# अमेरिका में कैसे मनाया जाता है दशहरा, जानिए न्यू जर्सी से टेक्सास तक सात समंदर पार कैसे होती है विजयादशमी की धूम

> अमेरिका में रहने वाले भारतीय परिवार बिना किसी सरकारी छुट्टी और कड़े नियमों के बीच अपनी परंपराओं और संस्कृति को कैसे जीवित रखते हैं, जानिए इस रिपोर्ट में।

**Type:** article · **Category:** कल्चर · **Published:** 2026-10-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/culture/how-dussehra-is-celebrated-in-the-usa-from-new-jersey-to-texas-how-indian-families-keep-vijayadashami-alive-far-from-home-50375 · **Language:** Hindi
**Tags:** अमेरिका में दशहरा, विजयादशमी, प्रवासी भारतीय, रावण दहन, रामलीला अमेरिका, दुर्गा पूजा अमेरिका

भारत में विजयादशमी यानी दशहरे का पर्व हर साल बड़े ही उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जाता है। देश के कोने-कोने में इस दिन एक अलग ही समां बंध जाता है। कहीं लाउडस्पीकरों से रामलीला के भजन गूंजते हैं तो कहीं पटाखों की गड़गड़ाहट सुनाई देती है। गली-मोहल्लों में सजे मेलों की रौनक बच्चों को आकर्षित करती है और गरमा-गरम जलेबियों की सोंधी खुशबू इस पावन त्योहार की मिठास को और बढ़ा देती है। लेकिन जब यही दशहरा अमेरिका की धरती पर मनाया जाता है, तो इसका नजारा काफी जुदा होता है। न्यू जर्सी या टेक्सास जैसे इलाकों में रहने वाले किसी प्रवासी भारतीय परिवार के लिए दशहरे की सुबह किसी पारंपरिक उत्सव की बजाय ऑफिस की मीटिंग के अलार्म की आवाज से शुरू होती है। न तो यहाँ इस दिन कोई सरकारी अवकाश होता है, न ही घर के पास वाले पार्क में रावण दहन की वो पुरानी गूँज होती है और न ही रिश्तेदारों का बिना किसी पूर्व सूचना के घर आ जाना मुमकिन होता है। इसके बावजूद, अमेरिका में बसे प्रवासियों ने अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं को सहेजकर रखने के नायाब तरीके ढूँढ निकाले हैं। इनमें से कई तौर-तरीके भारत से काफी जुदा हैं, तो कुछ ऐसे भी हैं जो अपनों से दूर होने के अहसास को और गहरा कर देते हैं।

## स्थानीय पंचांग और टाइम जोन का गणित
भारत में जहाँ सभी पर्व पारंपरिक पंचांग की तिथियों के अनुसार तय होते हैं, वहीं अमेरिका में रहने वाले लोगों को स्थानीय पंचांग और वहाँ के समय का खास ध्यान रखना पड़ता है। यही वजह है कि कई परिवार अपने आस-पास के मंदिरों के आधिकारिक कैलेंडर को देखकर ही पूजा और धार्मिक आयोजनों की रूपरेखा तैयार करते हैं। दोनों देशों के बीच समय के बड़े अंतर के कारण कई बार त्योहार भारत से एक दिन पहले या फिर एक दिन बाद मनाया जाता है। त्योहार के दिन सबसे बड़ी चुनौती कामकाज की होती है, क्योंकि अमेरिका में दशहरे के अवसर पर किसी भी प्रकार की छुट्टी का प्रावधान नहीं है। इस स्थिति से निपटने के लिए स्थानीय भारतीय मंदिर और सांस्कृतिक संगठन अपने बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों को अक्सर अगले नजदीकी शनिवार या रविवार को आयोजित करते हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग अपनी व्यस्तताओं से वक्त निकालकर इनमें शामिल हो सकें।

## दफ्तर की भागदौड़ के बीच घर पर पूजा
जब सार्वजनिक आयोजनों की तारीख वीकेंड पर होती है, तो कई परिवार वास्तविक तिथि पर अपने घरों में ही एक छोटी सी पूजा का आयोजन कर लेते हैं। कुछ लोग सुबह ऑफिस की भागदौड़ शुरू होने से पहले ही दीप प्रज्वलित कर लेते हैं, तो कुछ शाम को काम से घर लौटने के बाद परिवार के साथ मिलकर विधि-विधान से पूजा और प्रसाद वितरण करते हैं। इस दौरान भारत में रह रहे माता-पिता और अन्य रिश्तेदारों के साथ संपर्क बनाए रखना भी एक चुनौती बन जाता है। अक्टूबर के महीने में भारतीय मानक समय अमेरिका के पूर्वी तट से लगभग साढ़े नौ घंटे और पश्चिमी तट से करीब साढ़े बारह घंटे आगे रहता है। इसका मतलब यह होता है कि दिल्ली में जब सुबह की शुरुआत हो रही होती है, तो कैलिफोर्निया में देर रात का वक्त चल रहा होता है। ऐसी स्थिति में तमाम परिवार अपनी घर की पूजा का एक संक्षिप्त वीडियो रिकॉर्ड करके भारत में बैठे अपनों को भेज देते हैं, ताकि सात समंदर पार की दूरी के बावजूद त्योहार की खुशियाँ और आशीर्वाद बिना किसी रुकावट के पहुँच सकें।

## अग्नि सुरक्षा नियमों के बीच रावण दहन के नए रास्ते
भारत में दशहरे के दिन रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के ऊँचे-ऊँचे पुतलों का दहन मुख्य आकर्षण होता है। मैदानों में उमड़ी भीड़, आतिशबाजी का शोर और जय श्रीराम के जयकारों के बीच बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश गूँज उठता है। लेकिन अमेरिका के खुले मैदानों में इतने बड़े पैमाने पर पुतलों को आग के हवाले करना बिल्कुल आसान काम नहीं है। वहाँ कड़े फायर सेफ्टी रेगुलेशन, स्थानीय प्रशासन से मिलने वाली परमिशन, बीमा और आयोजन से जुड़ी अन्य तमाम कानूनी शर्तों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होता है। इन सभी बाधाओं के चलते भारतीय समुदाय ने इस परंपरा को कायम रखने के वैकल्पिक और अनूठे रास्ते निकाल लिए हैं। कुछ चुनिंदा संगठन सभी जरूरी अनुमतियाँ लेकर किसी बड़े मैदान या मंदिर परिसर के भीतर ही नियंत्रित रूप से रावण दहन का आयोजन करवाते हैं, जहाँ अग्निशमन विभाग के कर्मचारी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम मौजूद रहते हैं। कुछ जगहों पर छोटे आकार के पुतलों का प्रयोग किया जाता है, तो कुछ अन्य आयोजनों में आधुनिक रोशनी, तेज आवाज और विशेष विजुअल इफेक्ट्स के माध्यम से प्रतीकात्मक दहन का नजारा पेश किया जाता है।

## मंच पर जीवंत होती रामलीला
अमेरिका में बसे भारतीय समुदाय के बीच रामलीला का मंचन भी काफी पसंद किया जाता है। वहाँ के स्थानीय नाट्य समूहों में बच्चे और बड़े मिलकर उत्साह के साथ रामायण के विभिन्न प्रसंगों को मंच पर जीवंत करते हैं। कई बार कम उम्र के बच्चे वानर सेना यानी हनुमान के सैनिकों की भूमिका निभाते हैं, जबकि अन्य सदस्य राम, लक्ष्मण, सीता या रावण जैसे प्रमुख पात्रों के रूप में नजर आते हैं। मंदिरों के सभागारों और स्कूलों के बड़े ऑडिटोरियम में आयोजित होने वाली ये प्रस्तुतियाँ उन बच्चों के लिए बेहद खास होती हैं, जिनका जन्म और लालन-पालन भारत से बहुत दूर हुआ है। उनके लिए रामलीला केवल मनोरंजन का कोई साधन नहीं रह जाती, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, पारिवारिक संस्कारों और रामायण की गाथा से जुड़ने का एक बेहद सशक्त माध्यम बन जाती है।

## क्षेत्रीय विविधताओं का अनूठा संगम
भारत की ही तरह अमेरिका में रहने वाले विभिन्न राज्यों के लोग अपनी-अपनी क्षेत्रीय परंपराओं को पूरी श्रद्धा के साथ निभाते हैं। जिस तरह देश के अलग-अलग हिस्सों में दशहरा अलग अंदाज में मनाया जाता है, वही विविधता अमेरिका में भी देखने को मिलती है। बंगाली समुदाय के लोग कई बड़े शहरों में दुर्गा पूजा का भव्य आयोजन करते हैं। इसके लिए कम्युनिटी हॉल या बड़े स्थान किराए पर लिए जाते हैं, जहाँ माँ दुर्गा की खूबसूरत प्रतिमा स्थापित की जाती है और कई दिनों तक विशेष पूजा, सांस्कृतिक संध्या और सामूहिक भोज का दौर चलता है। विजयादशमी के पावन अवसर पर महिलाओं द्वारा सिंदूर खेला की परंपरा भी पूरी आन-बान के साथ निभाई जाती है, जिसमें सुहागिनें देवी को सिंदूर अर्पित कर एक-दूसरे के सुखी जीवन की कामना करती हैं। उत्सव का समापन आपस में गले मिलने, मिठाइयाँ बाँटने और एक-दूसरे को शुभकामनाएँ देने के साथ होता है। इसी तरह गुजराती परिवारों के लिए नवरात्रि और दशहरे का पर्व गरबा और डांडिया के बिना अधूरा माना जाता है। न्यू जर्सी और टेक्सास जैसे राज्यों में गुजराती संगठन बड़े पैमाने पर गरबा नाइट्स का आयोजन करते हैं, जहाँ पारंपरिक परिधानों मेंज रंगे लोग देर रात तक थिरकते हैं।

## इसका आप पर असर
अमेरिका में रहने वाले भारतीय परिवारों को त्योहार के दिन सार्वजनिक अवकाश न मिलने और कड़े स्थानीय नियमों के बीच अपनी परंपराएं निभाने के लिए अतिरिक्त योजना बनानी पड़ती है।

- **अमेरिका में:** भारतीय परिवारों को स्थानीय टाइम जोन, कड़े फायर सेफ्टी नियमों और वीकेंड पर होने वाले आयोजनों के हिसाब से अपनी पूजा और समारोह तय करने होते हैं।
- **भारत में:** सुदूर रह रहे परिवारों को वीडियो कॉलिंग और डिजिटल माध्यमों के जरिए समय के बड़े अंतर के बावजूद त्योहार की खुशियों में शामिल होना पड़ता है।

## ऐसा क्यों हुआ
विदेशों में त्योहार मनाने के तरीकों में आए बदलाव मुख्य रूप से प्रशासनिक नियमों, भौगोलिक दूरियों और स्थानीय जीवनशैली के कारण होते हैं।

- **स्थानीय कानून:** अमेरिका में खुले मैदानों में आग जलाने पर कड़े फायर सेफ्टी रेगुलेशन लागू होते हैं, जिसके कारण पारंपरिक रावण दहन के लिए विशेष परमिशन लेनी पड़ती है।
- **समय का अंतर:** भारत और अमेरिका के बीच साढ़े नौ से साढ़े बारह घंटे का समयांतर होने के कारण लाइव संपर्क रखना कठिन होता है, जिससे रिकॉर्डेड वीडियो का सहारा लेना पड़ता है।
- **छुट्टियों का अभाव:** अमेरिकी कैलेंडर में दशहरे का अवकाश न होने के कारण सभी बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम केवल वीकेंड पर आयोजित किए जाते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. अमेरिका में दशहरे पर छुट्टी क्यों नहीं मिलती?
अमेरिका के सरकारी अवकाश कैलेंडर में दशहरा शामिल नहीं है, इसलिए लोगों को अपने सामान्य कार्य दिवसों के दौरान ही त्योहार मनाना पड़ता है।

### 2. अमेरिका में रावण दहन कैसे किया जाता है?
कड़े फायर सेफ्टी नियमों और प्रशासन की अनुमति के बाद कुछ संगठन सुरक्षित स्थानों पर नियंत्रित रावण दहन आयोजित करते हैं या प्रतीकात्मक तरीकों का उपयोग करते हैं।

### 3. भारत और अमेरिका के समय में कितना अंतर होता है?
अक्टूबर के दौरान भारतीय समय अमेरिका के पूर्वी तट से लगभग साढ़े नौ घंटे और पश्चिमी तट से लगभग साढ़े बारह घंटे आगे रहता है।

### 4. अमेरिका में रामलीला का मंचन कहाँ होता है?
स्थानीय भारतीय समुदाय मंदिरों के सभागारों और स्कूलों के ऑडिटोरियम में रामलीला का मंचन करता है।

### 5. बंगाली समुदाय अमेरिका में दुर्गा पूजा कैसे मनाता है?
बंगाली समुदाय कम्युनिटी हॉल किराए पर लेकर माँ दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करता है और सिंदूर खेला जैसी परंपराएं निभाता है।

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