# हिंदी भवन में प्रसून जोशी को प्रदान किया गया हिंदी रत्न सम्मान, रजत शर्मा ने रेखांकित की राष्ट्रभाषा की बढ़ती ताकत

> 1 अगस्त 2026 को दिल्ली के हिंदी भवन में आयोजित समारोह में प्रसार भारती अध्यक्ष प्रसून जोशी को हिंदी रत्न पुरस्कार से नवाजा गया। मुख्य अतिथि रजत शर्मा ने कहा कि हिंदी समाचार चैनलों की दर्शक संख्या अंग्रेजी से 140 प्रतिशत अधिक है।

**Type:** article · **Category:** कल्चर · **Published:** 2026-08-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/culture/hindi-bhavana-men-prasoon-joshi-ko-pradana-kiya-gaya-hindi-ratna-sammana-rajat-sharma-ne-rekhankita-ki-rashtrabhasha-ki-barhati-ta-12887 · **Language:** Hindi
**Tags:** प्रसून जोशी, रजत शर्मा, हिंदी रत्न सम्मान, हिंदी भवन, प्रसार भारती, दिल्ली news, हिंदी समाचार

दिल्ली स्थित हिंदी भवन में 1 अगस्त 2026 को आयोजित वार्षिक सम्मान समारोह में प्रसिद्ध गीतकार और प्रसार भारती के अध्यक्ष प्रसून जोशी को प्रतिष्ठित हिंदी रत्न सम्मान से अलंकृत किया गया। राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन की जयंती के अवसर पर आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार और एडिटर इन चीफ रजत शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने मंच से प्रसून जोशी को यह सम्मान प्रदान किया। इस विशिष्ट अवसर पर साहित्य, पत्रकारिता और जनसंचार क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया और भाषा के संरक्षण तथा संवर्धन में प्रसून जोशी के योगदान की सराहना की।

## प्रसून जोशी का आभार और रजत शर्मा की प्रशंसा
प्रसून जोशी ने सम्मान प्राप्त करने के बाद अपने संबोधन में कहा कि रजत शर्मा उनके वरिष्ठ हैं और उनके हाथों यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त करना अत्यंत गर्व और प्रसन्नता का विषय है। वहीं मुख्य अतिथि रजत शर्मा ने कहा कि प्रसून जोशी को सम्मानित करना उनके लिए भी गौरव की बात है, क्योंकि उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी भाषा के मान सम्मान को निरंतर ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। उन्होंने प्रसून जोशी की रचनात्मकता की प्रशंसा करते हुए पंक्तियां दोहराईं कि तेरे जैसा कोई मिला ही नहीं, कैसे मिलता कहीं पर था ही नहीं। रजत शर्मा के अनुसार प्रसून जोशी ने अंग्रेजी प्रधान व्यावसायिक परिवेश में कार्य करते हुए भी हिंदी की सहजता और गरिमा को बनाए रखा है और वे इस सम्मान के सच्चे हकदार हैं।

## हिंदी भवन से रजत शर्मा का गहरा भावनात्मक जुड़ाव
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रजत शर्मा ने हिंदी भवन के साथ अपने बचपन की पुरानी यादों को साझा किया। उन्होंने बताया कि यह स्थान उनके लिए केवल एक सभागार नहीं बल्कि जीवन का एक अत्यंत भावुक अध्याय है। जब वे मात्र छह सात वर्ष के थे, तब से उनका जुड़ाव इस संस्थान से रहा है। उनके दादाजी हिंदी भवन की लाइब्रेरी में ग्रंथपाल के रूप में कार्यरत थे और उन्हीं के वेतन से परिवार का पालन पोषण होता था। दादाजी नियमित रूप से उनके लिए नई नई पुस्तकें घर लाते थे, जिन्हें पढ़कर उनका हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम गहरा हुआ। प्रारंभिक शिक्षा हिंदी माध्यम में ग्रहण करने के बाद जब उन्होंने श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) में दाखिला लिया, तब वहां का पूरा माहौल अंग्रेजी केंद्रित था, जिससे शुरुआत में असहजता महसूस हुई।

## जेपी आंदोलन और पत्रकारिता के शुरुआती दिनों के अनुभव
कॉलेज जीवन के दौरान देश में जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में ऐतिहासिक जेपी आंदोलन की शुरुआत हुई। रजत शर्मा ने बताया कि किसी भी जनआंदोलन की वास्तविक अभिव्यक्ति देश की अपनी भाषा में ही होती है। वे इस आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल हुए, जिससे भाषा को लेकर मन में हिचकिचाहट पूरी तरह समाप्त हो गई। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा, तो शुरुआती दो वर्षों तक हिंदी में उत्कृष्ट लेखन करने के बावजूद उन्हें अपेक्षित पहचान नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने अंग्रेजी में लिखना आरंभ किया और संपादक के पद तक पहुंचे। हालांकि जब टेलीविजन पर अपना पहला टॉक शो शुरू करने का अवसर आया, तो उन्होंने दृढ़ संकल्प के साथ अपनी मातृभाषा हिंदी को ही चुना।

## लालू प्रसाद यादव से जुड़ा पहला शो और टीवी का दिलचस्प किस्सा
रजत शर्मा ने अपने शुरुआती टेलीविजन शो की रिकॉर्डिंग से जुड़ा एक मनोरंजक संस्मरण भी श्रोताओं के साथ साझा किया। वे अपने पहले एपिसोड की रिकॉर्डिंग प्रख्यात लेखक खुशवंत सिंह के साथ करना चाहते थे, जबकि बिहार के वरिष्ठ राजनेता लालू प्रसाद यादव की रिकॉर्डिंग तीसरे क्रम पर निर्धारित थी। हालांकि लालू प्रसाद यादव ने तय समय से काफी पहले सुबह दस बजे ही फोन करके तुरंत स्टूडियो पहुंचने की बात कही, जबकि उनका समय शाम चार बजे तय था। किसी तरह प्रबंध करके लालू प्रसाद यादव का शो सुबह ही शूट किया गया। रजत शर्मा ने जोर देकर कहा कि यदि वह शो हिंदी भाषा में प्रसारित नहीं हुआ होता, तो उसे इतनी व्यापक जनप्रियता और ऐतिहासिक सफलता कभी नहीं मिल पाती।

## अंग्रेजी चैनलों से 140 प्रतिशत आगे निकली हिंदी समाचार दृश्यता
समारोह के समापन वक्तव्य में रजत शर्मा ने आधुनिक युग में हिंदी भाषा की बढ़ती प्रासंगिकता और शक्ति पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज के समय में हिंदी अब किसी भी दृष्टि से उपेक्षित या निरीह भाषा नहीं रह गई है, बल्कि यह देश के शासन प्रमुखों और जन जन की अभिव्यक्ति की सशक्त वाणी बन चुकी है। अपनी बात को सिद्ध करने के लिए उन्होंने भारतीय मीडिया उद्योग के आंकड़े प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि वर्तमान में हिंदी समाचार चैनलों की दर्शक संख्या अंग्रेजी समाचार चैनलों की तुलना में 140 प्रतिशत अधिक है। यह आंकड़ा इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भारत के जनमानस में हिंदी का प्रभाव लगातार गहरा हो रहा है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** यह घटना देश भर में हिंदी मीडिया की बढ़ती लोकप्रियता और 140 प्रतिशत अधिक दर्शक संख्या के प्रभाव को दर्शाती है।

**दिल्ली में:** दिल्ली स्थित हिंदी भवन साहित्य और पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान देने वाली हस्तियों को सम्मानित करने की अपनी पुरानी परंपरा को कायम रख रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. 2026 में हिंदी रत्न सम्मान से किसे सम्मानित किया गया?
प्रख्यात गीतकार और प्रसार भारती के अध्यक्ष प्रसून जोशी को हिंदी रत्न सम्मान 2026 से सम्मानित किया गया।

### 2. हिंदी रत्न सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि कौन थे?
वरिष्ठ पत्रकार और एडिटर इन चीफ रजत शर्मा इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और उन्होंने प्रसून जोशी को यह पुरस्कार प्रदान किया।

### 3. यह सम्मान किस अवसर पर और कहां आयोजित किया गया?
यह सम्मान 1 अगस्त 2026 को राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन के जन्मदिवस के अवसर पर दिल्ली के हिंदी भवन में आयोजित किया गया।

### 4. रजत शर्मा का हिंदी भवन से क्या व्यक्तिगत संबंध था?
रजत शर्मा छह सात वर्ष की उम्र से हिंदी भवन से जुड़े थे, क्योंकि उनके दादाजी वहां लाइब्रेरियन थे और वहीं से उनके लिए किताबें लाया करते थे।

### 5. हिंदी समाचार चैनलों की व्यूअरशिप को लेकर रजत शर्मा ने क्या आंकड़ा पेश किया?
रजत शर्मा ने बताया कि आज हिंदी न्यूज चैनलों की व्यूअरशिप अंग्रेजी न्यूज चैनलों की तुलना में 140 प्रतिशत अधिक है।

## प्रेरणा और सबक
**प्रेरणा और सीख:**

- **मातृभाषा में गर्व महसूस करें:** अपनी भाषा और संस्कृति पर विश्वास रखकर बड़े से बड़े मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई जा सकती है।
- **संघर्ष से ना घबराएं:** शुरुआती दौर में पहचान न मिलने के बावजूद निरंतर प्रयास करने से सफलता अवश्य मिलती है।
- **विषम परिस्थितियों को अवसर में बदलें:** नई भाषाएं सीखने के साथ साथ अपनी मौलिक जड़ों से जुड़े रहना ही दीर्घकालिक सफलता की कुंजी है।

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