाला सोशल ऐप बनने की कोशिश कर रहा है, न कि डेटिंग को नए सिरे से गढ़ रहा है। वे कहते हैं, 'यहां कोई नया पहिया नहीं बनाया जा रहा।'\n\nवहीं एरिक हॉल का अनुभव इतना नरम नहीं रहा। अकाउंट फ्लैग होने के बाद उन्होंने ऐप छोड़ने का फैसला कर लिया। उनका कहना है, 'सच कहूं तो मैं गे दोस्त बनाने वाले ऐप को लेकर उत्साहित था, लेकिन बिना किसी ठोस वजह के बैन होना निराश करने वाला रहा। मैं इसे डिलीट कर रहा हूं।'\n\nवेरिफिकेशन और विविधता को लेकर शिकायतें\nहॉल अकेले नहीं हैं जिन्हें मॉडरेशन में गड़बड़ी नज़र आई। एक अन्य आवेदक का कहना है कि साइनअप के दौरान मेकअप में ली गई उसकी फोटो रिजेक्ट कर दी गई। ऐप का रुख मस्कुलिन दिखने वाले पुरुषों की ओर ज़्यादा झुका नज़र आता है और बायो में प्रोनाउन लिखने की इजाज़त नहीं है, हालांकि फेमिनिन अंदाज़ वाले कई अकाउंट अब भी ऐप पर मौजूद मिले। कुछ यूज़र्स ने इससे भी गहरी समस्या की ओर इशारा किया, नस्लीय विविधता की कमी। न्यूयॉर्क शहर में कम्युनिटी हेल्थ लाइज़न के तौर पर काम करने वाले और खुद को नॉनबाइनरी बताने वाले 35 वर्षीय रैफी रेगुलस कहते हैं कि ऐप के लाइव मैप ने ब्रॉन्क्स में उनके अपने इलाके की जानकारी तक गलत दिखाई। जब उन्होंने अपने जैसे दिखने वाले क्वीयर पुरुषों को खोजने के लिए मैप की रेंज बढ़ाकर 10 मील की, तो नतीजों ने उन्हें चौंका दिया। वे कहते हैं, 'पूरे न्यूयॉर्क शहर में कहीं भी ब्लैक और लैटिनएक्स लोग बेहद कम नज़र आए, जो मुझे बहुत अजीब लगा। मुझे ज़्यादातर सिस जेंडर गोरे पुरुष ही मिले, जो या तो एक जैसे लग रहे थे या एआई से बने लग रहे थे, शायद दोनों ही। मैंने द मैट्रिक्स देखी है।' एक हफ्ते के भीतर उन्होंने ऐप डिलीट कर दिया।\n\nगूज़ के सह-संस्थापक डेरेक चैडविक का कहना है कि कंपनी यूज़र्स की पहचान, जेंडर एक्सप्रेशन या निजी दिखावट के आधार पर कोई फैसला नहीं लेती, और उन्होंने कभी ऐसा किए जाने से भी इनकार किया। यह पूछे जाने पर कि क्या गूज़ के पास कलर्ड यूज़र्स के अनुभव को बेहतर बनाने की कोई योजना है, चैडविक कहते हैं कि ऐप को शुरू से ही ऐसे भेदभाव वाले फीचर्स, जैसे एथनिसिटी फिल्टर, के बिना बनाया गया है, जो उनके मुताबिक पुराने प्लेटफॉर्म्स को लंबे समय से परेशान करते रहे हैं। गूज़ ने यह बताने से इनकार कर दिया कि अब तक कितने यूज़र्स इससे जुड़े हैं, हालांकि कंपनी का कहना है कि लॉन्च के बाद से मेंबर्स ने 2 लाख 50 हज़ार से ज़्यादा बातचीत शुरू की हैं।\n\nवेरिफिकेशन को चकमा देकर घुसी फर्जी प्रोफाइल\n@whatsthattwunk नाम से एक्स पर सक्रिय एक यूज़र, जिसने पेशेवर वजहों से अपना असली नाम सार्वजनिक न करने का अनुरोध किया, को पता चला कि उसकी बिना शर्ट वाली तस्वीरें, जिनमें जिम के लॉकर रूम में अंडरवियर पहने खींची गई एक फोटो भी शामिल थी, गूज़ पर 'रॉबर्ट' नाम की एक प्रोफाइल पर अपलोड कर दी गई थीं, जिसे नैशविल में रहने वाला 33 वर्षीय वकील बताया गया था। सैन फ्रांसिस्को में रहने वाले इस 27 वर्षीय टेक वर्कर का कहना है कि जो ऐप खुद को इनवाइट-ओनली या एप्लिकेशन बेस्ड बताता है, उससे उम्मीद की जाती है कि वह अपलोड की गई फोटो पर फेशियल रिकग्निशन जैसी कोई जांच करे। वे कहते हैं, 'फिर भी एक कैटफिश प्रोफाइल आसानी से पास हो गई।' उन्हें सबसे ज़्यादा इस बात का बुरा लगा कि नकली प्रोफाइल बनाने वाले ने उन्हें असल उम्र से छह साल बड़ा दिखा दिया।\n\nगूज़ पर मेंबर्स को अपनी प्रोफाइल वेरिफाई करने के लिए ऐप के अंदर ही एक सेल्फी लेनी होती है, लेकिन इसका डिटेक्शन सिस्टम हर फर्जी अकाउंट को नहीं पकड़ पाता। इस घटना के बाद @whatsthattwunk को यह सोचने पर मजबूर होना पड़ा कि 'क्या उन्हें असली यूज़र्स को वेरिफाई करने की सच में परवाह है, या वे सिर्फ एआई इस्तेमाल के लिए बायोमेट्रिक डेटा जुटा रहे हैं।' चैडविक ने यह बताने से इनकार कर दिया कि गूज़ का वेरिफिकेशन सिस्टम ठीक कैसे काम करता है, उनका कहना था कि इसका खुलासा करने से 'बुरी नीयत रखने वालों को बायपास तरीके खोजने में सीधी मदद मिलती है।' उन्होंने बताया कि मॉडरेशन टीम फर्जी प्रोफाइल बनने से रोकने के लिए 'बेहद सख्ती से' काम कर रही है।\n\nयूज़र डेटा को लेकर शर्तों पर विवाद\nगूज़ को यूज़र्स के अपलोड किए गए डेटा और फोटो के इस्तेमाल को लेकर भी आलोचना झेलनी पड़ी है। 27 जून को इंटरनेट पर डेटा माइनिंग को लेकर बड़े स्तर पर चिंता जताई जाने लगी, जब सामने आया कि गूज़ की शुरुआती सेवा शर्तों में यूज़र्स की फोटो पर कंपनी को व्यापक अधिकार दिए गए थे। इसका मतलब था कि ऐप पर अपलोड या भेजा गया कोई भी कंटेंट हमेशा के लिए कंपनी की संपत्ति बन जाता और उसका इस्तेमाल 'मेंबर कंटेंट के पूरे या किसी हिस्से से डेरिवेटिव वर्क बनाने, उसे अडैप्ट करने, फॉर्मेट बदलने, अनुवाद करने और अन्य तरीकों से भुनाने' के लिए किया जा सकता था। इस विरोध के बाद गूज़ ने 30 जून को अपनी सेवा शर्तें बदलीं, ताकि कंपनी के शब्दों में यूज़र अधिकारों पर अपने 'दायरे को साफ तौर पर सीमित' किया जा सके। हालांकि नई शर्तों के बावजूद गूज़ अब भी मेंबर्स के कंटेंट का इस्तेमाल अपने सेफ्टी और एंटी-स्पैम मॉडल को ट्रेन करने के साथ-साथ सेफ्टी गाइडलाइंस बनाने में करता है।\n\nविवादों के बावजूद कुछ को नज़र आती है उम्मीद\nलॉन्च के बाद से जुड़े इतने विवादों के बावजूद लॉरेंस अब भी गूज़ के सीधे-सादे पहलुओं की तारीफ करते हैं। वे कहते हैं, 'गे डेटिंग की दुनिया में हर कोई किसी न किसी चीज़ में खोट निकालना चाहता है, जबकि मुझे लगता है कि यह ऐप अपने मकसद के बारे में काफी साफ है। यह उस असल बेलगामी से एक राहत भरा बदलाव है, जिसकी मार्केटिंग हमें हमेशा दिखाई जाती है, यानी बस चौबीसों घंटे सेक्स। एक ऐसी जगह होना जो थोड़ी असली और सच्ची चीज़ के लिए हो, अच्छा लगता है।'\n\nइसका आप पर असर\n• नए डेटिंग ऐप्स इस्तेमाल करने वाले एलजीबीटीक्यूआईए+ यूज़र्स के लिए: अगर आप गूज़ जैसे ऐप पर साइनअप करते हैं, तो ध्यान रखें कि पूरी तरह कपड़ों में ली गई फोटो भी फ्लैग हो सकती है, लाइव मैप आपके इलाके की जानकारी दूसरे यूज़र्स को दिखा सकता है, और ऐप की शर्तें आपकी अपलोड की गई फोटो को सेफ्टी और एंटी-स्पैम सिस्टम की ट्रेनिंग में इस्तेमाल करने की इजाज़त देती हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. गूज़ ऐप क्या है?\nगूज़ गे पुरुषों के लिए बना एक नया इनवाइट-ओनली 'एंटी-एल्गोरिद्म' ऐप है, जो खुद को हुकअप की बजाय दोस्ती पर केंद्रित बताता है, हालांकि इसके ज़्यादातर फीचर दूसरे ऐप्स पर भी मौजूद हैं।\n\n2. गूज़ से कैसे जुड़ा जा सकता है?\nयूज़र्स इनवाइट कोड के ज़रिए या एक्सेस के लिए अप्लाई कर के गूज़ से जुड़ सकते हैं, और कम से कम एक मामले में मंज़ूरी दो घंटे से भी कम समय में मिल गई।\n\n3. एरिक हॉल का अकाउंट क्यों फ्लैग हुआ?\nओनलीफैंस क्रिएटर एरिक हॉल ने पूरी तरह कपड़ों में ली गई सेल्फी अपलोड की थीं, फिर भी उनके अकाउंट को अनुचित बताकर फ्लैग किया गया और नई फोटो अपलोड करने के साथ कम्युनिटी गाइडलाइंस पढ़ने को कहा गया।\n\n4. फर्जी प्रोफाइल का मामला क्या था?\n@whatsthattwunk नाम के एक्स यूज़र को पता चला कि उसकी बिना शर्ट वाली तस्वीरें, जिनमें जिम लॉकर रूम की एक फोटो भी शामिल थी, गूज़ पर 'रॉबर्ट' नाम की एक नकली प्रोफाइल पर अपलोड कर दी गई थीं, जिसे नैशविल का 33 वर्षीय वकील बताया गया।\n\n5. गूज़ की शुरुआती सेवा शर्तों में यूज़र फोटो को लेकर क्या था?\nशुरुआती शर्तों में गूज़ को यूज़र्स के अपलोड या भेजे गए किसी भी कंटेंट पर हमेशा के लिए मालिकाना और उससे डेरिवेटिव वर्क बनाने का अधिकार मिला हुआ था, विरोध के बाद 30 जून को इन शर्तों को सीमित किया गया।\n\n6. क्या शर्तें बदलने के बाद भी गूज़ मेंबर्स के फोटो इस्तेमाल करता है?\nहां, गूज़ का कहना है कि वह अब भी मेंबर कंटेंट का इस्तेमाल अपने सेफ्टी और एंटी-स्पैम मॉडल को ट्रेन करने और सेफ्टी गाइडलाइंस बनाने में करता है।\n\n7. विविधता की शिकायतों पर सह-संस्थापक डेरेक चैडविक ने क्या कहा?\nचैडविक ने कहा कि कंपनी यूज़र्स की पहचान, जेंडर एक्सप्रेशन या दिखावट के आधार पर कोई फैसला नहीं लेती और ऐप को एथनिसिटी फिल्टर जैसे भेदभाव वाले फीचर्स के बिना बनाया गया है।\n\n8. गूज़ से अब तक कितने लोग जुड़ चुके हैं?\nकंपनी ने सटीक संख्या बताने से इनकार किया, लेकिन कहा कि लॉन्च के बाद से मेंबर्स ने 2 लाख 50 हज़ार से ज़्यादा बातचीत शुरू की हैं।",
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  "publishedAt": "2026-07-16",
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